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राजनीति

लालू का ऐलान- राहुल 2019 में होंगे गैर बीजेपी दलों के पीएम पद के उम्मीदवार

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राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू यादव (फाइल फोटो)

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) अध्यक्ष लालू यादव ने राहुल गांधी को लेकर बड़ा ऐलान किया है। लालू ने कहा कि 2019 के आम चुनाव में राहुल गांधी गैर बीजेपी दलों की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। उन्होंने कहा कि मेरा समर्थन और मेरी पार्टी का समर्थन राहुल गांधी को है।

लालू ने कहा कि गुजरात चुनाव में पीएम मोदी राम के ना पर वोट मांग रहे हैं। यह साबित हो गया है कि बीजेपी गुजरात में हार रही है। इस वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम के नाम पर वोट मांगने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी राम के नाम पर वोट मांगकर ध्रुवीकरण की कोशिश कर रही है।

बता दें कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पार्टी अध्यक्ष बनने के एक कदम और नजदीक पहुंच गए हैं। राहुल के पक्ष में बीते मंगलवार को दाखिल किए गए सभी 89 नामांकनों को जांच में सही पाया गया और इस तरह अध्यक्ष पद के लिए चुनाव मैदान में वह अकेले उम्मीदवार हैं। एक बयान में कहा गया है, “कुल 89 नामांकन पत्रों में सभी में राहुल गांधी के नाम के प्रस्ताव पाए गए हैं। ये नामांकन पत्र सभी राज्यों से हैं।”

चुनाव के लिए निर्वाचन अधिकारी मुलापल्ली रामचंद्रन ने एक बयान में कहा, “हमने सभी नामांकन पत्रों की जांच की है और सभी 89 नामांकन पत्र वैध पाए गए हैं। अब सिर्फ एक मात्र वैध उम्मीदवार राहुल गांधी हैं, जो कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव मैदान में हैं।”

नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 11 दिसंबर है, और राहुल गांधी को उसी दिन नया कांग्रेस अध्यक्ष घोषित किए जाने की उम्मीद है।

wefornews bureau 

चुनाव

हिमाचल चुनाव : कई सीटों पर कांटे की टक्कर के बाद जीते नेता

हिमाचल प्रदेश में 1985 के बाद से हर पांच साल बाद चला आ रहा फेरबदल इस बार भी जारी रहा। राज्य में मुकाबला दोनों मुख्य पार्टियों भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच था, जिसके नतीजे में भी जोरदार टक्कर दिखाई दी।

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Election Himachal

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 में सत्ता परिवर्तन की इबारत लिखी जा चुकी है। हिमाचल प्रदेश में 1985 के बाद से हर पांच साल बाद चला आ रहा फेरबदल इस बार भी जारी रहा। राज्य में मुकाबला दोनों मुख्य पार्टियों भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच था, जिसके नतीजे में भी जोरदार टक्कर दिखाई दी। चुनाव में कुछ सीटों पर जीत हार का अंतर हजार मतों से भी कम का रहा। जिनमें से विधानसभा सीट संख्या-68 किन्नौर में टक्कर खासी रोमांचक रही। किन्नौर विधानसभा सीट पर कांग्रेस के जगत सिंह नेगी ने भाजपा के तेजवंत सिंह नेगी को मात्र 120 मतों से शिकस्त दी। बता दें कि यह दोनों नेता 2003 विधानसभा चुनाव के बाद से चार बार एक दूसरे के खिलाफ लड़ चुके हैं जिसमें से तीन बार जगत सिंह नेगी ने बाजी मारी है जबकि 2007 में तेजवंत सिंह नेगी ने जीत हासिल की थी।

वहीं विधानसभा सीट संख्या -39 बड़सर में कांग्रेस के इंद्र दत्त लखनपाल ने भाजपा के बलदेश शर्मा को कांटे के मुकाबले में 439 मतों से हराया। बता दें कि 2012 विधानसभा चुनाव में लखनपाल ने 2658 वोटों से जीत हासिल की थी।

