आख़िर कोई दास्तान-ए-प्याज़ बताता क्यों नहीं? | WeForNewsHindi | Latest, News Update, -Top Story
Connect with us

ब्लॉग

आख़िर कोई दास्तान-ए-प्याज़ बताता क्यों नहीं?

सरकार कभी अफ़ग़ानिस्तान से तो कभी मिस्र से प्याज़ के आयात का भारी-भरकम आँकड़ा देकर कहती है कि ‘देश में तो सब ठीक है’। प्याज़ का दाम न तो कोई राष्ट्रीय समस्या है और ना ही कोई प्राकृतिक आपदा। हरेक दो-तीन साल पर प्याज़ ऐसे ही और लाल हो उठता रहा है, तो प्याज़ के भाव घटने के बजाय बढ़ क्यों रहा है?

Published

on

People buy onion

प्याज़ के दाम को लेकर देशभर में हाहाकार है। इसे शतक-वीर कहा जा रहा है क्योंकि इसका दाम 100 रुपये प्रति किलोग्राम को पार कर चुका है। सरकार कहती है कि मौसम की मार की वजह से प्याज़ का उत्पादन क़रीब 28-29 फ़ीसदी गिरा है। लेकिन कोई ये बताने वाला नहीं है कि 30 प्रतिशत पैदावार घटने से दाम सामान्य के मुक़ाबले चार से पाँच गुना यानी 400 से 500 फ़ीसदी तक क्यों बढ़ गये? क्या उत्पादन में आयी गिरावट को देखते हुए जनता ने ज़्यादा प्याज़ खाना शुरू कर दिया, वो भी इतना ज़्यादा कि दाम बढ़ने के बावजूद ख़पत भी बेतहाशा बढ़ने लगे? वर्ना, दाम बढ़ने पर तो ख़पत घटनी चाहिए। वो बढ़ कैसे सकती है?

प्याज़ के दाम में ऐसी आग भी तब लगती है जब अर्थव्यवस्था की विकास दर के औधें मुँह गिरने का सिलसिला सालों-साल से जारी है। विकास दर गिरने का मतलब है — देश के सकल घरेलू उत्पादन में गिरावट। इसका स्वाभाविक असर होता है — जनता की औसत आमदनी में कमी। यानी, आम आदमी की आमदनी घट रही है, बेरोज़गारी बढ़ती ही जा रही है, तो फिर वो लोग कौन और कितने हैं जो आसमान छूती क़ीमतों के बावजूद प्याज़ पर टूटे पड़े हैं? प्याज़ को लेकर सीधा और छोटा सा सवाल सिर्फ़ इतना ही है। लेकिन सही जबाब नदारद है।

सरकार कभी अफ़ग़ानिस्तान से तो कभी मिस्र से प्याज़ के आयात का भारी-भरकम आँकड़ा देकर कहती है कि ‘देश में तो सब ठीक है’। सारा क़सूर विश्व बाज़ार की तेज़ी का है। ज़रूर होगा। सरकार भला क्यों झूठ बोलेगी? वो तो अब बस इतना बता दे कि क्या भारतीय जनता उस दौर में भी बेहद महँगे प्याज़ की बेतहाशा ख़पत कर रही है, जब उसका दाम आसमान छू रहा हो? बेशक़, प्याज़ का दाम न तो कोई राष्ट्रीय समस्या है और ना ही कोई प्राकृतिक आपदा। हरेक दो-तीन साल पर प्याज़ ऐसे ही और लाल हो उठता रहा है। पिछली सरकारों ने भी प्याज़ पर कोई कम आँसू तो बहाये नहीं। लिहाज़ा, सवाल फिर वही है कि यदि प्याज़ की राष्ट्रीय किल्लत है तो आँसुओं की सकल मात्रा घटने के बजाय बढ़ क्यों रही है?

