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राजनीति

जेटलीजी और सत्ता के पक्ष में होने से ज्यादा न्यायोचित होना महत्वपूर्ण है : कांग्रेस

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फाइल फोटो

कांग्रेस ने महाभियोग के प्रस्ताव को केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली द्वारा ‘प्रतिशोध की याचिका’ करार दिए जाने वाले बयान पर शनिवार को पलटवार किया। कांग्रेस ने कहा कि ‘सत्ता के यथोचित पक्ष में होने से ज्यादा न्यायोचित होना महत्वपूर्ण है।’

सिलसिलेवार ट्वीट के जरिए कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सौमित्र सेन को अपदस्थ करने के लिए न्यायाधीश जांच अधिनियम के तहत संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किया। उन्होंने ट्वीट के साथ महाभियोग को समर्थन करते हुए जेटली का एक वीडियो भी पोस्ट किया।

वीडियो का हवाला देते हुए कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “श्रीमान जेटली, आपने जब न्यायमूर्ति सेन के महाभियोग के पक्ष में दलील पेश की थी तो किसी ने आपके ऊपर प्रतिशोध की राजनीति करने का आरोप नहीं लगाया था। यूपीए सरकार ने न्यायाधीश जांच अधिनियम के तहत संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किया था। ऐसा प्रतीत होता है कि इस मामले में आपका रुख भी यही था।”

एक अन्य ट्वीट में सुरजेवाला ने 2015 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्त आयोग (एनजेएसी) अधिनियम को विफल करने पर जेटली की प्रतिक्रिया का जिक्र किया।

उन्होंने कहा, “श्रीमान जेटली, सत्ता के यथोचित पक्ष में होने से ज्यादा न्यायोचित होना महत्वपूर्ण है। आपकी याददाश्त को ताजा करने का वक्त है। अगर सांसद महाभियोग की संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हैं तो यह बदले की राजनीति है। अगर जेटली जी सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को अनिर्वाचित की निरंकुशता कहते हैं तो यह विधिमान्य विचार है।”

जेटली ने शुक्रवार को कांग्रेस पर महाभियोग प्रस्ताव को राजनीतिक औजार के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और कहा कि यह न्यायाधीश बी.एस. लोया की मौत मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद न्यायपालिका को धमकाने की प्रतिशोधात्मक याचिका है।

कांग्रेस की अगुवाई में राज्यसभा में सात दलों के 64 सदस्यों ने शुक्रवार को उपराष्ट्रपति व राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू को प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा को कदाचार के पांच आधारों पर हटाने के लिए महाभियोग लाने का प्रस्ताव सौंपा है।

–आईएएनएस

राजनीति

मोदी के इस बर्ताव से खफा हैं ममता

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समय की कमी के कारण विश्व भारती विश्वविद्यालय के उच्चतम पुरस्कार को प्रदान नहीं करेंगे।

बता दें कि देसीकोत्तम नामक यह पुरस्कार दीक्षांत समारोह के दौरान दिया जाना था। इस पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

वहीं विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति सबुजकली सेन ने कहा कि पहले भी ऐसा हो चुका है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित व्यक्तियों को वार्षिक दीक्षांत समारोह में पुरस्कार नहीं दिया गया, बाद में विश्वविद्यालय ने विशेष समारोह आयोजित कर प्रदान किया।

शांति निकेतन में संवाददाताओं से बातचीत में कार्यवाहक कुलपति ने कहा है कि समय की कमी के कारण पुरस्कार समारोह स्थगित किया जा रहा है। 60 के दशक में भी समय की कमी के कारण पुरस्कार प्रदान नहीं किया गया था। बाद में इसे प्रतिष्ठित व्यक्तियों को दिया गया। उधर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पर नाखुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि समय की कमी के कारण प्रधानमंत्री के पुरस्कार वितरण न करने के फैसले से वह हैरान हैं।

अप्रैल में विश्व भारती एकेडमिक काउंसिल ने बॉलीवुड स्टार अमिताभ बच्चन, लेखक अमिताव घोष,कवि गुलजार, लेखर सुनीति कुमार पाठक, रबिंद्र संगीत, भौतिक शास्त्री अशोक सेन आदि को देसीकोत्तम अवार्ड से सम्मानित करने का निर्णय किया था। विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने मई में सभी नामों को मंजूरी दी थी।

