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महाराष्ट्र में किसानों के दूध आंदोलन से शहरों में दूध की किल्‍लत

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photo credit (twitter)

दूध के दामों में बढ़ोतरी करने की मांग पर महाराष्‍ट्र के किसान दूध आंदोलन कर रहे हैं। लगातार दूसरे दिन जारी इस आंदोलन से  महाराष्ट्र के बड़े और छोटे शहरों में दूध की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

बता दें कि सोमवार को मुंबई, पुणे, नागपुर, नासिक और अन्य प्रमुख शहरों के लिए जा रहे दूध के टैंकरों को राज्य के विभिन्न हिस्सों में रोककर विरोध प्रदर्शन किया गया था।

स्वाभिमानी शेतकारी संघटना (एसएसएस) और महाराष्ट्र किसान सभा (एमकेएस) के नेतृत्व में किसानों के समूहों ने दूध पर पांच रुपये प्रति लीटर सब्सिडी व मक्खन व दूध पाउडर पर वस्तु एवं सेवा कर में छूट की मांग की।

लाखों लीटर दूध से लदे टैंकरों को पुणे, नासिक, कोल्हापुर, सांगली, बीड, पालघर, बुलढाणा, औरंगाबाद व सोलापुर के रास्तों में रोका गया और उन्हें सड़कों पर खाली कर दिया गया, जबकि एक टैंकर में अमरावती के निकट आग लगा दी गई।

अन्य स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक रूप में पंढरपुर, पुणे, बीड, नासिक, अहमदनगर व दूसरे जगहों पर विरोध दर्ज कराने के लिए प्रमुख मंदिरों में ‘दुग्ध अभिषेक’ कराया। हालांकि, राज्य सरकार ने प्रदर्शन को लेकर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी।

एसएसएस अध्यक्ष और सांसद राजू शेट्टी और एमकेएस अध्यक्ष अजीत नवले जैसे शीर्ष नेता कुछ स्थानों पर दूध टैंकरों को रोकने के लिए सड़कों पर उतरे, जबकि कई बड़े और छोटे दूध सहकारी समितियों ने किसानों के आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की।

शेट्टी ने मीडिया से कहा, “राज्य सरकार ने 27 रुपये प्रति लीटर की खरीद कीमत तय की है, लेकिन किसानों को केवल 17 रुपये प्रति लीटर मिलते हैं। हम गोवा, कर्नाटक और केरल की तरह किसानों के लिए पांच रुपये की प्रत्यक्ष सब्सिडी की मांग कर रहे हैं।”

शेट्टी ने मीडिया से कहा, “स्कीम्ड दूध पाउडर की कीमत में गिरावट के साथ दुग्ध सहकारी समितियों को मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है।”

नवले ने कहा कि सरकार के दूध पाउडर पर 50 रुपये प्रति किलोग्रा की सब्सिडी की घोषणा से किसानों को फायदा नहीं होगा, क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में दूध पाउडर की कीमतें गिर गईं, लेकिन इसका फायदा निजी कंपनियों को हो रहा है, जो इसे पाउडर में बदलती हैं।

इस मुद्दे को महाराष्ट्र विधानसभा में नागपुर में उठाया गया। इस पर पशुपालन व डेयरी विकास मंत्री महादेव जानकर ने भरोसा दिया कि शहरों को दूध की कमी नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि मुंबई में 15 दिनों के पर्याप्त भंडार हैं। मुंबई को हर रोज सात लाख लीटर ताजा दूध की आवश्यकता होती है। ज्यादातर शहरी केंद्रों में एक करोड़ लीटर की खपत होती है।

जानकर ने किसानों को चेताया, “हम मुद्दे को हल करने की कोशिश कर रहे हैं। अगर कोई कानून तोड़ने की कोशिश करता है तो उससे सख्ती से निपटा जाएगा।” जानकर ने बाद में कहा कि सरकार तीन रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी देने के लिए तैयार है।

–आईएएनएस

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केरल में बाढ़ से 174 मरे, 12 जिलों में रेड अलर्ट

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जलप्रलय का कहर

तिरुवनंतपुरम, 17 अगस्त (आईएएनएस)| केरल में शुक्रवार को 10 दिनों से लगातार हो रही बारिश और बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 174 हो चुकी है। अधिकारियों ने बारिश कम होने के बाद अपने बचाव अभियान को जारी रखा और कई लोगों को सुरक्षित बचाकर राहत शिविरों तक लाया गया। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने शुक्रवार सुबह मृतकों की संख्या 164 बताई थी, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 174 कर दिया गया।

