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लाइफस्टाइल

सर्दियों में बालों की ऐसे करें देखभाल

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सर्दियों के मौसम में तापमान में गिरावट होने और ठंडी हवाओं के चलने से बालों में रूखापन आ जाता है। प्राकृतिक तेल और नमी चली जाती है, जिससे बाल रूखे और बेजान नजर आते हैं, इसलिए बालों की उचित देखभाल बेहद जरूरी है।

‘द बॉडी शॉप इंडिया’ की प्रमुख (ट्रेनिंग) शिखी अग्रवाल और सौंदर्य विशेषज्ञ ब्लॉसम कोचर ने सर्दियों के दौरान बालों की देखभाल के संबंध में ये सुझाव दिए हैं :

* दो मुंहे व रूखे बालों से छुटकारा पाने के लिए सर्दियों में हर कुछ हफ्ते पर नियमित रूप से ट्रिमिंग कराएं।

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* बालों में मौजूद अतिरिक्त तेलों से छुटकारा पाने के लिए ड्राइ शैम्पू का इस्तेमाल करें। यह बालों में प्राकृतिक ऑयल को बनाए रखता है और अतिरिक्त तैलीयपन को दूर  करता है।

* बार-बार शैम्पू करने से बालों से नमी और प्राकृतिक तेल का सुरक्षात्मक लेयर निकल जाता है, इसलिए शैम्पू कम करें। गीले बालों में कंघी न करें, क्योंकि इससे बाल ज्यादा     टूटते हैं।

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* हेयर स्क्रब का इस्तेमाल करें। इसके इस्तेमाल से सिर की मृत त्वचा निकल जाती है और बाल मुलायम हो जाते हैं। फिर इसे पानी से धो लें।

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* बालों की कंडीशनिंग जरूर करें, इससे बाल मुलायम और मजबूत बनते हैं। बालों पर कंडीशनर पांच मिनट तक लगाए रखने के बाद गुनगुने पानी से धो लें।

सिल्की व मुलायम बालों के लिए आप हेयर मास्क का इस्तेमल भी कर सकती हैं। बालों में चौड़े दांत वाले कंघी का इस्तेमाल करें, ताकि कंडीशनर पूरे बालों को अच्छे से कवर कर ले।

रूसी से बचाव के उपाय :

* मृत त्वचा और फ्लेक्स निकालने के लिए बाल में अच्छे से कंघी करें और सिर पर रूसी को कंट्रोल में करने वाले लोशन को लगाए। 7-10 मिनट तक हल्के हाथों से मसाज करें।

* एक कटोरी में एंटी डैंड्रफ शैम्पू को लेकर उसमें थोड़ा पानी मिलाए। अब इस मिश्रण को रूई के फाहे से बालों पर लगाएं। बालों पर पानी स्प्रे करके हल्के हाथों से 10 मिनट तक मसाज करें। बालों को 10 मिनट और शावर कैप में रखे और फिर पानी से धो लें।

* शैम्पू के बाद बालों को तौलिएं से पोंछकर सुखा लें और फिर बालों के सिरों पर एंटी डैंड्रफ कंट्रोल कंडीशनर लगाएं। दो मिनट तक लगाए रहने के बाद पानी से धो लें।

* डैंड्रफ कंट्रोल कॉन्सन्ट्रेट को पूरे सिर पर अच्छी तरह से लगाकर हल्के हाथों से धीरे-धीरे मसाज करें और इसे लगा रहने दें।

–आईएएनएस

ब्लॉग

अटल थे, अटल हैं, अटल रहेंगे!

