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ज़रा हटके

‘हास्य चिकित्सक’ की उदास कश्मीरियों के चेहरों पर मुस्कान लाने की कोशिश

टकराव के माहौल में पले बढ़े आज के युवा रोज हिंसा-प्रतिहिंसा देख रहे हैं, वहां कश्मीर के 67 वर्षीय कॉमेडी किग का कहना है कि कश्मीरियों के बुझे चेहरों पर मुस्कान व हंसी लाने का एकमात्र जरिया हास्य-विनोद है।

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कश्मीर में हिंसा शुरू होने बाद जिन गलियों में आज नारों व गोलियों की गूंज सुनाई देती है, कभी वहां हंसी के हसगुल्ले छुटते थे। और, इसकी वजह थे कश्मीर के चार्ली चैपलिन नाम से मशहूर नजीर जोश जिनके दूरदर्शन पर आते ही कश्मीरी घरों में हंसी की फुलझड़ियां छूटती थीं। चेहरे के हाव-भाव में घबराहट, गली के जोकर जैसे और चाल-ढाल में चैपलिन जैसे जोश घाटी को गुदगुदाते थे।

टकराव के माहौल में पले बढ़े आज के युवा रोज हिंसा-प्रतिहिंसा देख रहे हैं, वहां कश्मीर के 67 वर्षीय कॉमेडी किग का कहना है कि कश्मीरियों के बुझे चेहरों पर मुस्कान व हंसी लाने का एकमात्र जरिया हास्य-विनोद है।

कवि, लेखक, निर्देशक और अभिनेता जोश यहां हर घर में ‘जूम जर्मन’, ‘अहेड रजा’ और कई अन्य नामों से चर्चित हैं जो कई टीवी धारावाहिकों में उनके किरदारों के नाम रहे हैं।

वह नियमित रूप से स्थानीय दूरदर्शन पर हास्य धारावाहिक लेकर आते थे जिसे कश्मीरी बहुत पसंद करते थे। लेकिन, 1990 में जब अलगाववादी हिंसा कश्मीर में भड़क उठी तो उनका कार्यक्रम बंद हो गया। हालांकि, उन्हें सीधे-सीधे कोई धमकी नहीं मिली लेकिन घाटी में हिंसा में हास्य विनोद व व्यंग्य के लिए जगह नहीं बची और उनके पास प्रायोजक नहीं रहे।

जोश का मानना है कि कश्मीरी अवाम कई सामाजिक व मनोवैज्ञानिक समस्याओं के दौर से गुजर रहे हैं जिसका इलाज सिर्फ दवाइयों से नहीं हो सकता है।

जोश ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “यहां लोग तनावमुक्त होना चाहते हैं और हास्य-विनोद और व्यंग्य इसके लिए बेहतर जरिया है।”

उन्होंने एक घटना के बारे में बताया जिसमें एक परिवार ने अपनी अवसादग्रस्त मां को तनाव मुक्त करने के लिए उनको धन्यवाद दिया था।

उन्होंने बताया, “महिला के बेटे ने मुझे बताया कि कॉमेडी धारावाहिक ‘हजार दास्तान’ की एक कड़ी को देखकर उनकी मां के चेहरे पर काफी समय के बाद मुस्कान आई।”

उन्होंने कहा, “लड़के ने बताया कि महीनों अवसादग्रस्त रहने के बाद उसकी मां के हंसने के बारे में जब मनोचिकित्सक को मालूम हुआ तो उन्होंने कॉमेडी धारावाहिक की और कड़ियां दिखाने की सलाह दी। इससे वह पूरी तरह ठीक हो गईं।”

जोश को लगता है कि जहां कर्फ्यू, बंद और गलियों में हिंसा कोई असाधारण घटना नहीं बल्कि आम बात हो वहां लोगों का मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए उनके जीवने में थोड़े हास्य-विनोद की जरूरत होती है।

लेकिन, घाटी में हिंसा बढ़ जाने के बाद नजीर जोश के सामाजिक और राजीतिक व्यंग्य पर आधारित टीवी धारावाहिकों के लिए कोई जगह नहीं बची।

जोश मध्य कश्मीर के बडगाम जिला स्थित अपने घर के बाहर बादलों को टकटकी निगाहों से निहारते हुए जोश ने बताया कि सामाजिक व्यंग्य पर आधारित उनका अंतिम धारावाहिक जूम जर्मन 1989 में बना था लेकिन कश्मीर में हिंसा के हालात पैदा होने के बाद यह 25 कड़ियां से ज्यादा नहीं चल पाया।

जाड़े के सूर्य की क्षीण किरणें घने बादलों के बीच राह बनाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन बादल उन्हें धरती तक पहुंचने के उनके मार्ग में बाधक बनकर खड़े हैं।