उधर मुख्यमंत्री बनर्जी ने कहा है कि मैं नाखुश हूं, जिन्हें लगता था कि उन्हें अवार्ड मिलने जा रहा, अब वो नहीं पाएंगे। अमिताभ बच्चन, द्विजेन मुखर्जी का नाम सम्मान पाने वालों की सूची में था, ये सभी राजनीति से ऊपर हैं। मैं इसके कारणों को नहीं जानना चाहती, मगर यह बहुत ठेस पहुंचाने वाला है। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह राजनीति की जगह नहीं है।

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योगी ने किया शिवाजी का अपमान: शिवसेना

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शिवसेना ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि इसके रास्ते में जो भी आ रहा है वह उसे खंजर मार रही है।

बता दें कि शिवसेना ने विरार में रैली के दौरान मराठा योद्धा छत्रपति शिवाजी की तस्वीर पर माल्यार्पण के दौरान अपनी खड़ाऊ रूपी चप्पल नहीं उतारने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की निंदा। 28 मई को पालघर लोकसभा उपचुनाव के लिए योगी रैली करने आये थे।

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में कहा है कि उत्तर प्रदेश के ढोंगी मुख्यमंत्री ने चुनाव अभियान के लिए पालघर का दौरा किया और कहा कि शिवसेना ने भाजपा की पीठ में खंजर घोंपा। यह दिखाता है कि वह छत्रपति शिवाजी के इतिहास को नहीं समझ पाए हैं। पार्टी ने आरोप लगाया है कि आज भाजपा एक पागल हत्यारा बन गई है जो अपने रास्ते में आने वाले किसी को भी खंजर मार रही है। फडणवीस ने हाल में कहा था कि शिवसेना ने पालघर लोकसभा उपचुनाव में दिवंगत सांसद चिंतामन वनगा के पुत्र को चुनाव मैदान में उतारकर भाजपा को धोखा दिया है।

शिवसेना ने कहा कि भाजपा ने पालघर उपचुनाव के लिए कांग्रेस के पूर्व नेता राजेन्द्र गावित को उम्मीदवार बनाने का कृत्य किया और भाजपा सेना के खिलाफ बोल रही है। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ या देवेन्द्र फडणवीस को पीठ में खंजर भोंकने की भाषा नहीं जंचती है।

शिवसेना ने कहा कि भाजपा उन लोगों को अवसर दे रही है जिन्होंने बाला साहेब (ठाकरे) की पीठ में खंजर भोंका था, जब वह जीवित थे।

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कर्नाटक: कुमारस्वामी ने जीता फ्लोर टेस्ट

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फाइल फोटो

कर्नाटक विधानसभा में मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने फ्लोर टेस्ट जीता है। कांग्रेस और जेडीएस के कुल 117 विधायकों ने उन्हें समर्थन दिया है।

बीजेपी विधायकों ने फ्लोर टेस्ट से पहले कर्नाटक विधानसभा से वॉकआउट किया। बीजेपी नेता येदियुरप्पा ने कहा कि अगर सरकार ने किसानों का कर्ज माफ नहीं किया तो सोमवार से राज्यभर में प्रदर्शन करेंगे।

बीजेपी विधायक दल के नेता बीएस येदियुरप्पा को कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष का नेता चुना गया। नवनिर्वाचित विधानसभा अध्यक्ष के.आर. रमेश कुमार ने सदन के पीठासीन अधिकारी के रूप में उनके निर्वाचन के तुरंत बाद यह घोषणा की। कुमार ने कहा कि गोविंद कारजोल विपक्ष के उपनेता होंगे।

कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए बीजेपी नेता सुरेश कुमार के नाम वापस लिए जाने के बाद कांग्रेस विधायक के.आर. रमेश कुमार को सर्वसम्मति से कर्नाटक विधानसभा का अध्यक्ष चुना गया।

बता दें कि 104 सीटों वाली सबसे बड़ी पार्टी के रूप में आमंत्रित किए जाने के बाद भाजपा के बीएस येदियुरप्पा ने सीएम पद की शपथ ली थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के शक्ति परीक्षण के आदेश के बाद विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने से पहले ही इस्तीफा दे दिया था। 224 सदस्यों वाली विधानसभा में 221 सीटों पर चुनाव हुए हैं।

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