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राजनीति

मेहुल चोकसी से सांठगांठ पर कांग्रेस ने मांगा वित्तमंत्री का इस्तीफा

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राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया है। उन्होंने कहा कि देश की चौकीदारी करने की जगह मोदी जी का सरकारी ढांचा नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, विजय माल्या जैसे लोगों को देश से भगाने के काम में लगा था। वित्तमंत्री और उनके परिवार पर मेहुल चोकसी के साथ मिलीभगत का आरोप लगाते हुए अरुण जेटली की बर्खास्तगी और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।

कांग्रेस ने आरोप लगाते हुए कहा कि PNB घोटाले के आरोपी मेहुल चौकसी की कंपनी गीतांजलि जेम्स ने अरुण जेटली की बेटी सोनाली व दामाद जयेश बख्शी की लीगल फर्म को रीटेन किया था और इसके लिए 24 लाख रुपये दिए थे। चौकसी के भागने के बाद 20 फरवरी को सोनाली और जयेश ने 24 लाख रुपये लौटा दिए थे।

सचिन पायलट ने कहा कि 2015 में मेहुल चोकसी के खिलाफ पहली एफआईआर दर्ज हुई। उन्होंने कहा कि सरकार, सरकारी तंत्र और हर किसी को एक हलफनामे के माध्यम से इस बात की जानकारी थी कि मेहुल चोकसी देश छोड़कर भागने वाला है और 4 जनवरी 2018 को मेहुल चोकसी देश छोड़कर भाग गया।

पायलट ने कहा कि मोदी सरकार देश का पैसा लूटने वाले लोगों की मदद कर रही है, सरकार के पास पिछले साढ़े तीन साल से पंजाब नेशनल बैंक में चल रहे घोटाले की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने कोई एक्शन नहीं लिया।

कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार के 44 महीनों में 23 घोटालेबाजों ने देश को 53 हजार करोड़ रुपये का आर्थिक चूना लगाया।

उन्होंने कहा कि विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल ने घपला किया और सरकार रोकने में नाकाम रही। इन लोगों ने देश के साथ गद्दारी की लेकिन इतनी आसानी से देश से कैसे भागे?  सचिन पायलट ने कहा कि वित्त मंत्री को अपने पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं है।

सचिन ने कहा कि इस देश में जितने भी भगोड़े हैं उनकी वकालत करने के लिये वही लोग सामने क्यों आते हैं जो सत्ता से जुड़े हैं? राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि ये चुप्पी साधने का प्रकरण कब तक चलेगा, प्रधानमंत्री जी को सामने आकर जवाब देना होगा। उन्होंने कहा कि सारी सरकारी एजेंसियों को ये दायित्व दिया गया है कि जो कोई भी बीजेपी के खिलाफ आवाज़ उठाता है उसके खिलाफ कार्रवाई करो।

सचिन पायलट ने कहा कि सीबीआई में आरोप-प्रत्यारोप पर भारत सरकार मौन है, सीबीआई की विश्वसनीयता समाप्त होती जा रही है, जो शीतयुद्ध आज प्रकट होकर सामने आ रहा है उससे स्पष्ट होता है कि आरोप-प्रत्यारोप सिर्फ सीबीआई अफसरों तक ही सीमित नहीं है।

उन्होंने कहा कि इसकी पृष्ठभूमि को देखा जाए तो समझ में आयेगा कि सरकार के माध्यम से हस्तक्षेप हो रहा है और भारी भ्रष्टाचार करने वालों को बचाने की साजिश सीबीआई के अंदर रची गयी थी।

पायलट ने कहा कि सीबीआई का खुद का दामन साफ नहीं है तो किस मुंह से भारत सरकार और सीबीआई अब भ्रष्टाचार वाले मामलों की जांच कर सकती है?