8 अगस्त तक लगभग 2.40 लाख लोगों को 1,568 राहत शिविरों में स्थानांतरित किया जा चुका था।

केरल सरकार ने एक बयान में कहा, “गत 10 दिनों से लगातार हो रही बारिश से शुक्रवार तक 174 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। 14 जिलों में से 12 जिलों में रेडअलर्ट जारी किया गया है।

बयान के अनुसार, “कासरगोड़ और तिरुवनंतपुरम जिलों में शुक्रवार को रेडअलर्ट हटा लिया गया था।”

पेरियार और इसकी सहायक नदियों में उफान से एर्नाकुलम और त्रिशूर के कई कस्बे जलमग्न हो गए हैं।

चालाकुडी से टीवी चैनलों को वीडियो क्लिप भेजने वाले लोगों के एक समूह ने कहा, “हमारे पास खाना नहीं है और 150 लोग राहत की प्रतीक्षा कर रहे हैं।”

हजारों लोग अभी भी ऊंची इमारतों पर बैठे हैं और बचाए जाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अकेले एर्नाकुलम और त्रिशूर शिविरों में 50,000 से अधिक लोग फंसे हैं।

कई जिलों में शुक्रवार सुबह से तेज बारिश से राहत मिली है, लेकिन इडुक्की स्थित बड़े बांधों से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है।

मंत्रिमंडल सचिव पी.के. सिन्हा ने शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए केरल व तमिलनाडु के मुख्य सचिवों के साथ बैठक की।

सिन्हा ने थल, जल और वायु सेना, एनडीआरएफ और विभिन्न एजेंसियों को केरल में जरूरी सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए।

उन्होंने इसके साथ ही इन एजेंसियों को नाव, हेलीकॉप्टर, लाइफ जैकेट, रेन कोट इत्यादि सामना भी मुहैया कराने के आदेश दिए।

गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “केंद्र ने अब तक केरल में 339 मोटर बोट, 2800 लाइफ जैकेट, 1400 लाईफ ब्वॉय, 27 लाईट टॉवर्स, 1000 रेनकोट वितरित किए हैं।”

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बयान के अनुसार, 1 लाख खाद्य पैकेट को वितरित किया गया है और अन्य 1 लाख खाद्य पैकेट की आपूर्ति की व्यवस्था की जा रही है।

रेलवे ने भी अभी तक 1,20,000 पानी के बोतल मुहैया कराए हैं और इसके अतिरिक्त इतने ही और बोतलों की व्यवस्था की जा रही है।

मंत्रालय ने कहा कि 2.9 लाख लीटर पीने के पानी को लेकर विशेष ट्रेन को भेजा गया है, जोकि शनिवार को कायाकुलम पहुंचेगी।

भारतीय नौसेना ने गोताखोर सदस्यों के साथ अपनी 51 नौकाओं को तैनात किया है। वहीं 1000 लाईफ जैकेट और 1300 रबड़ के जूते केरल भेजा गया है। इसके साथ ही शुक्रवार को 1600 खाद्य पैकेट को विमान से नीचे गिराया गया था।

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बयान के अनुसार, भारतीय वायुसेना ने 23 हेलीकॉप्टर, 11 ट्रांसपोर्ट विमानों को तैनात किया है। थल सेना ने 10 टुकड़ियों, 10 इंजीनियरिंग टास्क फोर्स, 60 नौकाओं और 100 लाइफ जैकेट को सेवा पर लगाया है। एनडीआरएफ ने 43 राहत टीमों और 163 नौकाओं को अन्य सामग्रियों के साथ काम पर लगाया है।

जिन क्षेत्रों में टेलीफोन संपर्क कट गया है, केरल सरकार ने वहां के लोगों को संचार के लिए वी-सैट का प्रयोग करने की सलाह दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को फोन पर मुख्यमंत्री पिनारई विजयन के साथ बाढ़ की स्थिति पर चर्चा की और कहा कि वह स्थिति का जायजा लेने के लिए शनिवार को हवाई सर्वेक्षण करेंगे।

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केरल बाढ़ राहत के लिए 10 करोड़ रुपये देगा पंजाब

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चंडीगढ़, 17 अगस्त | पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने बाढ़ से जूझ रहे केरल राज्य को तुरंत 10 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की है।

