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अगर घोषित संपत्ति से मेल नहीं खा रही है 2.5 लाख से ज्यादा जमा की गई रकम तो देना होगा टैक्स और पैनल्टी

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फाइल फोटो

नई दिल्ली: सरकार ने 9 नवंबर रात आगाह किया कि बड़े नोटों का चलन बंद करने के बाद उन्हें जमा कराने की 50 दिन की छूट की अवधि में 2.5 लाख रुपये से अधिक की नकद जमा के मामलों में यदि आय घोषणा में विसंगति पाई गई तो कर और 200 फीसदी जुर्माना देना पड़ सकता है। राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने ट्विटर पर ये जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि 10 नवंबर से 30 दिसंबर 2016 की अवधि में हर बैंक खाते में 2.5 लाख रुपये की सीमा से अधिक की सभी नकदी जमाओं की रपट हमें मिलेगी। अधिया ने कहा कि आयकर विभाग इन जमाओं का मिलान जमाकर्ता के आयकर रिटर्न से करें। उचित कार्रवाई की जा सकती है। खाताधारक की ओर से घोषित आय और जमाओं में किसी तरह की विसंगति को कर-चोरी का मामला माना जाएगा।

अधिया ने कहा कि उन छोटे कारोबारियों, गृहिणियों, कलाकारों व कामगारों को चिंतित होने की जरूरत नहीं है जिन्होंने कुछ नकदी बचाकर घर में रखी हुई है। उन्‍होंने कहा कि इस तरह के लोगों को आयकर विभाग की जांच आदि के बारे में चिंतित होने की जरूरत नहीं है।

उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को 1.5 लाख या दो लाख रुपये तक की छोटी जमाओं को लेकर चिंतित होने की जरूरत नहीं है क्योंकि राशि तो कराधान योग्य आय के दायरे में नहीं आती। इस तरह की छोटी जमाओं वाले खाताधारक आयकर विभाग से किसी तरह के उत्पीड़न की चिंता नहीं करें। लोगों की ओर से आभूषण खरीदे जाने के बारे में उन्होंने कहा है कि जवाहरात खरीदने वालों को पैन नंबर देना होगा।

wefornews bureau

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