अरे! जब प्याज़ ही कम होगा तो इसे छीला-काटा भी कम ही जाएगा। कम प्याज़ कटेंगे तो इसके काटने पर बहने वाले आँसुओं की मात्रा भी तो घटनी चाहिए या नहीं? बहरहाल, प्याज़ की किल्लत जितनी भी सच्ची या झूठी हो, लेकिन इसे लेकर होने वाली बातों में कहीं कोई कंजूसी नहीं है। हर कोई प्याज़-मर्मज्ञ बना फिरता है। आपने ज़रा सा ज़िक्र छेड़ा नहीं कि सामने वाला फ़ौरन शुरू हो जाएगा। देखते ही देखते अपनी बातों से आपको छलनी कर देगा। इसकी वजह बहुत सीधी है। लोकतंत्र में जनता अपनी सरकार के दिखाये रास्ते पर चलती है। सरकार भी ज़मीन पर कुछ करे या ना करे, बातें करने में कभी कंजूसी नहीं करती। दरअसल, ये दौर ही बातों का है। बातें करना ही असली काम है। कमर्ठता की निशानी है।

ये लेख भी तो बातें ही कर रहा है। इससे न तो प्याज़ का उत्पादन होगा और ना आयात। दाम भी कम होने से रहा। सरकार भी जागने से रही। फिर भी बातें करने का धर्म तो निभाना ही होगा। कोई अपना धर्म कैसे छोड़ सकता है भला? कुत्ते का धर्म है भौंकना, साँप का धर्म है डसना, मच्छर का धर्म है ख़ून चूसना। ऐसे ही क़ुदरत ने हर चीज़ का एक धर्म तय कर रखा है। सभी अपने-अपने धर्म का पालन करना होता है। इसीलिए जितनी बातें प्याज़ की कमी की होती है, उतनी ही इसके आयात की भी होती है। कमोबेश वैसे ही जैसे 2016-17 में दालों के आयात की अनन्त बातें हुआ करती थीं।

ज़रा उस दौर को याद करें। क्या तब सरकार ने आयात की धमकी देकर या वास्तव में दालों के आयात करके इसकी किल्लत को दूर करने और दाम को काबू में लाने की कोशिश नहीं की थी? बेशक़ की थी। सरकार कार्रवाई नहीं करती तो क्या दालें 500 रुपये प्रति किलोग्राम के दाम से नहीं बिकती? तब भी तो खाद्य आपूर्ति मंत्री की ओर से जनता को मीठी गोली दी जाती थी कि ‘दालों का ऐसा आयात किया जा रहा है, मानों सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त होकर ही मानेंगे।’ बातें ख़ूब हुईं इसीलिए दाल के दाम तभी नरम पड़े जब किसानों ने बम्पर पैदाकर करके दिखाया। हालाँकि, ज़्यादा दलहन उत्पादन के बावजूद अभागे किसानों की दुर्दशा बनी ही रही, क्योंकि उनके मुनाफ़े को बिचौलियों, आढ़तियों और सूदख़ोरों की मिलीभगत ने हड़प लिया।

कालाबाज़ारियों और मिलावटख़ोरों की तब भी पौ-बारह थी और आज भी है। इनके लिए कमी दालें बहार का सबब बनती हैं तो कभी आलू-प्याज़ और टमाटर जैसी चीज़ों के दाम। केन्द्र की हो या राज्यों की, इस पार्टी की हो या उस पार्टी की, कोई भी कालाबाज़ारियों का बाल तक बाँका नहीं कर पाता। आयात करने वाली सरकारी कम्पनियों को तभी नींद से जगाया जाता है, जब चिड़ियाँ खेतों को चुग कर फ़ुर्र हो चुकी होती हैं। सौ दिन चले अढ़ाई कोस के संस्कारों में ढली सरकारी कम्पनियाँ क़ीमतों को नीचे लाने के लिए यदि एक लाख टन सामान की ज़रूरत होगी तो हज़ार टन का आयात करते-करते हाँफ़ने लगती हैं।

