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POK में पत्रकारों का पाक सेना के खिलाफ प्रदर्शन

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फोटो-ANI

पीओके के मुजफ्फराबाद प्रेस क्लब के बाहर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के विरोध में पाकिस्तान के पत्रकारों ने प्रदर्शन किया है। बुधवार को पीओके में कई पत्रकारों पर सुरक्षा बलों ने हमला किया था।

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पाकिस्तान सरकार से ‘इमरान की गुमशुदगी’ का विज्ञापन प्रकाशित कराने की मांग

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लाहौर: पाकिस्तान में मध्यावधि चुनाव कराने की मांग के एक दिन बाद विपक्षी दल पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) ने संघीय सरकार से ‘प्रधानमंत्री इमरान खान की गुमशुदगी’ का विज्ञापन प्रकाशित करने की मांग की।

पाकिस्तानी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के मुकाबिक, पीएमएल-एन की प्रवक्ता मरियम औरंगजेब ने कहा कि ‘लोगों से लंबे चौड़े वायदे करने के बाद प्रधानमंत्री इमरान खान गायब हो गए हैं। उन्होंने एक करोड़ रोजगार, पचास लाख मकान का वादा किया था लेकिन वादा करने के बाद से वह लापता हैं। पीआईए के (कराची) विमान हादसे में मारे गए लोगों के परिजन जानना चाहते हैं कि प्रधानमंत्री कहां चले गए हैं।’

मरियम ने कहा कि टिड्डियों के हमले में फसलें तबाह हो रही हैं, कोरोना के कारण मौतें बढ़ रही हैं लेकिन सरकार के पास इस सबसे निपटने के लिए कोई रणनीति नहीं है।

इससे पहले पीएमएल-एन के महासचिव अहसन इकबाल ने देश में मध्यावधि चुनाव की मांग की थी और इमरान खान की तरफ संकेत करते हुए कहा था कि ‘अनाड़ी ड्राइवर ने देश को बर्बाद कर दिया है।’

उन्होंने कहा, “देश में बदतरीन आर्थिक अव्यवस्था है और यह कोरोना के आने से पहले से है। पाकिस्तानी रुपया इस क्षेत्र की सबसे कमजोर करेंसी है। कृषि-उद्योग का बुरा हाल है और जवाबदेही ब्यूरो के नाम पर ऐसा आतंक फैलाया गया है कि अफसर कह रहे हैं कि उनसे उनकी मौत के दस्तावेज पर भले दस्तखत करवा लो लेकिन वे किसी फाइल पर दस्तखत नहीं करेंगे।”

पीएमएल-एन के इन बयानों पर इमराननीत पाकिस्तान तहरीके इंसाफ ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी नेता व पंजाब सरकार में मंत्री फय्याज उल हसन चौहान ने कहा कि ‘पीएमएल-एन द्वारा प्रधानमंत्री इमरान खान की आलोचना करना आसमान पर थूके जाने के समान है। इनके एक नेता (नवाज शरीफ) लंदन में हैं जिन्हें कानून तलाश रहा है और दूसरे नेता (शहबाज शरीफ) अपने ड्राइंग रूम में कैद हैं।’

–आईएएनएस

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भारत में अटके 176 और पाकिस्तानियों की स्वदेश वापसी

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लाहौर: कोरोना वायरस महामारी के प्रसार को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के कारण भारत में फंसे 176 और पाकिस्तानी बुधवार को स्वदेश लौटे। पाकिस्तानी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, इनकी वापसी अटारी-वाघा सीमा के रास्ते से हुई।

यह सीमा कोरोना वायरस के प्रकोप के सामने आने के बाद से बंद है। पाकिस्तान के नागरिकों की स्वदेश वापसी के लिए सीमा को बुधवार को कुछ देर के लिए खोला गया। यह सभी लोग बीते दो महीने से भारत में फंसे हुए थे। इनमें से अधिकांश तीर्थ यात्रा वीजा पर भारत गए थे।

कराची निवासी सैयद सरवर हुसैन इस 176 लोगों के जत्थे में शामिल थे। उन्होंने स्वदेश वापसी के लिए पाकिस्तान व भारत सरकार का शुक्रिया अदा किया।

