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ममता ने राजस्थान में मजदूर की हत्या की निंदा की

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फाइल फोटो

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को बंगाल के एक मजदूर की राजस्थान में हत्या किए जाने की निंदा की। मजदूर की जिंदा जलाकर हत्या कर दी गई। आरोपी का कहना है कि ‘उसने हत्या एक लड़की को लव जिहाद से बचाने के लिए की।’

यह घटना राजस्थान के राजसमंद जिले में हुई और आरोपी शंभूनाथ रायगर ने इस नृशंस कृत्य का वीडियो भी रिकार्ड कर सोशल मीडिया पर अपलोड किया। यह वीडियो वायरल हो गया है।

ममता बनर्जी ने ट्वीट किया कि हम बंगाल के एक मजदूर की राजस्थान में की गई जघन्य हत्या की निंदा करते हैं। कैसे लोग इस हद तक अमानवीय हो सकते हैं? दुखद।”

पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार ने कहा रायगर से मामले में पूछताछ की जा रही है। वायरल होते वीडियो में अपराधी, शेख पर फावड़े से हमला करता दिख रहा है। उसके शरीर पर केरोसिन डाल रहा है व उसे जिंदा जला रहा है। रायगर ने चेतावनी दी कि जो ‘लव जिहाद’ में लिप्त है, उनकी भी यही नियति होगी।

हत्या में इस्तेमाल वस्तु, शेख की बाइक व चप्पलें घटना स्थल पर मिली हैं। राजस्थान के गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया के अनुसार मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित किया गया है।

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मोदी सरकार के ‘स्वच्छ गंगा कोष’ को नहीं मिला जनता का सहयोग

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फाइल फोटो

स्‍वच्‍छ गंगा कोष में 86 प्रतिशत योगदान सरकारी संस्‍थाओं ने किया है। इसकी जानकारी द इंडियन एक्सप्रेस को सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली है।

एनआरआई और भारतीय मूल के व्‍यक्तियों (PIO) से मिला अंशदान कुल रकम के दो प्रतिशत से भी कम है। जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय द्वारा दिए गए दस्‍तावेजों से पता चलता है कि 2015-16, 2016-17, 2017-18 और 2018-19 (30 सितंबर तक) में सरकारी विभागों, सरकारी संगठनों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने स्‍वच्‍छ गंगा निधि के लिए कुल 163.49 करोड़ रुपये दिए हैं। यह कुल रकम का 86.42 प्रतिशत है।

दस्‍तावेजों के मुताबिक, इसी अवधि में निजी संगठनों से 19.54 करोड़ रुपये मिले जो कुल योगदान का 10.32 प्रतिशत रहा। एनआरआई और भारतीय मूल के व्‍यक्तियों से 3.76 करोड़ रुपये प्राप्‍त हुए हैं। व्‍यक्तिगत श्रेणी के तहत 2.37 करोड़ रुपये मिले, जो पूरी निधि का 1.25 प्रतिशत है। आरटीआई दस्‍तावेजों के अनुसार, स्‍वच्‍छ गंगा निधि में अभी 234.98 करोड़ रुपये उपलब्‍ध हैं।

केंद्रीय कैबिनेट ने 24 सितंबर, 2014 को स्‍वच्‍छ गंगा निधि को हरी झंडी थी, इसका गठन जनवरी, 2015 में हुआ।

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सबरीमाला पुनर्विचार याचिकाओं पर 13 नवंबर को सुनवाई

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फाइल फोटो

केरल के सबरीमला मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 13 नवंबर को सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ कुल 19 पुर्नविचार याचिकाएं लंबित हैं।

बता दें कि कोर्ट ने 28 सितंबर को सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश करने की अनुमती दी थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी सभी आयुवर्ग की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रार्थना का अधिकार नहीं मिल सका।

सबरीमाला मंदिर में दर्शन के आखिरी दिन सोमवार को रजस्वला आयुवर्ग की एक और महिला ने मंदिर में प्रवेश की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारियों के विरोध के चलते उन्हें वापस ही लौटना पड़ा।

बता दें कि मलयालम महीनों के पहले पांच दिन मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। इसके अलावा पूरे साल मंदिर के दरवाजे आम दर्शनार्थियों के लिए बंद रहते हैं।

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‘पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध नहीं’

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पूरे देश में पटाखों की बिक्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि पटाखों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि केवल लाइसेंस वाले ही पटाखे बेच सकते हैं।

साथ ही अदालत ने कहा कि कोशिश की जाए कि कम प्रदूषण वाले पटाखों का इस्तेमाल हो ताकि पर्यावरण को कोई नुकसान ना पहुंच पाए। इसके अलावा कोर्ट ने पटाखों की ऑनलाइन सेल पर बैन लगा दिया है।  कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा है कि ई-कॉमर्स वेबसाइट से पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है।

कोर्ट ने पटाखा फोड़ने के लिए समय सारिणी जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, दिवाली पर लोग रात 8 बजे से 10 बजे तक, क्रिसमस और न्यू ईयर पर रात 11.45 बजे से 12.15 बजे तक ही पटाखे बजा पाएंगे।

बता दें कि शीर्ष अदालत ने 28 अगस्त को वायु प्रदूषण के चलते बिगड़ते हालात को नियंत्रित करने के मद्देनजर पूरे देश में पटाखों पर प्रतिबंध लगाने वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

अदालत ने याचिकाकर्ताओं, पटाखा निर्माताओं और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) का पक्ष सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि स्वास्थ्य का अधिकार और व्यापार या व्यवसाय चलाने के अधिकार के बीच सामंजस्य बनाने की जरूरत है।

पटाखा निर्माण करने वालों ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि दिवाली के दौरान केवल पटाखे प्रदूषण बढ़ाने की एकमात्र वजह नहीं है। यह प्रदूषण बढ़ाना वाला एक कारक है और इस आधार पर पूरे उद्योग को बंद नहीं किया जा सकता।

अदालत ने सुनवाई के दौरान वायु प्रदूषण की वजह से बच्चों में श्वास की समस्याओं के बढ़ने को लेकर भी चिंता जताई थी और कहा था कि वह इस पर निर्णय करेगी कि क्या पटाखे फोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा या मुनासिब नियंत्रण स्थापित किया जाएगा। शीर्ष अदालत ने 2017 में दिवाली के दौरान दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था।

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