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नेहरू को याद रखने की जरूरत

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पं. जवाहर लाल नेहरू (फाइल फोटो)

भारत की आत्मा को समझने में पंडित जवाहरलाल नेहरू से बढ़कर और कोई बुद्धिजीवी हम सब की मदद नहीं कर सकता। नेहरू की भारत को लेकर जो समझ रही है, देश को इस वक्त उसी समझ की आवश्‍यकता है। वे भारतीय समाज, धर्म, संस्कृति, इतिहास आदि को जिस नजरिए से व्यापक फलक पर रखकर देखते थे, उसका साफ-साफ जिक्र उन्होंने अपनी किताब ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ में किया है।

पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लिखा है “हिंदुस्तान में जिंदगी सस्ती है। इसके साथ ही यहां जिंदगी खोखली है, भद्दी है, उसमें पैबंद लगे हुए हैं और गरीबी का दर्दनाक खोल उसके चारों तरफ है। हिंदुस्तान का वातावरण बहुत कमजोर बनानेवाला हो गया है। उसकी वजहें कुछ बाहर से लादी हुई हैं और कुछ अंदरूनी हैं लेकिन वे सब बुनियादी तौर पर गरीबी का नतीजा है। हमारे यहां के रहन-सहन का दर्जा बहुत नीचा है और हमारे यहां मौत की रफ्तार बहुत तेज है।”

धर्म के प्रसंग में नेहरूजी ने लिखा है, “धर्म का ढ़ंग बिलकुल दूसरा है। प्रत्यक्ष छान-बीन की पहुंच के परे जो प्रदेश है, धर्म का मुख्यतः उसी से संबंध है और वह भावना और अंतर्दृष्टि का सहारा लेता है। संगठित धर्म धर्म-शास्त्रों से मिलकर ज्यादातर निहित स्वार्थों से संबंधित रहता है और उसे प्रेरक भावना का ध्यान नहीं होता। वह एक ऐसे स्वभाव को बढ़ावा देता है, जो विज्ञान के स्वभाव से उलटा है। उससे संकीर्णता, गैर-रवादारी, भावुकता, अंधविश्वास, सहज-विश्वास और तर्क-हीनता का जन्म होता है। उसमें आदमी के दिमाग को बंद कर देने का सीमित कर देने का, रूझान है। वह ऐसा स्वभाव बनाता है, जो गुलाम आदमी का, दूसरों का सहारा टटोलनेवाले आदमी का होता है।”

साम्प्रदायिकता के खतरे को लेकर नेहरू परिचित भी थे और चिंतीत भी। दो मई, 1950 को उन्होंने सारे मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर कहा था, ‘हम सम्प्रदायों के बीच एकता का उद्देश्य भूल गये हैं, धर्मनिरपेक्षता की बात करते हैं लेकिन उसे बहुत कम समझ पाये हैं।’

दरअसल भारत जब आजाद हुआ तो उसकी नींव साम्प्रदायिक देश विभाजन पर रखी गयी। इसने सामाजिक-राजनीतिक और आर्थिक संरचनाओं को गंभीरता से प्रभावित किया। जिसका परिणाम आज भी भारतीय समाज में व्यापक स्तर पर देखा जा सकता है।

आज नेहरू की पुण्‍य तिथि है। भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को गुजरे हुए आज पांच दशक हो चुके हैं। मौत के बाद कि‍सी भी व्‍यक्‍ति के रास्‍ते पर चलना आसान नहीं होता और वि‍ज्ञान का नि‍यम है कि दो लोग एक जैसे नहीं होते, एक जैसा अनुसरण नहीं कर सकते, वैसे ही जैसे हमारी दो आंखें कभी एक जैसी नहीं होतीं। फिर भी नेहरू को हमेशा याद रखने की जरूरत है। तब ही यह देश अपने संविधान के सिद्घांतो के अनुरूप चल पाऐगा और रह पाऐगा।

wefornews bureau

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बांधवगढ़ ले जाए जाएंगे उत्पाती हाथी