हुसैन के साथ स्वदेश लौटे महेश कुमार ने फंसे पाकिस्तानी नागरिकों की मदद करने के लिए नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग को धन्यवाद दिया। उन्होंने बताया कि वह तीर्थ यात्रा पर मार्च के शुरू में भारत गए थे और अब वह अपने सिंध स्थित गृहनगर पहुंचकर सुकून महसूस कर रहे हैं।

कोरोना महामारी के सामने आने के बाद अब तक भारत में फंसे करीब 400 पाकिस्तानी स्वदेश लौट चुके हैं। बुधवार को स्वदेश लौटने वालों से पहले दो और जत्था वापस पाकिस्तान लौट चुका है।

अधिकारियों ने बताया कि वापसी पर इन सभी लोगों की कोरोना प्रोटोकाल के तहत जांच की गई। इनके सामानों को भी डिसइंफेक्ट किया गया। कुछ संदिग्ध मरीजों को क्वारंटाइन सेंटर भेजा गया है।

उधर, पाकिस्तान में फंसे भारतीय भी स्वदेश वापसी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि कम से कम 208 भारतीय नागरिक इस वक्त कोरोना वायरस महामारी के कारण पाकिस्तान में फंसे हुए हैं।

–आईएएनएस

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नेपाल ने भारत के हिस्सों को नक्शे में दिखाने का प्रस्ताव लिया वापस

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नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली (फाइल फोटो)

नेपाल ने जारी किए उस विवादित नक्शे का प्रस्ताव वापस ले लिया है, जिसमें उसने भारत के हिस्से को नेपाल की सीमा के अंदर दर्शाया था। इससे माना जा रहा है कि भारत की कूटनीतिक जीत हुई है। अब नेपाल ने अपने इस विवादित नक्‍शे पर रोक लगा दी है। कहा जा रहा है कि नेपाल कांग्रेस के दबाव में वहां की सरकार ने अपने कदम वापस खींचे हैं।

बताया जा रहा है कि नेपाल की मुख्‍य विपक्षी पार्टी नेपाल कांग्रेस ने सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस बात से अवगत कराया था कि इस मामले में उसे कुछ और समय चाहिए। इसके बाद संविधान संशोधन बिल को संसद की कार्यसूची से हटा लिया गया। इसे संसद में दो तिहाई समर्थन चाहिए था।

दोनों देशों के बीच रिश्तों में तब तनाव आ गया था जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आठ मई को उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रे को धारचुला से जोड़ने वाली रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 80 किलोमीटर लंबी सड़क का उद्घाटन किया था। नेपाल ने इस सड़क के उद्घाटन पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया था कि यह नेपाली सीमा से होकर जाती है। भारत ने उसके दावे को खारिज करते हुए कहा था कि सड़क पूरी तरह से उसकी सीमा में है।

बता दें कि नेपाल सरकार ने पिछले हफ्ते नेपाल का संशोधित राजनीतिक और प्रशासनिक नक्शा जारी किया था जिसमें लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को उसके भू-भाग में दर्शाया गया था, जिसपर नाराजगी जताते हुए भारत ने नेपाल से स्पष्ट रूप से कहा था कि वह अपने भूभाग के दावों को अनावश्यक हवा न दे और मानचित्र के जरिये गैरन्यायोचित दावे करने से बचे।

वहीं नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली ने कहा था कि उनके देश का भारत के साथ विशिष्ट व करीबी रिश्ता है और उन्हें विश्वास है कि दोनों पड़ोसियों के बीच कालापानी का मुद्दा बातचीत के जरिये सुलझा लिया जाएगा। ग्यावली ने कहा था कि सीमा विवाद नया नहीं है। यह इतिहास का अनसुलझा, लंबित और बकाया मुद्दा है जो हमें विरासत में मिला है। यह एक बोझ है और जितनी जल्दी हम इसे सुलझा लेंगे उतनी जल्दी हम अपनी निगाहें भविष्य पर जमा पाएंगे।

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