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कर्नाटक में लंगूर ने चलाई यात्रियों से भरी बस, देखें वीडियो

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Karnataka
PHOTO CREDIT (ANI)

इन दिनों सोशल मीडिया एक ऐसा जरिया बन गया है जहां पर लोग कुछ अनोखा वीडियो को पोस्ट करके मशहूर हो जाते हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है जिसको देखकर किसी को भी अपनी आखों पर विश्वास नहीं हो रहा है कि ऐसा रियल में भी हो सकता है। जी हां आज हम आपके लिए एक ऐसा ही वीडियो लेकर आए हैं।

दरअसल, कर्नाटक स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन (KSRTC) के एक बस ड्राइवर का एक वीडियो इन दिनों वायरल हो रहा है, जिसमें वह गाड़ी की स्टीयरिंग पर लंगूर को बैठाया दिख रहा है। हैरानी की बात ये है कि इस ड्राइवर ने सवारियों की जान की परवाह किये बगैर उसने न सिर्फ लंगूर को स्टीयरिंग पर बैठाया, बल्कि उसने स्टीयरिंग का कंट्रोल भी लंगूर के हाथों में दे दिया।

वीडियो में देखा जा सकता है कि ड्राइवर अपनी सीट पर बैठा हुआ है और लंगूर (हनुमान लंगूर) को उसने स्टीयरिंग व्हील पर बैठा रखा है। लंगूर ने भी अपने दोनों हाथों से स्टीयरिंग के व्हील को पकड़ रखा है। देवनगरे डिवीजन के इस ड्राइवर का नाम प्रकाश बताया जा रहा है।

केएसआरटीसी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हमने उस ड्राइवर को ड्यूटी से निकाल दिया है और डिविजनल सिक्योरिटी ऑफिसर को इस मामले की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा है। जब तक इसकी पूरी जांच नहीं कर ली जाती है तब तक उसे कोई नया काम नहीं सौंपा जाएगा। उसे नौकरी से सस्पेंड भी किया जा सकता है।

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ये है दुनिया का सबसे खतरनाक लाई डिटेक्टर टेस्ट…

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lie detector test

‘लाई डिटेक्टर टेस्ट’ एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत अपराधियों से सच उगलवाया के लिए मशीन का सहारा लिया जाता है। ये मशीने आधुनिक युग की देन है, लेकिन आपको यह जानकर काफी हैरानी होगी कि लाई डिटेक्टर टेस्ट का इस्तेमाल इंसान सैंकड़ों सालों कर रहा है। जी हां, मशीनों के अभाव में सैंकड़ों साल पहले से मिस्र में लाई डिटेक्टर टेस्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो मिस्त्र का ‘अयिदाह कबीला’ सदियों से इस लाई डिटेक्टर टेस्ट का इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन जब आप झूठ पकड़ने वाले इनके तरीके के बारे में जान लेंगे तो खौफ से आपके भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे। जी हां, यह तरीका बेहद डरावना है। खास बात ये है कि ये समुदाय आज भी लाई डिटेक्टर की इस पुरानी तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है।

झूठ पकड़ने का यहां जो तरीका अपनाया जाता है उसके तहत अयिदाह कबीले के लोग एक धातु को पहले गरम करते हैं। इसके बाद में उस धातु को आरोपी की जीभ पर लगाते हैं। माना जाता है कि जिस आरोपी की जीभ पर इस प्रक्रिया के बाद फफोले पड़ जाते हैं, उसे दोषी मान लिया जाता है। इसे एक परम्परा का नाम दिया गया है जिसे ‘बिशाह’ कहा जाता है। मिस्र के कबीलों में पुराने समय में लाई डिटेक्टर टेस्ट करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।

हालांकि आज अधिकतर कबीलों में यह परंपरा बंद हो चुकी है, लेकिन एक कबीला अब भी इसका इस्तेमाल कर रहा है। जी हां, अयिदाह कबीला इस परंपरा का इस्तेमाल कर रहा है। अल अरबिया डॉट नेट की खबर के मुताबिक, इस परंपरा के तहत अयिदाह कबीले के लोग एक लोहे की छड़ को पहले गरम करते हैं और उसके बाद उस छड़ को आरोपी की जीभ पर लगाते हैं। इसके बाद दोषी का दोष सिद्ध होता है। इसके लिए इनका लॉजिक भी गजब का है। आप इसके बारे में सोच भी नहीं सकते।

जी हां, इस प्रक्रिया के तहत जिस व्यक्ति की जीभ पर फफोले नहीं पड़ते वह निर्दोष साबित होता है। इस परंपरा को मानने वाले लोगों का कहना है कि जिस व्यक्ति ने अपराध किया होता है, वो नर्वस होता है, जिससे उसकी जीभ सूख जाती है और जब गरम धातु की छड़ उसकी जीभ से छूती है तो उस पर फफोले पड़ जाते हैं। वहीं जो व्यक्ति निर्दोष होता है, उसकी जीभ पर सलाइवा होता है और जब छड़ उससे छूती है तो कुछ नहीं होता।

