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एबीवीपी सदस्यों से झगड़े के बाद जेएनयू का छात्र रहस्यमयी ढंग से हुआ लापता

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नई दिल्ली: दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) का एक छात्र अपने होस्टल में हुए झगड़े के बाद शनिवार से लापता है।

स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी में पढ़ने वाला नजीब अहमद लापता होने से सिर्फ 15 दिन पहले कैम्पस में रहने आया था, लापता के अब से उसके माता-पिता उसके होस्टल के बाहर बैठे विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

कार्यकर्ताओं का आरोप है कि मेस कमेटी के चुनाव के लिए हर छात्र के पास जाकर प्रमोशन करने के दौरान शुक्रवार रात को नजीब अहमद का जंग अखिल एबीवीपी के कार्यकर्ताओं से हुआ था। नजीब ने एबीवीपी के प्रत्याशी को चांटा मार दिया था, जिसके बाद झगड़ा बढ़ गया, और कार्यकर्ताओं ने होस्टल में आकर नजीब की पिटाई की। बीजेपी की छात्र शाखा एबीवीपी ने इस आरोप से इंकार किया है।

एक गवाह ने बताया, “वाम कार्यकर्ताओं ने बीचबचाव किया, और नजीब को बचाने के लिए उसे वॉशरूम में बंद कर दिया, और उसे बाद में वॉर्डन की मौजूदगी में बाहर ले जाया गया, लेकिन उससे भी मदद नहीं मिली, क्योंकि गालीगलौज जारी रही…”।

गवाह के मुताबिक, “अगली सुबह से नजीब का किसी से संपर्क नहीं हुआ है…”

नजीब ने उसी रात अपने माता-पिता से बात की थी, लेकिन जब तक वे यूपी के बदायूं से दिल्ली पहुंचे, नजीब लापता हो चुका था। सोमवार को अपहरण की एफआईआर दर्ज किया है।

जेएनयू छात्रसंघ ने एक बयान जारी कर आरोप लगाया है कि नजीब जिस होस्टल में रहता था, उसमें छात्रों को ‘आतंकित’ करने के लिए लगातार कोशिशें होती रहती हैं। बयान में बताया है, “कल, घटना की रिपोर्ट बनाने के लिए हुई वॉर्डनों की बैठक को भी एबीवीपी के सदस्यों ने बार-बार बाधित किया…”।

जेएनयू प्रशासन ने बयान जारी कर कहा है कि कैम्पस की व्यापक तलाश की जा रही है। यूनिवर्सिटी ने कहा, “जेएनयू की सुरक्षा व्यवस्था से कहा गया है कि लापता छात्र को खोजें… डीन ने सभी होस्टलों के सभी कमरों में तलाश किए जाने के लिए सभी वॉर्डनों को लिखित निर्देश जारी कर दिए हैं…” यूनिवर्सिटी ने यह भी बताया कि वह लगातार पुलिस के संपर्क में है।

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कनॉट प्लेस के मशहूर रेस्तरां लड़ रहे अस्तित्व की लड़ाई

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नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी के कनॉट प्लेस (राजीव चौक) स्थित देश की आजादी के समय के रेस्तरां में कुछ समय पहले तक बड़ी रौनक रहती थी और यहां खाने-पीने के शौकीन राजनयिकों, राजनेताओं और फिल्मी सितारों का आना-जाना लगा रहता था, मगर अब ये रेस्तरां अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं।

इस चुनौतीपूर्ण समय में यहां के रेस्तरां काफी मुसीबतों का सामना कर रहे हैं। मगर इसके बावजूद यहां सभी निराश नहीं हैं। यहां स्थित यूनाइटेड कॉफी हाउस (यूसीएच) के मालिक भविष्य के बारे में आशावादी बने हुए हैं।

तीसरी पीढ़ी के उद्यमी आकाश कालरा तीन दशकों से रेस्तरां चला रहे हैं। उन्होंने कहा, हम इस बारे में उदास के बजाए कोविड-19 के बाद के समय को देख रहे हैं।

उन्होंने कहा कि लोगों को फिर से रेस्तरां में आने को प्रेरित करने के लिए लोगों के मन में एक उमंग पैदा करने की जरूरत है।

यूनाइटेड कॉफी हाउस ने चित्रकार, समाजसेवी, पत्रकार और राजनेताओं से लेकर फिल्मी सितारों तक की एक भीड़ को आकर्षित किया है। यह रेस्तरां (भोजनालय) शहर के बदलते परि²श्य और खाद्य संस्कृति का गवाह रहा है।

कालरा ने कहा, गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री वी. पी. सिंह से लेकर उस समय तक के जो भी रहें हों, हर कोई रेस्तरां में आया करता था। मशहूर चित्रकार एम. एफ. हुसैन महीने में कम से कम एक बार तो यहां आते ही थे।