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Elephant

भोपाल, 19 सितंबर | छत्तीसगढ़ में उत्पात मचाने वाले हाथी काफी समय से मध्य प्रदेश के सीधी जिले में घुसकर उत्पात मचा रहे हैं। इस दौरान दो लोगों की मौत होने के अलावा संपत्ति का भारी नुकसान हो चुका है। वन अमले ने इन हाथियों को कब्जे में ले लिया है और इन्हें बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान भेजने की तैयारी हो रही है। वन विभाग की ओर से बुधवार को दी गई आधिकारिक जानकारी में बताया गया कि छत्तीसगढ़ के हाथी मवई नदी को पार कर सीधी जिले में घुस गए और यहां जमकर उत्पात मचाया। इन हाथियों ने कुंदौर गांव के कच्चे घरों को तोड़कर उनमें रखा अनाज खा लिया और खेतों की फसलों को तबाह कर दिया।

हाथियों के बढ़ते आतंक को देखते हुए टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने तत्काल सोलर लाइट गांव की सीमा पर लगा कर हाथियों को गांव में घुसने से रोका। इसके बाद हाथी अन्य गांवों में भी इसी तरह उत्पात मचाते हुए सीधी मुख्यालय की 15 किलोमीटर की परिधि में पहुंच गए। हाथियों को भगाने के लिए पश्चिम बंगाल से विशेषज्ञ भी बुलाए गए। अगस्त से सितंबर के बीच इन उत्पाती हाथियों ने दो ग्रामीणों की जान भी ले ली।

उत्पाती हाथियों पर काबू पाने के लिए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के संचालक मृदुल पाठक के नेतृत्व में अधिकारियों और कर्मचारियों के दल ने अभियान चलाया और कुल पांच हाथियों को कब्जे में ले लिया है। इन हाथियों को बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान ले जाया जाएगा।

–आईएएनएस

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हिंदी ब्लॉग्स को हर महीने 3 करोड़ पेज व्यू : मॉमस्प्रेसो

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Hindi Blog

नई दिल्ली, 14 सितम्बर | भारत के महिलाओं के लिए सबसे बड़े यूजर-जनरेटेड कंटेंट प्लेटफार्म मॉमस्प्रेसो ने हिंदी दिवस (14 सितंबर) पर अपने 6,500 से ज्यादा ब्लॉगर्स के डेटा का विश्लेषण कर नई रिपोर्ट प्रस्तुत की है। विश्लेषण कहता है कि हिन्दी ब्लॉग्स ने हर महीने 3 करोड़ से ज्यादा पेज व्यू हासिल की है। इसमें से 95 प्रतिशत की खपत पाठकों ने मोबाइल पर की है।

प्लेटफार्म ने बताया कि हिंदी पेज व्यू अंग्रेजी से ज्यादा हो गए हैं और इस समय कुल पेज व्यू का 50 प्रतिशत हो गया है।

मॉमस्प्रेसो की ओर से जारी बयान में कहा गया कि प्लेटफार्म पर हिंदी में लेखन की सूची मुख्य रूप से उन शहरों की माताओं ने तैयार की है, जिनकी तुलनात्मक रूप से भागीदारी कम रही है। इनमें पटना, आगरा, लखनऊ, शिमला, भुवनेश्वर और इंदौर शामिल है। 75 प्रतिशत हिन्दी ब्लॉग्स को मॉमस्प्रेसो मोबाइल ऐप के जरिये लिखा गया है, जबकि अंग्रेजी में ऐसा नहीं है। 60 प्रतिशत ब्लॉगर्स अभी भी ब्लॉग लिखने के लिए डेस्कटॉप उपयोग करते हैं। मोबाइल ऐप पर बने हिन्दी ब्लॉग्स में से 93 प्रतिशत एंड्रायड फोन पर बने हैं। प्लेटफार्म पर इस समय 1,595 हिन्दी ब्लॉगर्स हैं, जिन्होंने अब तक 14,746 ब्लॉग्स बनाए हैं। हर महीने करीब 1,800 ब्लॉग्स जोड़े जा रहे हैं।

