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बनी-बनाई धारणाओं को चुनौती दे रहे हैं आधुनिक हो रहे मदरसे

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आजमगढ़, 27 सितम्बर | उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में स्थित सबसे पुराने मदरसों में से एक मदरसतुल इस्लाह के पूर्व छात्र रहे अबु ओसामा का मानना था कि मदरसे से स्नातक की पढ़ाई करने के बाद वह आधुनिक दुनिया में प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे। लेकिन, उन्हें बाद में पता चला कि उनका ऐसा सोचना गलत था।

दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क से परास्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद हैदराबाद के मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय के सामाजिक कार्य विभाग में बतौर सहायक प्रोफेसर कार्यरत ओसामा ने बताया, “मैंने महसूस किया कि वहां, मदरसे के पाठ्यक्रम और कार्यक्रम से इस्लामिक मूल्यों और नैतिकता के अलावा मैंने बहुत कुछ सीखा था।”

मदरसे खबरों में गलत वजह से रहे हैं, खासकर आजमगढ़ के मदरसे। पूर्वी उत्तर प्रदेश का आजमगढ़ जिला कभी हिंदू-मुसलमान भाईचारे के लिए जाना जाता था और जहां से कई बड़े विद्वान सामने आए थे। लेकिन, बीते कुछ सालों में मीडिया की खबरों ने इसे गलत तरीके से ‘आतंकगढ़’ के रूप में परिभाषित कर दिया क्योंकि यहां से कुछ मुस्लिम चरमपंथी गिरफ्तार हुए थे।

उत्तर प्रदेश में करीब 19,000 मदरसे हैं जिनके देश प्रेम पर सवाल उठाते हुए योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली राज्य की भाजपा सरकार ने स्वतंत्रता दिवस पर मदरसों में होने वाले राष्ट्रगान की वीडियो रिकॉर्डिग की मांग की थी।

लेकिन, इनमें से कई मदरसे, जिनमें आजमगढ़ के मदरसे शामिल हैं, बनी बनाई धारणाओं को तोड़ते हुए एक नई सकारात्मक इबारत लिख रहे हैं। वक्त के साथ कदम मिलाते हुए इन्होंने अपने पाठ्यक्रम को आधुनिक व प्रगतिशील बनाया है, साथ ही विद्यार्थियों को कंप्यूटर व अन्य आधुनिक प्रौद्योगीकीय यंत्र मुहैया कराए हैं।

इन मदरसों में अब कुरान, अरबी भाषा व धर्मशास्त्र के साथ-साथ अंग्रेजी, हिंदी, विज्ञान, गणित, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र, कंप्यूटर साइंस आदि विषयों की पढ़ाई हो रही है। कुछ ने पॉलिटेक्निक और लघु आईटीआई भी शुरू किए हैं।

आजमगढ़ और इसके पड़ोसी जिलों में करीब 50 बड़े मदरसे हैं जहां तकरीबन 50,000 छात्र दाखिला लेते हैं। यह विद्यार्थी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम, जम्मू एवं कश्मीर, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और नेपाल तक से आते हैं।

विद्यार्थियों के बीच संदेश के आदान-प्रदान के लिए व्हाट्सएप लोकप्रिय साधन है और अधिकांश के पास ईमेल और फेसबुक अकाउंट है।

मदरसतुल इस्लाह, जिसे 1908 में स्थापित किया गया था, इस क्षेत्र के सबसे पुराने मदरसों में से एक है, जहां करीब 1500 विद्यार्थी पढ़ते हैं। इस मदरसे में प्रवेश करते ही जिस पर सबसे पहले निगाह पड़ती है वह है इसका पॉलिटेक्निक भवन।

इस्लाह से करीब 50 किलोमीटर दूर एक और मदरसा है, जामियातुल फलाह। इसकी स्थापना 1962 में हुई। यहां करीब 4300 विद्यार्थी पढ़ते हैं जिनमें से करीब आधी लड़कियां हैं।

जामियातुल फलाह के निदेशक मौलाना मोहम्मद ताहिर मदनी ने कहा कि इस्लामी मदरसों के लिए आधुनिक विषयों की शुरुआत करना जरूरी है।

मदनी ने आईएएनएस से कहा, “जामियातुल फलाह की स्थापना इस आधार पर हुई थी कि हम इस्लामी और आधुनिक, दोनों शिक्षाओं को शामिल करेंगे। हम जामिया की नींव रखने के बाद से ही ऐसा कर रहे हैं।”

मुस्लिमों की स्थिति पर सच्चर समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्लिम समुदाय के केवल 4 फीसदी बच्चे ही मदरसों में दाखिला लेते हैं।

