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राजनीति

SSC पेपर लीक मामले में कांग्रेस बोली- ‘मोदी सरकार का नाम पेपरलीक सरकार रख देना चाहिए’

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सुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार की नाक के नीचे युवाओं के भविष्य से ये खिलवाड़ क्यों किया गया।

कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया है। सुरजेवाला ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि अब तक एसएससी के सात पेपर मोदी सरकार में लीक हो चुके हैं। अब मोदी सरकार का नया नाम पेपर लीक सरकार होना चाहिए है।

उन्होंने कहा कि व्यापम घोटाले में 73000 युवाओं का भविष्य अंधकारमय हुआ था वहीं SSCscam के बाद 2 करोड़ युवाओं के भविष्य पर अंधकार छा गया है।

सुरजेवाला ने कहा कि CGLE- 2017 के पेपर लीक का समय 10:30 बजे था जबकि, इसकी आंसर की लगभग 9:30 बजे ही सार्वजनिक हो गयी। विद्यार्थियों ने इस आंसर की के लीक होने की प्रक्रिया के स्क्रीनशॉट्स लिए हैं।

उन्होंने कहा कि CHSL का पेपर जब पटना में लीक हो चुका था तो परीक्षा को रद्द क्यों नहीं किया गया? जबकि आयोग प्रेस विज्ञप्ति के जरिए मान चुका था कि पेपर लीक हुआ है। मोदी सरकार की नाक के नीचे युवाओं के भविष्य से ये खिलवाड़ क्यों किया गया।

सुरजेवाला ने कहा कि एक ही विद्यार्थी को 700 प्रवेश पत्र मिल रहे हैं। इतनी बड़ी गड़बड़ कैसे हुआ? क्या यही भाजपा सरकार की परीक्षा प्रणाली है।

उन्होंने कहा कि एसएससी के पास पेपर अपलोड करने का कोई सुरक्षित माध्यम नहीं है। ये काम निजी कम्पनी के जरिए किया जा रहा है। जो सरकार एसएससी का सर्वर और सॉफ्टवेयर भी नहीं चला सकती, उसको सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।

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चुनाव

गहलोत ने राजस्थान सीएम और पायलट ने डिप्टी सीएम की ली शपथ

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ashok gehlot and sachin pilot

जयपुर के अल्बर्ट हॉल में सोमवार को अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री पद की और सचिन पायलट ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत कई नेता शामिल हुए। वहीं राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुईं।

इससे पहले गहलोत और पायलट के आवास पर उनके समर्थकों और पार्टी के कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगा हुआ था। लोगों ने अपने नेता को बधाई दी। फूल और मालाएं पहनाई।

शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने से पहले अशोक गहलोत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि एक बार जब कैबिनेट को लेकर फैसला हो जाए। मुख्यमंत्री कैबिनेट की सालाह पर काम करना शुरू कर देंगे। जनता के हित में जो कुछ भी होगा वह किया जाएगा। घोषणापत्र हमारी पहली प्राथमिकता होगी।

वहीं शपथग्रहण समारोह से पहले जयपुर में सचिन पायलट के आवास पर भी समर्थकों का जमावड़ा लगा रहा। इस दौरान पायलट ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि राज्य और लोगों के लिए यह नई शुरूआत है। लोगों ने हम पर भरोसा किया है। आज से ही काम शुरू हो जाएगा। जैसे ही कैबिनेट बनेगा और बेहतर ढंग से काम होगा और लोगों से किए गए वोदों को हम पूरा करेंगे और उनकी उम्मीदों पर खरे उतरेंगे।

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राजनीति

रायबरेली के सरकारी कार्यक्रम को मोदी ने बना दिया अखाड़ा: कांग्रेस

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pm modi
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)।

कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी ने रायबरेली में रेल कोच फैक्ट्री के विस्तार परियोजना का शुभारंभ करते हुए उसे राजनीतिक अखाड़ा बना दिया।

प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता ओंकारनाथ सिंह ने कहा कि आश्चर्य की बात है कि प्रधानमंत्री ने इसका भी संज्ञान नहीं लिया कि इस सरकारी कार्यक्रम में प्रदेश के राज्यपाल और उप्र विधानसभा के अध्यक्ष उपस्थित हैं। उन्होंने इन दोनों महान विभूतियों को विषम स्थिति में डाल दिया। उन्होंने यह ख्याल भी नहीं रखा कि सभी राजनीतिक दल और प्रदेश की जनता राज्यपाल को निर्विवाद रूप में देखती है और उनसे न्याय की अपेक्षा करती है। साथ ही सभी राजनीतिक दल के विधायक विधानसभा अध्यक्ष से निष्पक्ष निर्णय की अपेक्षा रखते हैं।

सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सरकारी कार्यक्रम के मौके पर कांग्रेस पार्टी के नेताओं की आलोचना कर जो इसे राजनीतिक मंच बना दिया, उसकी जितनी भी निंदा की जाए, कम है।

प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता ने आईपीएन को दिए अपने बयान में कहा कि अच्छा होता भाजपा इस कार्यक्रम के बाद अपना कार्यक्रम करती और उसमें प्रधानमंत्री जो चाहते, बोलते। इससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री सहित अपने सभी नेताओं की जो भी रैली करती है, उसको सरकारी रूप इसीलिए देती है, ताकि सरकार के पैसे का उपयोग पार्टी के हित के लिए कर सके।

प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री उप्र की धरती पर संबोधन कर रहे थे, पर बुलंदशहर में हुए दंगे के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा। राफेल के बारे में स्पष्टीकरण देने के बजाय जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया। प्रदेश की कानून व्यवस्था पर एक शब्द भी नहीं बोले।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई का उदाहरण देते हुए जो कहा है ‘झूठहि लेना झूठहि देना, झूठहि भोजन झूठ चबेना’ यह उन्हीं पर सीधे-सीधे चरितार्थ होता है, क्योंकि जनता से उन्होंने 2 करोड़ नौकरी प्रतिवर्ष देने का वादा किया, 15 लाख खाते में देने का वादा किया, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का वादा किया, नोटबंदी के फायदे का असर पचास दिन में दिखाने का वादा किया और जीएसटी से व्यापार व्यवस्था में सुधार का वादा किया, जिसमें कोई भी वादा सफल नहीं हो पाया, सभी झूठा साबित हो चुका है। जनता को निराश होना पड़ा और उसी का परिणाम है कि अभी पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री की सभा में भीड़ न जुट पाने पर जिला प्रशासन को भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी दी गई। इससे साबित होता है कि अब भारतीय जनता पार्टी को प्रदेश और देश की जनता ने नकार दिया है।

–आईएएनएस

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चुनाव

राजनीति के ‘जादूगर’ हैं राजस्थान के नये मुख्यमंत्री

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राजस्थान के नये मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को प्रदेश की सियासत में जमीन से जुड़ा नेता कहा जाता है। काफी समय से राजनीति में सक्रिय गहलोत राजस्थान में काफी लोकप्रिय रहे और उन्हें ‘राजनीति का जादूगर’ और ‘मारवाड़ का गांधी’ जैसे उपनामों से भी बुलाया जाता है।

गहलोत ने समय-समय पर पार्टी को न सिर्फ ऊंचाई दी बल्कि विरोधियों को भी बता दिया राजनीति के दंगल में उनका नाम ही काफी है।

बता दें कि साल 2013 के राजस्थान विधानसभा चुनाव और फिर 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली हार के बाद भी अशोक गहलोत ने राज्य में अपनी पार्टी को प्रासंगिक बनाए रखा। राजनीति में माहिर गहलोत ने 2018 के राज्य विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बहुमत के जादुई आंकड़े के करीब लाने में अहम भूमिका निभाई।

राजनीतिक जानकारों की माने तो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी अशोक गहलोत को राजनीति में लेकर आईं। गहलोत के रूप में इंदिरा गांधी ने एक हीरा देखा जिसे कांग्रेस को समय-समय पर चमकाना था। दरअसल उस दौरान गहलोत पूर्वोत्तर क्षेत्र में शरणार्थियों के बीच अच्छा काम कर रहे थे और इंदिरा उनके काम से काफी खुश थीं।

3 मई 1951 को जन्मे गहलोत ने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1974 में एनएसयूआई के अध्यक्ष के रूप में की। 1971 तक इस पद पर रहे। गहलोत 1979 से 1982 तक कांग्रेस पार्टी के जोधपुर जिला अध्यक्ष रहे। 1982 में प्रदेश कांग्रेस कमिटी के महासचिव बने। उसी दौरान गहलोत सांसद बने।

1998 से 2003 और 2008 से 2013 तक राजस्थान के दो बार मुख्यमंत्री रहे। 5 बार लोकसभा सांसद और कई बार मंत्री भी रहे।

गहलोत 1980 से 1999 तक पांच बार 7वीं, 8वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं लोकसभा के लिए भी चुने गए। गहलोत 1999 से जोधपुर के सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वह 11वीं, 12वीं,13वीं और 14वीं राजस्थान विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं।

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