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कमलनाथ के पास बुंदेलखंड की तस्वीर बदलने का सुनहरा मौका : सत्यव्रत

चतुर्वेदी का आरोप है कि केंद्र की सरकार बदलते ही बुंदेलखंड के हालात को बदलने वाली इस परियोजना को ही बंद करने का फैसला ले लिया गया, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। यह सब इसलिए हो गया, क्योंकि राज्य और केंद्र में भाजपा की सरकारें थीं।

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Satyavrat Chaturvedi

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी को भारतीय जनता पार्टी की शिवराज सिंह चौहान सरकार के काल में बुंदेलखंड की हुई उपेक्षा का बेहद मलाल है। उनका मानना है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ के पास इस क्षेत्र की तस्वीर बदलने का सुनहरा अवसर है। उनके पास नजरिया है, अनुभव है और बेहतर प्रयास का अवसर है, जिसके जरिए वे वह सब कर सकते हैं जो यहां की जरूरत है।

पूर्व सांसद चतुर्वेदी ने आईएएनएस से खास बातचीत में अपने चार दशक के राजनीतिक अनुभवों को साझा करते हुए कहा, “विधायक, मंत्री और सासंद रहते हुए इस क्षेत्र के हालात बदलने के लिए जो कर सकता था, किया। विरोधी सरकारों से विभिन्न स्तर पर लड़ाइयां भी लड़ीं, तत्कालीन केंद्रीय उर्जा मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सहयोग से छतरपुर जिले के बरेठी में नेशनल थर्मल पावर कंपनी (एनटीपीसी) का सुपर थर्मल पावर स्टेशन स्थापित करने का शिलान्यास हुआ। पहले चरण में 28,000 करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च किया जाना था।”

चतुर्वेदी का आरोप है कि केंद्र की सरकार बदलते ही बुंदेलखंड के हालात को बदलने वाली इस परियोजना को ही बंद करने का फैसला ले लिया गया, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। यह सब इसलिए हो गया, क्योंकि राज्य और केंद्र में भाजपा की सरकारें थीं।

उन्होंने कहा, “अब राज्य में कांग्रेस की सरकार है, लिहाजा मुख्यमंत्री कमलनाथ को इस संयंत्र को शुरू कराने की लड़ाई लड़नी चाहिए। इस संदर्भ में मैं स्वयं कमलनाथ से मुलाकात करूंगा।”

एक सवाल के जवाब में चतुर्वेदी ने कहा कि बुंदेलखंड की अर्थव्यवस्था पूरी तरह कृषि पर आधारित है, कृषि के लिए जरूरत पानी की होती है, इस क्षेत्र में पानी का संकट सबसे ज्यादा होता है, इसे ध्यान में रखकर तीन बड़ी परियोजनाओं पर उर्मिल, बरियारपुर व सिंहपुर में काम हुआ और उसमें सफलता मिली, जिससे बड़े क्षेत्र में सिंचाई हो सकी। उसके बाद परिवहन के लिए रेल मार्ग तैयार हुआ।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए चतुर्वेदी कहते हैं, “किसी क्षेत्र का औद्योगिकीकरण तभी हो सकता था, जब परिवहन के साथ ऊर्जा की उपलब्धता हो। बुंदेलखंड में परिवहन सुविधा के बाद ऊर्जा उपलब्ध कराने के प्रयास तेज हुए थे। रेलमार्ग और अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा खजुराहो में होने के बाद ऊर्जा के लिए एनटीपीसी का संयंत्र लाया गया, शिलान्यास हो गया, जमीन अधिग्रहण हो गया। परिवहन और ऊर्जा की उपलब्धता से उद्योग घरानों के लिए आने का रास्ता साफ हो जाता, क्योंकि उनकी बड़ी दो जरूरतें पूरी हो जातीं।”