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Atal Behari Atal

वे साधारण परिवार में जन्मे, साधारण से प्राइमरी स्कूल में पढ़े और साधारण से प्राइमरी स्कूल टीचर के बच्चे हैं। उनके पिता का नाम कृष्ण विहारी वाजपेयी और दादा थे पंडित श्याम लाल वाजपेयी। उन्होंने सारे देश के सामने एक बार कहा था- ‘मैं अटल तो हूं पर ‘बिहारी’ नहीं हूं। तब लोगों ने इसे अजीब ढंग से लिया था।

लोगों को लगा कि वे ‘बिहार’ का अपमान कर रहे हैं। वस्तुत: उन्होंने कहा था कि असल में उनके पिता का नाम ‘वसंत – विहार’, ‘श्याम-विहार’, ‘यमुना विहार’ की तरह ही ‘विहार’ है, तो उनका मूल नाम है- अटल विहारी। ये तो बीबीसी लंदन ने शुरू कर दिया ‘ए.बी.वाजपेयी’ तो सब इसी पर चल पड़े।

संसद में एक बार अटल जी के लिए किसी ने कहा कि ‘वे आदमी तो अच्छे हैं लेकिन पार्टी ठीक नहीं है।’ इस पर अटल जी ने अपने भाषण में कहा भी था कि, ‘मुझसे कहा जाता है कि मैं आदमी तो अच्छा हूं, लेकिन पार्टी ठीक नहीं है, मैं कहता हूं कि मैं भी कांग्रेस में होता अगर वह विभाजन की जिम्मेदार नहीं होती।’

यूं तो वे भी पुराने कांग्रेसी थे। पहले सभी कांग्रेसी थे। आरंभिक दिनों में विजय राजे सिंधिया भी कांग्रेस में थी, जिवाजी राव सिंधिया भी कांग्रेस में थे। कांग्रेसी इस आरोप का उत्तर नहीं दे पाएंगे, क्योंकि कांग्रेस ही शायद कांग्रेस का इतिहास नहीं जानती। उन पर जो सबसे पहला आरंभिक प्रभाव था वो कई कवियों का रहा। मध्य प्रदेश के ही कई कवि अटल विहारी वाजपेयी के कालेज में थे।

डॉक्टर शिव मंगल सिंह ‘सुमन’ एक प्रगतिशील कवि और लेखक भी थे। अटल जी ने लाल किले से उनकी कविताएं भी पढ़ी हैं और अटल जी की जो बहुत मशहूर कविता है- ‘हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा, और ‘काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूं.’. उस पर ‘सुमन जी’ का प्रभाव है। इसी तरह की एक और कविता- ‘गीत नया गाता हूं’।

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उनकी भाषा पर भी ‘सुमन जी’ का प्रभाव है। दिलचस्प बात ये है कि ‘सुमन जी’ की भाषण शैली और कविता पाठ में ‘निराला जी’ का प्रभाव है। ये बात मुझे नीरज जी ने एक बार बताई थी कि सुमन जी निराला जी की शैली में कविता पढ़ते हैं।

महत्वपूर्ण बात ये है कि अटल जी भारतीय राजनीति में नेहरू जी के बाद एक अनूठे नक्षत्र हैं। यहां तक कि जब अटल जी पहली बार संसद में पहुंचे तो उनका भाषण सुन कर नेहरू जी ने कहा था- यह नौजवान नहीं मैं भारत के ‘भावी प्रधानमंत्री’ का भाषण सुन रहा हूं। ये बात उनके ‘बॉयोडाटा’ में लिखी हुई है। ये बात कहना कोई साधारण बात नहीं है। यह एक द्रष्टा की दृष्टि है। हीरे की परख जौहरी ही कर सकता है। बात ये है कि प्रतिभा की परख ही प्रतिभा ही कर सकती है।

नेहरू जी ने पहले ही दिन देख लिया कि भारत का भावी प्रधानमंत्री बोल रहा है। अटल जी प्रधानमंत्री बने, एक बार नहीं, दो बार नहीं, तीन बार प्रधानमंत्री बने। उन्होंने जवाहर लाल जी और इंदिरा जी के रिकॉर्ड को भी तोड़ा। भारत में ऐसा कोई प्रधानमंत्री नहीं हुआ, शायद कोई हो, जो तीन – तीन बार प्रधानमंत्री बने। अटल जी का राजनीति में कभी कोई ‘ग्रुप’ था ही नहीं।

