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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के निलंबन के लिए कर्णन ने राष्ट्रपति से लगाई गुहार

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कोलकाता हाई कोर्ट के जज सी एस कर्णन ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पत्र भेजकर खुद को मिली सजा रद्द करने के लिए कहा है। इस बात की जानकारी कर्णन का पक्ष रख रहे वकीलों ने 19 मई को दी है।

हालांकि, राष्ट्रपति कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, उनके पास ऐसी कोई याचिका नहीं आई है। सी एस कर्णन पर न्यायालय की अवमानना का मामला चल रहा है जिसके लिए चीफ जस्टिस ने उनको छह महीने की सजा सुनाई थी।

वकीलों ने गुरुवार (18 मई) को कहा था कि न्यायमूर्ति कर्णन को प्रधान न्यायाधीश जे एस खेहर की अध्यक्षता वाली सात सदस्यीय पीठ की ओर से सुनाई गई छह माह की कैद की सजा को निलंबित करने/रोक लगाने की मांग करते हुए न्यायमूर्ति कर्णन की ओर से संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत एक ज्ञापन ईमेल के जरिए भेजा गया है।

अनुच्छेद 72 कहता है कि राष्ट्रपति के पास दंड से क्षमा, दंड विराम, राहत और कमी देने या सजा को निलंबित करने की शक्ति होगी। उक्त ज्ञापन न्यायमूर्ति कर्णन के वकील मैथ्यूज जे नेडुमपारा और ए सी फिलिप ने तैयार किया था। इसमें नौ मई को सुनाए गए फैसले से जुड़े घटनाक्रम का संदर्भ है।

वकीलों ने पूर्व में यह दावा किया था कि न्यायमूर्ति कर्णन ने उन्हें सुनाई गई कैद की सजा के खिलाफ राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और अन्य को पत्र भेजे थे। न्यायमूर्ति कर्णन ने शीर्ष अदालत में एक याचिका लगाकर भी नौ मई के आदेश को वापस लेने की मांग की थी लेकिन प्रधान न्यायाधीश ने इसपर त्वरित सुनवाई से इनकार कर दिया।

wefornews bureau

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