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जेएनयू में कन्हैया की पेशी के दौरान पत्रकारों की पिटाई

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जेएनयू में देश विरोधी नारेबाजी का विवाद शांत होने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है। छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार की पटियाला हाउस कोर्ट में पेशी के दौरान आज वकीलों और जेएनयू छात्रों के बीच जमकर हाथापाई हुई। वकीलों के एक समूह ने जेएनयू के छात्रों और पत्रकारों पर हमला किया और उन्हें धमकी भी दी। एनडीटीवी की पत्रकार सोनल मेहरोत्रा के साथ भी कोर्ट के अंदर बदसलूकी हुई। जब यह सब हो रहा था तो पुलिसवाले वहीं खड़े थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की।

सोनल ने बताया कि हमला करने वाले वकील पूछ रहे थे कि आप जेएनयू से हैं? वे लोगों को पकड़ रहे थे, जिन्हें जेएनयू से समझ रहे थे उन्हें अकारण ही पीट रहे थे।

वकीलों का यह समूह ‘भारत माता की जय और जेएनयू मुर्दाबाद’ के नारे लगा रहा था।

उधर, इस मामले में पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में जेएनयू के छात्रों ने आज हड़ताल बुलाई है। कन्हैया की रिहाई तक यह हड़ताल जारी रहेगी। इससे पहले रविवार को भी वामपंथी छात्र संगठनों और शिक्षक संघ ने मानव शृंखला बनाकर अपना विरोध जताया था। इस बीच देश विरोधी नारेबाजी करने वाले पांच और छात्रों की तलाश जारी है।

शिक्षकों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया
उधर, जेएनयू के शिक्षकों ने पुलिसिया कार्रवाई का विरोध जारी रखते हुए इसे संस्थान की स्वायत्तता का हनन बताया और कहा कि हालात इमरजेंसी की याद दिला रहे हैं।

मामले पर स्टाफ भी बंटा हुआ दिख रहा है
इस बीच जेएनयू में देशद्रोह के नारे लगाने के आरोप पर विश्वविद्यालय का स्टाफ बंटा हुआ दिख रहा है। जहां कुछ शिक्षक पुलिस कार्रवाई के समर्थन में हैं वहीं कई इस कार्रवाई की कड़ी निंदा कर रहे हैं। जेएनयू के कई शिक्षकों का मानना है कि पिछले कुछ समय से जानबूझ कर विश्वविद्यालय को देश विरोधी दिखाने की साज़िश हो रही है।

22 फरवरी तक रिपोर्ट वाइस चांसलर को सौंपनी है
उधर, मामले की जांच में लगी जेएनयू की विशेष जांच कमेटी ने पूरी घटना की वीडियो फुटेज के आधार पर कई चश्मदीदों के बयान लिए हैं। 7 छात्रों को कमेटी के सामने पेश होने के लिए नोटिस जारी किया गया है। जांच पूरी होने तक ये छात्र क्लास अटेंड नहीं कर पाएंगे। कमेटी को 22 फरवरी तक अपनी रिपोर्ट वाइस चांसलर को सौंपनी है। मामले की जांच कर रही स्थानीय पुलिस ने इस केस को आतंकी मामलों की जानकार एजेंसी को सौंपने का आग्रह किया है।

40 सेंट्रल यूनिवर्सिटीज के शिक्षक प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में आए
देश की 40 सेंट्रल यूनिवर्सिटीज़ के शिक्षक संघ जेएनयू के प्रदर्शनकारी छात्रों और शिक्षकों के समर्थन में उतर गए हैं। फेडेरेशन ऑफ़ सेंट्रल यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन की अध्यक्ष नंदिता नारायण ने कहा, राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर छात्रों के खिलाफ इस तरह की पुलिस कार्रवाई गैर-जरूरी है। जेएनयू हमेशा से अच्छाई के लिए खड़ा रहा है। आज उनके साथ खड़ा होने की ज़रूरत है। वहीं पुणे FTII के छात्रों ने कहा, जो लोग सरकार की विचारधारा का विरोध करने का साहस करते हैं, सरकार उन्हें इसी तरह डराती और तंग करती है।

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रिश्तेदार ने लॉकडाउन में घर से निकाला, अजनबी आईपीएस ने अपनों से मिलवाया मासूम

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Delhi Police


नई दिल्ली, 25 मई (आईएएनएस)
| माता-पिता जिसके पास 13 साल के बच्चे को विश्वास करके छोड़ गए थे, उसने लॉकडाउन में बच्चों को निकाल बाहर किया। बच्चा कई दिन तक भूखा प्यासा पार्क में रहा। कुत्तों को पार्क में रोटी खिलाने पहुंची एक महिला की नजर जब बच्चे पर पड़ी तो मामले का भांडा फूटा। फिहलाह उड़ीसा कैडर के एक आईपीएस अधिकारी की मदद से अब बच्चा माता-पिता से मिल चुका है। 

