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केरल में भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त

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फाइल फोटो

केरल में भारी बारिश ने सामान्य जनजीवन बाधित कर दिया। पिछले 36 घंटों से कई जिलों में बारिश हो रही है जिसके कारण तीन हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित शरणगाहों तक पहुंचाया गया है। 14 जिलों में से 8 में सभी शैक्षणिक संस्थान सोमवार को बंद कर दिए गए और अधिकांश विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं स्थगित कर दी गईं हैं।

सर्वाधिक प्रभावित जिलों में अलाप्पुझा, इडुक्की, कोझिकोड, वयनाड़, कोट्टायम, कोल्लाम और कोच्चि शामिल हैं। मौसम विभाग ने बुधवार तक और बारिश होने का अनुमान जताया है। मौसम विभाग ने तटीय जिलों के लिए चेतावनी जारी कर दी है और मछुआरों से समुद्र में नहीं जाने को कहा है।

पहाड़ी इलाकों में संभावित भूस्खलन की चेतावनी जारी की गई है। वयनाड़ जिले से होते हुए कर्नाटक जाने वाली बस सेवाओं को रद्द कर दिया गया है। राज्य के राजस्व मंत्री ई. चंद्रशेखरन ने अपने विभाग और जिला अधिकारियों को अनुमानित नुकसान का जायजा लेने का निर्देश दिया है। अभी तक तीन लोगों के मरने की खबर है।

अलाप्पुझा के चंदिरूर में तिरुवनंतपुरम-मैंगलोर एक्सप्रेस की आखिरी बोगी के ऊपर एक पेड़ गिर गया। इस दौरान लोगों के चोटिल होने की खबर नहीं है। इस घटना की वजह से ट्रेन में तीन घंटे का विलंब हो गया।

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बिहार की शाही लीची दुनियाभर में अब जीआई टैग के साथ बिकेगी

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Lychee-
File Photo

बिहार के मुजफ्फरपुर की प्रसिद्ध शाही लीची को नई पहचान मिल गई है। अब देश-दुनिया में शाही लीची की बिक्री जीआई टैग के साथ होगी। बौद्धिक सम्पदा कानून की तहत शाही लीची को जीआई टैग मिला है।

ढाई सालों की जांच-पड़ताल में संतुष्ट होने के बाद शाही लीची को भौगोलिक उपदर्शन रजिस्ट्री ने टैग दिया है। बिहार लीची उत्पादक संघ ने जून 2016 को जीआई रजिस्ट्री कार्यालय में शाही लीची के जीआई टैग के लिए आवेदन किया था। मुजफ्फरपुर राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक विशालनाथ ने गुरुवार को बताया कि जीआई टैग मिलने से शाही लीची की बिक्री में नकल या गड़बड़ी की आशंकाएं काफी कम हो जाएंगी।

जीआई टैग मिलने से खुश विशालनाथ ने कहा कि मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, वैशाली व पूर्वी चंपारण के किसान ही अब शाही लीची के उत्पादन का दावा कर सकेंगे। ग्राहक भी ठगे जाने से बच सकेंगे। बिहार लीची उत्पादक संघ के अध्यक्ष बच्चा प्रसाद सिंह ने बताया कि काफी परिश्रम के बाद बिहार की शाही लीची को जीआई टैग मिल गया है।

उन्होंने बताया कि जीआई टैग देने वाले निकाय ने शाही लीची का सौ साल का इतिहास मांगा था। उन्होंने बताया कि कई साक्ष्य प्रस्तुत करने पर पांच अक्टूबर को शाही लीची पर जीआई टैग लग गया। जियोग्राफिकल आइडेंटिफि केशन किसी उत्पाद को दिया जाने वाला एक विशेष टैग है।

जीआई टैग उसी उत्पाद को दिया जाता है, जो किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में उत्पन्न होता है। लीची की प्रजातियों में ऐसे तो चायना, लौगिया, कसैलिया, कलकतिया सहित कई प्रजातियां है परंतु शाही लीची को श्रेष्ठ माना जाता है। यह काफी रसीली होती है। गोलाकार होने के साथ इसमें बीज छोटा होता है।

