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बारिश में ‘आंखों’ का रखें खास ख्याल

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फाइल फोटो

मानसून में बारिश बच्चों व युवाओं के चेहरे पर खुशी ही नहीं, वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण की आशंकाएं भी साथ लाती है। इस तरह मानसून हमारे शरीर के सबसे संवेदनशील हिस्से ‘आंखों’ में कुछ हानिकारक समस्याएं भी पैदा करता है।

इंडस हेल्थ प्लस की प्रिवेंटिव हेल्थकेयर स्पेशलिस्ट कंचन नायकवाडी ने मानसून के दौरान आंखों की देखभाल के लिए कुछ प्रमुख और आसान सुझाव दिए हैं, ताकि लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

* स्वच्छ रहें : हमेशा अपनी आंखों के नजदीक आने वाले कपड़ों और अपने हाथों को साफ रखें। अपने निजी सामान जैसे तौलिए, चश्मा, कॉन्टेक्ट लेंस इत्यादि किसी के साथ साझा न करें। जब भी आप अपने घर से बाहर जाते हैं, तो धूप का चश्मा या चश्मा पहनें। वे बाहरी तत्वों को हमारी आंखों में प्रवेश करने से रोकते हैं।

* अपनी आंखों का बहुत सावधानी से इलाज करें : रोजाना ठंडे पानी से अपनी आंखें धोएं। जागने या कॉन्टेक्ट लेंस को हटाने के बाद अपनी आंखों को जोर से न रगड़ें, क्योंकि यह कॉर्निया को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकता है।

* मानसून के दौरान कॉन्टेक्ट लेंस न पहनें, क्योंकि वे आंखों में अत्यधिक सूखेपन का कारण बन सकते हैं, जिससे आंखें लाल हो सकती हैं और उनमें जलन हो सकती है। अपने चश्मे को साफ और सूखा रखें।

* जलभराव वाले क्षेत्रों से बचें, क्योंकि उनमें बहुत सारे वायरस, बैक्टीरिया और फंगस होते हैं जो आसानी से संक्रमित हो सकते हैं और नुकसान पहुंचा सकते हैं।

* किसी भी संक्रमण से लड़ने के लिए अपने शरीर को स्वस्थ और प्रतिरक्षा प्रणाली को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए संतुलित और स्वस्थ आहार लें।

* आम तौर पर बारिश के मौसम के दौरान होने वाले संक्रमण न केवल डराने वाले, बल्कि बहुत हानिकारक भी होते हैं। हमारी आंखों में होने वाले सबसे आम संक्रमण हैं ‘कंजक्टिवाइटिस’ या आमतौर पर आई फ्लू, स्टाई और कॉर्नियल अल्सर।

–आईएएनएस

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दिमाग के लिए खतरनाक है डायबिटीज!

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आजकल के लाइफस्टाइल ने कई लोगों को डायबिटीज का शिकार बना दिया है। डायबिटीज एक बहुत ही घातक बीमारी है, जो व्यक्ति को धीरे-धीरे मौत के मुंह में ले जाती है लेकिन क्या आप जानते हैं कि डायबिटीज की बीमारी आपके दिमाग को भी गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाती है।

जी हां, मध्य वर्ग की उम्र में डायबिटीज से पीड़ित लोगों का दिमाग सिकुड़ने लगता है। साथ ही उनकी याददाश्त भी कमजोर होने लगती है। इस बात की जानकारी एक हालिया स्टडी में सामने आई है।

वैज्ञानिकों ने पाया कि टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित बुजर्गों में 5 वर्षों में ही याददाश्त कमजोर होने लगती है और उन्हें बोलने में भी दिक्कत होती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि स्टडी के शुरुआती समय में जिन लोगों की उम्र 68 के आस-पास थी, उन लोगों का दिमाग डायबिटीज के कारण बहुत पहले से ही डैमेज होना शुरू हो चुका था।

शोधकर्ताओं ने बताया कि दुनियाभर के अधिकतर लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। मौजूदा समय में ब्रिटेन की 3.7 मिलियन आबादी डायबिटीज की समस्या से जूझ रही है। शोधकर्ताओं का कहना है कि डायबिटीज होने का एक अहम कारण मोटापा भी है। अनहेल्दी लाइफस्टाइल और डाइट के कारण 90 फीसदी लोग टाइप-2 डायबिटीज का शिकार हो चुके हैं।

डायबिटीज अपने आप में ही एक बहुत बड़ी बीमारी है। इससे किडनी, दिल, आंखें और नर्वस सिस्टम पर बुरा असर पड़ता है लेकिन यूनिवर्सिटी ऑफ तस्मानिया द्वारा हुई इस स्टडी में बताया गया है कि डायबिटीज से दिमाग पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है, जिससे डिमेंशिया होने का खतरा भी रहता है।

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प्यार में पहल पुरुष ही क्यों करें?