घटना दिल्ली के द्वारका इलाके की है। बच्चे के बारे में उड़ीसा कैडर के जिस आईपीएस अधिकारी ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा था उनका नाम अरुण बोथरा है। बकौल अरुण बोथरा, बच्चा कई दिन तक पार्क की बेंच पर ही लेटा-बैठा रहा। जब पार्क में कुत्तों को रोटी खिलाने जाने वाली महिला की नजर बच्चे पर पड़ी, तो वे उसे खाना खिलाती रहीं।

उसके बाद एक एनजीओ की और सोशल मीडिया की मदद ली गई। जिसमें कामयाबी मिल गई। जैसे ही परिवार को पता चला वो बच्चे से मिलने दिल्ली पहुंच गया। हालांकि, बच्चे का परिवार समस्तीपुर में था। किसी आईपीएस अधिकारी संजय ने बच्चे के परिवार को पटना पहुंचाने का इंतजाम किया। फिलहाल बच्चा और परिवार अब साथ साथ हैं।

–आईएएनएस

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सूरत से नवादा जा रही ‘श्रमिक स्पेशल ट्रेन’ में महिला ने दिया बच्चे को जन्म

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आगरा: श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू होने के बाद से ट्रेनों में कई बच्चों का जन्म हो चुका है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है सूरत से नवादा जाने वाली श्रमिक स्पेशल ट्रेन में। रेलवे अधिकारियों को सूचना मिली कि एक महिला प्रसव पीड़ा से है। सूरत से नवादा जा रही इस ट्रेन को आगरा स्टेशन पर रोक कर सुरक्षित डिलीवरी करायी गयी।

इस बात की जानकारी रेलवे ने ट्वीट करके दी है। रेलवे के मुताबिक, रेल अधिकारियों को सूरत से नवादा जाने वाली श्रमिक स्पेशल ट्रेन में एक महिला यात्री को प्रसव पीड़ा की सूचना मिली। आगरा रेलवे स्टेशन पर डॉ. पुल्किता ने तुरंत गाड़ी पर पहुंचकर ट्रेन में ही सुरक्षित डिलीवरी कराई। रेलवे ने बताया है कि मां एवं बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।

गौरतलब है कि इस से पहले आठ मई को गुजरात के जामनगर से चली श्रमिक स्पेशल ट्रेन में भी एक महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया था। 13 मई को अहमदाबाद-फैजाबाद श्रमिक स्पेशल ट्रेन में आरपीएफ कर्मियों की सहायता से एक महिला ने बच्चे को जन्म दिया था। कानपुर में उसे चिकित्सकीय देखभाल मुहैया करायी गई थी।

ट्रेनों में सबसे अधिक सात बच्चों का जन्म पश्चिम मध्य रेलवे में हुआ है। वहीं तीन-तीन बच्चों के जन्म दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे और उत्तर मध्य रेलवे में हुए हैं। मध्य रेलवे में दो और पूर्व मध्य रेलवे, उत्तर रेलवे, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे, दक्षिण मध्य रेलवे, उत्तर पूर्व रेलवे और पश्चिम रेलवे में एक-एक बच्चे का जन्म हुआ है।

–आईएएएनएस

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केजरीवाल ने एम्स के पूर्व डॉक्टर के निधन पर शोक जताया

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नई दिल्ली: एम्स के मेडिसिन विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. जे.एन. पांडेय का कोरोनावायरस के कारण निधन होने के एक दिन बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शोक व्यक्त किया है। केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा, “डॉ. पांडेय के परिवार के प्रति हरी संवेदना।

लंबे समय तक सेवा देने के बाद वह एम्स से सेवानिवृत्त हुए थे, लेकिन उन्होंने दूसरे अस्पताल में तब तक काम करना जारी रखा जब तक कि इस सप्ताह कोरोनावायरस के कारण दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से उनका निधन नहीं हो गया। दिल्ली आपको सलाम करता है सर। आपकी आत्मा को शांति मिले।”

एक पल्मोनोलॉजिस्ट और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के मेडिसिन विभाग के पूर्व अध्यक्ष पांडेय मंगलवार को कोरोना पॉजिटिव निकले थे। वह 79 साल के थे और उनमें कोरोना के हल्के लक्षण थे। उनका उनके आवास पर निधन हो गया।

वह वर्तमान में दक्षिण दिल्ली स्थित सीताराम भारतीय इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड रिसर्च से जुड़े थे।

–आईएएनएस

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