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जानिए, तीन मूर्ति चौक क्यों हुआ ‘हाइफा चौक’

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तीन मूर्ति चौक क्यों हो रहा है 'हाइफा चौक'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके इसराइली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू ने तीन मूर्ति चौक पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और इसका नाम बदलकर तीन मूर्ति हाइफा चौक कर दिया गया।

बता दें कि दिल्ली के तीन मूर्ति चौक का इजराइल के साथ ऐतिहासिक संबंध है। तांबे की बनी ये मूर्तियां इजरायल में बच्चों को भारत का शौर्य समझाती है। तीन मूर्ति पर कांस्य की तीन मूर्तियां हैदराबाद, जोधपुर और मैसूर लैंसर का प्रतिनिधित्व करती हैं जो 15 इंपीरियल सर्विस कैवलरी ब्रिगेड का हिस्सा थे। ब्रिगेड ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 23 सितंबर 1918 में हाइफा शहर पर हमला किया था और उसे जीत लिया था।

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इजराइल के हाइफा शहर में 23 सितंबर 1918 को एर जंग लड़ा गया। इस लड़ाई में राजपूत सेना का नेतृत्व जोधपुर रियासत के सेनापति दलपत सिंह ने किया था। इस ऐतिहासिक लड़ाई में जोधपुर की सेना के करीब 900 सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए जिससे राठौड़ों को विजय मिली और उन्होंने हाइफा पर कब्जा कर लिया। जिससे खुश होकर भारत में ब्रिटिश सेना के कमांडर-इन-चीफ ने फ्लैग-स्टाफ हाउस के नाम से अपने लिए एक रिहायसी भवन का निर्माण करवाया।

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1. एक ऐतिहासिक युद्ध के लिए तीन मूर्ति चौक अब इजरायल के शहर हाइफा के नाम पर तीन मूर्ति हाइफा चौक कहलाएगा।

 

2. तीन मूर्ति चौक का इजराइल के साथ ऐतिहासिक संबंध है। तीन मूर्ति स्मारक की तीनों मूर्तियां तांबे की बनी हैं, जो हैदराबाद, जोधपुर और मैसूर लेंसर्स को रि-प्रेजेंट करती हैं।

3. ये तीनों 15 इम्पिरियल सर्विस कैवलरी ब्रिगेड का भी हिस्सा रह चुके हैं। इजरायल के हाइफा शहर में 23 सितंबर 1918 को जंग लड़ी गई थी।

जानें: तीन मूर्ति चौक क्यों पहुंचे इजरायल के पीएम नेतन्याहू

4. हाइफा युद्ध में राजपूताने की सेना का नेतृत्व जोधपुर रियासत के सेनापति दलपत सिंह ने किया था।

5. इस लड़ाई में जोधपुर की सेना के करीब 900 सैनिक शहीद हुए थे। राठौड़ों की इस बहादुरी से प्रभावित होकर भारत में ब्रिटिश सेना के कमांडर-इन-चीफ ने फ्लैग-स्टाफ हाउस के नाम से अपने लिए एक रिहायसी भवन का निर्माण करवाया।

जानें: तीन मूर्ति चौक क्यों पहुंचे इजरायल के पीएम नेतन्याहू

6. इस चौराहे के बीच में गोल चक्कर के बीचों बीच एक स्तंभ के किनारे तीन दिशाओं में मुंह किए हुए तीन सैनिकों की मूर्तियां लगी हुई हैं। जो रणबांका राठौड़ों की बहादुरी को यादगार बनाने के लिए बनाई गई थी।

7. हर साल 23 सितंबर को भारतीय योद्धाओं को सम्मान देने के लिए हाइफा के मेयर, इजरायल की जनता और भारतीय दूतावास के लोग एकत्र होकर ‘हाइफा दिवस’ मनाते हैं। भारतीय सेना भी 23 सितंबर को ‘हाइफा दिवस’ मनाती है।

जानें: तीन मूर्ति चौक क्यों पहुंचे इजरायल के पीएम नेतन्याहू

8. उत्तरी दिल्ली नगर निगम (NDMC) पहले ही इन तीन मूर्ति चौक का नाम बदलने की परमिशन दे चुकी है।

9. बता दें कि इजरायल की सरकार आज तक हाइफा, यरुशलम, रमल्लाह और ख्यात के समुद्री तटों पर बनी 900 भारतीय सैनिकों की समाधियों की अच्छी तरह देखरेख करती है।

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बाड़मेर पहुंचे PM, ऑयल रिफाइनरी का करेंगे शुभारंभ

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पीएम मोदी (फाइल पोटो)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज पश्चिम राजस्थान को रिफाइनरी की सौगात देने जा रहे है। एचपीसीएल और राजस्थान सरकार के संयुक्त उपक्रम के तहत बाड़मेर के पचपदरा में बनने जा रही रिफाइनरी के कार्य शुभारंभ के लिए पीएम पचपदरा पहुंच चुके है। आगामी चार साल में करीब 43 हजार करोड़ की लागत से बनने वाली यह रिफाइनरी पश्चिम राजस्थान के विकास में मील का पत्थर साबित होगी।

इससे पूर्व बाड़मेर के उत्तरलाई एयरबेस स्टेशन पर पीएम मोदी का राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने स्वागत किया। इसके बाद विशेष हैलीकॉप्टर से पीएम मोदी व मुख्यमंत्री राजे पचपदरा में कार्यक्रम स्थल पहुंचे।