समुदाय के कुछ रूढ़िवादियों ने तर्क दिया कि इन चार फीसदी बच्चों को इस्लामी शिक्षाओं में विशेषज्ञ होना चाहिए और उन्हें आधुनिक विषयों को सीखने की जरूरत नहीं है, लेकिन मदरसा इस्लाह में अंग्रेजी के शिक्षक मोहम्मद आसिम का मानना है कि इन आधुनिक विषयों को सीखना इस्लाम को समझने और प्रचार करने के लिए भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि गणित का ज्ञान विरासत पर इस्लामी कानून और व्यापार में काम आएगा जबकि विज्ञान की जानकारी कुरान की आयतों को समझने में मददगार होगी।

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के शोध छात्र मोहम्मद सऊद आजमी ने कहा, “यह एक अच्छा संकेत है कि मदरसे अपने छात्रों में आधुनिक समझ को बढ़ा रहे हैं। लेकिन, उन्हें अपने पढ़ाने की शैली को बेहतर करना होगा और उन्हें पर्यावरण विज्ञान और आधुनिक अर्थशास्त्र जैसे विषयों को भी जोड़ना होगी।”

–आईएएनएस

(यह खबर आईएएनएस और फ्रैंक इस्लाम फाउंडेशन के सहयोग से शुरू की गई एक विशेष श्रृंखला का हिस्सा है)

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बांधवगढ़ ले जाए जाएंगे उत्पाती हाथी

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भोपाल, 19 सितंबर | छत्तीसगढ़ में उत्पात मचाने वाले हाथी काफी समय से मध्य प्रदेश के सीधी जिले में घुसकर उत्पात मचा रहे हैं। इस दौरान दो लोगों की मौत होने के अलावा संपत्ति का भारी नुकसान हो चुका है। वन अमले ने इन हाथियों को कब्जे में ले लिया है और इन्हें बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान भेजने की तैयारी हो रही है। वन विभाग की ओर से बुधवार को दी गई आधिकारिक जानकारी में बताया गया कि छत्तीसगढ़ के हाथी मवई नदी को पार कर सीधी जिले में घुस गए और यहां जमकर उत्पात मचाया। इन हाथियों ने कुंदौर गांव के कच्चे घरों को तोड़कर उनमें रखा अनाज खा लिया और खेतों की फसलों को तबाह कर दिया।

हाथियों के बढ़ते आतंक को देखते हुए टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने तत्काल सोलर लाइट गांव की सीमा पर लगा कर हाथियों को गांव में घुसने से रोका। इसके बाद हाथी अन्य गांवों में भी इसी तरह उत्पात मचाते हुए सीधी मुख्यालय की 15 किलोमीटर की परिधि में पहुंच गए। हाथियों को भगाने के लिए पश्चिम बंगाल से विशेषज्ञ भी बुलाए गए। अगस्त से सितंबर के बीच इन उत्पाती हाथियों ने दो ग्रामीणों की जान भी ले ली।

उत्पाती हाथियों पर काबू पाने के लिए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के संचालक मृदुल पाठक के नेतृत्व में अधिकारियों और कर्मचारियों के दल ने अभियान चलाया और कुल पांच हाथियों को कब्जे में ले लिया है। इन हाथियों को बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान ले जाया जाएगा।

–आईएएनएस

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हिंदी ब्लॉग्स को हर महीने 3 करोड़ पेज व्यू : मॉमस्प्रेसो

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नई दिल्ली, 14 सितम्बर | भारत के महिलाओं के लिए सबसे बड़े यूजर-जनरेटेड कंटेंट प्लेटफार्म मॉमस्प्रेसो ने हिंदी दिवस (14 सितंबर) पर अपने 6,500 से ज्यादा ब्लॉगर्स के डेटा का विश्लेषण कर नई रिपोर्ट प्रस्तुत की है। विश्लेषण कहता है कि हिन्दी ब्लॉग्स ने हर महीने 3 करोड़ से ज्यादा पेज व्यू हासिल की है। इसमें से 95 प्रतिशत की खपत पाठकों ने मोबाइल पर की है।

प्लेटफार्म ने बताया कि हिंदी पेज व्यू अंग्रेजी से ज्यादा हो गए हैं और इस समय कुल पेज व्यू का 50 प्रतिशत हो गया है।

मॉमस्प्रेसो की ओर से जारी बयान में कहा गया कि प्लेटफार्म पर हिंदी में लेखन की सूची मुख्य रूप से उन शहरों की माताओं ने तैयार की है, जिनकी तुलनात्मक रूप से भागीदारी कम रही है। इनमें पटना, आगरा, लखनऊ, शिमला, भुवनेश्वर और इंदौर शामिल है। 75 प्रतिशत हिन्दी ब्लॉग्स को मॉमस्प्रेसो मोबाइल ऐप के जरिये लिखा गया है, जबकि अंग्रेजी में ऐसा नहीं है। 60 प्रतिशत ब्लॉगर्स अभी भी ब्लॉग लिखने के लिए डेस्कटॉप उपयोग करते हैं। मोबाइल ऐप पर बने हिन्दी ब्लॉग्स में से 93 प्रतिशत एंड्रायड फोन पर बने हैं। प्लेटफार्म पर इस समय 1,595 हिन्दी ब्लॉगर्स हैं, जिन्होंने अब तक 14,746 ब्लॉग्स बनाए हैं। हर महीने करीब 1,800 ब्लॉग्स जोड़े जा रहे हैं।

