सर्दियों में रहना है फिट, तो रोज खाएं ये 5 चीजें | WeForNewsHindi | Latest, News Update, -Top Story
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सर्दियों में रहना है फिट, तो रोज खाएं ये 5 चीजें

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सर्दियां शुरू होते ही जुकाम, खांसी, और बुखार की समस्याएं शुरू हो जाती हैं। मौसम बदलने पर ये परेशानियां आम हैं। मौसम के बदलने का असर सबसे ज्यादा छोटे बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ता है।

इस मौसम में होने वाली इन आम बीमारियों से बचाव के लिए और सर्दियों में फिट रहने के लिए आपको कुछ आहारों का नियमित सेवन करना जरूरी है। जो इस मौसम में आसानी से मिल जाता हैं। खाने-पीने के मामले में सर्दियां साल का सबसे अच्छा मौसम हैं क्योंकि इस दौरान तमाम ऐसी चीजें उपलब्ध होती हैं, जो शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होती हैं।

आइए हम आपको बताते हैं कि कौन से आहार आपको बीमारियों से बचा कर रखेगें..

आंवला

आंवला विटामिन सी से भरपूर होता है। आंवले में कई ऐसे न्यूट्रिशंस होते हैं, जो सर्दियों में बेहद फायदेमंद होते हैं। इसमें मौजूद विटामिन सी शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। साथ ही इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट शरीर में मौजूद हानिकारक रसायनों को बाहर निकलते हैं। इसके सेवन से ब्लड शुगर कंट्रोल होता है और एनीमिया से भी बचा जा सकता है। रोज 50 ग्राम के दो आंवले खाने से 0.5 ग्राम प्रोटीन, 13.7 ग्राम कार्बोहाइट्रेट, 58 ग्राम कैलरी और 1.2 मिलीग्राम आयरन मिलता है।

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पालक

हरी पत्तेदार सब्जियों में पालक सबसे बैस्ट है। इसमें प्रोटीन,विटामिन,आयरन के अलावा और भी बहुत से तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। सब्जियों के साथ पालक का सूप पीने से शरीर में पानी की कमी पूरी होती है। पालक को आप सब्जी के रूप में भी खा सकते हैं।

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गाजर

सर्दियों में हमें विटामिन व न्यूट्रिशंस से भरपूर कई प्रकार की चीजें खाने को मिलती हैं। उनमें से एक गाजर है। गाजर में भरपूर मात्रा में विटामिन और मिनरल्स होते हैं। इसमें विटामिन ए, विटामिन बी, सी, कैल्शियम और पैक्टीन फाइबर होता है, जो सर्दियों में कॉलेस्ट्रोल का लेवल बढ़ने नहीं देता।

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रोजाना गाजर का जूस पीने से सर्दी व जुकाम से रक्षा होती है। गाजर का जूस शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली को मजबूत बनाता है जिससे आप इस मौसम में बैक्‍टीरिया और वायरस से बचे रहते हैं।

सिंघाड़ा

मखाने की तरह पानी में पैदा होने वाले तिकोनाकार फल सिंघाड़ा सर्दियों के मौसम में अक्सर आपने सब्जी के बाजार में देखा होगा। सिघाड़े में साइट्रिक एसिड, एमिलोज, कर्बोहाइड्रेट, टैनिन, बीटा-एमिलेज, प्रोटीन, फैट, निकोटेनिक एसिड, रीबोफ्लेविन, थायमाइन, विटामिन्स-ए, सी, मैगनीज तथा फास्फोराइलेज आदि होते हैं। ये सर्दियों में खाये जाना वाला एक अच्छा फल है।

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चुकंदर

चुकंदर का सबसे बड़ा गुण शरीर में रक्‍त बढ़ाना होता है। लौह तत्व के अलावा चुकंदर में कई विटामिन भी भरपूर मात्रा में होते हैं। इसके नियमित सेवन से शरीर में विटामिन ए, बी, बी 1, बी 2, बी 6 व विटामिन सी की जरूरत पूरी हो जाती है। साथ ही इसमें सोडियम पोटेशियम, फॉस्फोरस, क्लोरीन, आयोडीन और आयरन भी होता है। चुकंदर का सेवन शरीर से अनेक हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने में बेहद लाभदायी है।

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कंप्यूटर, रसायन, फार्मेसी, बायोटेक्नोलॉजी के छात्र ढूढ़ेंगे कोरोना की दवा

