मां का दूध बढ़ाता है शिशु में प्रतिरक्षा क्षमता | WeForNewsHindi | Latest, News Update, -Top Story
Connect with us

स्वास्थ्य

मां का दूध बढ़ाता है शिशु में प्रतिरक्षा क्षमता

Published

on

फाइल फोटो

पहली बार मां बनने वाली महिलाओं को अपने शिशु को स्तनपान कराने में अपूर्व सुखद अनुभूति होती है और यह शिशु के लिए भी एक अनमोल उपहार है। मां का दूध शिशु में प्रतिरक्षा क्षमता, यानी रोगों से लड़ने की ताकत बढ़ाता है। महिलाओं को शिशु को स्तनपान कराने के सही तरीके और यह अच्छी तरह पता होना चाहिए कि बच्चे को कैसे, कब और कितना स्तनपान कराना है।

मिथकों के अलावा आधुनिक जीवनशैली की वास्तविकताएं नई माताओं में अक्सर उलझन पैदा करती रहती है, इसलिए उन्हें स्तनपान से जुड़ी भ्रांतियों को नजरअंदाज करना चाहिए।

पूर्वी दिल्ली के पटपड़गंज स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के कंसल्टेंट डॉ. मयूर दास ने कहा, “स्तनपान एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। घर की बुजुर्ग महिलाओं को चाहिए कि वे नई माताओं को स्तनपान के लिए प्रेरित करें और उन्हें स्तनपान के सही तरीके बताएं। स्तनपान कराने के लिए माताओं को कुछ महत्वपूर्ण चीजों को ध्यान का रखना चाहिए, जैसे कि शिशु के जीवन के पहले घंटे के भीतर स्तनपान कराने की शुरुआत हो और छह महीने तक शिशु को स्तनपान कराएं। बोतल, कृत्रिम निप्पल या चुसनी के उपयोग के बिना स्तनपान कराएं, इससे मां और बच्चा दोनों स्वस्थ रहेंगे।”

डॉ. मयूर दास के कुछ सुझाव :

* मां का दूध प्रतिरक्षा क्षमता को बढ़ाता है। प्रसव के बाद उत्पन्न होने वाला स्तन दूध ‘कोलोस्ट्रम’ आपके बच्चे के लिए पहला सही आहार है, क्योंकि यह पहला टीका लगने के समान होता है। यह एंटीबॉडी और इम्यूनोग्लोबुलिन (आईजीए) से भरपूर होता है। कोलोस्ट्रम में अधिक संख्या में सुरक्षात्मक सफेद कोशिकाएं होती हैं, जिसे ल्यूकोसाइट्स कहा जाता है। ये कोशिकाएं सूक्ष्मजीवों से शिशु का बचाव करती हैं।

* स्तन दूध में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन और खनिजों का प्राकृतिक अद्वितीय उच्च संतुलन होता है, जिस कारण बच्चे के द्वारा इसे पचाना और अवशोषित करना आसान होता है। मां का दूध बच्चों में बाद के जीवन में मधुमेह की आशंका को 35 प्रतिशत तक कम करता है और बचपन के कैंसर और बाद में हृदय रोग के खतरे को भी कम कर देता है।

* स्तनपान करने वाले बच्चों की तुलना में ‘बोतलपान’ करने वाले बच्चों में दस्त, कोलेरा जैसे संक्रमण की संभावना अधिक होती है।

* स्तनपान कराने वाली महिलाएं प्रसव के बाद की समस्याओं से तेजी से और आसानी से निजात पा जाती हैं, क्योंकि यह ऑक्सीटॉक्सिन हार्मोन जारी करता है, जो गर्भाशय को सामान्य स्थिति में वापस लौटने में मदद करता है और प्रसव के बाद के रक्तस्राव को कम कर देता है।

* बच्चे को डिब्बाबंद दूध पिलाने वाली माताओं की तुलना में स्तनपान करने वाली माताओं में प्रति दिन 300 से 500 अतिरिक्त कैलोरी खर्च होती है। शोध से भी पता चला है कि स्तनपान कराने वाली माताओं में गर्भावस्था के दौरान प्राप्त वजन बहुत तेजी से कम होता है। स्तनपान काफी फायदेमंद है, लेकिन स्तनपान को लेकर अभी भी कई मिथक हैं, जिन्हें दूर किया जाना जरूरी है।

–आईएएनएस

राष्ट्रीय

ऑक्सफोर्ड वैक्सीन के 17 ट्रायल साइट में पीजीआई-चंडीगढ़ भी शामिल

Published

on

File Photo

चंडीगढ़ का पीजीआई हॉस्पिटल ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित वैक्सीन कोविशिल्ड के परीक्षणों के दूसरे और तीसरे चरण के लिए भारत के 17 ट्रायल साइट (परीक्षण स्थलों) में से एक है। इसके निदेशक ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

इस ट्रायल के लिए देशभर के 17 स्थलों में 1,600 स्वस्थ वयस्कों को शामिल किया जाएगा।पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) के निदेशक जगत राम ने कहा, “कोविशील्ड वैक्सीन के दूसरे और तीसरे चरण परीक्षण के लिए ट्रायल साइट में से एक होने की इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को सौंपा जाना एक सम्मान है।”

उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में पहले चरण के ट्रायल के परिणाम उत्साहजनक रहे हैं और कोई भी गंभीर प्रतिकूल दुष्प्रभाव सामने नहीं आया। दूसरे और तीसरे चरण का परीक्षण मानव में कोविड-19 के खिलाफ इसका प्रभाव और अपेक्षित सुरक्षा को देखने के लिए एक बड़ी मानव आबादी पर किया जाएगा।

निदेशक ने कहा कि जैसा कि परीक्षणों के परिणामों का दूरगामी प्रभाव पड़ेगा, हम अपनी क्षमताओं को मजबूत करेंगे। उन्होंने कहा कि ‘ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया’ की वांछित अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए समय-सीमा के साथ-साथ तौर-तरीकों और व्यापक योजना को तैयार करने के लिए एक कोर समूह का गठन किया जाएगा और महामारी से निपटने में हम सर्वश्रेष्ठ क्षमताओं के साथ योगदान देंगे।

इससे पहले, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के तहत कोविड-19 के विशेषज्ञों की एक समिति ने ‘ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया’ (डीजीसीआई) को दूसरे और तीसरे चरण के परीक्षण के लिए ‘सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया’ (एसआईआई) को मंजूरी देने की सिफारिश की थी।

पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ के अलावा, परीक्षणों के लिए अन्य स्थलों में दिल्ली का एम्स, पुणे का एबीजे मेडिकल कॉलेज, पटना का राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आरएमआरआईएमएस), जोधपुर का एम्स, गोरखपुर का नेहरू अस्पताल, विशाखापट्टनम का आंध्र मेडिकल कॉलेज और मैसूर का जेएसएस एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च भी शामिल हैं।

आईएएनएस

Continue Reading

राष्ट्रीय

मप्र में कोरोना मरीज 34 हजार के पार, अब तक 900 मौतें

Published

on

Coronavirus
प्रतीकात्मक तस्वीर

भोपाल। मध्यप्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ना लगातार जारी है। मरीजों की संख्या अब 34 हजार को पार कर गई है, वहीं मौतों का आंकड़ा 900 तक पहुंच गया है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा सोमवार को जारी बुलेटिन के मुताबिक, राज्य में बीते 24 घंटों में 750 मरीज सामने आए हैं। अब मरीजों की कुल संख्या 34,285 हो गई है। सबसे ज्यादा मरीज इंदौर में 7646 है, यहां 91 मरीज सामने आए हैं। वहीं भोपाल में 24 घंटों में सबसे ज्यादा 166 मरीज सामने आए और कुल मरीजों की संख्या 6793 हो गई है।

राज्य में एक तरफ जहां मरीजों का आंकड़ा बढ़ रहा है, वहीं मौतों की संख्या भी बढ़ रही है। बीते 24 घंटों में 14 मरीजों की मौत से कुल संख्या 900 हो गई है। अब तक सबसे ज्यादा 317 मौतें इंदौर में हुई हैं, इसके अलावा भोपाल में अब तक 190 मरीज दम तोड़ चुके हैं।

–आईएएनएस

Continue Reading

राष्ट्रीय

कर्नाटक में सौ साल की बुजुर्ग महिला ने कोरोना को मात दी

Published

on

Coronavirus
प्रतीकात्मक तस्वीर

चित्रदुर्ग (कर्नाटक)। यहां एक संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से कोरोना की मरीज हुईं 100 साल से अधिक उम्र की एक बुजुर्ग महिला जानलेवा वायरस को मात देकर स्वस्थ हो गईं। जिले के एक चिकित्सक ने यह जानकारी दी।

जिला अस्पताल के चिकित्सक रंगा रेड्डी ने आईएएनएस को फोन पर बताया, सिद्दम्मा की उम्र 100 साल से ज्यादा है। वह संकमण से मुक्त हो गई हैं। उन्हें इस अस्पताल से शनिवार को छुट्टी मिल गई। उन्हें 27 जुलाई को भर्ती कराया गया था।

चित्रदुर्ग बेंगलुरु से 205 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में है।

रंगा रेड्डी ने बताया कि सिद्दम्मा बुरुजानाहट्टी गांव में स्थित पुलिस क्वार्टर में अपने परिवार के साथ रहती हैं। उनकी पांच संतान हैं, 17 पोते-पोती और 22 पड़पोते-पड़पोती हैं।

जिला स्वास्थ्य बुलेटिन में शतायु बुजुर्ग महिला के संक्रमण से मुक्त होने की सूचना प्रसारित होते ही स्थानीय समाचार चैनलों के मीडयाकर्मी सिद्दम्मा से मिलने पहुंचे।

सिद्दम्मा ने संवाददाताओं से कन्नड़ में कहा, मुझे किसी चीज से डर नहीं लगता। अस्पताल में डॉक्टर ने जब बताया कि कोरोना बीमारी हो गई है तो मैं घबराई नहीं। मैंने तो इस बीमारी का पहले नाम भी नहीं सुना था। मुझे पीने के लिए गर्म पानी और खाने के लिए दलिया दिया जाता था।

रंगा रेड्डी ने कहा कि सिद्दम्मा की उम्र 110 साल बताई जाती है। इसका सत्यापन कराना होगा। हालांकि उनके पास ऐसा कोई दस्तावेज नहीं है, जिससे साबित हो सके कि उनका जन्म 1910 में हुआ था।

–आईएएनएस

Continue Reading

Most Popular