खेल

2001 में मिली हार की टेंशन के साथ पांचवें दिन मैदान पर उतरेंगे कंगारू, हार का खतरा बढ़ा

steven-smith

रांची टेस्ट के दूसरे दिन ऑस्ट्रेलियाई हमले से हैरान टीम इंडिया को चौथे दिन जीत की दस्तक सुनाई देने लगी है। शुरुआती दो दिन तक सिर के बल खड़ा ये मुकाबला अब अपने असल रुप में सामने आ गया है।

पहली पारी में 451 रन बनाने वाले कंगारुओं के सामने अब पारी से हार का खतरा मंडराने लगा है। तीन दिन का खेल का मिजाज ऐसा था जहां हार-जीत और ड्रॉ तीनों ही ऑप्शंस खुले हुए थे लेकिन एक ही दिन में मज़बूत दिख रही ऑस्ट्रेलियाई टीम हार की तरफ आगे बढ़ने लगी। दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलियाई महारथी को सस्ते में आउट करने के बाद कप्तान विराट कोहली ने भी अपने चोटिल कंधे को विरोधियों को दिखाकर ये बयां किया कि इन बाज़ुओं में बहुत दम बाकी है। चौथे दिन का खेल खत्म हुआ तो टीम इंडिया ने अपनी पहली पारी नौ विकेट के नुकसान पर 603 रन बनाकर घोषित की।

451 रन के जवाब में बने इस विशाल स्कोर के कारण टीम इंडिया को पहली पारी में 152 रन की बढ़त मिल गई। जवाब में दूसरी पारी में कंगारुओं को शुरु से ही झटके लगने शुरु हो गए। छठे ओवर में जडेजा ने खतरनाक डेविड वॉर्नर को अपना शिकार बनाया और इसके बाद पवेलियन लौटने की बारी आई नाइट वॉचमैन नाथन लायन की। लायन को भी जडेजा ने ही चलता किया। इन दो विकेटों के साथ ही ऑस्ट्रेलियाई टीम का मनोबल टूटने लगा।

चौथे दिन स्टंप्स तक ऑस्ट्रेलिया ने सिर्फ 23 रन बनाते हुए अपने दो विकेट गंवा दिए। ऑस्ट्रेलिया दूसरी पारी में अभी भारत से 129 रन पीछे है यानी हार कंगारुओं के सिर पर मंडरा रही है। रांची टेस्ट की दूसरी पारी में गेंदबाज़ों ने जिस रफ्तार से ऑस्ट्रेलिया के विकेट लिए हैं, अगर अंतिम दिन भी उसी तरीके से विकेट मिले तो भारत को यहां एक बड़ी जीत मिल सकती है। हालांकि ये एक हाइपोथेटिकल सिचुएशन है लेकिन क्रिकेट में ऐसा होता है।

16 साल पहले ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत ने ऐसा ही किया था। यानी पांचवें दिन जब कंगारु बैटिंग करने उतरेंगे, तब उनके ऊपर डेढ़ दशक पहले मिली हार का टेंशन सवार होगा। मैच पलटने की पूरी कहानी का श्रेय पुजारा और साहा की जोड़ी को जाता है, जिन्‍होंने अपने बल्ले से शानदार पारियों को अंजाम देकर टीम इंडिया को मज़बूती प्रदान की। पुजारा ने तीसरे दिन बनाए अपने शतक को चौथे दिन दोहरे शतक में तब्दील किया तो साहा की शतकीय पारी भी काफी सरहानीय साबित हुई।

यही वजह भी रही कि चाहे पुजारा का दोहरा शतक हो या फिर साहा की सेंचुरी, पवेलियन में बैठे कप्तान कोहली ने इन लम्हों का जमकर लुत्फ उठाया। पुजारा और साहा के बीच सातवें विकेट के लिए हुई 199 रन की साझेदारी ने ऑस्ट्रेलिया के हौसले को हिला दिया और यहीं से ऑस्ट्रेलिया के हाथों बाज़ी मुट्ठी में रेत की मानिंद फिसलने लगी। पुजारा 202 रन की मैराथन पारी खेली तो साहा की पारी का अंत 117 रन पर हुआ लेकिन इसके बाद भी टीम इंडिया के बल्लेबाज़ों ने हार नहीं मानी।

टीम इंडिया के ऑलराउंडर रवीन्द्र जडेजा ने 55 गेंदों में तेज़तर्रा 54 रनों की पारी खेलकर कंगारुओं को करारा जवाब देने में कसर बाकी नहीं छोड़ी। जडेजा की ये तूफानी पारी 5 चौकों और 2 छक्कों से सजी थी। जडेजा ने अपनी अर्धशतकीय पारी का जश्न तलवार जैसे बल्ले को घुमाकर मनाया, जिस पर कोहली भी अपनी मुस्कान देते नजर आए। टीम इंडिया रांची के JSCA स्टेडियम में जीत के रास्ते पर सरपट भागती दिख रही है। अब सारी निगाहें मैच के आखिरी दिन पर हैं। आठ ओवर में दो विकेट गंवाने वाली कंगारु टीम का अगर अगले दो सत्र में सूपड़ा साफ हो जाता है तो यकीन मानिए लखनऊ की राजनीतिक जीत से इतर रांची की इस फतह का जश्न पूरा देश मनाएगा, वो भी बगैर किसी भेदभाव के।

wefornews bureau

 

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Most Popular

To Top