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राजनीति

21 फरवरी को कमल हासन करेंगे पार्टी के नाम का ऐलान

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File Photo

बॅालीवुड के सुपरस्टार कमल हासन अब राजनीति में एंट्री लेने की तैयारी हैं। कमल हासन ने इस बात का ऐलान आधिकारिक तौर पर कर दिया है। आगामी 21 फरवरी को कमल हासन तमिलनाडु के रामनाथपुरम में राजनीतिक पार्टी का औपचारिक ऐलान करेंगे।

इसके साथ ही कमल हासन इसी दिन अपनी ताकत का प्रदर्शन करने के लिए राज्यव्यापी यात्रा की शुरुआत करेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कमल हासन कई चरणों में अपनी राज्यव्यापी सफर को पूरी करेंगे। हासन पहले अपने गृहजनपद रामानाथपुरम से मधुरई, दिंडीगुल और सिवगंगई की यात्रा करेंगे।

इसके बाद वह अपनी यात्रा को आगे बढ़ेंगे। कमल हासन ने लगभग एक साल पहले ही इस बात के संकेत दे दिए थे कि वह राजनीति में आना चाहते हैं और किसी राजनीतिक दल के साथ मिलकर काम करने की बजाय वह अपनी पार्टी बनाकर चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं।

मंगलवार को तमिलनाडु में मीडिया को संबोधित करते हुए हासन ने कहा कि वह अपनी राजनीतिक यात्रा को चुनौती देने का इरादा रखते हैं, जो कुछ वक्त से तमिलनाडु की राजनीति को तोड़ने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने राजनीतिक पार्टी का गठन सिर्फ इसलिए करना चाहते हैं ताकि सामूहिक आवाज को बुलंद करना है।

उन्होंने यह भी कहा कि आम लोगों को किस तरह की समस्या हो रही है, उनके राजनेताओं से क्या उम्मीदे हैं और वह किस तरह से प्रदेश का विकास होते हुए देखना चाहते हैं, वह इन सभी मुद्दों को जानना चाहते हैं और इसके लिए वह यात्रा के दौरान आम जनता से मुलाकात करेंगे।

पिछले साल अक्टूबर में चेन्नई में शिवाजी गणेशन मेमोरियल के उद्घाटन में एक्टर कमल हासन और रजनीकांत दोनों ही पहुंचे थे। इस दौरान कमल हासन और रजनीकांत ने एक दूसरे से काफी देर तक बात की। कार्यक्रम के बाद रजनीकांत ने बोला था की, जब उन्होंने कमल हासन से पूछा कि राजनीति में कैसे सफल हों तो उन्होंने कहा- ‘मेरे साथ आइए तब मैं आपको इसका जवाब दूंगा’। उन्होंने यह पहले ही कहा है कि अगर सुपरस्टार रजनीकांत राजनीति में आते हैं तो वह उनसे हाथ मिलाना पसंद करेंगे।

Wefornews Bureau

राजनीति

तिरंगे के अपमान पर अमित शाह पर मुकदमा करेगी बहुजन विजय पार्टी

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Amit Shah

लखनऊ, 16 अगस्त । बहुजन विजय पार्टी (बविपा) ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह द्वारा गत 15 अगस्त को किए गए तिरंगे के अपमान को बेहद दुखद, राष्ट्रीय भावना के विरुद्ध व तिरंगे के अपमान की पराकाष्ठा बताते हुए कहा कि वह शाह के विरुद्ध न्यायालय जाएगी।

बविपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष केशव चंद्र ने गुरुवार को लखनऊ में कहा कि यह आश्चर्य का विषय है कि आजादी के 72वें वर्ष में सत्तारूढ़ दल के वरिष्ठ नेता व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को झंडा फहराना नहीं आता। उन्होंने कहा कि बेहद शर्मनाक यह प्रकरण पूरी दुनिया ने देखा। इससे देशवासियों की भावनाएं आहत हुईं।

उन्होंने कहा कि झंडारोहण के दौरान अमित शाह झंडे को खींचकर जमीन पर ले आते हैं, जो नेशनल फ्लैग कोड, 2002 के अंतर्गत दंडनीय अपराध है।

केशव ने कहा कि तिरंगे का अपमान किसी भी दशा में नहीं होना चाहिए और जमीन से उसका स्पर्श नहीं होना चाहिए। तिरंगे का जमीन से स्पर्श कराने पर 3 साल की कैद या जुर्माना या दोनों हो सकता है।