अब ज़रा ये समझिए कि ऐसी तमाम बातें कितनी बनावटी होती हैं? सरकार के पास एक से बढ़कर एक एक्सपर्ट यानी विशेषज्ञ होते हैं, जो वक़्त रहते आगाह करते हैं कि अति-वृष्टि यानी अत्यधिक बारिश की वजह से किसानों की किन-किन फ़सल को कैसा-कैसा नुकसान होने वाला है। इसी बुरी ख़बर से कालाबाज़ारियों में ख़ुशी की लहर दौड़ जाती है। ज़माख़ोर तैयार होकर शिकार पर निकल पड़ते हैं। सरकारी बाबुओं को भी रिश्वतख़ोरी और मक्कारी की ख़ुराक़ मिल जाती है। छापेबाज़ी का ढोंग किया जाता है। तरह-तरह की झूठी ख़बरें ‘प्लांट’ होती हैं। इससे जनता को बहकाया और बरगलाया जाता है।

वर्ना, ज़रा सोचिए कि यदि हम भारत में 80 प्रतिशत ईंधन की आपूर्ति आयातित कच्चे तेल से हमेशा कर सकते हैं कि तो वक़्त रहते प्याज़ का आयात करके क़ीमतों पर नकेल क्यों नहीं कस पाते? क्या सिर्फ़ इसलिए कि कच्चे तेल का आयात हमारी बड़ी प्राथमिकता है, क्योंकि यही केन्द्र और राज्य सरकारों की आमदनी यानी टैक्स-संग्रह का सबसे बड़ा ज़रिया है। दूसरे शब्दों में कहें तो कच्चे तेल के आयात में यदि कोताही होगी तो ये सरकार को बहुत ज़्यादा भारी पड़ेगा। उसके कर्मचारियों को तनख़्वाह के लाले पड़ने लगेंगे। सरकारी ठाठ-बाट और शान-ओ-शौक़त पर आँच आएगी। दूसरी ओर प्याज़-टमाटर, खाद्य तेल और दालों की क़ीमतों के चढ़ने-उतरने से सरकार की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उल्टा उसके चहेते ज़माख़ोरों में हर्ष और उल्लास की लहर दौड़ने लगेगी। तभी तो ‘अच्छे दिन’ का मज़ा मिलेगा।

ब्लॉग

मध्य प्रदेश: आतंकवादी और नक्सली बनने की ली शपथ

उनका आरोप था कि नगरपालिका द्वारा आवंटित दुकानों का प्रतिमाह किराया दिये जाने के बावजूद कार्रवाई की गई और न्यायालय में विचाराधीन मामलों को लेकर भी संज्ञान नहीं लिया गया न ही उचित माध्यम से सूचना दी गई।

Published

on

terrorists

मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के भीकनगांव में अतिक्रमण मुहिम से आक्रोशित लोगों द्वारा आतंकवादी और नक्सलवादी बनने की शपथ लिए जाने को लेकर 12 लोगों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई है।

भीकनगांव के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ओम नारायण सिंह बड़कुल ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के परीक्षण के उपरांत 12 लोगों के खिलाफ तहसीलदार द्वारा प्रतिबंधात्मक कार्यवाही का नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि इस वीडियो में पुष्टि हुई है कि इन लोगों ने अतिक्रमण मुहिम के विरोध में आतंकवादी व नक्सलवादी बनने की सार्वजनिक शपथ ली है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कार्रवाई की प्रतिक्रिया स्वरूप इस तरह का कृत्य स्पष्ट रूप से विधि विरुद्ध है।

भीकनगांव कस्बे में 6 जनवरी को विभिन्न वार्डों में अतिक्रमण हटाए जाने की कार्रवाई से आक्रोशित प्रभावितों ने उनके रोजगार समाप्त हो जाने का हवाला देते हुए सार्वजनिक रूप से आतंकवादी तथा नक्सलवादी बन जाने की शपथ ले ली थी। उन्होंने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था।

उनका आरोप था कि नगरपालिका द्वारा आवंटित दुकानों का प्रतिमाह किराया दिये जाने के बावजूद कार्रवाई की गई और न्यायालय में विचाराधीन मामलों को लेकर भी संज्ञान नहीं लिया गया न ही उचित माध्यम से सूचना दी गई। दूसरी ओर प्रशासन ने उनके आरोपों से नकारते हुए स्पष्ट किया था कि अतिक्रमण के विरुद्ध सम्बन्धितों को आवश्यक सूचना देने के उपरांत ही समस्त कार्रवाई संपादित की गई थी।