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बसपा-सपा गठबंधन से स्थायित्व के संकेत नहीं : शीला दीक्षित

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वरिष्ठ कांग्रेस नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का कहना है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) गठबंधन से स्थायित्व के संकेत नहीं मिल रहे हैं, लेकिन आगामी लोकसभा चुनाव में प्रदेश में कांग्रेस के परिणाम चौंकाने वाले होंगे।

शीला दीक्षित ने आईएएनएस को दिए साक्षात्कार में कहा, “उनको एक साथ आने दीजिए। वे मिलते और जुदा होते रहे हैं और फिर साथ आ रहे हैं। मेरा अभिप्राय यह है कि उनमें स्थिरता नहीं है और वे स्थायित्व के संकेत नहीं दे रहे हैं। अब आगे देखते हैं।”

तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकीं दीक्षित (80) सपा और बसपा गठबंधन को लेकर पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रही थीं। सपा और बसपा ने कांग्रेस को महागठबंधन से अलग रखते हुए प्रदेश में 80 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए एक गठबंधन किया है। दीक्षित को 10 जनवरी को दिल्ली कांग्रेस की कमान सौंपी गई।

उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन होने से पहले शीला दीक्षित को कांग्रेस ने मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित किया था। दीक्षित ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उम्मीद क्षीण पड़ गई है।

दीक्षित की टिप्पणी से इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस नेता चुनाव अभियान के दौरान सपा और बसपा को निशाना बनाएंगे, जबकि उनका सीधा मुकाबला सत्ताधारी पार्टी भाजपा से होगा।

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के सभी 80 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला लिया है, लेकिन पार्टी ने भाजपा को शिकस्त देने वाले सेक्यूलर दलों के लिए दरवाजा खुला रखा है।

उत्तर प्रदेश में पार्टी नेता उम्मीदवारों को बता सकते हैं कि कांग्रेस ही नरेंद्र मोदी सरकार को सत्ता से बाहर कर सकती है और भाजपा को शिकस्त दे सकती है।

कांग्रेस इस बात पर बल देंगे कि इस चुनाव के नतीजों से प्रदेश का मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि देश का प्रधानमंत्री चुना जाएगा।

लोकसभा चुनाव 2014 में कांग्रेस उत्तर प्रदेश में सिर्फ दो ही सीटें बचा पाई थीं, जबकि उससे पहले 2009 में पार्टी ने 21 सीटों पर जीत हासिल की थी, जब केंद्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) दूसरी बार केंद्र की सत्ता को बरकार रख पाई थी।

दीक्षित ने कहा कि उनसे कहा जाएगा तो वह उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए चुनाव प्रचार करेंगी, लेकिन वह दिल्ली पर अपना अधिक ध्यान केंद्रित करेंगी क्योंकि उनको यहां काफी काम करना है।

उन्होंने पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी को कांग्रेस द्वारा प्रधानमंत्री उम्मीदवार के तौर पर पेश करने का अनुमोदन किया।

उन्होंने कहा, “पार्टी को इस पर फैसला लेने दीजिए। हम चाहते हैं और खासतौर से मैं चाहती हूंं और हमारे बीच अधिकांश लोग चाहते हैं। लेकिन इस पर पूरी पार्टी द्वारा फैसला लिया जाएगा।”

गैर-भाजपा दलों में प्रधानमंत्री का पद विवादास्पद मसला है। राहुल गांधी ने खुद भी कहा कि इसका फैसला चुनाव के बाद लिया जाएगा और पहला काम नरेंद्र मोदी सरकार को पराजित करना है।

संपूर्ण भारत में महागठबंधन की संभावना पर पूछे जाने पर दीक्षित ने कहा कि लोग इस दिशा में प्रयासरत हैं, लेकिन इस पर अभी पूरी सहमति नहीं बन पाई है।

विपक्षी दलों ने इस बात के संकेत दिए हैं कि लोकसभा चुनाव से पहले देशभर में गठबंधन की संभावना कम है, लेकिन भाजपा को शिकस्त देने के लिए राज्य विशेष में गठबंधन होगा।

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राजनीति

सपा-बसपा गठबंधन से भाजपा का हिसाब गड़बड़ाया : अखिलेश

भाजपा की राष्ट्रीय परिषद की बैठक के बाद उत्तर प्रदेश में प्रभारी इसलिए भेजा गया है कि कम से कम एक सीट तो बचा ली जाए।

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लखनऊ, 17 जनवरी । समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को कहा कि जबसे सपा-बसपा गठबंधन की घोषणा हुई है, तब से भाजपा नेतृत्व का हिसाब गड़बड़ा गया है। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व तय नहीं कर पा रहा है कि उत्तर प्रदेश में उनकी स्थिति कहां और कैसी रहेगी।

