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स्वास्थ्य

अगर डायबिटीज है तो जरूर खाएं ये 5 चीजें

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फाइल फोटो

अगर आप हेल्दी रहना चाहते हैं तो अपनी डेली डाइट में फाइबर रिच फूड जरूर शामिल करिए। भागदौड़ भरी जिंदगी में हमें अपनी डाइट की जरूरतों का ध्यान नहीं रहता है। हम जो भी खाते हैं, वह हमारे शरीर की केवल कुछ जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त होता है।

हमारे शरीर के लिए साइबर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फाइबर शरीर में ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करता है। जर्नल साइंस में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, डायटरी फाइबर की खपत से टाइप 2 डाइबिटीज से भी लड़ने में मदद करता है।

टाइप 2 डायबिटीज से लड़ने के लिए अपनी डाइट में प्रतिदिन 20-35 ग्राम फाइबर लीजिए। डायबिटीज से लड़ने में ये 5 चीजें आपकी मददगार साबित हो सकती हैं।

अलसी-अलसी फाइबर का खजाना है। रोजाना अलसी के सेवन से दिल की बीमारियां कम होती है और स्ट्रोक का खतरा भी कम होता है। ब्लड शुगर लेवल और इंसुलिन सेंसिटिवटी पर भी नियंत्रण करता है।

दालें-दालें प्रोटीन के साथ-साथ फाइबर का भी अच्छा स्रोत होती हैं। दालों में पाई जाने वाली कार्बोहाइड्रेट का कुल 40 प्रतिशत फाइबर ही होता है जो ब्लड शुगर को कम करने में मदद करता है।

समूचा अनाज-गेहूं, ओट्स, जौ फाइबर रिच होते हैं जो धीरे-धीरे पचते हैं। इससे ब्लड शुगर अचानक से नहीं बढ़ पाता है. इसके अलावा वजन घटाने में भी मदद मिलती है।

अमरूद-अमरूद में भी खूब फाइबर होता है। इससे कब्ज से भी लड़ने में मदद मिलती है। डायबिटीज के मरीजों को अक्सर कब्ज की शिकायत रहती है। यह एक बढ़िया स्नैक्स साबित हो सकता है।

इसके अलावा पपीता, चेरीज, तरबूज, हरी पत्तेदार सब्जियां, टमाटर, कद्दू के बीज भी डायबिटीज के मरीजों को खाना चाहिए। इसके अलावा रोजाना एक्सरसाइज भी करनी चाहिए।

मेथी-मेथी के बीज और पत्तियां दोनों ही डायबिटीज से लड़ने में मददगार हैं। भरपूर मात्रा में फाइबर होने से पाचन क्रिया धीमी होती है जिससे शरीर में कार्बोहाइड्रेट्स और शुगर के अवशोषण पर नियंत्रण होता है। ये शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाते हैं. रात को सोने से पहले मेथी के बीज या सुबह मेथी का पानी लेना बहुत फायदेमंद है।

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75 फीसदी मधुमेह रोगियों को होती रेटिनोपैथी : शोध

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भारत में डायबिटीज मेलिटस काफी व्यापक है और इसके रोगियों की संख्या चिंताजनक रूप से बढ़ रही है। डायबिटीज यानी मधुमेह के कारण डायबेटिक मैक्युलर एडीमा (डीएमई) हो सकता है, जो रेटिना का तेजी से फैलने वाला रोग है, जिससे दृष्टिहीनता भी हो सकती है।

मधुमेह से पीड़ित लोगों में अन्य लोगों की तुलना में दृष्टिहीन होने का जोखिम 25 प्रतिशत अधिक होता है। यह तथ्य एक शोध में सामने आया है। डायबेटिक मैक्युलर एडीमा (डीएमई) में रेटिना में तरल संचित हो जाता है। ऐसा रिसती रक्त वाहिकाओं के कारण होता है। यदि किसी व्यक्ति में डायबेटिक रेटिनोपैथी (डीआर) पाई जाती है तो उसे डीएमई हो सकता है। डीएमई डीआर का सबसे आम रूप है।

मधुमेह से पीड़ित प्रत्येक रोगी को डीआर होने का जोखिम रहता है। डीएमई के लक्षणों में धुंधला या अस्पष्ट दिखना, सीधी लाइनों का लहरदार दिखना, कॉन्ट्रैस्ट कम होना या रंग समझने की क्षमता जाना, एक दूरी से देखने में कठिनाई, दृष्टि के केंद्र में छोटा, लेकिन बढ़ता हुआ धब्बा शामिल है।

दिल्ली आई केयर में ऑफ्थेल्मोलॉजिस्ट एवं आई सर्जन डॉ. शशांक राय गुप्ता ने बताया, “मेरे क्लीनिक में आखों की जांच के लिए आने वाले 75 प्रतिशत मधुमेह रोगियों में डायबेटिक रेटिनोपैथी की कोई न कोई अवस्था पाई जाती है। मधुमेह और डायबेटिक मैक्युलर एडीमा (डीएमई) के बढ़ते मामलों को देखते हुए हमें प्रारंभिक अवस्था में रोगियों की पहचान करने के लिये मजबूत ²ष्टिकोण की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि मधुमेह रोगियों को अपनी आंखों के प्रति सजग रहना चाहिए और नियमित अंतराल पर आंखों की जांच करवानी चाहिए, ताकि नेत्र रोग का पता चल सके, खासकर रेटिना के रोग।

दिल्ली आई केयर में आई सर्जन डॉ. शशांक राय गुप्ता ने कहा, “मधुमेह के रोगियों को अपने आंखों के स्वास्थ्य से बेहद सतर्क रहना चाहिए। विशेष रूप से रेटिना के उन लोगों को अक्सर उनकी ²ष्टि जांचनी चाहिए। मधुमेह मैकुलर एडीमा (डीएमई) का बोझ बढ़ रहा है और हमें शुरुआती चरण में रोगियों की पहचान करने के लिए एक मजबूत ²ष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।”