Continue Reading

अंतरराष्ट्रीय

चीन ने कैसे कोविड-19 महामारी पर काबू पाया

महामारी के दौरान वुहान में ठहरे फ्रांसीसी चिकित्सक फिलिप क्लेन ने कहा कि चीन सरकार ने महामारी की रोकथाम में चौंकाने वाला प्रयास किया है, और चीनी लोगों ने भी इसमें बड़ा योगदान दिया है।

Published

on

By

Wuhan China Market

बीजिंग, 9 जनवरी । वर्ष 2021 की शुरूआत में चीन के वुहान शहर के वाणिज्यिक सड़क पर लोगों की भीड़ नजर आती है। वुहान वासी मास्क पहने हुए परिजनों और दोस्तों के साथ खुशी से शॉपिंग करते दिखाई देते हैं। लेकिन एक साल पहले वुहान में कोविड-19 महामारी की वजह से 76 दिनों तक लॉकडॉउन लगा रहा, और सारी सड़कें सुनसान दिखाई देती थीं।

सिर्फ कुछ महीनों में चीन ने महामारी पर काबू पाया, और आम लोगों का जीवन सामान्य हो गया। रूसी लड़की अन्ना ने कहा कि कुल 1.7 लाख चिकित्सकों ने वुहान में महामारी की रोकथाम का प्रयास किया, और चिकित्सा उपकरणों की कुल लागत 1 अरब युआन से अधिक रही। हर गंभीर मरीजों के इलाज में कम से कम 1 लाख युआन का खर्च आया है। पिछले साल मार्च के मध्य तक महामारी की रोकथाम में चीन ने 1 खरब 16 अरब 90 करोड़ युआन खर्च किया, जो दुनिया में सबसे अधिक है। महामारी फैलने के बाद लगभग सभी देशों ने आर्थिक विकास पर ध्यान दिया, सिर्फ चीन ने अपना पूरा ध्यान जनता की जान पर केंद्रित किया।

पिछले 10 मार्च को चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने वुहान का दौरा किया। उन्होंने सामुदायिक क्षेत्र जाकर स्थानीय लोगों का हालचाल जाना और महामारी की रोकथाम व लोगों के जीवन की स्थिति का जायजा लिया।

महामारी के दौरान वुहान में ठहरे फ्रांसीसी चिकित्सक फिलिप क्लेन ने कहा कि चीन सरकार ने महामारी की रोकथाम में चौंकाने वाला प्रयास किया है, और चीनी लोगों ने भी इसमें बड़ा योगदान दिया है।

वहीं, अमेरिका के कुह्न् फाउंडेशन के अध्यक्ष रॉबर्ट लॉरेंस कुह्न् ने कहा कि चीन सरकार की संगठनात्मक क्षमता अद्भुत है। कोई अन्य देश ऐसा नहीं कर सकता है। चीन में इतनी जल्दी महामारी की रोकथाम में विजय पाने का कारण चीनी कम्यनिस्ट पार्टी का नेतृत्व है।

(साभार—-चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

Continue Reading

ब्लॉग

Mirza Ghalib: मिर्जा गालिब के वो जबरदस्त शेर जो अमर हैं

गालिब की मां शिक्षित थीं उन्होंने गालिब को घर पर ही शिक्षा दी जिसकी वजह से उन्हें नियमित शिक्षा कुछ ज़्यादा नहीं मिल सकी। गालिब ने आगरा के पास उस समय के प्रतिष्ठित विद्वान ‘मौलवी मोहम्मद मोवज्जम’ से फारसी की प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त की।

