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राजनीति

मोदी सरकार को झटका, अमेरिका से भाग चुका मेहुल चोकसी

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फाइल फोटो

पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले का आरोपी मेहुल चोकसी अमेरिका में नहीं है, वह वहां से फरार हो चुका है। इंटरपोल ने भारत को यह जानकारी दी कि रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने से पहले मेहुल चोकसी यहां से फरार हो गया। भारत, अमेरिका से मेहुल को लगातार सौंपने की मांग कर रहा था। अब इस खबर के बाद माना जा रहा है कि मोदी सरकार की कोशिश को जोरदार झटका लगा है।

बता दें कि नीरव मोदी और उसके मामा मेहुल चोकसी के खिलाफ देश में ईडी और सीबीआई जांच कर रही है। दोनों ने पीएनबी के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से बैंक को 13400 करोड़ रुपये से अधिक का चूना गया था। इस घोटाले के खुलासे के बाद दोनों देश छोड़कर फरार हो गए।

भारत मेहुल चोकसी के खिलाफ दुनियाभर में रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवा चुका है। ऐसे में जांच एजेंसी उम्‍मीद कर रही हैं कि चोकसी का अगला ठिकाना जल्द ही सार्वजनिक हो जाएगा।

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राजनीति

मनमोहन का मोदी पर तंज- मैं प्रेस से डरने वाला प्रधानमंत्री नहीं था

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manmohan singh
मनमोहन सिंह (फाइल फोटो)।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खिल्ली उड़ाते हुए मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें प्रेस से बात करने में कभी डर नहीं लगा। उन्होंने यह बात इसलिए कही कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने अबतक के कार्यकाल में कभी संवाददाता सम्मेलन आयोजित नहीं किया है।

उल्लेखनीय है कि मनमोहन सिंह विदेश भी जाते थे तो विमान में पत्रकारों से बातचीत करते हुए जाते और आते थे। अखबारों में खबर के साथ छपता था–‘प्रधानमंत्री के विशेष विमान से’। मई, 2014 के बाद से यह परंपरा बिल्कुल बंद है।

मनमोहन ने अपनी किताब ‘चेंजिंग इंडिया’ के विमोचन के मौके पर यह भी कहा कि भारत एक प्रमुख आर्थिक वैश्विक शक्ति बनने वाला है। पांच खंडों में प्रकाशित इस पुस्तक, चेंजिंग इंडिया, में कांग्रेस नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के प्रधानमंत्री के रूप में उनके 10 वर्षो के कार्यकाल, तथा एक अर्थशास्त्री के रूप में उनके जीवन के विवरण शामिल हैं।

मनमोहन ने कहा, “मैं कोई ऐसा प्रधानमंत्री नहीं था, जिसे प्रेस से बात करने में डर लगता हो। मैं नियमित तौर पर प्रेस से मिलता था, और जब भी मैं विदेश दौरे पर जाता था, लौटने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन जरूरी बुलाता था।” उन्होंने कहा, “उन तमाम संवाददाता सम्मेलनों को इस पुस्तक में वर्णित किया गया है।”

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने कहा, “लोग कहते हैं कि मैं एक मौन प्रधानमंत्री था, लेकिन यह किताब उन्हें इसका जवाब देगी। मैं प्रधानमंत्री के रूप में अपनी उपलब्धियों का बखान नहीं करना चाहता, लेकिन जो चीजें हुई हैं, वे पांच खंडों की इस पुस्तक में मौजूद हैं।”

मनमोहन का बयान ऐसे समय में आया है, जब इसके पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी प्रधानमंत्री के अबतक के कार्यकाल के दौरान एक भी संवाददाता सम्मेलन आयोजित न करने के लिए मोदी का मजाक उड़ाया है। मनमोहन ने देश के भविष्य के बारे में कहा कि तमाम गड़बड़ियों के बावजूद भारत एक प्रमुख वैश्विक ताकत बनने वाला है।

सिंह ने विक्टर ह्यूगो का उद्धरण देते हुए कहा, “एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में भारत के उदय एक ऐसा विचार है, जिसका समय आ गया है और धरती पर कोई भी ताकत इस विचार को रोक नहीं सकती।”

मनमोहन ने 1991 में तत्कालीन वित्तमंत्री के रूप में अपने बजट भाषण के दौरान भी विक्टर ह्यूगो का उद्धरण पेश किया था।

–आईएएनएस

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ब्लॉग

अनुभव आगे, युवा पीछे : कांग्रेस की 2019 की रणनीति?