उन्होंने आगे कहा कि सिर्फ छतरपुर जिले ही नहीं, पूरे बुंदेलखंड की तस्वीर बदलने का एक विजन लेकर वे चले, पहले खेती को पानी मिले इसके प्रयास किए, फिर परिवहन के लिए रेलमार्ग और हवाईसेवा पर ध्यान दिया, उसके बाद उद्योगों के लिए सबसे जरूरी ऊर्जा के इंतजाम की पहल की। इसके लिए एनटीपीसी लाए। यहां एनटीपीसी स्थापित होने के बाद दूसरे इस्पात, सीमेंट सहित कई उद्योग आ सकते थे, मगर अफसोस है कि भाजपा सरकारों ने इस क्षेत्र को उसके हक से वंचित कर दिया।

राज्य में सरकार बदलने से चतुर्वेदी की उम्मीद जागी है। उनका कहना है कि कमलनाथ एक अनुभवी राजनेता हैं, उनकी औद्योगिक विकास पर गहरी समझ है। इसके चलते उन्हें छतरपुर के एनटीपीसी संयंत्र को स्थापित करने की केंद्र सरकार से लड़ाई लड़नी चाहिए। वे (चतुर्वेदी) खुद इस मसले पर कमलनाथ से चर्चा करेंगे।

चतुर्वेदी ने कहा कि कमलनाथ का औद्योगिक विकास के प्रति नजरिया साफ है, कमलनाथ स्वयं बुनियादी तौर पर उद्योगपति हैं। वे जानते हैं कि उद्योग लगने से क्या बदलाव आ सकता है। उद्योगों की जरूरत को वे जानते हैं, लिहाजा उम्मीद है कि वे यहां के विकास के लिए बेहतर पहल करेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि एनटीपीसी के स्थापित होने से इस क्षेत्र में आनेवाले आर्थिक बदलाव की कल्पना नहीं की जा सकती। यहां एक तरफ जहां लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, वहीं आर्थिक संपन्नता के द्वारा भी खुलेंगे। वहीं पलायन जैसी समस्या को काफी हद तक रोका जा सकेगा। बाजार की हालत सुधरेगी।

उनका मानना है कि एनटीपीसी इस क्षेत्र के विकास के लिए ऐसा मील का पत्थर है, जो इस क्षेत्र की तस्वीर के साथ नई पीढ़ी की तकदीर बदलने वाला है। अब जरूरत इस बात की है कि राज्य सरकार एनटीपीसी की बंद हो चुकी फाइल को फिर से खोलने के लिए लड़ाई लड़े।

–आईएएनएस

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क्या अमेरिका F-16 विमान के बेज़ा इस्तेमाल के लिए पाकिस्तान को सज़ा देगा?

कभी पाकिस्तान के सबसे ख़ास दोस्त रहे अमेरिका के सामने अब धर्मसंकट है। अमेरिका को प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर ये स्वीकार करना होगा कि पाकिस्तान को लेकर उसकी पुरानी नीति ग़लत थी।

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F-16 jet

27 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के नौशेरा और राजौरी सेक्टर में भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनन्दन वर्तमान की ओर से दिखाये अदम्य साहस और वीरता ने पाकिस्तान को दो ऐसे गुनाहों को करने के लिए मज़बूर कर दिया, जिन पर पर्दा नहीं डाला जा सकता। पहला क़सूर है – 17 नवम्बर 2006 को अमेरिका से हुए क़रार को तोड़कर भारत के ख़िलाफ़ F-16 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल और दूसरा गुनाह है – युद्ध बन्दियों के प्रति व्यवहार से जुड़ी जेनेवा संघि, 1949 का उल्लंघन।

दोनों अपराधों के सबूत सारी दुनिया के सामने हैं। चाहे सच्चा हो या झूठा और दुर्भावनापूर्ण, लेकिन अभिनन्दन का हरेक वीडियो वायरल हो चुका है। उसे भारत के सुपुर्द करने की प्रक्रिया का भी पाकिस्तानी मीडिया ने सीधा प्रसारण किया। ज़बरन पाकिस्तानी सेना की तारीफ़ करवाने और भारतीय मीडिया की आलोचना करवाने वाले वीडियो भी पाकिस्तान के गुनाह के जीते-जागते सबूत हैं। इसीलिए अभिनन्दन की रिहाई के बाद भारत सरकार और हमारे राजनयिकों को ये तय करना होगा कि वो संयुक्त राष्ट्र से इस अपराध के ख़िलाफ़ कैसी कार्रवाई की माँग करना चाहेंगे?