स्वाद में काफी मीठी होती है। इसमें खास सुगंध होता है।बिहार के मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, वैशाली व पूर्वी चंपारण शाही लीची के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं। देश में कुल लीची उत्पादन का आधा से अधिक लीची का उत्पादन बिहार में होता है। आंकड़ों के मुताबिक बिहार में 32,000 हेक्टेयर में लीची की खेती की जाती है।

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खौफनाक! तांत्रिक दंपति ने सिद्धि प्राप्ति के नाम पर बेटे की बलि दी

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TOTKA
प्रतीकात्मक तस्वीर

अंधविश्वास में अंधे हुए एक दंपति ने तांत्रिक सिद्धि के नाम पर अपने मासूम बेटे की बलि चढ़ा दी। मामला बिहार से सामने बिहार के बांका जिले का है। वारदात को अंजाम देने के बाद से आरोपी तांत्रिक दंपति घर से फरार है।

दरअसल, मामला बांका जिले के बेलहर स्थित टेंगरा गांव का है। तांत्रिक दंपति ने अपने मासूम बेटे के सिर पर कील ठोककर बलि चढ़ा दी। जिस शख्स ने भी इस बाबत घटना के बारे में सुना वह कांप औऱ सिहर उठा। ग्रामीणों का कहना है कि मृतक बालक के पिता योगेंद्र पंडित पुराने तांत्रिक है। लोगों की झाड़-फूंक व तांत्रिक विधि से इलाज करने के लिए अक्सर वह दिल्ली सहित बिहार, झारखंड व उत्तर प्रदेश के जिलों में जाता रहा है। अंधविश्‍वास में फंसे लोग उसे झाड़-फूंक के लिए बुलाते रहे हैं।

बुधवार आलासुबह पंडित के तीन वर्षीय बेटे का शव झाड़ियों में खून से लथपथ अवस्था में पड़ा हुआ मिला। तांत्रिक पति और पत्नी गांव में मासूम की निर्दयता से हत्या की चर्चा होते सुन तभी से फरार है। उन्होंने कहा कि तंत्र सिद्धी की प्राप्ति के लिए दंपति ने अपने पुत्र की बलि चढ़ा दी।

जानकारी के मुताबिक, योगेंद्र पंडित ने पहली पत्नी की मृत्यु के बाद दूसरी शादी कर ली औऱ पिछले कई वर्षों से तांत्रिक योगेंद्र पंडित और उसकी दूसरी पत्नी मुनिया देवी तंत्र विद्या की सिद्धि में जुटे थे। दंपति आए दिन घर से बाहर रहते थे औऱ तंत्र की पट्टी ओढ़े थे। मंगलवार सुबह दंपति ने घर पहुंचकर तंत्र साधना आरंभ की। इसी दौरान दंपति ने तीन साल के मासूम बेटे गुलिया कुमार के सिर में कील ठोक कर उसकी नरबलि चढ़ा दी।

बालक की मौत की खबर ग्रामीणों को लगी तो उसके घर के आसपास लोगों की भीड़ जमा हो गई। कुछ लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दे दी। इसके बाद दोनों पति-पत्नी बेटे के शव को एक झाड़ी में फेंक कर वहां से फरार हो गए। बताया जाता है योगेन्द्र ने मुनिया को तांत्रिक विद्या सिखाने के चक्कर में वर्ष 2013 में उसके पति की ही बलि चढ़ा दी थी। उसके शव को कुएं में डाल दिया औऱ बाद में उसने मुनिया से शादी कर ली थी।

हैरानी की बात यह है कि पुलिस मामले को रफा-दफा करने में जुटी हुई है। थानाध्यक्ष का कहना है पुलिस को घटना की जानकारी नहीं है। हालांकि, बाद में उन्होंने पुलिस को घटनास्थल पर भेज कर मामले की जांच कराने की बात कही।

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मुंबई के सांताक्रूज स्थित गुजराल हाउस में भीषण आग

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Mumbai
(PHOTO CREDIT ANI)

मुंबई के सांताक्रूज के कलिना में स्थित गुजराल हाउस में भीषण आग लगी। फिलहाल, आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़िया पहुंची हैं।

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