“2019 का चुनाव मोदी बनाम राहुल होने जा रहा है। इसमें कोई दोराय नहीं है। सचिन पायलट और सिंधिया की पैठ महज अपने-अपने राज्यों में है, इसलिए इनकी तुलना राहुल से करना ठीक नहीं होगा।”

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Kamal Nath Sciendia

नई दिल्ली, 17 दिसंबर | राजस्थान और मध्य प्रदेश में सत्ता की चाबी अशोक गहलोत और कमलनाथ के हाथों में थमा दी गई है, दोनों ही पार्टी के अनुभवी और वरिष्ठ नेता हैं। गांधी परिवार के विश्वासपात्र हैं, लेकिन एक सवाल जो अभी भी दिमाग में कौंध रहा है कि युवाओं को तरजीह देने वाले राहुल गांधी ने इन पदों के लिए दौड़ में शामिल युवा चेहरों- सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया को मौका क्यों नहीं दिया?

राहुल अपनी सक्रिय राजनीति के शुरुआती दिनों से ही युवाओं को ज्यादा मौके दिए जाने की पैरवी करते रहे हैं। क्या ऐसा किसी सोची-समझी रणनीति के तहत किया गया या वाकई ‘युवा जोश’ पर ‘अनुभव’ भारी पड़ गया? ऐसी क्या वजह रही कि राहुल कांग्रेस पार्टी के पुराने र्ढे को तोड़कर नया उदाहरण पेश नहीं कर पाए?

राजस्थान के गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों का सफर कर चुकीं राजनीतिक विश्लेषक निकिता चावला ने आईएएनएस से कहा, “इसे 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की रणनीति कह सकते हैं। कांग्रेस अपनी लय धीरे-धीरे फिर से हासिल कर रही है। अगले साल लोकसभा चुनाव जीतने के लिए उन्हें अनुभव की सख्त जरूरत पड़ेगी। अशोक गहलोत और कमलनाथ बहुत ही परिपक्व नेता हैं, अपने-अपने राज्यों में इनकी एक छाप है, जो लोकसभा चुनाव में बहुत मदद करेगी। इसलिए कांग्रेस फिलहाल हर चीज को 2019 के नजरिए से देख रही है।”

वह कहती हैं, “मैं राजस्थान घूमी हूं, वहां की राजनीति से वाकिफ हूं तो कह सकती हूं कि सचिन पायलट ने बीते कई वर्षो में ग्रासरूट पर बहुत काम किया है। पायलट की लोकप्रियता में भी काफी तेजी से इजाफा हो रहा है। अशोक गहलोत ने एक बार कहीं कहा था कि यह शायद उनका ‘आखिरी मौका’ हो सकता है तो उनका यह बयान शायद काम कर गया। गहलोत और कमलनाथ, सोनिया गांधी के कंटेम्परेरी नेता भी हैं, इस बात को ध्यान में रखना चाहिए। 2019 का लोकसभा चुनाव जीतने के लिए पार्टी को अनुभव चाहिए, जो कमलनाथ और गहलोत के पास है। सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी अंदरखाने खुद को कमजोर नहीं करना चाहेगी।”

राहुल की युवाओं को तरजीह देने के सवाल पर कांग्रेस पार्टी की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी पार्टी कहती हैं, “कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है। यहां हर फैसला गहन विचार-विमर्श के बाद ही होता है। पार्टी में वही फैसले होते हैं, जिस पर सभी की एकराय होती है। गहलोत और कमलनाथ पर एकराय बनी।”