वैसे जेनेवा संघि का उल्लंघन करने के लिए पाकिस्तान के ख़िलाफ़ निन्दा प्रस्ताव पारित करने के अलावा कड़े आर्थिक प्रतिबन्धों की भी कार्रवाई हो सकती है। ऐसी कार्रवाई की ज़ोरदार माँग करके भारत चाहे तो पाकिस्तान और उसके दोस्तों को और शर्मसार कर सकता है। इस लिहाज़ से भारत सरकार ने अभी तक अपने अगले रुख़ का इज़हार नहीं किया है। अलबत्ता, ऐसे संकेत ज़रूर मिले हैं कि भारत ने पाकिस्तान की ओर से अपने ख़िलाफ़ F-16 फ़ाइटर्स और हवा से हवा में मार करने वाली एमराम (AMRAAM) मिसाइल के बेज़ा इस्तेमाल के लिए अमेरिका से कार्रवाई की अपेक्षा की है। इसीलिए 28 फरवरी को तीनों सेनाओं की ओर से हुई साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबूत के दौर पर एमराम के मलवे को सारी दुनिया के सामने पेश किया गया था।

कभी पाकिस्तान के सबसे ख़ास दोस्त रहे अमेरिका के सामने अब धर्मसंकट है। अमेरिका को प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर ये स्वीकार करना होगा कि पाकिस्तान को लेकर उसकी पुरानी नीति ग़लत थी। भारत ने पाकिस्तान को लेकर अमेरिका को ख़ूब आगाह किया। लेकिन अमेरिका की आँख तो 9/11 (11 सितम्बर 2001) के आतंकी हमले से ही खुली। तब धीरे-धीरे अमेरिका ने पाकिस्तान की पीठ पर से हाथ खींचना शुरू किया। पाकिस्तान ने फिर भी कोई सबक नहीं लिया। आख़िरकार, 2 मई 2011 को ओसामा बिन लादेन के सफ़ाये से पाकिस्तान की रही-सही इज़्ज़त भी जाती रही।

झूठ और दग़ा, पाकिस्तान की जन्मजात पहचान रही है। भारत ने तो इसे हमेशा झेला है। इस्लामिक देशों के संगठन (आईओसी) की ओर से भारत और पाकिस्तान के प्रति दिखाये गये रवैये से लगता है कि अब इस्लामिक देशों की आँखों पर पड़ा पर्दा भी झीना पड़ चुका है। तभी तो बालाकोट ऑपरेशन के बाद चीन, सउदी अरब, यूएई, मिस्र और तुर्की जैसे पुराने दोस्तों ने भी पाकिस्तान से कन्नी काट ली। किसी भी देश ने पाकिस्तान को पीड़ित नहीं माना। किसी भी देश ने भारतीय कार्रवाई की आलोचना नहीं की। किसी भी देश ने पाकिस्तान के जवाबी हमले को सही नहीं ठहराया।

भारत और पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाईयों को ठंडा करवाने में अमेरिका ने भी अहम भूमिका रही। इसीलिए अब राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रम्प को ये अग्निपरीक्षा देनी है कि वो उस पाकिस्तान पर कार्रवाई करें, जिसने अमेरिका से वादा ख़िलाफ़ी करके उसके F-16 फ़ाइटर्स का भारत के विरूद्ध इस्तेमाल किया। पाकिस्तान ने अपनी आदत के मुताबिक़ झूठ बोला कि उसने भारत के ख़िलाफ़ F-16 विमानों का इस्तेमाल नहीं किया। जबकि भारत ने पुख़्ता सबूत हैं कि F-16 विमानों और सिर्फ़ उसी से लॉन्च हो सकने वाले एमराम (AMRAAM) मिसाइल का इस्तेमाल हिन्दुस्तान के ख़िलाफ़ किया गया है।