अखिलेश का कहना है कि गठगबंधन होने से भाजपा को चुनाव से पहले ही पराजय का डर सताने लगा है। इसी घबराहट और हताशा में भाजपा नेतृत्व अब सच्चाई स्वीकार करने की जगह व्यर्थ बहानेबाजी से अपना दिल बहलाने में लगा है।

सपा प्रमुख ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि भाजपा नेतृत्व भलीभांति समझ रहा है कि जब उनकी सरकारों की हर मोर्चे पर विफलता जगजाहिर है तो जीतने की कैसे उम्मीद करें? आखिर किसानों-नौजवानों, बेरोजगारों व महिलाओं के हित में जब भाजपा ने कोई काम नहीं किया है तो वह उन्हें दोबारा क्यों चुनेंगे?

उन्होंने कहा कि भाजपा की राष्ट्रीय परिषद की बैठक के बाद उत्तर प्रदेश में प्रभारी इसलिए भेजा गया है कि कम से कम एक सीट तो बचा ली जाए।

अखिलेश ने कहा कि भाजपा नेतृत्व 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपनों’ में खोया हुआ है, इसलिए यूपी में अगर वे 82 सीटों पर जीत का दावा भी करने लगें तो क्या आश्चर्य, जबकि उत्तर प्रदेश में कुल जमा 80 लोकसभा सीटें ही हैं।

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मोदी दोबारा बनेंगे प्रधानमंत्री : नीतीश

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सीतामढ़ी, 17 जनवरी | बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यहां गुरुवार को नरेंद्र मोदी के दोबारा प्रधानमंत्री बनने का दावा करते हुए कहा कि वर्ष 2019 में फिर से मोदी के नेतृत्व में केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की की सरकार बनेगी। उन्होंने कहा, “वर्ष 2014 में जब हम साथ में नहीं थे, तब तो भाजपा की सरकार बनी थी, अब तो हम भी साथ में हैं।”

मुख्यमंत्री सीतामढ़ी जिला के डुमरा प्रखंड स्थित परमानंदपुर ग्राम में 620 करोड़ रुपये की लागत वाली परमानंदपुर पावर ग्रिड 400/200/132 केवी उपकेंद्र का शिलान्यास करते हुए कहा कि इसे पूरा करने के लिए जनवरी, 2021 का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

शिलान्यास कार्यक्रम के मौके पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने सीतामढ़ी में 400 केवी के पावर ग्रिड विद्युत उपकेंद्र के शिलान्यास के लिए भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय को धन्यवाद दिया।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के तीन बड़े पवर ग्रिड बिहार में स्थापित करने का केंद्र सरकार ने निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि दो दिन बाद सहरसा में भी इस प्रकार के पावर ग्रिड का शिलान्यास कार्यक्रम है।

विद्युत के क्षेत्र में केंद्र सरकार की योजनायों को जनोपयोगी बताते हुए उन्होंने कहा कि इस दिशा में राज्य सरकार की जो योजनाएं चल रही हैं, लोग उसका पूरा लाभ उठा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, “नवंबर, 2005 में जब हमने न्याय के साथ विकास का काम शुरू किया, उस समय पूरे बिहार में मात्र 700 मेगावाट बिजली की आपूर्ति होती थी, जिसका परिणाम था कि गांव तो छोड़ दीजिए राजधानी पटना में भी लोगों को जरूरत के अनुरूप बिजली की उपलब्धता नहीं थी।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि सात निश्चय योजना के तहत हर घर तक पक्की गली एवं नाली का भी निर्माण कराया जा रहा है। पहले बिहार का 25 हजार से 30 हजार करोड़ रुपये वार्षिक बजट हुआ करता था, जिसका पूरा पैसा भी खर्च नहीं हो पाता था। वहीं अब इस वित्तीय वर्ष में बिहार का बजट एक लाख 80 हजार करोड़ रुपये है, जिसकी लगभग आधी धनराशि विभिन्न योजना मद में खर्च करते हैं।

उन्होंने कहा कि समाज में प्रेम, शांति, सद्भाव कायम रहेगा, तभी विकास का पूरा लाभ मिलेगा।

चुनाव के नतीजों की कोई परवाह नहीं रहने की बात कहते हुए उन्होंने कहा, “जनता मालिक है। आप सब चाहेंगे तो सेवा करेंगे, नहीं चाहेंगे तो भी मेरी कोई शिकायत नहीं होगी।”

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