अटल जी तो ‘भगवान राम’ की तरह हैं, जिनके पास ‘हनुमान’ भी अपना नहीं किसी और का है। हनुमान ‘सुग्रीव’ के थे। मसलन- प्रमोद महाजन थे, जो लालकृष्ण आडवाणी के आदमी माने जाते थे, मगर भगत रहे अटलजी के। आप अटल जी की एक और विशेषता देखें, अटल जी के जो सबसे बड़े सलाहकार थे वे कांग्रेस के दिग्गज नेता द्वारका प्रसाद मिश्र के बेटे हैं। अटल जी के सबसे अच्छे मित्र थे शहाबुद्दीन, जिन्हें अटल जी राजनीति में लाए, वे आईएफएस और मुसलमान हैं। विश्व में किसी राजनेता का ऐसा नैतिक साहस है कि, बिल क्लिंटन का भी नहीं, कि किसी से उनके क्या संबंध हैं, आध्यात्मिक संबंध, प्रेम संबंध या भावनात्मक संबंध, वे सब जग जाहिर है।

शीला कौल जो उनके साथ रहती थीं.. आप इसे मित्रता कहे, प्रेम संबंध कहें, मीरा का संबंध कहें, या फिर राधा का संबंध कहें, लिव इन रिलेशन कहें, लेकिन मैं इससे पूरी तरह सहमत हूं कि वे जो करते थे खुलकर करते, वही करते जो उन्हें उचित लगता। कृष्ण की तरह करते, जैसे कृष्ण ने सत्यभामा और रुक्मिणी के होते हुए राधा के संबंध को छुपाया नहीं।

जब वे कष्ट में रहे तब तो मैंने उन्हें रायसीना रोड के सुधीर के ढाबे से ‘दाल’ मंगाकर भी खाते देखा है। तब तो भारत वर्ष में कहीं से उनका कोई रिश्तेदार नहीं आया। अब तो अनूप मिश्रा और करुणा शर्मा भी देखी जाती हैं, जो रिश्तेदार हैं। परिवार जन भी आ गए, प्रधानमंत्री जो बन गए। पर तब एक मात्र शीला जी रही जो सुख दुख में उनके साथ खड़ी थी। लेकिन किसी ने इसे देखा नहीं। हिंदुस्तान के किसी राजनीतिज्ञ ने, प्रेस ने इस विषय को उठाया भी नहीं, कि प्रधानमंत्री आवास में एक महिला भी रहती है।

मुझे याद है पहली बार प्रधानमंत्री बनने पर जब मैं उन्हें बधाई देने गया था तो सो ‘ऊषा सिंहल’ के साथ गया था। ऊषा दीदी माननीय अशोक सिंहल जी की इकलौती बहन थीं। इनके सात भाई थे, अशोक भैया, आनंद भैया, पूर्व डीजी पुलिस और ब्लड प्रेशर सिंहल के नाम से मशहूर भारतेंदु प्रकाश सिंहल, विचारक, चिंतक और लेखक, उद्योग पति विवेक सिंहल, और अब नहीं रहे पीयूष सिंहल- इन सात भाइयों की एक बहन। वे कहती थीं, ‘ये सात भैया एक तरफ और राज भैया एक तरफ’।

मुझे उषा जी अपना भाई मानती थी और राखी बांधती रही। ऊषा जी अटल जी को भी राखी बांधती रही हैं। उन्हें पतरकु (दुबले पतले वाले) भैया कहती रहीं। उस समय अटल जी के सेवक सर्वस्व थे शिवकुमार ‘मूंछड़ जी’। दीदी ने शिवकुमार जी के सामने ही एक बार पूछ लिया अटल जी से कि ‘क्या शीला जी भी यहीं रहती है पतरकू भैया!’ तो अटल जी शर्माने लगे और कहने लगे- ‘हां, यहीं रहती है ऊषा बहिन’।

लेकिन ये विश्व के इतिहास की एक अनोखी घटना है। क्या कोई ऐसी और घटना बता सकता है, जहां प्रधानमंत्री के घर में एक अनजान महिला जो उनकी पत्नी नहीं हो उसके बाद भी अपने दत्तक दामाद के साथ वहीं रहती हो। रंजन भट्टाचार्य के साथ दत्तक बेटी भी। तो प्रेस ने क्यों नहीं उठाया ये सवाल। कभी किसी ने ध्यान भी नहीं दिया।

