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बीमार सोच वाला मनहूस क़दम था नोटबंदी : मनमोहन सिंह

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manmohan singh
File Photo

नोटबंदी के दो साल पूरे होने पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मोदी सरकार पर करारा प्रहार किया है। उन्होंने इसे ‘बीमार सोच’ वाला और ‘मनहूस’ कदम करार दिया।

मनमोहन सिंह ने कहा, ‘नोटबंदी से भारतीय अर्थव्यवस्था पर जो कहर बरपा किया, उसका नतीज़ा पूरे देश के सामने है। नोटबंदी ने हरेक व्यक्ति को प्रभावित किया, भले ही उसका धर्म, जाति, पेशा या संप्रदाय कुछ भी हो। हमेशा कहा जाता है कि वक्त सभी जख्मों को भर देता है लेकिन नोटबंदी के जख्म-दिन-ब और गहरे होते जा रहे हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, नोटबंदी से जीडीपी में गिरावट तो हुई ही, उसके अन्य असर भी दिखाये दिये। छोटे और मंझोले काम-धंधे भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं जिसे नोटबंदी ने पूरी तरह से तोड़ दिया। अर्थव्यवस्था के लगातार जूझते रहने का बहुत बुरा असर रोज़गार पर पड़ा। इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए दिए जाने वाले कर्ज और बैंकों की गैर-वित्तीय सेवाओं ने भी दम तोड़ दिया। नोटबंदी के कारण ही रुपया गिरा और इससे मैक्रो-इकोनॉमी काफी प्रभावित हुई।

बता दें कि मोदी सरकार ने 8 नवंबर 2016 को 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बंद करने का ऐलान किया था। पुराने नोट बदलने के लिए बैंकों में बेहद अफरातफरी रही। इससे आम लोगों को काफी दिक्कतें हुईं। लेकिन मोदी सरकार नोटबंदी को हमेशा अपनी बड़ी उपलब्धि बताती रही, जबकि विपक्ष इस नीति को आर्थिक आपदा बताता रहा।

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शहीद मेजर वीएस ढौंडियाल को अंतिम विदाई

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देहरादून में पुलवामा में हुई मुठभेड़ में शहीद होने वाले भारतीय सेना के मेजर वीएस ढौंडियाल को अंतिम विदाई दी गई। शहीद मेजर की अंतिम विदाई के दौरान उनकी पत्नी काफी भावुक हो गईं और उन्होंने अपने पति को आखिरी सलाम किया।

मेजर विभूति ढौंडियाल का परिवार मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के बैजरों के पास ढौंड गांव का रहने वाला है। विभूति के दादा केएन ढौंडियाल 1952 में दून आकर बस गए थे। विभूति के पिता और दादा दोनों ही राजपुर रोड स्थित एयरफोर्स के सीडीए कार्यालय से सेवानिवृत्त हुए थे।

तीन बहनों में सबसे छोटे 34 साल के मेजर विभूति की शादी पिछले साल ही 19 अप्रैल को हुई थी। पत्नी निकिता कौल ढौंडियाल दिल्ली में बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी करती हैं। पिता ओपी ढौंडियाल का निधन 2015 में हो चुका है।

इसके बाद से मां सरोज ढौंडियाल बीमार रहने लगी हैं। दो बहनों की शादी हो चुकी है। तीसरी बहन की शादी नहीं हुई है। वह दून इंटरनेशनल स्कूल में शिक्षिका हैं।

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पुलवामा हमले पर जल्दबाजी में जवाबी कार्रवाई के खिलाफ हैं शत्रुघ्न सिन्हा

“जोश में कहीं अपना होश न खो बैठें। मैं जानता हूं कि पुलवामा में जो भी हुआ, उसके बाद गुस्सा उबल रहा है। यह कायरता का बेशर्मी भरा कृत्य है और इससे सबसे संभव कठोर तरीके से निपटा जाना चाहिए।”

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Shatrughan Sinha

मुंबई, 18 फरवरी | जम्मू एवं कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को हुए आतंकी हमले से परेशान और विचलित सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने जल्दबाजी में जवाबी कार्रवाई के प्रति आगाह किया है।

अभिनेता से राजनेता बने शत्रुघ्न ने कहा, “जोश में कहीं अपना होश न खो बैठें। मैं जानता हूं कि पुलवामा में जो भी हुआ, उसके बाद गुस्सा उबल रहा है। यह कायरता का बेशर्मी भरा कृत्य है और इससे सबसे संभव कठोर तरीके से निपटा जाना चाहिए।”

उन्होंने आगाह किया, “हमारे माननीय प्रधानमंत्री ने हमसे हिंसा के इस उन्मादी कृत्य का मुंहतोड़ जवाब देने का वादा किया है। हमें गुस्से में आकर जवाब नहीं देना चाहिए। हम सभी भारतीय घायल और चोट खाए हुए हैं। हमें कुछ करने से पहले अपने अगले कदम के बारे में गहराई से सोचना चाहिए।”

पुलवामा हमले पर पंजाब के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की टिप्पणी पर प्रत्यक्ष रूप से बोलने से इनकार करते हुए शत्रुघ्न ने राजनेताओं को इस प्रकार के बयान देने के प्रति चेताया।

उन्होंने कहा, “किसी को भी कुछ कहने को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है। भारतीय जनता अमनपसंद आवाजें (अभी) नहीं सुनना चाहती। भारत इस वक्त बहुत गुस्से में है।”

क्या हमें बॉलीवुड में सभी पाकिस्तानी कलाकारों को प्रतिबंधित कर देना चाहिए? इस पर शत्रुघ्न ने कहा, “सांस्कृतिक आदान-प्रदान और उनके साथ क्या करना चाहिए, इस बारे में अभी सोचना तक भी सही नहीं होगा। मैं यह कहना चाहूंगा कि यह मोहम्मद रफी, किशोर कुमार, लता मंगेशकर और आशा भोसले की जमीन है। हमें किसी दूसरे देश के गायकों की जरूरत क्यों पड़ती है?”

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पुलवामा मुठभेड़ में मेजर समेत 4 जवान शहीद, 2 आंतकी ढेर

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Kashmir

दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा जिले के पिंगलिन इलाके में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में एक मेजर समेत 4 जवान शहीद हो गए, जबकि जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के दो आतंकी मारे गए। इस दौरान एक नागरिक की भी मौत हुई है। 

मुठभेड़ जिस जगह हुई वह कुछ दिनों पहले केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के काफिले पर हुए आत्मघाती हमले के स्थान से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर ही है।

रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल राजेश कालिया ने कहा, “मारे गए जेईएम आतंकवादियों में एक शीर्ष कमांडर है जो पाकिस्तान का रहने वाला है।”

पिंगलेना गांव में रविवार रात हुई मुठभेड़ में मेजर के अलावा तीन जवान भी शहीद हुए हैं और नागरिक की भी मौत हुई है जिसकी पहचान मुश्ताक अहमद के रूप में हुई है।

मुठभेड़ रविवार देर रात शुरू हुई जब सुरक्षा बलों, राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर), राज्य पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने जैश-ए-मुहम्मद (जेईएम) के आतंकवादियों की यहां छिपे होने की खुफिया सूचना मिलने के बाद पिंगलेना गांव को घेर लिया। 

कालिया ने कहा, “घेराबंदी जैसे ही कड़ी हुई छिपे हुए आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गया।” 

इससे पहले 14 फरवरी को पुलवामा में जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर सीआरपीएफ काफिले पर हुए आत्मघाती हमले में 40 जवान शहीद हुए थे। 

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