मुख्यमंत्री पंजाब राहत कोष में से पांच करोड़ रुपये की राशि केरल के मुख्यमंत्री राहत कोष में भेजे जा रहे हैं और शेष पांच करोड़ रुपये तैयार खाद्य वस्तुओं और अन्य वस्तुओं के रूप में भारतीय रक्षा मंत्रालय द्वारा भेजे जाएंगे।

इस संबंधी जानकारी देते हुए एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा बाढ़ प्रभावित केरल राज्य को दी गई इस मदद की पहली खेप, जोकि 30 टन की है, जिसमें तैयार खाद्य सामग्री, बिस्कुट, रस, बोतलबंद पानी और सूखा दूध शामिल है। इसके अलावा एक लाख फूड पैकेट पहली खेप में भेजे जा रहे हैं। भारतीय वायुसेना के द्वारा भेजी जा रही यह सामग्री शनिवार तक चली जाएगी और बाकी सामान केरल सरकार की मांग के अनुसार भेज दिया जाएगा।

प्रवक्ता ने बताया कि पंजाब सरकार बाढ़ प्रभावित केरल राज्य को समय पर मदद पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। इसी के अंतर्गत 30-30 टन खाद्य वस्तुएं लेकर चार हवाई जहाज केरल जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने राज्य की विभिन्न गैर सरकारी संस्थाओं और परोपकारी संस्थाओं को भी अपील की कि वह केरल के लोगों की हर तरह की मदद के लिए सामने आएं, क्योंकि इस अनोखी समस्या से निपटने के लिए अनोखे किस्म के उपायों की जरूरत है। उन्होंने पूरे देश को इस संकट की घड़ी में केरला की मदद करने के लिए आगे आने की भी अपील की।

— आईएएनएस

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पंचतत्व में विलीन हुआ अटल बिहारी का पार्थिव शरीर

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (93) का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया। शुक्रवार शाम को नई दिल्ली के राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। अटल बिहारी वाजपेयी को उनकी दत्तक पुत्री नमिता भट्टाचार्य ने मुखाग्नि दी।

इस दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, बीजेपी के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत तमाम नेता मौजूद रहे। सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों ने अटल बिहारी वाजपेयी को सलामी दी।

इससे पहले अटल बिहारी वाजपेयी (93) को बीजेपी मुख्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल रामनाईक समेत सैकड़ों बीजेपी कार्यकर्ताओं ने श्रद्धांजलि दी थी।

अटलजी के निधन पर 7 दिन का राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई। शुक्रवार को देश के 12 राज्यों ने राजकीय शोक और अवकाश की घोषणा की गई। इनमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश, ओडिशा, पंजाब, बिहार, झारखंड, हरियाणा, तेलंगाना, तमिलनाडु और कर्नाटक राज्य शामिल हैं। इन राज्यों में सरकारी कार्यालय, स्कूलों और कॉलेजों में अवकाश रखा गया।

अटल बिहारी वाजपेयी का गुरुवार शाम 5.05 बजे निधन हो गया था। वे 93 साल के थे। 11 जून को उन्हें किडनी और यूरिन में संक्रमण के कारण एम्स में भर्ती कराया गया था और पिछले 9 हफ्तों से वे एम्स में भर्ती थे, लेकिन पिछले 36 घंटों के दौरान उनकी सेहत काफी बिगड़ती चली गई। उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 25 दिसंबर 1924 को अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म हुआ था। वे कवि और शिक्षक भी रह चुके हैं। 1951 में जनसंघ की स्थापना हुई और वाजपेयीजी ने चुनावी राजनीति में प्रवेश किया। अटलजी ने 1955 में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा था लेकिन वह हार गए थे। सन् 1957 में अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार सांसद बनकर लोकसभा में आए और 1996 में वो पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने। हालांकि मात्र 13 दिनों के लिए ही। 1998 में वह फिर से पीएम बने और 2004 तक रहे। वाजपेयी कुल 10 बार लोकसभा सांसद रहे और वह दो बार 1962 और 1986 में राज्यसभा सांसद रहे। अटल ने उत्तर प्रदेश, नई दिल्ली और मध्य प्रदेश से लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीते और गुजरात से राज्यसभा पहुंचे थे।

उन्होंने 2005 में मुंबई में एक रैली में ऐलान कर दिया कि वे सक्रिय राजनीति से संन्यास ले रहे हैं और लालकृष्ण आडवाणी और प्रमोद महाजन को बागडोर सौंप रहे हैं। उस समय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि वाजपेयी मौजूदा राजनीति के भीष्म पितामह हैं।

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