जब मैंने प्रभाष जोशी जी पर लेख लिखा तो करीब 160 से ज्यादा पत्र मेरे पास आए। इनमें शरद पवार और काजमी जैसे लोगों के पत्र भी हैं, जिनमें लिखा है कि आप में अपने पिता की ही तरह हंस की प्रवृत्ति है कि दूध और जल को अलग कर देते हैं। कंकड़ से मोती चुनने और नीर क्षीर विवेक का।

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ये सब जो तुलनात्मक अध्ययन है वो मैं इसलिए बता रहा हूं कि कांग्रेस क्या, कोई पार्टी क्या, कोई मीडिया क्या, ये मुद्दा कोई इसलिए नहीं उठा पाया क्योंकि ये जो सज्जन थे जवाहर लाल नेहरू के साले, कमला नेहरू जी के भाई थे। उन्हीं की पत्नी थीं शीला कौल। कांग्रेस इस मुद्दे को उठा नहीं सकती थी, लेकिन प्रेस ने भी नहीं उठाया। इसकी वजह आपने नहीं सोची होगी।

विचार करें, क्योंकि अटल जी का ‘चरित्र’ सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा था। उनके चरित्र पर कोई धब्बा नहीं है। उसके बावजूद उन्होंने अशोक सिंहल जी के डांटने पर एक बार संसद में कहा था, ” मैं कुंआरा तो हूं, ब्रह्मचारी नहीं।” इसे कहने के लिए बेहद नैतिक साहस चाहिए। प्रो.रज्जू भैया ने भी कहा था कि ये कहने के लिए बहुत नैतिक साहस चाहिए। लेकिन अशोक सिंहल जी को ये बात बुरी लगी थी।

उन्होंने कहा- ये क्या कोई कहने वाली बात है कि ‘मैं कुआंरा तो हूं, ब्रह्मचारी नहीं, यानी चरित्रहीन हूं।’ मगर ये बात नहीं है। जयप्रकाश नारायण ने एक बार गांधी जी के सामने शपथ ली, मैं प्रभावती जी के साथ बिस्तर पर नहीं सोऊंगा। बह्मचर्य का पालन करूंगा। पर प्रकाश झा ने एक लंबी फिल्म जयप्रकाश जी पर बनाई थी। उस पर मैंने पचासों आपत्तियां की थीं और बहुत अखबारबाजी भी हुई। पार्लियामेंट में भी हंगामा हुआ। इस फिल्म में एक इंटरव्यू में प्रकाश झा ने जयप्रकाश जी के मुंह से कहलवाया कि -‘मैं ऐसा नहीं रह पाया। बह्मचर्य का वैसा पालन नहीं कर पाया जैसा प्रभावती करती रहीं’। इसका आशय था कि जय बाबू कहीं-कहीं स्खलित भी हुए। मैंने इस पर आपत्ति भी की थी। लेकिन अटल जी का ये नैतिक साहस।

गांधी जी को हम लोग बहुत ज्यादा मानते हैं। उनके इस बात के लिए बहुत सम्मान देते हैं। उनके नैतिक साहस का सम्मान करते हैं। गांधी जी की आत्मकथा की बात करते हैं। उनके ‘सत्य के प्रयोग’ की बहुत बात करते हैं, लेकिन अटल जी के अनुभव या कहें कि एक्सपीरिएंस विद ट्रुथ पर आज तक कोई बात नहीं हुई। शायद ही कोई कर पाए। फिर भी उन्होंने देखा जाएतो ये सब कहा।

ये हिम्मत की बात है। साहस का विषय है कि भारत की राजनीति में पहला पुरुष है जिसके घर में एक महिला मित्र है। जो महिला है उनसे उनका क्या रिश्ता है ये पूछने का साहस किसी के पास नहीं है!