इसे देखते हुए उन्होंने कहा, “ऐसे ही वर्तमान हालात हैं। आप जहां भी जाएंगे आपको अवसाद के घने व काले बादल मिलेंगे। विभिन्न अस्पतालों में आने वाले सत्तर फीसदी मरीज अवसाद व तनाव से ग्रस्त हैं। कश्मीर में मनोरंजन का कोई जरिया नहीं है। सिनेमा हाल बंद हो चुके हैं। यहां अन्य राज्यों की तरह कोई स्थानीय फिल्म उद्योग नही है।”

जोश ने बताया, “कश्मीर में सिर्फ एक टीवी स्टेशन है और वहां भी मनोरंजन के कार्यक्रम शुरू करने के लिए कुछ नहीं हो रहा है जिससे लोगों को अपनी जिंदगी के तनाव को भुलाकर हंसने का बहाना मिले।”

उन्होंने उन दिनों को याद किया जब कश्मीरी उत्सुकता से साप्ताहिक टीवी नाटक का इंततार करते रहते थे।

जोश ने बताया, “मैं कुछ स्थानीय परिवारों को जानता हूं जहां महिलाओं ने अपने जेवरात बेचकर टीवी खरीदा था ताकि वे मेरी धारावाहिक हजार दास्तान देख पाएं। इस धारवाहिक की 52 कड़ियां 1985 से लेकर 1987 के बीच स्थानीय दूरदर्शन चैनल पर चली थीं।”

यह धारावाहिक प्रदेश की सत्ता पर काबिज लोगों के ऊपर राजनीतिक व्यंग्य पर आधारित था, जिसमें लोगों की समस्याओं के प्रति उनकी बेरुखी व लापरवाही का चित्रण किया गया था।

उन्होंने बताया, “कुछ स्थानीय नेता धारावाहिक की लोकप्रियता को लेकर क्षुब्ध थे। उन्होंने दिल्ली जाकर केंद्रीय नेतृत्व से शिकायत की कि इस धारावाहिक को लेकर उनकी स्थिति असहज बन गई है।”

जोश ने अपने बीते दिनों को याद करते हुए बताया, “शिकायत होने के बाद हर कड़ी को पहले पूर्वावलोकन के लिए दिल्ली भेजा जाता था, उसके साथ कश्मीरी अनुवादक भी होते थे। समीक्षा समिति ने राजनीतिक व सामाजिक व्यंग्य को सही ठहराया और उसे प्रोत्साहन देने की बात कही।”

जोश के पेशेवर जीवन की शुरुआत स्थानीय रंगकर्म से हुई। उन्होंने बताया, “आरंभ में हम गांव और जिला स्तर पर नाटक खेलते थे। मैंने 1968 में श्रीनगर के टैगोर हॉल में एक नाटक खेला था जहां प्रदेश संस्कृति अकादमी की ओर से नाट्य महोत्सव का आयोजन किया गया था।”

उन्होंने 1973 में टेलीविजन के लिए ‘हाऐर केकर’ नाटक लिखा। इसकी सफलता से वह उत्साहित हुए और कश्मीर में 1989 में मनोरंजन व हास्य कार्यक्रमों पर रोक लगाने तक लगातार हास्य धारवाहिक लिखते रहे।

हालांकि, वह हालात के आगे पूरी तरह से हतोत्साहित नहीं हुए हैं। वह कहते हैं कि प्रदेश और केंद्र सरकार की ओर से उनके कार्य को समर्थन मिले तो कश्मीर में अब भी हास्य व्यंग्य के कार्यक्रम दोबारा शुरू किए जा सकते हैं।

जोश ने कहा, “हमें कम से कम निर्माण लागत की जरूरत है ताकि अतीत की गरिमा फिर से हासिल हो। मुझे आशा है कि निकट भविष्य में बेहतर समझ बनेगी और मैं फिर कश्मीरियों को टीवी धारावाहिकों के जरिये हंसाकर उनको रोज-रोज के तनाव से मुक्त कर सकूंगा।”

वह मानते हैं कि स्थानीय युवाओं में काफी प्रतिभा है। उन्होंने कहा, “नई पीढ़ी के इन लड़के व लड़कियों को अभिनय व निर्देशन में कठिन प्रशिक्षण की जरूरत है ताकि यहां रंगकर्म और टीवी धारावाहिक का लोप न हो।”

(यह साप्ताहिक फीचर श्रंखला आईएएनएस और फ्रैंक इस्लाम फाउंडेशन की सकारात्मक पत्रकारिता परियोजना का हिस्सा है।)

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बांधवगढ़ ले जाए जाएंगे उत्पाती हाथी

