व्यंग्य

व्यंग्य: कैबिनेट की बैठक में मोदी ने अपने मंत्रियों को दिया अलौकिक तत्व ज्ञान…!

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रेखांकन साभार: सी एस सुकुमार

केन्द्रीय कैबिनेट की पिछली बैठक में जब सारे मंत्री नोटबन्दी से पैदा हुआ हालात पर अपना सिर धुन रहे थे, तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने सभी साथियों को अलौकिक ज्ञान का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा:

मित्रों, क्या आपको पता है कि शोरूम और गोदाम में क्या फ़र्क होता है? शायद, आप जानते होंगे। लेकिन मैं आपको नयी बात बताता हूँ। शोरूम, महिलाओं के ब्रा की तरह है जबकि गोदाम, पैंटी में क़ैद रहता है। पहली जगह सिर्फ़ आकर्षण और तैयारियों के लिए है जबकि असली सौदा दूसरी जगह होता है।

मित्रों, शादी के बाद जैसे ही मुझे ये गूढ़ रहस्य समझ में आया मैंने जशोदा बेन को छोड़ दिया। क्योंकि मेरा यक़ीन सिर्फ़ शोरूम में रहता है। गोदाम का बोझ मैं कभी नहीं उठाना चाहता। आज भी यही हाल है। आप मेरे किसी भी काम को इस उदाहरण में फिट पाएँगे। चाहे वो पड़ोसी देशों से सम्बन्ध हो या आतंकवादियों पर सर्ज़िकल हमला या कालाधन के नाम पर की गयी नोटबन्दी! मेरे हरेक क्रियाकलाप में आपको शोरूम की गतिविधियों का ही अहसास होगा। मेरे कर्मों में आपको गोदाम की हरकतें ढूँढ़ने से भी नहीं मिलेंगी, क्योंकि उनका वजूद ही नहीं होता!

मित्रों, आप अच्छी तरह जानते हैं कि देश की जनता 2014 में नये ब्रा की ओर किस क़दर आकर्षित हुई थी। लम्बे अरसे से पुरानी ब्रा के इस्तेमाल से वो बोर हो चुकी थी। मैंने उसे मुफ़्त में नयी और फ़ैन्सी ब्रा देने का सपना दिखाया। जनता मेरे झाँसे में आ गयी। अब मैं पाँच साल तक नये ब्रा के मज़े लूँगा।

मित्रों, मैं जानता हूँ कि जनता को जब गोदाम की ख़्वाहिश होगी तो उसे काँग्रेस के पास ही जाना होगा, क्योंकि अच्छा-बुरा जैसा भी वो गोदाम के संचालन का गुरुमंत्र और सलीक़ा सिर्फ़ काँग्रेस को ही आता है। मुझे यदि गोदाम चलाने का हुनर आता होता तो मैंने जशोदा बेन को ही क्यों छोड़ा होता! मज़े की बात ये भी अविवाहित रहे वाजपेयी जी भी गोदाम के संचालन में अनाड़ी थे। यही हाल संघ के सैंकड़ों नेताओं का भी रहा है और यहाँ तक कि आज भी है।

मित्रों, अपने शोरूम के कुशल संचालन से काँग्रेस जब-जब भटकी है, तब-तब देश को गोदाम के सुख से वंचित होना पड़ा है! इसकी एक और वजह ये है कि बीजेपी मूलत: उन रेडियोलॉज़िस्ट और पैथोलॉज़िस्ट की तरह है, जो रोग को पहचानने में तो मददगार हो सकते हैं लेकिन मरीज़ का इलाज़ कर पाना उनके बूते का होता नहीं! जबकि काँग्रेस को कुशल सर्ज़न और फ़िज़िशियन की तरह मरीज़ का उपचार करने में महारथ हासिल है। उसके पास 60 साल का लम्बा अनुभव भी है। देश को उस पर पर्याप्त भरोसा भी रहा है और भविष्य में देश को उसके पास ही जाना होगा!

कैबिनेट में मोदी जी के इस तत्व ज्ञान पर बाद सन्नाटा छा गया! सभी को राजनीति का गूढ़ मंत्र समझ में आ चुका था! अब सभी जल्द से 2019 के आने और सत्ता से विदा लेने की बाट जोह रहे हैं!

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