‘टिडर’, ‘जुस्क’, ‘बम्बल’, ‘हैपन’, ‘मैच’, ‘वन्स’, ‘हिज’, ‘हगल’, ‘द लीग’, ‘चैपी’, ‘प्लेंटी ऑफ फिश’, ‘लेस्ली’, जैसी दर्जनभर से अधिक डेटिंग वेबसाइट्स हैं, जहां बड़ी तादाद में महिलाएं प्यार की तलाश में हैं।

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बदलते दौर में प्यार करने की परिभाषाएं बदल रही हैं और प्यार के इजहार की वह परंपरा भी टूट रही है, जिसमें प्यार में इजहार करने का झंडा सिर्फ पुरुष थामे रखता है। महिलाओं में ऑनलाइन प्यार तलाशने का चलन बढ़ा है, मुखर हो रहीं महिलाएं आगे बढ़कर पुरुषों से प्यार का इजहार करने से भी नहीं हिचकिचा रही हैं।

कुछ बरस पहले तक ऑनलाइन डेटिंग करने वालों को हिकारत भरी नजरों से देखा जाता था, लेकिन अब यह एक ट्रेंड बन गया है। एक अनुमान के मुताबिक, अब हर पांच में से एक रिलेशनशिप ऑनलाइन शुरू हो रहा है, यह वजह है कि ऑनलाइन डेटिंग एप्स की बाढ़ आ गई है। अमेरिका और यूरोप में स्टैब्लिश कई बड़ी डेटिंग कंपनियां भारत में कारोबार खड़ा कर रही हैं। इसी में से एक है, ‘बम्बल’ जिसमें हाल ही में प्रियंका चोपड़ा ने भी निवेश किया है।

‘बम्बल’ डेटिंग एप को महिला प्रधान एप कहा जा रहा है, जिसकी अपनी वजहें हैं। इसका जवाब देते हुए इसकी को-फाउंडर व्हाइटनी वोल्फ कहती हैं, “ऑनलाइन डेटिंग को लेकर खासतौर पर महिलाओं में हमेशा से थोड़ा-सा संशय रहता है। इसलिए भारत में महिला सशक्तीकरण के मोटो के साथ एप को लॉन्च किया गया है।”

दुनियाभर में ‘बम्बल’ का इस्तेमाल करने वालों की संख्या 4.5 करोड़ से अधिक है।

डेटिंग एप अब किस तरह महिला प्रधान हो रहे हैं? इसका जवाब देते हुए नारीवादी गीता यथार्थ कहती हैं, “बम्बल ने डेटिंग एप के क्षेत्र में क्रांति ला दी है। इस डेटिंग एप में महिलाओं की सुरक्षा और कंफर्ट को ध्यान में रखकर कई बेहतरीन फीचर्स तैयार किए गए हैं। मसलन, इस एप पर महिलाएं ही सबसे पहले पहल कर सकती हैं। अगर किसी लड़के को किसी लड़की की प्रोफाइल पसंद भी आ गई तो वह उसे मैसेज नहीं कर पाएगा। फोटो डाउनलोड नहीं कर पाएगा, किसी तरह की ऑनलाइन स्टॉकिंग तो भूल ही जाइए।”

वह कहती हैं, “बम्बल की तरह अब कई और महिला प्रधान डेटिंग एप शुरू हो सकते हैं, क्योंकि अब भारतीय महिलाएं संकोच के आवरण से बाहर निकलकर हर चीजों में हाथ आजमा रही हैं।”

‘टिडर’, ‘जुस्क’, ‘बम्बल’, ‘हैपन’, ‘मैच’, ‘वन्स’, ‘हिज’, ‘हगल’, ‘द लीग’, ‘चैपी’, ‘प्लेंटी ऑफ फिश’, ‘लेस्ली’, जैसी दर्जनभर से अधिक डेटिंग वेबसाइट्स हैं, जहां बड़ी तादाद में महिलाएं प्यार की तलाश में हैं।