मॉमस्प्रेसो ने बताया कि हिन्दी की अधिकतम रीडरशिप लखनऊ, जयपुर, इंदौर, चंडीगढ़, आगरा और पटना से है। यह भी बताया गया कि 95 प्रतिशत यूजर्स ने लेखन का इस्तेमाल मोबाइल पर किया। जिस कंटेंट ने अधिकतम रीडरशिप (65 प्रतिशत) हासिल की, वह ‘मां की जिंदगी’ या ‘मॉम्स लाइफ’ सेक्शन था। रिलेशनशिप्स से लेकर पैरेंटिंग और सामाजिक उत्तरदायित्व तक का लेखन इस पर उपलब्ध है। अन्य लोकप्रिय सेक्शन में प्रेग्नेंसी, बेबी, हेल्थ और रैसिपी भी शामिल हैं।

हिंदी पोस्ट्स को अंग्रेजी की तुलना में 4.2 गुना ज्यादा एंगेजमेंट मिला। इसमें लाइक्स, शेयर और कमेंट्स शामिल हैं। हिन्दी में हाइपर एंगेजमेंट की एक बड़ी वजह हिन्दी कंटेंट की क्वालिटी है। पहली बार महिलाओं को कई मुद्दों पर अपने विचार अभिव्यक्त करने के लिए सुरक्षित स्थान मिला है। कई महिलाएं जो लैंगिंक भेदभाव, सामाजिक मुद्दों और अन्य वजहों से खुलकर बोल नहीं पाती थी, वह भी इस पर अपने आपको अभिव्यक्त कर रही है।

मॉमस्प्रेसो के सह-संस्थापक और सीईओ विशाल गुप्ता ने कहा, “हमारा विजन यह है कि अगले तीन वर्षो में हमारे प्लेटफॉर्म पर सभी माताओं में से 70 फीसदी को लेकर आना है और क्षेत्रीय भाषा लेखन इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण है। हमें गर्व है कि मॉमस्प्रेसो एक ऐसा मंच प्रदान कर रहा है जहां भारत भर की माताएं बिना डर के अपने विचार व्यक्त कर रही हैं। इन विषयों पर बहस और चर्चाओं को प्रोत्साहित करती हैं। पिछले 12 महीनों में हमारे ट्रैफिक चार गुना बढ़ा है और हिंदी की भूमिका इस विकास में महत्वपूर्ण रही है। इस समय हमारे पास चार अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में लेखन है और वर्ष के अंत से पहले हमारी योजना 3 और जोड़ने की है।

हिंदी भाषा लेखन का उपयोग करने वाले ब्रांड्स की संख्या 2017 के 6 फीसदी से बढ़कर 2018 में 27 फीसदी हो गई है। इसमें पैम्पर्स, डेटॉल, बेबी डव, नेस्ले, जॉनसन एंड जॉन्सन, एचपी, ट्रॉपिकाना एसेंशियल्स और क्वैकर जैसे ब्रांड शामिल हैं।

–आईएएनएस

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हिंदी के प्रख्यात गीतकार और कवि गोपाल दास नीरज का निधन।

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Gopaldas Neeraj

हिंदी के प्रख्यात गीतकार और कवि गोपाल दास नीरज का गुरुवार को यहां के एम्स में देर शाम 7:50 बजे निधन हो गया। मंगलवार को तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें आगरा के लोटस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, लेकिन तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें एम्स लाया गया, जहां उन्होंने आखिरी सांस ली।

उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के पुरवली गांव में चार जनवरी, 1925 को जन्मे गोपाल दास नीरज हिंदी मंचों के प्रसिद्ध कवियों में शुमार थे। उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों को भी कई सुपरहिट गाने दिए। उन्हें उनकी उत्कृष्ट रचनाओं के लिए कई बार सम्मानित किया गया था। उन्होंने तीन बार फिल्म फेयर अवार्ड भी अपने नाम किया था।

मशहूर कवि और गीतकार गोपाल दास नीरज को 1991 में पद्मश्री और 2007 में पद्मभूषण सम्मान से भी नवाजा गया था। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार ने भी यश भारती सम्मान से सम्मानित कर उनके दमदार लेखनी को सराहा था।

गोपालदास को सांस लेने में तकलीफ थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बुधवार को तबीयत में सुधार की भी खबरें आई थीं, लेकिन गोपालदास ने आखिर में दुनिया को अलविदा कह ही दिया।

–आईएएनएस

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