राजनीति में उनका कोई गुरु नहीं है। हालांकि लोग कहते हैं कि उनके गुरु ‘अमुक’ रहे हैं। कभी लोग बलराज मधोक को बता देते हैं, लोग कहते हैं कि मधोक जी ही उन्हें जनसंघ में ले आए। जबकि पहले से ही बलराज मधोक उन पर आरोप लगाते रहे कि वे जनसंघ में ‘कांग्रेस के एजेंट’ थे। जनसंघ में वे ‘जवाहर लाल नेहरू के आदमी’ हैं। पर आज बलराज मधोक दिल्ली में किसी को हैंड पंप से पानी खीचते नजर आते हैं। जनसंघ के संस्थापक मधोक जी रहे और तीन बार प्रधानमंत्री बने अटल जी! तो इस आदमी में कोई न कोई खूबी तो ऐसी होगी।

इन खूबियों को जरा देखिए और सोचिए। सबसे बड़ी खूबी कि गोविंदाचार्य ने कह दिया कि आप उन्हें ‘मुखौटा’ कह सकते हैं। वे ‘मुखौटा’ थे कि नहीं, इस बारे में आगे जाकर भारतीय जनता विश्लेषण करे। इसलिए ये बात तो आप इतिहास पर छोड़िए।

(लेखक दूरदर्शन महानिदेशालय में अपर महानिदेशक हैं। ये उनके निजी विचार हैं)

By : राजशेखर व्यास

–आईएएनएस

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लाइफस्टाइल

वीकेंड पर घूमने की ये जगह हैं सबसे बेस्ट

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फाइल फोटो

दिल्लीवाले घूमने के शौकीन होते हैं, लेकिन ये समझ नहीं पाते कि 1 या 2 दिन की छुट्टी में कहां जाएं। हम आपको दिल्ली के आस-पास की कुछ ऐसी जगहों के बारे में बता रहे हैं जहां आप एक दिन में घूमकर आ सकते हैं और अपनी छुट्टी को यादगार बना सकते हैं। आइए जानें…

मोरनी– मोरनी हरियाणा के पंचकूला जिले में स्थित एक खूबसूरत हिल स्टेशन है। यह दिल्ली से केवल 260 किलोमीटर की दूरी है। वीकेंड बिताने के लिए यह बेहतरीन ऑप्शन है। दिल्ली से यहां पहुंचने में लगभग 5 घंटे का समय लगता है। यहां की खूबसूरत वादियां और झील किसी के भी मन को खुश कर देती हैं।

वीकेंड पर दिल्लीवासियों के लिए घूमने की ये जगह हैं सबसे बेस्ट

दमदमा झील- दिल्ली की भागदौड़ भरी जिंदगी और प्रदूषण से भरे वातारण में रहते-रहते दिल्ली वाले बोर हो जाते हैं। ऐसे में शांति के साथ सुकून की छुट्टी बिताने के लिए दिल्ली वालों के लिए दमदमा झील एक बेहतरीन जगह है। यह दिल्ली से केवल 60 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां पहुंचने में लगभग 1 घंटा 30 मिनट का समय लगता है। दमदमा झील हरयाणा की सबसे खूबसूरत झीलों में से एक है। इसके आस-पास कैंपिग की सेवाएं भी उपलब्ध हैं।

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मुरथल– जब भी आप रोड ट्रिप प्लान करते होंगे तो सबसे पहले आपके मन में मुरथल का ख्याल जरूर आता होगा। लॉन्ग ड्राइव के साथ अच्छे खाने का स्वाद लेना हो तो मुरथल से अच्छा ऑप्शन दिल्ली वालों के लिए नहीं हो सकता है। यहां कई ढाबे मौजूद हैं। साथ ही लोगों के मनोरंजन के लिए फॉक डांस से लेकर कई दूसरी चीजें भी उपलब्ध हैं।

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नीमराना किला– राजस्थान के किलों में नीमराना किला एक प्रसिद्ध किला है। दिल्ली की भागदौड़ से दूर कपल्स के लिए यह किला एक दूसरे के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करने के लिए बेहद खास है। यहां जाने के लिए मॉनसून का समय सबसे बेहतर होता है। बरसात के मौसम में किले के चारों तरफ फैली हरियाली पर्यटकों के मन मोह लेती है। यह किला दिल्ली से 120 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यहां पहुंचने में लगभग 2 घंटे 30 मिनट का समय लगता है।