फ़िलहाल, ये साफ़ नहीं है कि F-16 विमानों और एमराम मिसाइलों को लेकर पाकिस्तान ने 2006 वाले जिस अमेरिकी क़रार तो तोड़ा है, इसके बदले में अमेरिका क्या क़दम उठाएगा? वो कैसे पाकिस्तान को दंडित करेगा? क्या अमेरिका अपने क़रार की अनदेखी करना चाहेगा? अनदेखी की नीति पर चलने से महाशक्ति अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रम्प की प्रतिष्ठा पर आँच आएगी। वैश्विक स्तर पर यदि क़रारों और संधियों की प्रतिष्ठा नहीं रहेगी तो दुनिया की व्यवस्थाएँ कैसे चलेंगी?

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जंग के कुहासे में धूमिल पड़ गई सच्चाई

घंटों की चुप्पी के बाद भारत ने पुष्टि की कि उसका एक पायलट कार्रवाई में लापता है, लेकिन इससे ज्यादा कुछ बताने से मना कर दिया। इस बात की भी पुष्टि की गई कि भारत ने पाकिस्तान के एक विमान को मार गिराया, लेकिन यह नहीं बताया कि क्या यह एफ-16 है।

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Raveesh Kumar

जंग के कुहासे में सीमा पर हवाई मुठभेड़ को लेकर दावों और प्रतिदावों के बीच भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के एक वरिष्ठ अधिकारी विदेश मंत्रालय संयुक्त सचिव (विदेश प्रचार) रवीश कुमार के साथ ब्रीफिंग में बुधवार को सामने आए, लेकिन सवालों के जवाब नहीं दिए और तथ्यों को कयासों पर छोड़ दिया।

एयर वाइस मार्शल आर. जी. के. कपूर वायुसेना मुख्यालय में सहायक वायुसेना प्रमुख (ऑपरेशन) हैं। वह आक्रामक हवाई सैन्य संचालन के प्रभारी हैं। दो दिनों में पहली बार आईएएफ के अधिकारी मीडिया के सामने आए, लेकिन पाकिस्तान द्वारा भारतीय पायलटों को हिरासत में लेने के दावों को लेकर उठे कई सवालों के जवाब नहीं दिए।

पाकिस्तान की हिरासत में लहूलुहान पायलट का परेशान करने वाला वीडियो वायरल होने से देश में पैदा हुई व्यग्रता के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला।

यहां तक कि आधिकारिक तौर पर उनकी पहचान की भी पुष्टि नहीं की गई, जबकि सोशल मीडिया पर उनकी पृष्ठभूमि के ब्योरे छाए हुए हैं।

पाकिस्तान के भीतर घुसकर मंगलवार को किए गए हवाई हमले का उन्माद पायलट के भावी हाल को लेकर चिंता में बदल गया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने दावा किया कि आईएएफ के दो पायलट उनकी हिरासत में हैं।

भारत का दावा है कि सिर्फ एक पायलट कार्रवाई में लापता है।

विदेश सचिव विजय गोखले ने मंगलवार के हवाई हमले को लेकर पहला बयान पाकिस्तान के इंटर सर्विसिस पब्लिक रिलेशंस के महानिदेशक, मेजर जनरल आसिफ गफूर द्वारा हमले को सार्वजनिक करने के घंटों बाद दिया।

सोशल मीडिया पर सुबह से ही पाकिस्तान की तरफ से जवान को भारी तैनाती के साथ सियालकोट में टैंक से जंग की खबरें छाई हुई थीं।

नियंत्रण रेखा (एलओसी) और जम्मू-कश्मीर की ओर फौरन कार्रवाई शुरू हो गई। पाकिस्तानी वायुसेना (पीएएफ) के लड़ाकू विमान द्वारा भारत के इलाके में बम गिराने की खबरों के बीच कश्मीर घाटी के बडगाम में एक विमान को मार गिराने की रिपोर्ट आई।