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भूखी शार्क के बीच जा गिरी ये महिला, देखें वीडियो

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China

चीन में एक महिला गलती से एक टैंक में गिर गई जहां कई भूखी शार्क थीं। Jiaxing के शॉपिंग मॉल में महिला शार्के के टैंक के ऊपर से निकलने के चक्कर में अंदर जा गिरी। उस समय शार्क को खाना खिलाने की तैयारी चल रही थी। उस वक्त टैंक इसलिए खुला था क्योंकि उनको खाना डालने की तैयारी चल रही थी।

जैसे ही महिला गिरी तो दो लेमन शार्क उसके करीब आ गईं और आस-पास घूमने लगीं। सेक्यूरिटी गार्ड और आस-पास खड़े लोग तुरंत वहां पहुंचे और महिला को बाहर निला लिया गया। जरा सी चूक महिला की जान ले सकती थी।

मॉल के स्पोक पर्सन ने कहा कि खाने के लिए चैम्बर्स को खोला गया था। महिला इसलिए चैम्बर के ऊपर से गुजरने की कोशिश कर रही थी क्योंकि उसी समय एक मीटिंग थी। उन्होंने बताया कि महिला बिलकुल ठीक है और कोई चोट नहीं आई है।

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भारत के इन होटलों में भूतों का डेरा…

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कहीं घूमने जाने को मन बना रहे हैं तो ये जानकारी आपके लिए जरूरी है। हर कोई अपनी ट्रिप को मजेदार बनाने के लिए क्या कुछ नहीं करता है। लोकेशन के चयन के बाद जो पहला काम होता है वो है होटल बुकिंग। अपने अनुभव को यादगार बनाने के लिए हम अच्छे से अच्छा होटल ढूंढते हैं।

भारत में अंग्रेजी शासन के दौरान बहुत से आलीशान भवनों और होटलों का निर्माण करवाया गया था। बहुत से भवनों को हेरिटेज घोषित किया गया, जबकि कुछ होटल खंडहर में तब्दील हो गए। माना जाता है कि उस दौरान बनाए गए बहुत से होटल आज अपनी संरचनात्मक खूबसूरती से ज्यादा डरावने अनुभवों के लिए चर्चा में रहते हैं। जानकारों का मानना है कि इन होटल्स में भूत-प्रेतों का साया है।

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मॉर्गन हाऊस पश्चिम बंगाल में कालिम्पोंग नामक हिल स्टेशन पर स्थित है। इस होटल की संरचना कुछ ऑस्कर वाइल्ड की प्रसिद्ध किताब ‘द कैंटरविले घोस्ट’ के महल से बहुत हद तक मेल खाती है। जॉर्ज मोरगन कभी यहां अपनी पत्नी के साथ रहा करते थे, लेकिन जब उनकी पत्नी का देहांत हो गया तो वे यह घर छोड़कर चले गए। बाद में इसे एक लॉज बना दिया गया, लेकिन वहां ठहरने वाले लोगों ने शिकायत की। उन्हें लग रहा था कि वहां कोई आत्मा है। लोगों को वहां किसी औरत के हाई हील्स में चलने की आवाजें आती हैं।

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ब्रिज राज भवन राजस्थान के कोटा शहर में स्थित है। इस होटल का इतिहास भी भारत में अंग्रेजों से जुड़ा है। इस भवन में कभी मेजर चार्ल्स बर्टन नाम का एक ब्रिटिश अधिकारी रहा करता था। जिससे इस भवन की रहस्यमयी कहानी जुड़ी है। इसका भवन निर्माण 19वीं शताब्दी के दौरान करवाया गया था, जिसे बाद में एक हेरिटेज होटल में तब्दील किया गया। माना जाता है कि 1857 की क्रांति के दौरान चार्ल्स बर्टन और उनके परिवार की इसी होटल में हत्या कर दी गई थी। कहते हैं यहां आज भी मेजर का भूत भटकता है, जानकारों का मानना है कि आधी रात के दौरान यहां अनहोनियां घटती रहती हैं।

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उत्तराखंड के मसूरी स्थित सवॉय होटल भारत के ऐतिहासिक होटल्स में से है। जिसका निर्माण 1902 में करवाया गया था। अपनी खूबसूरती के साथ-साथ ये होटल भारत के चुनिंदा भुतहा होलट में गिना जाता है। जानकारों का मानना है कि यहां किसी ब्रिटिश लेडी गारनेट ऑरमेकी की आत्मा भटकती है। जो सन् 1911 में यहां रहने आई थीं, लेकिन कुछ समय बाद गारनेट की रहस्यमयी तरीके से मौत हो गई थी। मौत की वजह आज तक पता नहीं लगी है। शाम के बाद होटल के कुछ कमरों में से अजीबो-गरीब आवाजें सुनाई देती हैं।

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