बविपा अध्यक्ष ने कहा कि उनके पास इस बात के सबूत हैं कि भाजपा के कार्यक्रमों में राष्ट्रगान गाते समय पार्टी का झंडा फहराया जाता है, लेकिन पार्टी अध्यक्ष होने के नाते अमित शाह ने कभी कोई कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने भी कभी इस बात का संज्ञान नहीं लिया है। सच्चाई यह है कि भाजपा का ‘प्रखर राष्ट्रवाद’ राष्ट्रीय ध्वज पर भी हावी होता जा रहा है।

केशव चंद्र ने कहा कि समय-समय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी देश ही नहीं, विदेशों में भी राष्ट्रगान का अपमान कर चुके हैं। राष्ट्रगान के समय मोदी चहलकदमी करने लगते हैं, जो पूरी दुनिया देख चुकी है।

–आईएएनएस

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राजनीति

वाजपेयी आधुनिक भारत के शीर्षस्थ नेता : मनमोहन

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नई दिल्ली, 16 अगस्त | कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनमोहन सिंह ने गुरुवार को कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी आधुनिक भारत के ‘शीर्षस्थ नेताओं’ में से एक थे और उन्होंने अपना पूरा जीवन देश की सेवा करने में लगाया। पूर्व प्रधानमंत्री ने एक बयान में कहा, ” भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी के दुखद निधन के बारे में पता चला। वह एक शानदार वक्ता, प्रभावी कवि, अद्वितीय लोकसेवक, उत्कृष्ट सांसद और महान प्रधानमंत्री रहे।”

उन्होंने कहा, “वह आधुनिक भारत के शीर्षस्थ नेताओं में से एक थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन हमारे महान देश की सेवा में लगाया।”

उन्होंने कहा, “राष्ट्र के प्रति उनकी सेवाओं को लंबे समय तक याद किया जाएगा।”

राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने भी वाजपेयी के निधन पर बयान जारी कर कहा, “मैं वाजपेयीजी के दुखद निधन से बहुत दुखी हूं। वह एक महान इंसान और सच्चे राजनेता थे।”

आजाद ने कहा कि वाजपेयी जरूरत पड़ने पर कभी भी विपक्षी पार्टी के नेताओं की प्रशंसा करने से नहीं चूकते थे।

उन्होंने कहा, “मुझे याद है जब उन्होंने 1971 में भारत-पाक युद्ध के बाद दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की प्रशंसा की थी और उन्हें ‘दुर्गा’ कहा था।”

लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने पूर्वानुमान लगाया था कि वाजपेयी भविष्य में प्रधानमंत्री बनेंगे और वह बने।

खड़गे ने वाजपेयी को ‘अजातशत्रु’ करार दिया, जिन्होंने कभी अपना शत्रु नहीं बनाया।

खड़गे ने कहा कि हालांकि हमारी विचारधारा अलग थी, फिर भी हम उनके भाषणों को सुनते थे।

उन्होंने कहा, “उनमें बहुत सहिष्णुता थी और सभी से काफी सहजता से मिलते थे। उन्होंने कभी भी दूसरों को नीचा दिखाने की कोशिश नहीं की।”

कांग्रेस सांसद मोतीलाल वोरा और कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी वाजपेयी के निधन पर शोक प्रकट किया।

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ओपिनियन

अटल बिहारी वाजपेयी : नए भारत के सारथी और सूत्रधार

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नई दिल्ली, 16 अगस्त (आईएएनएस)| भारत रत्न, सरस्वती पुत्र एवं देश की राजनीति के युगवाहक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा और जनसेवा को समर्पित रहा। वे सच्चे अर्थों में नवीन भारत के सारथी और सूत्रधार थे। वे एक ऐसे युग मनीषी थे, जिनके हाथों में काल के कपाल पर लिखने व मिटाने का अमरत्व था। ओजस्वी वक्ता विराट व्यक्तित्व और बहुआयामी प्रतिभा के धनी वाजपेयी की जीवन यात्रा आजाद भारत के अभ्युदय के साथ शुरू होती है और विश्व पटल पर भारत को विश्वगुरु के पद पर पुन: प्रतिष्ठित करने की आकांक्षा के साथ कई पड़ावों को जीते हुए आगे बढ़ती है। वे भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य थे। वे 1968 से 1973 तक भारतीय जन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने अटल बिहारी वाजपेयी में भारत का भविष्य देखा था। वाजपेयी 10 बार लोक सभा सांसद रहे। वहीं वे दो बार 1962 और 1986 में राज्यसभा सांसद भी रहे। वाजपेयी जी देश के एक मात्र सांसद थे, जिन्होंने देश की छह अलग-अलग सीटों से चुनाव जीता था। सन 1957 से 1977 तक वे लगातार बीस वर्षो तक जन संघ के संसदीय दल के नेता रहे। आपातकाल के बाद देश की जनता द्वारा चुने गए मोरार जी देसाई जी की सरकार में वे विदेश मंत्री बने और विश्व में भारत की एक अलग छवि का निर्माण किया।