हालांकि सरकार के आमंत्रण पत्र के मुताबिक इस कार्यक्रम का नाम शिलान्यास के स्थान पर कार्य शुभारंभ किया गया है। बाड़मेर रिफाइनरी का कार्य 4 साल में पूरा ​होगा जिसके निर्माण में करीब 43129 करोड़ रुपए की लागत आएगी और इसका निर्माण 4567.32 एकड़ भूमि में होगा। इस रिफाइनरी के निर्माण में युक्त होने वाली करीब 30 फीसदी मशीनें विदेश से मंगवाई गई है जबकि 70 फीसदी मशीने देश की भेल कंपनी उपलब्ध करवाएगी।

इस प्रोजेक्ट में 15 ​हजार से ज्यादा कर्मचारी और इंजीनियर लगेंगे जिनके यहां रहने की व्यवस्था एक टाउनशिप का निर्माण कराके की गई है। यहां निर्माण कार्य के साथ साथ 1 साल बाद से ही रिफाइनरी  के फेब्रिकेशन का काम भी तेजी से किया जाएगा।

आपको बता दें कि बाड़मेर रिफाइनरी एचपीसीएल और राजस्थान सरकार के सहयोग से स्थापित की जा रही है जिसमें 74 फीसदी एचपीसीएल की हिस्सेदारी तय की गई है जबकि राज्य सरकार की इसमें 26 फीसदी हिस्सेदारी होगी। यहां बीएस 6 मानक स्तर के पेट्रोल डीजल का उत्पदान किया जाएगा।

राजस्थान में क्रूड आॅयल नहीं है ऐसे में रिफाइनरी को क्रूड आॅयल एक पाइप लाइन के जरिए गुजरात से उपलब्ध कराया जाएगा। ये पाइपलाइन 2 से 3 फीट चौड़ी होगी जिसकी लंबाई करीब 650 किलोमीटर बताई गई है। केयर्न एनर्जी कंपनी ये क्रूड आॅयल उपलब्ध कराएगी।

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जस्टिस लोया केस: कोर्ट ने कहा- महाराष्ट्र सरकार याचिकाकर्ताओं को दें सभी दस्‍तावेज

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जस्टिस लोया (फाइल फोटो)

विशेष सीबीआई जज लोया कि मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से कहा कि वह याचिकाकर्ताओं को सभी दस्तावेज दे।

सीबीआई के स्पेशल जज बृजगोपाल लोया की संदिग्ध हालात में मौत की स्वतंत्र जांच मामले पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई है। ये सुनवाई 7 दिनों के लिए टाल दी गई है।

बता दें कि जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एमएन शांतनगौडार की बेंच में इस केस की सुनवाई लिस्टेड है। सोमवार को जस्टिस शांतनगौडार के छुट्टी पर होने के चलते मामले की सुनवाई नहीं हुई थी। जिसके बाद आज भी कोर्ट ने सुनवाई टालने का आदेश दिया है। कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को याचिकाकर्ता को दस्तावेज सौंपने का भी आदेश दिया है।

शुक्रवार को हुई चार जजों की प्रेस कांफ्रेंस के बाद ये मामला एक बार फिर सुर्खियों में आया था। प्रेस कांफ्रेंस में जजों ने सवालों के जवाब देते हुए कहा था कि हां जज लोया की मौत का मामला भी उनकी बेचैनी, विरोध और असंतोष की वजह है। इस बेंच में शामिल जस्टिस अरुण मिश्रा को लेकर भी सवाल उठे थे।

गौरतलब है कि जज लोया की मौत पर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे। शुक्रवार को चार जजों ने जो प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, उसमें जजों के रोस्टर तय करने पर भी सवाल उठाए गए थे और जस्टिस लोया केस का जिक्र भी किया गया था।

दरअसल, सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में सीबीआई के स्पेशल जज बीडी लोया सुनवाई कर रहे थे। दिसंबर 2014 में नागपुर में एक समारोह में अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाने के बाद उनका निधन हो गया। मौत की वजह और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट जैसे कई मसलों को लेकर सवाल उठाये जाते रहे है।

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सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच भारत-पाक के बीच चलने वाली बस सेवा रोकी गई

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PAK Bus
फाइल फोटो

जम्मू कश्मीर में सीमा पर दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव से पुंछ-रावलकोट बस सेवा को एक बार फिर रोक दिया गया है। मीडिया खबर के मुताबिक भारत और पाकिस्तान के बीच ‘कारवां ए अमन’ नाम से चलने वाली ये बस पुंछ के चाकन दा बाग इलाके से रावलकोट के लिए रवाना हुई। लेकिन जैसे ही यह एलओसी के गेट पर पहुंची, पाकिस्‍तान की ओर से फायरिंग शुरू हो गई। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा को ध्‍यान में रखते हुए तत्‍काल बस को वहीं रोक दिया गया और बस को वापस पुंछ लाया गया।

सोमवार (15 जनवरी) की सुबह पाक सेना ने सीमा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन किया। सीमा पर तनाव के माहौल को देखते हुए प्रशासन ने राह-ए-मिलन बस सेवा को रद्द कर दिया।

जिला आयुक्त पुंछ तारिक अहमद जरगर का कहना है कि सीमा पर तनाव के माहौल को देखते हुए बस सेवा को रद्द कर दिया गया है। अगर अगले सप्ताह तक सीमा पर हालात बेहतर हुए तो बस सेवा को फिर से बहाल कर दिया जाएगा।

बता दें कि वर्ष 2006 में जम्मू और कश्मीर के पुंछ के चाकन दा बाग इलाके से रावलकोट के बीच ये बस सेवा शुरू की गई थी।

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