मधुमेह की रोकथाम के उपाय :

-मधुमेह से पीड़ित रोगियों को प्रत्येक 6 माह में ऑफ्थेल्मोलॉजिस्ट को दिखाना चाहिए और तय अपॉइंटमेंट से चूकना नहीं चाहिए।

-रोगियों को डीएमई के लक्षणों के प्रति सचेत रहना चाहिए, जैसे धुंधला या अस्पष्ट दिखाई देना, सीधी लाइनें लहरदार दिखाई देना, रंगों के प्रति असंवेदनशीलता, केंद्रीय दृष्टि में धब्बे, आदि और ²ष्टि में परिवर्तन होने पर तुरंत विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए।

–आईएएनएस

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स्वास्थ्य

बच्चों में बढ़ रहा है डायबिटीज खतरा…

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Diabetes-
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बच्चों में बढ़ता मोटापा आज चिंता का विषय बन चुका गया है। जो कई बीमारियों का कारण बनता जा रहा है।

कई कारणों से बच्चे आज मोटापे का शिकार बन रहे हैं जैसे लगातार टीवी देखना, इंटरनेट, गेमिंग डिवाइसेज पर समय बिताना, खेलकूद की कमी, जंक फूड का सेवन और निष्क्रिय जीवनशैली।  मोटापे का एक घातक परिणाम डायबिटीज के रूप में सामने आता है और डायबिटीज का बुरा असर शरीर के हर अंग पर पड़ता है।

पिछले साल किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया है कि दिल्ली में लगभग 35 फीसदी किशोरों का वजन सामान्य से अधिक है या वे मोटापे से ग्रस्त हैं।आजकल बच्चे खेल-कूद के बजाए इन्डोर गतिविधियों में ज्यादा समय बिताते हैं। ऐसे में मोटापे का शिकार हो जाते हैं और इसका एक घातक परिणाम डायबिटीज के रूप में सामने आता है और डायबिटीज का बुरा असर शरीर के हर अंग पर पड़ता है।”

डायबिटीज नवजात शिशुओं को भी प्रभावित कर सकता है और ज्यादातर लोग इसके बारे में नहीं जानते हैं। नियोनेटल डायबिटीज बच्चों में छह माह की उम्र से पहले भी हो सकता है।”एक अनुमान के अनुसार अकेले दिल्ली में 32 लाख बच्चे डायबिटीज से पीड़ित हैं।

ज्यादातर मामलों में ये बच्चे मोटापे का शिकार होते हैं या इनका वजन सामान्य से अधिक होता है। अध्ययन के अनुसार, बच्चों में मोटापा टाईप 2 डायबिटीज का कारण बन सकता है। लेकिन समय पर निदान के द्वारा रोग के लक्षणों को नियन्त्रण में रखा जा सकता है और प्री डायबिटीज को डायबिटीज में बदलने से रोका जा सकता है।

डायबिटीज का मुख्य कारण असेहतमंद जीवनशैली है और अच्छी आदतों द्वारा इस पर नियन्त्रण पाया जा सकता है। सबसे पहले अपने वजन पर नियन्त्रण रखें। ब्लड शुगर को नियन्त्रण में रखने के लिए बीएमआई सही होना बहुत जरूरी है। इसके लिए काबोर्हाइड्रेट का सेवन सीमित मात्रा में करें।

फाईबर और प्रोटीन से युक्त आहार लें। हरी सब्जियों, फलों, फलियों और साबुत अनाज का सेवन करें।”अगर परिवार में डायबिटीज का इतिहास है तो आपको नियमित रूप से अपने ब्लड शुगर की जांच करवानी चाहिए। अपने ब्लड प्रेशर, कॉलेस्ट्रॉल, ट्राई ग्लीसराईड पर नियन्त्रण रखें। डायबिटीज दिल की बीमारियों का कारण भी बन सकता है। इसलिए ब्लड प्रेशर और कॉलेस्ट्रॉल को नियन्त्रित रखना बहुत जरूरी है।

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रोजाना 3-4 कप कॉफी मधुमेह में मददगार

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रोजाना तीन-चार कप काफी पीने से मधुमेह टाइप-2 का खतरा 25 फीसदी कम हो सकता है। यह सुझाव एक शोध के नतीजों के आधार पर दिया गया है।

मधुमेह टाइप-2 के मामलों में काफी पीने का असर पुरुष और महिला दोनों में पाया गया है। शोध में कैफीन रहित काफी पीने से भी उसी प्रकार का प्रतिरक्षी प्रभाव पाया गया।स्वीडन के कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट के एसोसिएट प्रोफेसर मैट्टियस काल्स्ट्रोम ने कहा कि महज कैफीन नहीं, बल्कि हाइड्रॉक्सीसिनेमिक एसिड्स के कारण यह असर होता है। ‘

हाइड्रॉक्सीसिनेमिक एसिड्स में मुख्य रूप से क्लोरोजेनिक एसिड, ट्राजोनेलिन, कैफेस्टॉल, कॉवियोल और कैफिक एसिड होते हैं।शोध के नतीजे यूरोपीय एसोसिएशन फॉर स्टडी ऑफ डायबिटीज के 2018 में जर्मनी में आयोजित सालाना सम्मेलन में प्रस्तुत किए गए। शोधार्थी दल ने कुल 111,85,210 प्रतिभागियों को शामिल किया और 30 संभावित अध्ययनों की समीक्षा की।

–आईएएनएस

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