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वजन घटाएं, दिल की धड़कन रहेगी सही

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मोटापे की समस्या वाले लोग अगर अपने वजन में कमी लाएं तो दिल की धड़कन के अनियमित होने और उससे उत्पन्न विकार में खुद कमी ला सकते हैं। यह बात एक शोध से पता चली है।

शोध के निष्कर्षो से पता चलता है कि 10 फीसदी वजन घटाने के साथ जोखिम कारकों से जुड़े प्रबंधन से एट्रियल फाइब्रिलेशन (एएफ) के प्रभाव में कमी आ सकती है। यह स्ट्रोक के प्रमुख कारक में से है, जिससे मोटापाग्रस्त लोगों में हर्ट फेल्योर हो सकता है।

वजन घटाने वाले लोगों में इसके कम लक्षण दिखाई दिए और उन्हें कम इलाज की जरूरत पड़ी और उन्हें बेहतर नतीजे हासिल हुए। ऑस्ट्रेलिया के एडिलेड विश्वविद्यालय के मिलिसा मिडेलडोर्प ने कहा, यह पहली बार है कि ऐसे साक्ष्य पाए गए हैं कि मोटापाग्रस्त लोग जो एट्रियल फाइब्रिलेशन से पीड़ित हैं, वजन कम करके व जीवनशैली में सुधार लाकर इस बीमारी का इलाज खुद कर सकते हैं।”

एएफ एक क्रमिक बढ़ने वाली बीमारी है, जिसमें शुरुआती कमी, स्थितियों के साथ लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं। मोटापा व जीवनशैली से जुड़े कारक इसकी बढ़ने के लिए जिम्मेदार होते हैं।

–आईएएनएस

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नारियल तेल के आश्चर्यजनक फायदे!

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नारियल तेल के इस्तेमाल के कई फायदे हैं। कई गुणों से भरपूर यह तेल स्वास्थ्यपरक फायदों के लिए पीढ़ियों से इस्तेमाल में लाया जा रहा है। ‘

बिड़ला आयुर्वेद’ की आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉक्टर प्रियंका संपत ने नारियल तेल के ये फायदे बताए हैं :

* नारियल तेल त्वचा के लिए नैचुरल मॉइश्चराइजर का काम करता है, यह मृत त्वचा को हटाकर रंग निखारता है, चूंकि इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है, तो इसका इस्तेमाल त्वचा रोग, डर्मेटाइटिस, एक्जिमा और स्किन बर्न में किया जा सकता है। नारियल तेल स्ट्रेच मार्क्‍स हटाने में भी मदद करता है और होंठ को फटने से बचाने के लिए भी इसे नियमित रूप से होंठ पर लगाया जा सकता है।

* नारियल तेल बालों को घना, लंबा और चमकदार बनाने में काफी मददगार साबति होता है। सिर का मसाज सिर्फ पांच मिनट नारियल तेल से करने से न सिर्फ रक्त संचार में वृद्धि होती है, बल्कि खो चुके पोषक तत्वों की भी भरपाई करता है, नियमित रूप से नारियल तेल से मसाज करने से बालों में रूसी नहीं होता है।

* नारियल तेल को मुंह में करीब 20 मिनट तक रखने के बाद थूक देने से मुंह के कीटाणु और मसूड़ों की समस्याएं दूर होती है। स्वस्थ मसूड़ों के लिए सप्ताह में कम से कम तीन बार ऐसा करें।

* आयुर्वेद में पित्त वृद्धि के कारण नारियल तेल का इस्तेमाल गठिया, जोड़ों के दर्द को कम करने के लिए किया जाता है। यह हड्डियों में कैल्शियम और मैग्नीशियम अवशोषित करने की क्षमता में सुधार करता है।

‘हिंदूजा हेल्थकेयर सर्जिकल’ में टीम लीडर डायटीशियन इंद्रायनी पवार ने नारियल तेल के लाभ संबंधी ये बातें बताई हैं :

* नारियल तेल के इस्तेमाल से वजन भी कम किया जा सकता है। ताजे नारियल से निकाले गए तेल में अन्य नारियल तेलों की अपेक्षा ज्यादा मीडियम चेन फैटी एसिड्स (70-85 प्रतिशत) होता है।

मीडियम चेन फैटी एसिड्स आसानी से ऑक्सीडाइज्ड लिपिड्स होते हैं और एडीपोज ऊतक में संग्रहित नहीं होते हैं। इस प्रकार, मुख्य रूप से मीडियम चेन फैटी एसिड युक्त नारियल का तेल वजन घटाने में मददगार साबित होता है।

* नारियल तेल लॉरिक एसिड और कैप्रिक एसिड की तरह एंटीमाइक्रोबियल लिपिड का एक समृद्ध स्रोत होता है, जो एंटीफंगल और जीवाणुरोधी होते हैं।

* खाना पकाने में नारियल का तेल ज्यादा अच्छा रहता है। इसका तेल ऑक्सीकरण के प्रति कम असुरक्षित होता है, जो इसे खाना पकाने के लिए सबसे सुरक्षित बनाता है।

–आईएएनएस

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सर्दी-जुकाम से बचाव के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय…

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सर्दियों के मौसम में ठंड के बढ़ते ही सर्दी, खांसी, बुखार जैसी बीमारियों में बढ़ोतरी हो जाती है। चिकित्सकों का मानना है कि इस मौसम में ठंड से बचने के लिए हम गरम कपड़े तो पहन लेते हैं, मगर ठंड के असर से बचने के लिए शरीर का बाहर के साथ-साथ अंदर से भी गरम रहना जरूरी है।