Published

on

Mirza Ghalib

वह कुछ दिन लाहौर रहे, फिर दिल्ली चले आए। क़ौकान बेग के चार बेटे और तीन बेटियां थीं। इतिहास के पन्ने पलटें तो उनके बेटों में अब्दुल्लाबेग और नसरुल्लाबेगका वर्णन मिलता है। गालिब अब्दुल्लाबेग के ही पुत्र थे। जब गालिब पांच साल के थे, तभी पिता का देहांत हो गया। पिता के बाद चाचा नसरुल्ला बेग खां ने गालिब का पालन-पोषण किया। नसरुल्ला बेग खां मराठों की ओर से आगरा के सूबेदार थे।

गालिब की मां शिक्षित थीं उन्होंने गालिब को घर पर ही शिक्षा दी जिसकी वजह से उन्हें नियमित शिक्षा कुछ ज़्यादा नहीं मिल सकी। गालिब ने आगरा के पास उस समय के प्रतिष्ठित विद्वान ‘मौलवी मोहम्मद मोवज्जम’ से फारसी की प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त की। ज्योतिष, तर्क, दर्शन, संगीत एवं रहस्यवाद इत्यादि से इनका कुछ न कुछ परिचय होता गया। गालिब की कम ही समय में फारसी में गजलें भी लिखने लगें थे। आज हम आपको उनके कुछ मशहूर शेर पढ़ाएंगे।

-हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन
दिल के ख़ुश रखने को ‘ग़ालिब’ ये ख़याल अच्छा है

-मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले

-हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले

-उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है

-ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता

-रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ाइल
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है

-इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना

-न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता
डुबोया मुझ को होने ने न होता मैं तो क्या होता

-रंज से ख़ूगर हुआ इंसाँ तो मिट जाता है रंज
मुश्किलें मुझ पर पड़ीं इतनी कि आसाँ हो गईं

-आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक
कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक

-बस-कि दुश्वार है हर काम का आसाँ होना
आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसाँ होना

-हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अच्छे
कहते हैं कि ‘ग़ालिब’ का है अंदाज़-ए-बयाँ और

-रेख़्ते के तुम्हीं उस्ताद नहीं हो ‘ग़ालिब’
कहते हैं अगले ज़माने में कोई ‘मीर’ भी था

-बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मिरे आगे

-काबा किस मुँह से जाओगे ‘ग़ालिब’
शर्म तुम को मगर नहीं आती

-दर्द मिन्नत-कश-ए-दवा न हुआ
मैं न अच्छा हुआ बुरा न हुआ

-कोई मेरे दिल से पूछे तिरे तीर-ए-नीम-कश को
ये ख़लिश कहाँ से होती जो जिगर के पार होता

-क़र्ज़ की पीते थे मय लेकिन समझते थे कि हाँ
रंग लावेगी हमारी फ़ाक़ा-मस्ती एक दिन

-कहाँ मय-ख़ाने का दरवाज़ा ‘ग़ालिब’ और कहाँ वाइज़
पर इतना जानते हैं कल वो जाता था कि हम निकले

Continue Reading
Advertisement
राष्ट्रीय4 hours ago

एसएफजे मामले में एनआईए के समक्ष चार और पेश हुए

राजनीति4 hours ago

किसान और चीन को लेकर गरजे राहुल, बोले- ‘मुझे गोली मार सकते हैं पर छू नहीं सकते’

राष्ट्रीय4 hours ago

फ्रांस के साथ पांच दिवसीय युद्धाभ्यास में दोनों ओर से होंगे राफेल विमान

congress logo
राजनीति5 hours ago

असम में पांच दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी कांग्रेस, केरल के लिए बनाई कमेटी

Train
राष्ट्रीय5 hours ago

रेलवे ने 18 स्पेशल ट्रेनों की संचालन अवधि बढ़ाई

Delhi Violence
राष्ट्रीय5 hours ago

दिल्ली हिंसाः मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग करने वाली याचिका पर कोर्ट ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब

congress logo
राष्ट्रीय5 hours ago

तेलंगाना : कांग्रेस के नेताओं को कृषि कानूनों के विरोध के दौरान हिरासत में लिया गया