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कुचेसर किला– 18वीं शताब्दी में तैयार किया गया कुचेसर किला मड फोर्ट होटल के नाम से भी जाना जाता है। यह किला दिल्ली से लगभग 84 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यहां पहुंचने में केवल 2 घंटे का समय लगता है। इस किले में हर क्लास के कमरे उपलब्ध हैं. इसके अलावा यहां बैलगाड़ी की सवारी के साथ-साथ कई सारे इंडोर और आउटडोर खेलों का भी आनंद लिया जा सकता है।

वीकेंड पर दिल्लीवासियों के लिए घूमने की ये जगह हैं सबसे बेस्ट

परवाणू– यह जगह दिल्ली से करीबन 270 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। परवाणू हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में चंडीगढ़ और शिमला के रास्ते में पड़ता है। हालांकि यह दिल्ली के ज्यादा नजदीक नहीं है, लेकिन यहां की रोड ट्रिप किसी के लिए भी यादगार साबित हो सकती है। यहां पहुंचने में लगभग 6 घंटे का समय लगता है। यहां प्रकृति के खूबसूरत नजारे, चारों तरफ फैली हरियाली, चौड़ी सड़कें, सुहाना मौसम किसी की भी छुट्टियों को यादगार बना सकता है।

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भरतपुर– राजस्थान का यह एक प्रमुश शहर है। यहां मौजूद बर्ड सेंचुरी बेहद प्रसिध्द हैं। यहां घने जंगल मौजूद हैं, जिस वजह से यह जगह पक्षी प्रेमियों को अपनी ओर काफी आकर्षित करती है। आप यहां रिक्शा में बैठकर बर्ड सेंचुरी का आनंद ले सकते हैं। यह जगह दिल्ली से लगभग 182 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यहां पहुंचने में 3 घंटे 40 मिनट का समय लगता है।

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मथुरा और वृंदावन– जिन लोगों को पूजा पाठ और भगवान के दर्शन करने में ज्यादा आनंद मिलता है वो अपनी 1 या 2 दिन की छुट्टी में मथुरा और वृंदावन जाकर भगवान के दर्शन कर सकते हैं। मथुरा, वृंदावन और आसपास के इलाकों में भगवान श्रीकृष्ण के कई मंदिर हैं, जहां हमेशा श्रद्धालुओं का आना जाना लगा रहता है। यह दिल्ली से लगभग 144 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यहां पहुंचने में करीबन 3 घंटे का समय लगता है।

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आगरा– प्यार में डूबे लोगों के लिए छुट्टी बिताने के लिए आगरा से बेहतर घूमने की जगह कोई हो ही नहीं सकती है। आगरा में मौजूद ताजमहल सच्चे प्यार की एक खूबसूरत मिसाल है। ताज महल के अलावा आगरा का किला, फतेहपुर सीकरी, मेहताब बाग, जामा मस्जिद, अकबर का मकबरा, गुरु का ताल, मोती मस्जिद। दिल्ली गेट, अमर सिंह गेट, सिकंदरा और कांच महल आदि घूमने के लिए शानदार जगहें हैं। यह दिल्ली से करीबन 202 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

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लाइफस्टाइल

तस्वीरें पोस्ट करने के लिए सिर्फ एक दिन के लिए खरीदे जा रहे कपड़ेे…

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प्रतीकात्मक तस्वीर

लोगों की भीड़ में सबसे अच्छा और ग्लैमरस दिखना लगभग हर व्यक्ति की इच्छा होती है। बदलते फैशन और आकर्षित दिखने की रेस में आजकल लोग एक दिन के लिए ऑनलाइन कपड़े खरीद रहे हैं।

इतना ही नहीं इन कपड़ो को पहनकर लोग तस्वीरें क्लिक करके सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं और इन कपड़ोंं को फिर वापस कर देते हैं। इस ट्रेंड को ‘आउटफिट ऑफ द डे’ का नाम दिया गया है।