मॉमस्प्रेसो ने बताया कि हिन्दी की अधिकतम रीडरशिप लखनऊ, जयपुर, इंदौर, चंडीगढ़, आगरा और पटना से है। यह भी बताया गया कि 95 प्रतिशत यूजर्स ने लेखन का इस्तेमाल मोबाइल पर किया। जिस कंटेंट ने अधिकतम रीडरशिप (65 प्रतिशत) हासिल की, वह ‘मां की जिंदगी’ या ‘मॉम्स लाइफ’ सेक्शन था। रिलेशनशिप्स से लेकर पैरेंटिंग और सामाजिक उत्तरदायित्व तक का लेखन इस पर उपलब्ध है। अन्य लोकप्रिय सेक्शन में प्रेग्नेंसी, बेबी, हेल्थ और रैसिपी भी शामिल हैं।

हिंदी पोस्ट्स को अंग्रेजी की तुलना में 4.2 गुना ज्यादा एंगेजमेंट मिला। इसमें लाइक्स, शेयर और कमेंट्स शामिल हैं। हिन्दी में हाइपर एंगेजमेंट की एक बड़ी वजह हिन्दी कंटेंट की क्वालिटी है। पहली बार महिलाओं को कई मुद्दों पर अपने विचार अभिव्यक्त करने के लिए सुरक्षित स्थान मिला है। कई महिलाएं जो लैंगिंक भेदभाव, सामाजिक मुद्दों और अन्य वजहों से खुलकर बोल नहीं पाती थी, वह भी इस पर अपने आपको अभिव्यक्त कर रही है।

मॉमस्प्रेसो के सह-संस्थापक और सीईओ विशाल गुप्ता ने कहा, “हमारा विजन यह है कि अगले तीन वर्षो में हमारे प्लेटफॉर्म पर सभी माताओं में से 70 फीसदी को लेकर आना है और क्षेत्रीय भाषा लेखन इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण है। हमें गर्व है कि मॉमस्प्रेसो एक ऐसा मंच प्रदान कर रहा है जहां भारत भर की माताएं बिना डर के अपने विचार व्यक्त कर रही हैं। इन विषयों पर बहस और चर्चाओं को प्रोत्साहित करती हैं। पिछले 12 महीनों में हमारे ट्रैफिक चार गुना बढ़ा है और हिंदी की भूमिका इस विकास में महत्वपूर्ण रही है। इस समय हमारे पास चार अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में लेखन है और वर्ष के अंत से पहले हमारी योजना 3 और जोड़ने की है।

हिंदी भाषा लेखन का उपयोग करने वाले ब्रांड्स की संख्या 2017 के 6 फीसदी से बढ़कर 2018 में 27 फीसदी हो गई है। इसमें पैम्पर्स, डेटॉल, बेबी डव, नेस्ले, जॉनसन एंड जॉन्सन, एचपी, ट्रॉपिकाना एसेंशियल्स और क्वैकर जैसे ब्रांड शामिल हैं।

–आईएएनएस

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हिंदी के प्रख्यात गीतकार और कवि गोपाल दास नीरज का निधन।

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Gopaldas Neeraj

हिंदी के प्रख्यात गीतकार और कवि गोपाल दास नीरज का गुरुवार को यहां के एम्स में देर शाम 7:50 बजे निधन हो गया। मंगलवार को तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें आगरा के लोटस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, लेकिन तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें एम्स लाया गया, जहां उन्होंने आखिरी सांस ली।

उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के पुरवली गांव में चार जनवरी, 1925 को जन्मे गोपाल दास नीरज हिंदी मंचों के प्रसिद्ध कवियों में शुमार थे। उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों को भी कई सुपरहिट गाने दिए। उन्हें उनकी उत्कृष्ट रचनाओं के लिए कई बार सम्मानित किया गया था। उन्होंने तीन बार फिल्म फेयर अवार्ड भी अपने नाम किया था।

मशहूर कवि और गीतकार गोपाल दास नीरज को 1991 में पद्मश्री और 2007 में पद्मभूषण सम्मान से भी नवाजा गया था। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार ने भी यश भारती सम्मान से सम्मानित कर उनके दमदार लेखनी को सराहा था।

गोपालदास को सांस लेने में तकलीफ थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बुधवार को तबीयत में सुधार की भी खबरें आई थीं, लेकिन गोपालदास ने आखिर में दुनिया को अलविदा कह ही दिया।

–आईएएनएस

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