पाकिस्तान की तरफ से ही आधिकारिक दावे किए गए, जिसमें जवाबी कार्रवाई की बात कही गई।

हालांकि दावे के तथ्य बदलते रहे। पाकिस्तान ने घोषणा की कि उसने भारत के दो पायलट को अपने कब्जे में ले लिया है। इस खबर के फैलने से पहले खबर आई कि आईएएफ ने पाकिस्तान के एफ-16 को मार गिराया।

इस खबर का उन्माद बहुत देर नहीं रहा, क्योंकि भारत के पायलट के पकड़े जाने का कथित वीडियो पाकिस्तानी मीडिया पर वायरल हो गया।

घंटों की चुप्पी के बाद भारत ने पुष्टि की कि उसका एक पायलट कार्रवाई में लापता है, लेकिन इससे ज्यादा कुछ बताने से मना कर दिया। इस बात की भी पुष्टि की गई कि भारत ने पाकिस्तान के एक विमान को मार गिराया, लेकिन यह नहीं बताया कि क्या यह एफ-16 है।

जंग पर नजर रखने वाली वेबसाइटों ने भारत और पाकिस्तान सीमा पर खाली हवाई क्षेत्र दिखाया है, जिससे घबराहट बनी हुई है।

दावे काफी अधिक हो रहे हैं, लेनिक तथ्य बहुत कम हैं।

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पाकिस्तान को पानी रोकने पर विशेषज्ञों की राय बंटी

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नई दिल्ली, 16 फरवरी | सीआरपीएफ की टुकड़ी पर गुरुवार को पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले के बाद कड़ी कार्रवाई करने की मांग को देखते हुए विशेषज्ञ पश्चिम और पूरब की तरफ बहने वाली सिंधु और ब्यास नदियों का पानी पाकिस्तान जाने से रोकने पर विचार कर रहे हैं। वहीं, कुछ इसकी संभाव्यता पर शक जता रहे हैं।

जल संसाधन मंत्रालय के सेवानिवृत्त शीर्ष अधिकारी एम. एस. मेनन का कहना है कि पाकिस्तान को दिए जानेवाले पानी को रोका जा सकता है। उन्होंने सिंधु जल समझौते पर लंबे समय से काम किया है।

उन्होंने कहा, “हमने अधिक पानी उपभोग करने की क्षमता विकसित कर ली है। स्टोरेज डैम में निवेश बढ़ाकर हम ऐसा कर सकते हैं। झेलम, चेनाब और सिंधु नदी का बहुत सारा पानी देश में ही इस्तेमाल किया जा सकता है।”

भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुआ सिंधु जल समझौता पूरब की तरफ बहने वाली नदियों – ब्यास, रावी और सतलुज के लिए हुआ है और भारत को 3.3 करोड़ एकड़ फीट (एमएएफ) पानी मिला है, जबकि पाकिस्तान को 80 एमएएफ पानी दिया गया है।

विवादास्पद यह है कि संधि के तहत पाकिस्तान को भारत से अधिक पानी मिलता है, जिससे यहां सिंचाई में भी इस पानी का सीमित उपयोग हो पाता है। केवल बिजली उत्पादन में इसका अबाधित उपयोग होता है। साथ ही भारत पर परियोजनाओं के निर्माण के लिए भी सटीक नियम बनाए गए हैं।

एक दूसरे सेवानिवृत्त अधिकारी, जो मंत्रालय में करीब दो दशकों तक सिंधु आयुक्त रह चुके हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान को पानी रोकना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यह अंतराष्ट्रीय संधि है, जिसका भारत को पालन करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा, “मैं नहीं समझता कि इस प्रकार का कुछ करना संभव है। पानी प्राकृतिक रूप से बहता है। आप उसे रोक नहीं सकते।”

पूर्व अधिकारी ने कहा कि अतीत में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई है, लेकिन लोग ऐसी मांग भावनाओं में बहकर करते रहते हैं।

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