चांद पर पहले महिला और बाद में पुरुष को भेजगा नासा | WeForNewsHindi | Latest, News Update, -Top Story
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चांद पर पहले महिला और बाद में पुरुष को भेजगा नासा

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NASA-min (1)

वाशिंगटन: दुनिया इस साल मानव के चांद पर कदम रखने की 50वीं वर्षगांठ मना रही है, इसी आलोक में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि वह एक अन्य कार्यक्रम के तहत इस दिशा में एक बार फिर बड़ी उपलब्धि हासिल करने को तैयार है।

कार्यक्रम के तहत पहले महिला और उसके बाद पुरुष को चांद की सतह पर उतारा जाएगा। इस कार्यक्रम को ‘आर्टेमिस’ नाम दिया गया है, जो अपोलो की जुड़वा बहनें मानी जाती हैं। यह चंद्रमा और आखेट (शिकार) की देवी का नाम भी है।

एजेंसी की मानें तो उसका स्पेस कार्यक्रम आर्टेमिस, उसके मंगल मिशन में बेहद अहम भूमिका निभाएगा। 

नासा ने एक बयान में कहा, “मंगल पर हमारा रास्ता आर्टेमिस बनाएगा। नया आर्टेमिस मिशन अपोलो कार्यक्रम से साहसिक प्रेरणा लेकर अपना रास्ता तय करेगा।”

अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के उन क्षेत्रों का पता लगाएंगे, जहां पहले कोई भी नहीं गया है। वे ब्रह्मांड के रहस्यों को खोलते हुए उस तकनीक का भी परीक्षण करेंगे जो सौरमंडल में मनुष्य की सीमाओं को विस्तार देगी।

एजेंसी ने कहा, “चांद की सतह पर हम पानी, बर्फ और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का पता लगाएंगे, जिससे भविष्य में अंतरिक्ष की और आगे तक की यात्रा संभव हो सके। चंद्रमा के बाद मनुष्य की अगली बड़ी उपलब्धि मंगल ग्रह होगी।”

चंद्रमा पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी साल 2024 में होगी। इस कार्यक्रम पर लगभग 30 अरब डॉलर का खर्च आएगा। इसी के साथ स्पेसफ्लाइट अपोलो-11 की कीमत भी करीब इतनी ही होगी।

अमेरिका द्वारा 1961 में शुरू कर 1972 में समाप्त किए गए अपोलो कार्यक्रम की लागत 25 अरब डॉलर थी।

अपोलो-11 मिशन के तहत 50 साल पहले दो अंतरिक्ष यात्री चांद की सतह पर उतरे थे। इस मिशन पर उस समय लागत छह अरब डॉलर आई थी, जो इस समय 30 अरब डॉलर के बराबर है।

नासा के प्रशासक जिम ब्रिडेनस्टाइन के अनुसार, अपोलो कार्यक्रम और ‘आर्टेमिस’ के बीच मुख्य अंतर यह है कि पहले जहां चांद की सतह पर महज मौजूदगी दर्ज कराई गई थी, वहीं अब वहां एक स्थायी मानव उपस्थिति होगी।

इस कार्यक्रम में 2020 में चंद्रमा के आसपास एक मानवरहित मिशन काम करेगा। जबकि इसके दो साल बाद एक मानवयुक्त मिशन के तहत चंद्रमा की परिक्रमा की जाएगी।

अगले चंद्र मिशनों को स्पेस लांच सिस्टम द्वारा अंतरिक्ष में पहुंचाया जाएगा। रॉकेट को नासा और बोइंग द्वारा विकसित किया जा रहा है, जो पूरा बनने के बाद सबसे बड़ा रॉकेट होगा।

नासा की योजनाओं के अनुसार, साल 2022 और 2024 के बीच के पांच मिशनों को निजी कंपनियों द्वारा संचालित किया जाएगा।

–आईएएनएस

अंतरराष्ट्रीय

भूकंप के तेज झटकों से दहला पाकिस्तान, 19 मरे, 300 से अधिक घायल

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इस्लामाबाद, 24 सितम्बर | पाकिस्तान में मंगलवार को भूकंप के तेज झटके से बड़े पैमाने पर तबाही हुई है। अब तक 19 लोगों के मरने की सूचना है। तीन सौ से अधिक लोग घायल हुए हैं। सर्वाधिक तबाही पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हुई है।

भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.8 दर्ज की गई। डॉन न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, भूकंप के झटके जोरदार तरीके से आठ से 10 सेकंड तक महसूस किए गए। अमेरिका के भूगर्भीय सर्वे के मुताबिक, स्थानीय समयानुसार शाम चार बजे के थोड़ी ही देर बाद आए भूकंप का केंद्र पीओके और पाकिस्तानी पंजाब प्रांत की सीमा पर था। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भूकंप का केंद्र पीओके-पंजाब सीमा पर मीरपुर में था। अधिकारियों ने बताया कि इसका असर इस्लामाबाद, पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा के व्यापक इलाकों में महसूस किया गया।

एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भूकंप का केंद्र पीओके-पंजाब सीमा पर मीरपुर में था। अधिकारियों ने बताया कि इसका असर इस्लामाबाद, पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा के व्यापक इलाकों में महसूस किया गया।

इसका सर्वाधिक असर पीओके के मीरपुर में हुआ है। संभागीय आयुक्त चौधरी मोहम्मद तैयब ने बताया कि मीरपुर में भूकंप की चपेट में आने से 19 लोग मारे गए हैं। इनमें तीन बच्चे भी शामिल हैं। इलाके के जतलान नाम के गांव में दस लोगों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि तीन सौ से अधिक लोग घायल हुए हैं जिनमें से 35 की हालत गंभीर है।

भूकंप इतना तेज था कि इसके झटके भारतीय राजधानी दिल्ली तक में महसूस किए गए।

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अन्य

वैज्ञानिकों ने मानव के एक और पूर्वज के चेहरे का किया पुनर्निर्माण

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तेल अवीव: हमारे डेनिसोवंस पूर्वज (मानव की विलुप्त प्रजाति जो साइबेरिया से दक्षिण पूर्व एशिया में फैली थी), जो एक लाख साल पहले धरती पर रहते थे, वे कैसे दिखते होंगे, इसका अब तक सिर्फ अनुमान लगाया जाता था।

डेनिसोवंस की गुलाबी रंग की हड्डियां, तीन दांत व निचला जबड़ा होता था, लेकिन अब उन्हें एक चेहरा भी मिल गया है। आनुवांशिक डेटा का इस्तेमाल करते हुए वैज्ञानिकों ने अब इन लंबे समय से खोए हुए पूर्वजों का पुनर्निर्माण किया है।

इजरायल के जेरूसलम के हिब्रू विश्वविद्यालय के शोध के लेखक लिरान कार्मेल ने कहा, “हमने डेनिसोवंस की स्केलेटल (कंकाल) एनाटमी के पहले पुनर्निर्माण को प्रस्तुत किया है।”

कार्मेल ने कहा, “कई मायनों में डेनिसोवंस निएंडरथल से मेल खाते थे, लेकिन कुछ लक्षणों में हमसे मेल खाते थे और कुछ मायनों में वे अनूठे थे।”

समग्र रूप से शोधकर्ताओं ने 56 एनाटोमिकल फीचर की पहचान की, जिसमें डेनिसोवंस, आधुनिक मानव और निएंडरथल से भिन्न हैं। इसमें से 34 भिन्नताएं खोपड़ी में हैं। इस शोध को जर्नल ‘सेल’ में प्रकाशित किया गया है।

–आईएएनएस

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Viral सच

बकरों को भी होता है दर्द न दें कुर्बानी

पेटा के अनुसार, वीडियो ईद के पहले जारी किया गया है ताकि लोग देख सकें कि बकरे को कितनी तकलीफ होती है और वे लोगों से शाकाहारी बनने की गुहार लगाते हैं।

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Rajanpuri Bakra

नई दिल्ली, 31 जुलाई | पीपल फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (People for the Ethical Treatment of Animals) (PETA) ने ईद से पहले एक वीडियो जारी किया है, जिसमें बकरों के साथ क्रूरता की तस्वीर है। तस्वीर में भुथरे चाकू से बकरों को हलाल किया जा रहा है, जो इस दौरान चिल्ला रहे हैं। वीडियो राजस्थान के अलवर से लिया गया है, जहां बकरी के दूध और मांस के व्यापार को दिखाया गया है।

पेटा के एसोसिएट डायरेक्टर निकुंज शर्मा ने कहा, “वीडियो में बकरे को बोरियों में डालते और दोपहिया वाहनों पर सामान के थैले की तरह ले जाते दिखाया गया है। बकरे को दर्द राहत के उपाय किए बगैर बधिया किया जाता है और उन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया जाता है, मतलब उचित पशुचिकित्सा नहीं किया जाता है।”

पेटा के अनुसार, वीडियो ईद के पहले जारी किया गया है ताकि लोग देख सकें कि बकरे को कितनी तकलीफ होती है और वे लोगों से शाकाहारी बनने की गुहार लगाते हैं।

पेटा ने पशुपालन, डेयरी और मत्स्यपालन मंत्री गिरिराज सिंह को पत्र लिख कर उनसे यह सुनिश्चित करवाने की मांग की है कि बकरे को बधिया करते समय उन्हें एनेस्थेसिया दिया जाए। साथ ही पेटा ने कसाईखानों की जांच की व्यवस्था के साथ-साथ पशु परिवहन एवं वध कानून को लागू करने की मांग की है।

–आईएएनएस

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