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जानिए क्यों मनाया जाता है नागपंचमी का त्योहार?

nag panchmi
फाइल फोटो

देश भर में शुक्रवार को नागपंचमी का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। नागपंचमी के दिन लोग नाग पूजा बहुत श्रद्धा और आस्था के साथ करते हैं।

ऐसी मानना है कि नागपंचमी के दिन सांपों को दूध पिलाना बहुत शुभ फल देता है। यही वजह है आज के दिन नागपूजा के लिए अनेक नाग पकड़े जाते हैं और घर-घर में इनके मुंह को दूध में डालकर धार्मिक भावनाओं को संतुष्ट किया जाता है।

शास्त्रों में इस बात का उल्लेख मिलता है कि सांपों को दूध पीलाने से सर्प देवता प्रसन्न होते हैं। इससे घर में अन्न, धन और लक्ष्मी का भंडार बना रहता है। इसलिए यह परंपरा सदियों से चली आ रही है कि नागपंचमी के दिन नागों को दूध अर्पित किया जाए। इस परंपरा का लाभ उठाने के लिए नागपंचमी के मौके पर संपेरों की टोलियां लोगों के दरवाजे पर जाकर नाग के दर्शन करवाती है। इसके अलावा मंदिरों के बाहर भी सपेरें पोटली में सांप लेकर श्रद्धालुओं को दर्शन कराते हैं।

शास्त्रों में नाग को दूध पीलाने के मत को विज्ञान स्वीकार नहीं करता है। जंतुओं के स्वभाव एवं उनके गुणों पर काम करने वाले विशेषज्ञ और खुद सपेरे भी स्वीकार करते हैं कि सांप की शारीरिक संरचना ऐसी नहीं होती है कि वह दूध पी सके। डॉ नासिर, चिकित्सक, कानपुर प्राणि उद्यान के मुताबिक अगर सांप ने दूध पी लिया तो उनकी आंतों में इंफेक्शन हो जाता है और वह जल्द ही मर जाते हैं। सांप पूरी तरह से मांसाहारी होता और चूहे, कीड़े-मकोड़े, मछलियां आदि खाता है। दूध उसके लिए जहर समान है।

सांप ऐसी चीजें ग्रहण करते हैं, जो न अम्लीय होते हैं और न ही क्षारीय। दूध की प्रकृति बीच की है, ऐसे में यदि उसने दूध पी भी लिया तो उसके आंतों में इंफेक्शन हो जाएगा।

wefornews bureau 

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