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Elephant

भोपाल, 19 सितंबर | छत्तीसगढ़ में उत्पात मचाने वाले हाथी काफी समय से मध्य प्रदेश के सीधी जिले में घुसकर उत्पात मचा रहे हैं। इस दौरान दो लोगों की मौत होने के अलावा संपत्ति का भारी नुकसान हो चुका है। वन अमले ने इन हाथियों को कब्जे में ले लिया है और इन्हें बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान भेजने की तैयारी हो रही है। वन विभाग की ओर से बुधवार को दी गई आधिकारिक जानकारी में बताया गया कि छत्तीसगढ़ के हाथी मवई नदी को पार कर सीधी जिले में घुस गए और यहां जमकर उत्पात मचाया। इन हाथियों ने कुंदौर गांव के कच्चे घरों को तोड़कर उनमें रखा अनाज खा लिया और खेतों की फसलों को तबाह कर दिया।

हाथियों के बढ़ते आतंक को देखते हुए टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने तत्काल सोलर लाइट गांव की सीमा पर लगा कर हाथियों को गांव में घुसने से रोका। इसके बाद हाथी अन्य गांवों में भी इसी तरह उत्पात मचाते हुए सीधी मुख्यालय की 15 किलोमीटर की परिधि में पहुंच गए। हाथियों को भगाने के लिए पश्चिम बंगाल से विशेषज्ञ भी बुलाए गए। अगस्त से सितंबर के बीच इन उत्पाती हाथियों ने दो ग्रामीणों की जान भी ले ली।

उत्पाती हाथियों पर काबू पाने के लिए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के संचालक मृदुल पाठक के नेतृत्व में अधिकारियों और कर्मचारियों के दल ने अभियान चलाया और कुल पांच हाथियों को कब्जे में ले लिया है। इन हाथियों को बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान ले जाया जाएगा।

–आईएएनएस

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ज़रा हटके

राहुल गांधी ने चाय पीते आंख मारी

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Rahul Gandhi Bhopal

भोपाल, 17 सितंबर | अभी लोग फिल्म अभिनेत्री प्रिया प्रकाश की तरह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा संसद के भीतर आंख मारने का किस्सा नहीं भूले होंगे कि मध्यप्रदेश की राजधानी में सोमवार को चाय पीते हुए ऐसी ही तस्वीर एक बार फिर सामने आई है। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल हो रहा है। भोपाल में राहुल गांधी का लाल घाटी से रोड शो शुरू हुआ। राहुल का काफिला जब पुराने भोपाल से गुजर रहा था, तभी वह बस से उतरे और राजू टी स्टॉल पर खड़े होकर उन्होंने समोसा खाया, उसके बाद चाय भी पी।

राहुल गांधी इस दौरान लगभग चार मिनट तक वहां रुके। यहां जमा युवाओं ने राहुल के साथ सेल्फी ली। कांग्रेस अध्यक्ष ने दुकानदार से समोसा के बारे में कुछ पूछा भी।

राहुल चाय पी रहे थे और कार्यकर्ताओं का अभिवादन भी स्वीकार कर रहे थे। उन्होंने चाय की चुस्की ली और इसी दौरान उनकी आंख भी चल गई। चाय पीने और आंख मारने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

–आईएएनएस

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ज़रा हटके

जानिए, शादी में दूल्हे-दुल्हन को क्यों मिला तोहफे में 5 लीटर पेट्रोल

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देश मे लगातार बढ़ रही पेट्रोल-डीजल की कीमत ने आम लोगों को काफी परेशान किया है। लोग शादियों में अब तो पेट्रोल भी देने लगे हैं।

तमिलनाडु में इस सप्ताह हुई एक शादी में दूल्हे को उसके दोस्तों ने गिफ्ट में पेट्रोल से भरी हुई बोतले गिफ्ट में दी। तमिल टीवी चैनल के मुताबिक शादी में दूल्हा और दुल्हन मेहमानों की बधाई स्वीकार कर रहे थे। उसी दौरान दूल्हे के दोस्त आए और उसे पांच लीटर पेट्रोल का कैन थमाया।

तमिल टीवी चैनल ‘पुथिया तलाईमुरई’ के अनुसार कुड्डलूर में एक विवाह समारोह के दौरान जब नवदंपती प्रभु और दिव्या मेहमानों का अभिवादन कर रहे थे तभी दूल्हे के दोस्त पांच लीटर पेट्रोल की केन लेकर वहां पहुंचे। उनके गिफ्ट को देखकर चारों तरफ लोग हंसने लगे। इसके बाद दूल्हे ने दोस्तों के इस उपहार को स्वीकार किया। प्रभु एक ऑटोरिक्शा चालक है। दोस्तों ने सोचा कि दूल्हा एक ऑटो ड्राइवर है। इसलिए दूल्हे को इस तरह का गिफ्ट देना चाहिए।

जब लोगों ने दूल्हे के दोस्तों से इस अनोखे गिफ्ट के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि इतना महंगा पेट्रोल उपहार के रूप में जरूरत की वस्तु बन गया है। इस उपयोगिता को देखते हुए लोगों ने पेट्रोल दूल्हे को उपहार में देने का फैसला किया। बता दें, तमिलनाडु में पेट्रोल के दाम इस वक्त 85.15 रुपये प्रति लीटर हैं।

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