ऑनलाइन डेटिंग का यह फैशन पश्चिमी देशों से होता हुआ भारत पहुंचा है। सबसे पहला डेटिंग एप 1995 में शुरू हुआ, जिसका नाम ‘मैच डॉट कॉम’ था। इसके बाद 2000 में ‘ईहार्मनी’ और 2002 में ‘एश्ले मैडिसन’ शुरू हुआ, जिन्होंने ऑनलाइन डेटिंग का शुरुआती क्रेज शुरू किया। साल 2012 में ‘टिंडर’ लॉन्च हुआ, जो पहला डेटिंग एप था, जिसमें स्वाइप की सुविधा थी।

मार्च, 2014 तक टिंडर पर दुनियाभर में रोजाना की दर से एक अरब जोड़ों के मैच हो रहे थे। साल 2014 में ही टिंडर की को-फाउंडर व्हाइटनी वोल्फ ने बम्बल शुरू किया, जो महिला प्रधान डेटिंग एप है। 1990 के दशक में ऑनलाइन डेटिंग एक स्टिग्मा था लेकिन अब एक-तिहाई शादियां ऑनलाइन ही हो रही हैं।

‘बम्बल’ ने अपनी वेबसाइट पर टैगलाइन लिखी है, “बंबल पर महिलाएं पहले कदम बढ़ाती हैं। हम आपके लिए मैदान तैयार कर रहे हैं और डेटिंग के तरीके बदल रहे हैं। हमारा मानना है कि रिश्तों की शुरुआत सम्मान और समानता के साथ होनी चाहिए।”

‘वू डेटिंग’ एप द्वारा हाल ही में कराए गए सर्वेक्षण के मुताबिक, इस तरह की ऑनलाइन डेटिंग एप पर महिलाओं और पुरुषों के बीच लैंगिक भेदभाव बहुत ज्यादा है। ‘क्वाट्र्ज इंडिया’ के मुताबिक, 20,000 शहरी लोगों पर किए गए सर्वे से पता चलता है कि भारत में डेटिंग एप पर महिलाओं की तुलना में पुरुष तीन गुना अधिक है।

हालांकि, इस लैंगिक विभाजन से सिर्फ महिलाओं के लिए ही नहीं, बल्कि पुरुषों के लिए भी समस्याएं खड़ी हो गई हैं। पुरुषों की समस्या है कि उनके पास ऑनलाइन ऑप्शन बहुत नहीं है, जबकि महिलाओं की समस्या यह है कि उनके पास इतने ऑप्शन हैं कि वे खुद को घिरी हुई पाती हैं।

इस बारे में गीता कहती हैं, “अगले 10 सालों में महिला, पुरुषों में यह अंतर कम होने जा रहा है, क्योंकि इस दौरान दोगुनी रफ्तार से महिलाएं ऑनलाइन डेटिंग एप का रुख करेंगी, जो इस खाई को बहुत हद तक मिटा देगा।”

–आईएएनएस

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हैंगओवर से छुटकारा दिलाएंगे ये 5 नुस्खे

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वीकेंड पार्टी का मजा तब किरकिरा हो जाता है जब अगले दिन ऑफिस के लिए तैयार होते वक्त सिर हैंगओवर की वजह से घूमने लगता है। व्यक्ति को चक्कर, मतली और सिर भारी होने जैसी शिकायत होने लगती है। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो ये घरेलू उपाय आपकी मदद कर सकते हैं।

8 आंउस पानी

नशा उतराने के लिए एक बार में कई आउंस पानी पीने के बजाए हर घण्टे पर 8 आंउस पानी पिएं, फायदा होगा।

कॉफी

हैंगओवर उतारने के लिए दो कप कॉफी भी काफी मददगार हो सकती है। ये आपके अंदर चुस्ती लाएगी।

टी बैंग्स

हैंगओवर की वजह से आंखो पर नजर आने वाली सूजन को कम करने के लिए 10 मिनट तक टी बैंग्स को आंखों पर रखें।

स्पोर्ट्स ड्रिंक पिएं

अतिरिक्त नमक शरीर से तरल पदार्थ को सोख लेता है। इसलिए नशा उतराने के लिए किसी स्पोर्ट्स ड्रिंक पिएं।

अंडा

अंडा खाने से आपका लीवर जल्दी रिकवर होगा।

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