salman khan
मनोरंजन5 hours ago

सलमान का ऐलान, ‘राधे’ ईद पर सिनेमाघरों में आएगी

Supreme_Court_of_India
राष्ट्रीय5 hours ago

चेक बाउंस मामलों के शीघ्र ट्रायल पर सुप्रीम कोर्ट ने किया हाई कोर्टों और राज्यों से जवाब तलब

om-birla
राजनीति5 hours ago

अब सासंदो को मिलेगा सब्सिडी वाला खाना, 29 जनवरी से शुरू हो रहा बजट सत्र

Astrology Horoscope
ब्लॉग4 weeks ago

Rashifal 22 December: इस राशि के लोगों के बन सकते हैं रुके काम, देखें अपना राशिफल

sensex
ब्लॉग4 weeks ago

Market Watch: विदेशी संकेतों से तय होगी घरेलू शेयर बाजार की चाल

Rahul gandhi
ब्लॉग4 weeks ago

Covid-19 lockdown के दौरान सबसे अधिक मददगार लोकसभा सांसदों में राहुल गांधी

Shamsur Rahman Faruqi
ब्लॉग4 weeks ago

उर्दू जगत के मशहूर कवि Shamsur Rahman Faruqi का निधन, अपने घर पर ली आखिरी सांस

Mirza Ghalib
ब्लॉग3 weeks ago

Mirza Ghalib: मिर्जा गालिब के वो जबरदस्त शेर जो अमर हैं

Migrant workers
लाइफस्टाइल4 weeks ago

कोविड के दौर में छात्रों को चिड़चिड़ापन, बेचैनी व घबराहट से बचाने की पहल

Salim and Salman Khan
मनोरंजन3 weeks ago

Salman Khan : सलमान ऐसे पास करते थे कॉलेज के दिनों में परीक्षा, खुद पिता सलीम खान ने बताई थी ये बात

Wuhan China Market
अंतरराष्ट्रीय2 weeks ago

चीन ने कैसे कोविड-19 महामारी पर काबू पाया

Rajinikanth
मनोरंजन3 weeks ago

रजनीकांत नहीं बनाएंगे राजनीतिक पार्टी, स्वास्थ्य कारणों का दिया हवाला

Airline-
राष्ट्रीय4 weeks ago

भारत ने ब्रिटेन से आने वाली फ्लाइट्स पर 31 दिसम्बर तक रोक लगाई

taj mahal
अन्य2 weeks ago

ताजमहल में लहराया भगवा झंडा, लगे जय श्री राम के जयकारे

Farmers-Protest
राजनीति1 month ago

मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री पटेल का विवादित बयान: कुकुर मुत्ते की तरह उगे किसान संगठन, विदेशों से हो रही फंडिंग

lucky ali
ज़रा हटके1 month ago

लकी अली ने भीड़ में बैठकर गुनगुनाया, वीडियो वायरल

robbery at gunpoint
शहर1 month ago

बिहार: दरभंगा में 5 करोड़ के गहनों की लूट

Rahul Gandhi with Opp Leaders
राष्ट्रीय1 month ago

राष्ट्रपति से मिलने के बाद राहुल गांधी बोले – सरकार कृषि कानून को वापस ले

Viral Video Tere Ishq Me
Viral सच2 months ago

प्यार में युवती को मिला धोखा तो प्रेमी के घर के सामने डीजे लगाकर ‘तेरे इश्क में नाचेंगे’ पर जमकर किया डांस, देखें Viral Video

Faisal Patel
राजनीति2 months ago

फैसल पटेल ने पिता Ahmed Patel की याद में भावनात्मक वीडियो शेयर कर जताया शोक

8 suspended Rajya Sabha MPs
राजनीति4 months ago

रात में भी संसद परिसर में डटे सस्पेंड किए गए विपक्षी सांसद, गाते रहे गाना

Ahmed Patel Rajya Sabha Online Education
राष्ट्रीय4 months ago

ऑनलाइन कक्षाओं के लिए गरीब छात्रों को सरकार दे वित्तीय मदद : अहमद पटेल

Sukhwinder-Singh-
मनोरंजन5 months ago

सुखविंदर की नई गीत, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश को समर्पित

Most Popular