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coronavirus
प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली। देश में तेजी से फैल रहे कोरोना वायरस की दवा तैयार करने में अब कंप्यूटर विज्ञान, रसायन विज्ञान, फार्मेसी, चिकित्सा और जैव प्रौद्योगिकी (बायोटेक्नोलॉजी) जैसे विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवर, शिक्षक, शोधकर्ता और छात्र भी हिस्सा लेंगे।

किसी दवा की खोज में हो रहे प्रयासों को संबल देने के लिए यह अपने आप में एक अनोखी राष्ट्रीय पहल है। इस विषय पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा, किसी दवा की खोज करना एक बेहद जटिल और महंगी प्रक्रिया है।

इस प्रक्रिया को कम समय में और कम लागत में पूरा करने के लिए कम्प्यूटेशनल ड्रग डिजाइन प्रक्रिया का उपयोग किया जा रहा है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय मंत्री ने कहा, इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पहल दुनिया भर के शोधकर्ताओं के लिए है क्योंकि हम अपने प्रयासों में अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं को शामिल करने के लिए भी इच्छुक हैं।

इस कार्य योजना के लिए गुरुवार को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने संयुक्त रूप से ड्रग डिस्कवरी हैकाथॉन लांच किया।

इसमें अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) भी शामिल हैं। इस हैकाथॉन को तीन ट्रैक्स में पूरा किया जायेगा। पहले ट्रैक में ड्रग डिजाइन के लिए कम्प्यूटेशनल मॉडल का इस्तेमाल किया जायेगा या मौजूदा डाटाबेस से ऐसे कंपाउंड की पहचान की जाएगी जिसमें कि सार्स-कोव-2 को रोकने की क्षमता हो।

दूसरे ट्रैक में प्रतिभागियों को डाटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस एवं मशीन लनिर्ंग का उपयोग करके नए उपकरण और एल्गोरिदम विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जायेगा ताकि न्यूनतम विषाक्तता और अधिकतम विशिष्टता के साथ दवा जैसे कंपाउंड को ढूंढा जा सके। तीसरे ट्रैक में मून-शॉट दृष्टिकोण के द्वारा केवल नए और अनूठे विचारों को देखा व समझा जायेगा। यह हैकाथॉन सीडैक (सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग), मायगाव, श्रोडिंगर और केमाक्सोन द्वारा समर्थित है।

आईएएनएस

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पूर्व आईआईटीयन ने डिओ से सैनिटाइजर बनाया

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कानपुर, 2 जुलाई (आईएएनएस)। आईआईटी-गुवाहाटी के एक सहायक प्रोफेसर के साथ मिलकर आईआईटी-कानपुर के एक पूर्व छात्र ने एक डिओडरेंट-कम-सैनिटाइजर तैयार किया है। यह न केवल कोरोनावायरस के खतरे को लगभग 7 से 10 घंटे तक दूर रखता है बल्कि खुशबू भी देता है।

इस परियोजना में इन दोनों लोगों ने कानपुर के फ्रेगरेंस एंड फ्लेवर डेवलपमेंट सेंटर के साथ मिलकर काम किया है। आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र आंशिक गंगवार ने कहा कि यह नया डिओडरेंट त्वचा और पर्यावरण के अनुकूल है और इसकी गंध तनाव से भी छुटकारा दिलाती है।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, डिओडोरेंट का उपयोग शरीर और कपड़ों पर किया जा सकता है। इसमें सैनिटाइजर के घटक हैं जो कि कोरोनावायरस से लड़ने में मदद करते हैं। हमें पेटेंट मिल गया है और सैनिटाइजर-कम डिओडोरेंट शीघ्र ही बाजार में उपलब्ध होगा।

इस प्रोडक्ट में 80 प्रतिशत एथिल अल्कोहल, 10 प्रतिशत ग्रीन ऑयल, 10 प्रतिशत मॉइस्चराइजर न्यूट्रोगेना ऑयल और खुशबू के सुगंधित तेलों का भी उपयोग किया गया है।

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टेक

चीनी एप की टक्कर में ‘बिहारी ब्राउजर

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Photo-Ians

नई दिल्ली, बिहार के युवा सिर्फ चीन की सीमाओं पर ही नहीं, तकनीक पर भी चीन को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। देश में चल रहे चाइनीज एप्स के बहिष्कार के अभियान और केंद्र सरकार द्वारा 59 चायनीज एप्स को बंद किए जाने के बाद मेड इन इंडिया एप की मांग बढ़ी है।