इस दौरान संयुक्त राष्ट्र संघ में पहली बार हिंदी में ओजस्वी उद्बोधन देकर वाजपेयी ने विश्व में मातृभाषा को पहचान दिलाई और भारत की एक अलग छाप छोड़ी। आपातकाल के दौरान उन्हें भी लोकतंत्र की हत्यारी सरकार की प्रताड़ना झेलनी पड़ी। उन्हें जेल में डाल दिया गया लेकिन उन्होंने जेल से ही कलम के सहारे अनुशासन के नाम पर अनुशासन का खून लिख कर राष्ट्र को एकजुट रखने की कवायद जारी रखी।

सिद्धांतों पर अडिग रहते हुए विचारधारा की राजनीति करने वाले वाजपेयी भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के बाद पहले अध्यक्ष बने। उन्होंने तीन बार 1996, 1998-99 और 1999-2004 में प्रधानमंत्री के रूप में देश का प्रतिनिधित्व किया। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय फलक पर देश को नई ऊंचाइयों पर प्रतिष्ठित करने वाले वाजपेयी के कार्यकाल में देश ने प्रगति के अनेक आयाम छुए।

अजातशत्रु अटल बिहारी वाजपेयी ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नारे को आगे बढ़ाते हुए ‘जय जवान-जय किसान- जय विज्ञान’ का नारा दिया। देश की सामरिक सुरक्षा पर उन्हें समझौता बिलकुल भी गंवारा नहीं था। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने 1998 में पोखरण में पांच भूमिगत परमाणु परीक्षण किए। इस परीक्षण के बाद कई अंतर्राष्ट्रीय शक्तियों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद वाजपेयी की दृढ़ राजनीतिक इच्छा शक्ति ने इन परिस्थितियों में भी उन्हें अटल स्तंभ के रूप में अडिग रखा। कारगिल युद्ध की भयावहता का उन्होंने डट कर मुकाबला किया और पाकिस्तान को राजनीतिक, कूटनीतिक, रणनीतिक और सामरिक सभी स्तरों पर धूल चटाई।

वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल में देश में विकास के स्वर्णिम अध्याय की शुरूआत हुई। वे देश के चारों कोनों को जोड़ने वाली स्वर्णिम चतुर्भुज जैसी अविस्मरणीय योजना के शिल्पी थे। नदियों के एकीकरण जैसे कालजयी स्वप्न के द्रष्टा थे। मानव के रूप में वे महामानव थे। सर्व शिक्षा अभियान, संरचनात्मक ढांचे के सुधार की योजना, सॉफ्टवेयर विकास के लिए सूचना एवं प्रौद्योगिकी कार्यदल का निर्माण और विद्युतीकरण में गति लाने के लिए केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग आदि योजनाओं की शुरुआत कर देश को प्रगति के पथ पर अग्रसर करने में उनकी भूमिका काफी अनुकरणीय रही। वाजपेयी सरकार की विदेश नीति ने दुनिया में भारत को एक नेतृत्वकर्ता के रूप में प्रतिष्ठित रहा।

अपनी ओजस्वी भाषण शैली, लेखन व विचारधारा के प्रति निष्ठा तथा ठोस फैसले लेने के लिए विख्यात वाजपेयी को कई पुरस्कारों से नवाजा गया। उन्हें 1992 में पद्म विभूषण 1994 में लोकमान्य तिलक पुरस्कार, 1994 में ही श्रेष्ठ सांसद पुरस्कार, भारत रत्न पंडित गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार और 2015 में उन्हें बांग्लादेश के सर्वोच्च अवार्ड फ्रेंड्स ऑफ बांग्लादेश लिबरेशन वार अवॉर्ड से उन्हें सम्मानित किया गया। देश के विकास में अमूल्य योगदान देने एवं अंतर्राष्ट्रीय फलक पर देश को सम्मान दिलाने के लिए वाजपेयी को 2015 में देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से अलंकृत किया गया।

— आईएएनएस

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