उन्होंने कहा कि उनके रेस्तरां के फिल्मी जगत की मशहूर हस्तियां रहे गुरुदत्त, देव आनंद और राज कपूर भी ग्राहक रहे हैं।

यहां के कीमा समोसा, नर्गिसी कोफ्ता और मटन करी काफी प्रसिद्ध रहे हैं, जिनका स्वाद लेने दूर-दराज से लोग आते रहे।

किसने सोचा होगा कि 78 साल बाद इस तरह के रेस्तरां का एक निर्जन रूप भी दिखाई देगा और जहां खाने के लिए आए लोगों की ऊजार्वान वातार्लाप चलती थी, वहां की स्थिति मौन में बदल जाएगी।

कोविड-19 महामारी का असर क्षेत्र के अन्य रेस्तरां पर भी पड़ा है। कनॉट प्लेस के डी ब्लॉक में स्थित द एंबेसी भी आजादी के समय का विख्यात रेस्तरां है, जो राष्ट्रव्यापीं बंद का खामियाजा भुगत रहा है।

इसकी स्थापना 1948 में दो भागीदारों, पी.एन. मल्होत्रा और जी.के. घई (जो विभाजन के बाद कराची से दिल्ली आए थे) ने की थी। 72 वर्ष पुराने इस रेस्तरां पर भी अब बंद का असर साफ देखने को मिल रहा है।

इस रेस्तरां में राज कपूर, यश चोपड़ा, लॉर्ड माउंटबेटन, अरुण जेटली और शीला दीक्षित जैसी बड़ी फिल्मी व राजनैतिक हस्तियों का आना रहता था। यहां के मटन चॉप्स, द सिगनेचर एंबेसी समोसा, मुगले मुसल्लम और दाल मीट का जायका लोगों के मुंह में पानी ला देता था।

इस रेस्तरां को फिलहाल पी. एन. मल्होत्रा के पोते कुमार सावर मल्होत्रा चलाते हैं। उन्होंने कहा, हमारे रेस्तरां के अलावा शहर में यूनाइटेड कॉफी हाउस, क्वॉलिटी और होस्ट जैसे तीन अन्य पुराने रेस्तरां हैं। वे दिल्ली के पर्याय हैं और इन्हें इस चुनौतीपूर्ण समय में सरकार द्वारा समर्थन दिया जाना चाहिए।

मल्होत्रा ने उद्योग के लिए तत्काल राहत और पुनरुद्धार के लिए सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।

–आईएएनएस

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दिल्ली के आनंद विहार में एक रिहायशी बिल्डिंग में लगी आग

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प्रतीकात्मक तस्वीर

दिल्ली के आनंद विहार इलाके की एक रिहायशी बिल्डिंग में आग लगी। राहत और बचावकार्य के लिए फायर ब्रिगेड की 7 गाड़ियां घटनास्थल के लिए रवाना हुई।

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श्रमिक स्पेशल ट्रेन के सामने कूदा ट्रैफिक पुलिसकर्मी, मौत

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प्रतीकात्मक तस्वीर

आगरा (उप्र): आगरा में 48 वर्षीय ट्रैफिक हेड कांस्टेबल ने तेज रफ्तार श्रमिक स्पेशल ट्रेन के सामने कूदकर कथित रूप से आत्महत्या कर ली।

कथित तौर पर हेड कांस्टेबल अशोक कुमार अवसाद में थे। वह 1997 में यातायात पुलिस में शामिल हुए थे। उनके परिवार में पत्नी और तीन बच्चे हैं। उनके दो बेटे भी उत्तर प्रदेश पुलिस में कॉन्स्टेबल हैं।

कुमार इंटरसेप्टर की ड्यूटी के लिए तैनात थे, लेकिन हाल ही में रकाबगंज पुलिस सर्कल के तहत बिजली घर इलाके में उन्हें ट्रैफिक मैनेजमेंट की ड्यूटी दी गई थी। मंगलवार को वह दो दिन की छुट्टी के बाद ड्यूटी पर आए थे।

बुधवार को उनका शव आगरा फोर्ट रेलवे स्टेशन से 2 किमी दूर पाया गया।

घटना के बाद आगरा के एसएसपी बबलू कुमार और अन्य पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।

रकाबगंज के एसएचओ विकास तोमर ने कहा, “आत्महत्या के पीछे का सही कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन बिजली घर ट्रैफिक ड्यूटी पर तैनात उनके सहयोगी ने कहा कि छुट्टी से लौटने के बाद कुमार उदास दिखे। उनका कहना था कि वह हमेशा मजाक के मूड में रहते थे। चूंकि उनका परिवार अभी सदमे की स्थिति में है, लिहाजा हम उनसे बाद में बात करेंगे।”

–आईएएनएस

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