इसी क्रम में दो बिहारी युवाओं का बनाया मैगटैप नाम के वेब ब्राउजर गूगल प्ले स्टोर पर खूब डाउनलोड किया जा रहा है। गूगल प्ले स्टोर पर आने के कुछ महीनों में ही इसे 8 लाख से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चूका है और फिलहाल इसकी रेटिंग 4़ 9 है।

एप से जुड़े सत्यपाल चंद्रा बताते हैं कि मैगटैप पूरी तरह से मेड इन इंडिया है। उन्होंने कहा, मैगटैप एक विजुअल ब्राउजर के साथ-साथ डक्यूमेंट रीडर, ट्रांसलेशन और ई-लनिर्ंग की सुविधा देने वाला एप है। इस एप को खास तौर पर देश के हिंदी भाषी छात्रों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

उन्होंने दावा करते हए कहा, प्ले स्टोर पर एजुकेशन कैटेगरी में यह एप दुनिया भर में पहले नंबर पर है। हाल ही में इसका वर्जन 2 भी लांच किया गया है। वर्जन 2 के लांच होने और फिर चायनीज ऐप्स पर बैन के बाद मैगटैप को 2़ 5-3 लाख के करीब डाउनलोड किया गया है।

वे कहते हैं कि इंटरनेट पर अधिकतर अच्छी जानकारियां अंग्रेजी में हैं, ऐसे में उन्हें पढ़ते वक्त यह एप किसी भी शब्द, वाक्य या पूरे पैराग्राफ को भी हिंदी सहित देश की 12 भाषाओँ में अनुवाद कर सकता है। साथ में कोई भी दूसरा एप जैसे- व्हाट्सएप, फेसबुक, मैसेंजर आदि में भी किसी शब्द पर टैप कर उसका अर्थ जाना जा सकता है।

मैगटैप को डेवलप करने वाले रोहन कुमार ने बताया कि उन्होंने अभी ही इसका अपडेटेड वर्जन मैगटैप 2़ 0 लांच किया है। इस नए अपडेट में कई और सुविधाएं जोड़ी गयी हैं, जिससे यह एप चीन की यूसी ब्राउजर के साथ ही गूगल के क्रोम और ओपेरा ब्राउजर से भी बेहतर साबित होगा।

उन्होंने दावा करते हुए कहा कि एप का ट्रांसलेशन फीचर अब 12 भारतीय भाषाओँ के साथ फ्रेंच, जर्मन, इटालियन और अरबी समेत 29 विदेशी भाषाओं में भी पल भर में अनुवाद कर सकेगा।

इससे भारत में हिंदी सहित कोई भी भाषा जानने वाले लोग अपने देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर की सभी मुख्य भाषाओं को घर बैठे सीख सकते हैं। इसके अलावा इस नए अपडेट में आवाज से आवाज और चित्र से आवाज में अनुवाद की भी सुविधा दी गई है।

मैगटैप ऐप बनाने वाली कंपनी मैगटैप टेक्नोलॉजी का मुख्यालय मुंबई में है। यह कंपनी भारत सरकार के स्टार्टअप योजना से भी जुड़ी है। कंपनी के दोनों फाउंडर, सत्यपाल चंद्रा जहां गया के रहने वाले हैं वहीं रोहन सिंह समस्तीपुर के हैं। मैगटैप को रोहन ने डिजाईन किया है और इसके तकनीकी पक्षों को संभालने में उनके 18 वर्षीय भाई अभिषेक सिंह मदद करते हैं।

नक्सल प्रभावित गया के इमामगंज प्रखंड के रहने वाले सत्यपाल चंद्रा अभाव और गरीबी के बीच प्रारंभिक पढाई पूरी कर कमाने के इरादे से वे दिल्ली चले गए। सत्यपाल ने करीब छह माह दिनरात मेहनत कर अंग्रेजी बोलना-लिखना सीखा। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई अंग्रेजी उपन्यास लिख डाले। उनकी किताबें द मोस्ट इलिजिबल बैचलर और व्हेन हेवेन्स फॉलडाउन काफी चर्चित रही हैं।

समस्तीपुर के मोहनपुर प्रखंड के निवासी रोहन सिंह ने 19 साल की उम्र में ही वेब डेवलपर के तौर पर काम किया है।

–आईएएनएस

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