राजस्थान की राजनीति पर नजर रखने वाले पत्रकार शिवओम गोयल कहते हैं, “2019 का चुनाव मोदी बनाम राहुल होने जा रहा है। इसमें कोई दोराय नहीं है। सचिन पायलट और सिंधिया की पैठ महज अपने-अपने राज्यों में है, इसलिए इनकी तुलना राहुल से करना ठीक नहीं होगा।”

राजस्थान की राजनीति में सचिन पायलट की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और ठीक ऐसा ही मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर है। क्या इससे भी कुछ लोग सकपकाए हुए हैं? इसका जवाब देते हुए राजनीतिक विश्लेषक संदीप शास्त्री कहते हैं, “इसका एक मायना यह भी है कि सचिन पायलट के पास मौके बहुत हैं, वह अभी सिर्फ 41 साल के हैं। उनके पास अथाह समय बचा है, लेकिन 67 साल के गहलोत और 72 साल के कमलनाथ को शायद आगे इस तरह का मौका नहीं मिल पाए। इसलिए उनके अनुभव और उम्र को देखते हुए उन्हें मौका दिया गया है।”

हालांकि, निकिता एक सुझाव देते हुए कहती हैं, “मेरा मानना है कि राजस्थान में सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए था और गहलोत को चाणक्य की भूमिका में रखना चाहिए था, इससे लोकसभा चुनाव में पार्टी को ज्यादा फायदा पहुंचता।”

–आईएएनएस

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राजनीति

मप्र में भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी की जांच के आदेश

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कमलनाथ, मुख्‍यमंत्री, मध्‍य प्रदेश (फाइल फोटो)

भोपाल। मध्य प्रदेश में शिवराज राज के दौरान प्रोफेशनल एग्जाम बोर्ड (पूर्व के व्यापमं) द्वारा ली गई चतुर्थ समूह के असिस्टेंट ग्रेड तृतीय की परीक्षा में धांधली के आरोपों की मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जांच कराने के आदेश दिए। बेरोजगार सेना के प्रमुख अक्षय हुंका ने मंगलवार को बताया कि जुलाई में हुई चतुर्थ समूह के असिस्टेंट ग्रेड तीन की परीक्षा संदेह के घेरे में है। परीक्षा के 10 टॉपर में से कई लोग पिछली परीक्षाओं में 40 प्रतिशत अंक भी प्राप्त नहीं कर सके थे और इस परीक्षा में उन्हें 95 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए हैं। यह साफ तौर पर बड़े घोटाले की तरफ इशारा करता है।

हुंका के अनुसार, इस घोटाले की जांच को लेकर युवाओं का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री कमलनाथ से मिला। कमलनाथ ने इस परीक्षा की जांच कराने के आदेश दिए हैं।

परीक्षार्थी इस घोटाले की एसआईटी जांच की मांग को लेकर मंगलवार सुबह चिनार पार्क में बड़ी संख्या में एकत्र हुए। उन्होंने कहा कि अगर चतुर्थ समूह परीक्षा के सभी चयनित अभ्यíथयों की जानकारी सार्वजनिक की जाए तो सैकड़ों मामले सामने आएंगे।

ज्ञात हो कि 28 से 31 जुलाई तक आयोजित हुई इस परीक्षा में 2700 पदों के लिए लगभग 1,40,000 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। यह परीक्षा शुरू से ही विवादों में रही है। इस परीक्षा में सर्वर खराब होने की शिकायत की बाद लगभग 250 लोगों ने 45 दिन बाद दोबारा परीक्षा दी थी। 12 दिसंबर को इसका परिणाम आया, जिसमें भारी गड़बड़ी हुई है। 10 टॉपरों में छह ऐसे हैं, जिनके पिछली परीक्षाओं में 50 प्रतिशत नंबर भी नहीं आए थे, इस बार उनके 95 प्रतिशत तक अंक आए हैं।

मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने गए प्रतिनिधिमंडल में बेरोजगार सेना के प्रमुख अक्षय हुंका के अलावा कांग्रेस विधायक कुणाल चौधरी और अन्य छात्र भी थे। कमलनाथ ने युवाओं की बात सुनी और जांच के आदेश दिए।

–आईएएनएस

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