इसलिए आज हम आपके लिए इन बीमारियों से बचने के कई घरेलू नुस्खे लेकर आए है। जिन्हें अपनाकर आप सर्दी में होने वाली बीमारियां से बच सकते है। रिसर्च के मुताबिक लौंग, तुलसी, काली मिर्च और अदरक से बनी चाय खांसी, सर्दी, जुकाम के लिए ‘रामबाण’ इलाज मानी जाती है।

हाल ही में बॉल्सब्रिज विश्वविद्यालय द्वारा पीएचडी की मानद उपाधि से सम्मानित दूबे ने कहा कि इन बीमारियों का मुख्य कारण वायरस का बढ़ता प्रसार होता है। उन्होंने कहा कि जुकाम एक संक्रामक बीमारी है जो बहुत जल्दी बढ़ती है। यह बीमारी बहती नाक, बुखार, सुखी या गीली खांसी अपने साथ लाती है, जो श्वसन तंत्र पर अचानक हमला करता है।

इसलिए सर्दी में  बच्चों और बुजुर्गों को विशेष ध्यान और सावधानी बरतनी चाहिए। सर्दियों में शहद का सेवन करने से शरीर को कई तरह की रोगों से दूर रखा जा सकता है।

आयुर्वेद में शहद को अमृत माना गया है। सर्दी, जुकाम होने पर रात को सोने से पहले एक ग्लास गुनगुने दूध में एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से यह खत्म हो जाती है।”

उनका कहना है कि शहद शरीर के ‘इम्युन सिस्टम’ को दुरुस्त करता है। उन्होंने कहा कि सर्दी के दिनों में बाजरे की रोटी खाने का बहुत फायदा मिलता है। यह शरीर को तो गर्म रखता ही है, साथ में बाजरे की रोटी में प्रोटीन, विटामिन बी, कैल्शियम, फाइबर और एंटी ऑक्सीडेंट शरीर के लिए अच्छे होते हैं।

ठंड से बचने के लिए बच्चों को भी बाजरे की रोटी खिलानी चाहिए। दूबे ने कहा, सर्दियों में मछली तथा सूप भी बेहद कारगर है। खाने में अदरक के प्रयोग से शरीर तो गरम होता ही है, साथ में पाचन क्रिया भी अच्छा होता है।”उन्होंने बताया कि आंवला डायबिटीज से परेशान लोगों के लिए किसी अमृत से कम नहीं है।

आंवला को प्राचीन आयुर्वेदिक प्रणाली में कई तरह के रोगों के इलाज के लिए लगभग 5000 साल से इस्तेमाल किया जा रहा है। आवंला की तुलना अमृत से की गई है। आंवला में विटामिन सी, विटामिन एबी, पोटैशिम, कैलशियम, मैग्नीशियम, आयरन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और डाययूरेटिक एसिड होते हैं।

आंवला और मूंगफली सर्दियों में फायदेमंद होता है। तिलों के तेल से मालिश भी हमें ठंड से बचाने का काम करती है। उन्होंने बताया कि सर्दियों में मौसमी और संतरा खाने से बचना चाहिए। खजूर को गर्म दूध के साथ खाने पर भी सर्दी से राहत मिलती है।

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सुबह के नाश्ते में ऐसे बनाएं दही पराठा…

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सुबह के नाश्ते में अगर आपको कुछ हेल्दी खाना है तो आप दही पराठा ट्राई कर सकती है। इसे बनाने के लिए ज्यादा सामग्री खर्च नहीं करनी पड़ेगी। आज हम आपके लिए इसकी आसान सी रेसिपी लेकर आए है। आइए जानतें है इसकी रेसिपी।

सामग्री

दो- कप आटा, एक कप- दही, एक मुट्ठी पुदीना आधा मुट्ठी- धनियापत्ती, एक प्याज, बारीक काट लें, 1/4 टीस्पून अजवाइन, तीन हरी मिर्च- (बारीक कटी), आधा छोटी कटोरी बची हुई दाल, स्वादानुसार नमक, 1/4 टीस्पून हल्दी, 1/2 कटोरी घी, पराठा सेंकने के लिए तेल, जरूरत के अनुसार पानी

विधि

दही पराठा बनाने के लिए सबसे पहले पुदीना-धनिया पत्ती को घोकर बरीक करके काट ले। अब एक थाल में आटा लें। इसके बाद इस आटे में प्याज, अजवाइन, हरी मिर्च, हल्दी, स्वादानुसार नमक और घी डालकर अच्छे से मिला लें। फिर इसमें पुदीना-धनिया पत्ती, दही और दाल डालकर मिक्स कर लें। अब इस आटे में पानी

डालकर मुलायम करके गूंथ ले। इसके बाद इस आटे को कम से कम 10-20 मिनट के लिए ऐसी छोड़ दे। अब इस आटे की छोटी-छोटी लोई बना ले। फिर इसे गोलकर करके बेल ले। अब एक तवे को गैस पर गर्म होने के लिए रखें। फिर पराठा को तवे पर डालकर गोल्डन होने तक सेक ले। जब यह अच्छे से सिक जाए तो

इसे एक प्लेट में निकाल ले। लीजिए तैयार है आपका दही पराठा। इसे अब आप हरे धनिए की चटनी के साथ सर्व करें। आप चाहें तो इस पराठे का अचार के साथ भी लुत्फ उठा सकते है।

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