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टीम इंडिया की जीत में ‘अड़ंगा’ बने मार्श-हैंड्सकॉम्ब

Virat Kohli
Virat Kohli

रांची टेस्ट किसी हॉलिवुड फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं था, एक्शन, ड्रामा, थ्रिल, सस्पेंस से भरपूर इस टेस्ट में टीम इंडिया जीत के इतने नज़दीक पहुंच कर भी उसे हासिल नहीं कर पाई और यही इस टेस्ट की खूबसूरती को बयां करता है।

आखिरी दिन ऑस्ट्रेलिया जब 2 विकेट के नुकसान पर 23 रन से आगे खेलने मैदान पर उतरी। पांचवें दिन के विकेट का मिजाज भारतीय गेंदबाज़ों को मदद देने के मूड में भी नज़र आ रहा था।

विकेट पर रफ पैचेज़ इतने थे जिसका नुकसान ऑस्ट्रेलियाई टीम को जल्दी उठाना पड़ सकता था और हुआ भी वैसा ही लेकिन इस बार इस विकेट पर अपनी शानदार गेंदबाज़ी का नमूना पेश किया टीम इंडिया की तेज गेंदबाज़ी आक्रमण के कर्णधार ईशांत शर्मा ने विकेट पर धीरे धीरे अपने पांव जमा रहे रेन्शॉ ईशांत की रफ्तार को भांप नहीं सके और 15 रन बनाकर वो आउट हो गए, ऑस्ट्रेलिया की मुश्किल् यहीं खत्म नहीं हुई।

क्रीज पर मोर्चा संभालने आए कप्तान स्टीवन स्मिथ को अगले ही ओवर की पहली गेंद पर अपना विकेट गंवाना पड़ा। रवीन्द्र जडेजा की एक बेहतरीन गेंद को पढ़ने में कप्तान स्टीव स्मिथ चूक गए और बिना जज किए हुए गेंद को छोड़ने का नतीजा उन्हें भुगतना पड़ा। वॉर्नर और नाइटवॉचमैन नेथन लायन को आउट करने के बाद कप्तान स्टीवन स्मिथ का विकेट जडेजा के लिए तीसरा शिकार साबित हुआ।

चार गेंदों के अंदर ऑस्ट्रेलिया के निकले दो बड़े विकेटों ने टीम इंडिया को पारी से जीत का सपना दिखा दिया। 63 रन पर चार विकेट निकल जाने के बाद तो जैसे टीम इंडिया के गेंदबाज़ों का हौसला सातवें आसमान पर पहुंच गया।

हालांकि इन दो बड़े झटकों से उबारने के लिए हैंड्सकॉम्ब और मिचेल मार्श अपनी कमर कसकर मैदान पर उतरे और धीरे धीरे उन्होंने अपने पांव क्रीज़ पर जमाने शुरु कर दिए। लंच तक ऑस्ट्रेलिया 83 रन बनाकर अपने चार विकेटे गंवाे चुका था।

लेकिन लंच के बाद मार्श और हैंड्सकॉम्ब की जोड़ी ने अपने इरादे ज़ाहिर कर दिए। इन दोनों ने ही अपने मजबूत और चट्टानी इरादों से अश्विन और जडेजा के किले को भेदने में देर नहीं लगाई।

दोनों ने एकाग्रता से बल्लेबाज़ी करते हुए क्रीज पर वक्त ज़ाया करना शुरू कर दिया क्योंकि आखिरी दिन अगर कंगारू विकेट पर टिकने की हिम्मत नहीं जुटा पाते तो टीम इंडिया इस टेस्ट में जीत अपने नाम करने में कामयाब ज़रूर हो जाती।

लेकिन इन सपनों पर मार्श और हैंड्सकॉम्ब की जोड़ी ने पानी फेरने का काम किया। इन दोनों के बीच पांचवें विकेट के लिए 124 रन की पार्टनरशिप हुई जिसने टीम इंडिया का बना बनाया काम बिगाड़ दिया। चायकाल तक इस जोड़ी ने खुद को बचाए रखा और आखिरी सेशन में पहली पारी में टीम इंडिया से मिली बढ़त को भी पार कर लिया।

हालांकि 53 रन के निजी स्कोर पर मार्श का विकेट गिरते ही एक बार फिर से टीम इंडिया के खिलाड़ियों के साथ-साथ स्टेडियम में मौजूद फैन्स को भी फिर से जीत की उम्मीद जग गई। मार्श का विकेट भी जडेजा ने ही झटका जो उनका चौथा विकेट रहा। क्रीज पर मजबूती से टिकी ये अहम जोड़ी टूटी जरूर लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

इसके बाद मैक्सवेल 2 रन बनाकर अश्विन की गेंद का शिकार बने। दूसरी पारी में अश्विन का ये पहला विकेट था। हैन्‍ड्कॉम्ब आखिर तक विकेट पर टिके रहे और नाबाद 72 रन की पारी खेल ऑस्ट्रेलिया के लिए हीरो साबित हुए।

आखिर में इस बेहतरीन टेस्ट का अंत एक ड्रॉ से हुआ। जिसने ऑस्ट्रेलिया और टीम इंडिया दोनों ही टीमों के हर खिलाड़ी को टेस्ट जैसे असल खेल की पहचान एक बार फिर पहुंचा दी।अगला पडाव अब धर्मशाला होगा जहां 1-1 की बराबरी के साथ दोनों टीमें एक बार फिर एक दूसरे का सामना करेंगी।

लेकिन सीरीज़ का ये आखिरी टेस्ट बहुत अहम साबित होगा, क्योंकि हार और जीत के बाद दोनों ही टीमों ने एक बराबरी की टक्कर का मुकाबला मैदान पर खेला है जो अगले टेस्ट में स्किल्स, टेंपरामेंट, धैर्य और रणनीतियों का असली इम्तिहान लेकर आएगा।

जो भी टीम इस मुकाबले में अपनी रणनीति के दांवपेंच में सफल साबित होगी, सीरीज की सिकंदर भी वही टीम बनेगी और यही इस बड़ी सीरीज़ का असली रोमांच लेकर आएगी।

wefornews bureau

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