विधानसभा सीट संख्या- 4 डलहौजी में कांग्रेस की दिग्गज नेता आशा कुमारी को जीत हासिल करने के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ा। आशा ने भाजपा के डी.एस. ठाकुर को कड़े मुकाबले में 556 मतों से हराया। दिन के शुरुआती रुझानों में आशा, ठाकुर से पीछे थी लेकिन अंतिम चरणों में वह ठाकुर को शिकस्त देने में सफल रही। सीट पर कड़े मुकाबले का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2012 का विधानसभा चुनाव में उन्होंने 7365 मतों के भारी अंतर से जीता था।

इसके अलावा विधानसभा सीट संख्या- 54 कसौली में भारतीय जनता पार्टी के राजीव सैजल ने कांग्रेस उम्मीदवार विनोद सुल्तानपुरी को केवल 442 वोटों से पटखनी दी। बता दें कि कसौली में हुए 2012 विधानसभा चुनाव में राजीव ने केवल 24 वोटों से अपने निकटतम प्रतिद्वंदी को शिकस्त दी थी।

साथ ही विधानसभा सीट संख्या- 15 नगरोटा में भाजपा के अरुण कुमार ने कांग्रेस के जी. एस. बाली को 519 मतों से हराया है। जी. एस बाली ने 2012 के विधानसभा चुनाव में 2743 मतों से जीत दर्ज की थी।

इसके साथ ही कांग्रेस की नाक का सवाल बन चुकी विधानसभा सीट संख्या-53 सोलन को कांग्रेस के डॉ. धनी राम शांडिल बचाने में कामयाब रहे। उन्होंने भाजपा के राजेश कश्यप को कड़े मुकाबले में मात्र 617 वोटों से हराया। गौरतलब है कि सोलन कई चुनावों से कांग्रेस की सुरक्षित सीटों में से एक रही है। 2012 के विधानसभा चुनाव में शांडिल ने 4472 मतों से जीत हासिल की थी।

हिमाचल में 9 नवंबर को मतदान हुआ था।

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चुनाव

हिमाचल चुनाव : भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व मुख्यमंत्री उम्मीदवार हारे

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हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव-2017 के नतीजे सामने आने के बाद राज्य में सत्ता की बागडोर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हाथ में आ चुकी है, लेकिन मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अपनी सीट बचाने में नाकाम रहे। भाजपा के मुख्यमंत्री उम्मीदवार और दो बार के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल सुजानपुर सीट पर 2933 वोटों से शिकस्त का सामना करना पड़ा। इस सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार रजिंदर राणा ने उन्हें मात दी है।

वर्ष 2012 में निर्दलीय चुनाव जीतने वाले राणा इस सीट पर दोबारा जीत हासिल करने में सफल रहे हैं। राणा ने 2012 के चुनाव में 14166 मतों से जीत हासिल की थी। उन्हें किसी समय धूमल का करीबी कहा जाता था। धूमल ने इस चुनाव में अपनी सीट बदली थी।

वहीं भाजपा प्रदेश इकाई अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ऊना विधानसभा सीट पर 3196 वोटों से हार गए हैं। इस सीट पर कांग्रेस के सतपाल सिंह रायजादा ने जीत दर्ज की है। सत्ती पिछले तीन चुनावों से इस सीट पर अजेय रहे थे। ऊना को भाजपा का गढ़ भी कहा जाता था।

–आईएएनएस

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राजनीति

गुजरात की जीत भाजपा की ‘नैतिक हार’ : ममता

गुजरात ने आम लोगों पर हुए अत्याचारों, व्यग्रता व अन्याय के खिलाफ वोट दिया। गुजरात ने 2019 का आगाज कर दिया।

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को भाजपा की गुजरात विधानसभा चुनाव में जीत को ‘अस्थायी’ और ‘लाज बचाने वाली’ बताया। ममता ने भाजपा की जीत को ‘नैतिक हार’ करार दिया। ममता ने ट्वीट किया, “मैं गुजरात के मतदाताओं को इस दौर में बहुत ही संतुलित फैसले के लिए बधाई देती हूं। यह अस्थायी व लाज बचाने वाली जीत है, लेकिन यह भाजपा की नैतिक हार को दिखाती है।”

उन्होंने कहा, “गुजरात ने आम लोगों पर हुए अत्याचारों, व्यग्रता व अन्याय के खिलाफ वोट दिया। गुजरात ने 2019 का आगाज कर दिया।”

सत्तारूढ़ भाजपा गुजरात में सत्ता बरकार रखने में सफल रही है और हिमाचल प्रदेश में जीत दर्ज की है।

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