नए कपड़ों में तस्वीरें पोस्ट कर वापस कर रहे लोग, वेबसाइट्स परेशान

बार्कले यार्ड की एक रिसर्च के मुताबिक, यूके में 10 लोगों में से करीबन 1 ऐसा व्यक्ति पाया गया है, जिसने सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर करने के लिए सिर्फ एक दिन के लिए ऑनलाइन कपड़े खरीदे और तस्वीरें शेयर करने के बाद उन कपड़ों को रिटर्न कर दिया।

नए कपड़ों में तस्वीरें पोस्ट कर वापस कर रहे लोग, वेबसाइट्स परेशान

रिसर्च में सामने आया है कि 35 से 44 साल के पुरुष और महिलाओं में लगभग 17 फीसदी लोगों को एक दिन के लिए शॉपिंग करने पर बुरा महसूस हुआ। इस रिसर्च में सबसे दिलचस्प बात ये सामने आई है कि महिलाओं से ज्यादा पुरुष एक दिन के लिए कपड़े खरीद कर वापस करते हैं क्योंकि पुरुष महिलाओं से ज्यादा अपने लुक्स को लेकर जागरूक रहते हैं।

नए कपड़ों में तस्वीरें पोस्ट कर वापस कर रहे लोग, वेबसाइट्स परेशान

रिसर्च के दौरान लगभग 12 फीसदी पुरुषों ने माना कि सोशल मीडिया पर तस्वीरें पोस्ट करने के लिए वो एक दिन के लिए कपड़े और दूसरी एक्सेसरीज खरीदते हैं और उन्हें पहनकर तस्वीरें क्लिक कराकर वापस कर देते हैं। बता दें, पुरुषों में अच्छा दिखने की चाहत केवल अपने दोस्तों में इंप्रेशन दिखाने के लिए ही नहीं होती है बल्कि, 10 में लगभग 1 पुरुष ने माना कि अपने दोस्तों को एक से ज्यादा बार एक ही कपड़े में देखकर उन्हें शर्मिंदगी महसूस होती है।

वहीं, पुरुषों के मुकाबले केवल 7 फीसदी महिलाएं ऐसी थीं जिन्हें अपने दोस्तों को एक से ज्यादा बार एक तरह के कपड़े पहने हुए देखकर शर्मिंदगी महसूस होती है। अधिकतर वेबसाइट्स और रिटेलर्स ‘ट्राई करने के बाद खरीदें’ का ऑफर देते हैं यानी अगर कपड़े पहनने के बाद पसंद न आए तो बिना पैसे दिए ही वापस कर सकते हैं।

नए कपड़ों में तस्वीरें पोस्ट कर वापस कर रहे लोग, वेबसाइट्स परेशान

इसी ट्रेंड के चलते लोगों में कपड़े पहनने के बाद रिटर्न करना उनके लिए आम बात हो गई। रिसर्च के दौरान महिला और पुरुष दोनों ने माना कि वो कपड़ों के टैग हटाए बिना ही पहनते हैं ताकि पसंद न आने पर उन्हें वापस कर सकें।

नए कपड़ों में तस्वीरें पोस्ट कर वापस कर रहे लोग, वेबसाइट्स परेशान

बता दें, लगभग 31 फीसदी ब्रिटिश लोगों ने बताया कि वो ऑनलाइन कपड़ों को खरीदने के बाद ‘ ट्राई बी फोर यू बाय मेथड’ के चलते उन्हें वापस कर देते हैं। रिसर्च में ये भी सामने आया कि महिलाओं के मुकाबले पुरुष कपड़ों और जूतों पर ज्यादा खर्च करते हैं। बता दें, लोगों द्वारा सोशल मीडिया के लिए कपड़ों को खरीदकर उन्हें वापस करने के ट्रेंड की वजह से रिटेलर्स को ‘रिटर्न कल्चर’ का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनको काफी मुश्किल हो रही है।

रिसर्च में सामने आया है कि रिटर्न पॉलिसी के चलते सालभर में लगभग 7 बिलियन पाउंड की ज्यादा सेल हुई है। इस चीज को देखते हुई ऑनलाइन कंपनियां अपने रिटर्न कल्चर को और भी ज्यादा आसान बनाने की कोशिश कर रही हैं, ताकि लोगों के लिए कपड़े रिटर्न करना ज्यादा आसान हो जाए।

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