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आखिर क्यों गोरखपुर के अस्पताल में 30 मासूम बच्चों की मौत पर हो रही लीपा-पोती?

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र के बीआरडी मेडिकर कॉलेज में महज 36 घंटे के भीतर 30 मासूम बच्चों की मौत ने सबको झकझोंर कर रख दिया है। ऑक्सीजन की कमी के चलते इन बच्चों की मौत की वजह सामने आ रही है लेकिन प्रदेश सरकार इस मामले की लीपापोती कर रही है। इस बात का खुलासा तब हुआ जब अस्पताल में ऑक्सीजन सिलिंडर सप्लाई करने वाली कंपनी ने 1 अगस्त को लिखी अपनी चिट्ठी में इस बात का जिक्र किया की वो अब ऑक्सीजन की सप्लाई नही कर पाएंगे क्योंकि 63 लाख रुपये से ज्यादा का बकाया है। ये चिट्ठी बीआर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल के साथ साथ गोरखपुर डीएम और उत्तर प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा विभाग महानिदेशक को भेजी गई है।

लेकिन चिट्ठी मिलने के बाद भी प्रशासन नही जागा तब फिर दूसरी चिट्ठी 10 अगस्त को फिर से ऑक्सीजन सिलिंडर सप्लाई करने वाली कंपनी के कर्मचारियों ने लिखी थी जो कर्मचारी अस्पताल में सिलिंडर देने का काम करते थे। ये चिट्ठी अस्पताल के बाल रोग विभाग के प्रमुख को संबोधित करते हुए एक चिट्ठी लिखी गई थी जिसमें ऑक्सीजन सिलिंडर सप्लाई कम होने की जानकारी दी गई है। बावजूद इसके प्रशासन के कानों तक जूं तक नही रेंगा। और तो और राज्य सरकार और प्रशासन ये बात मानने को राजी नही है कि मौत ऑक्सीजन की कमी के चलते हुई। पिछले पांच दिनों में जिले में अब तक 60 से ज्यादा बच्चों की मौत ने राज्य सरकार समेत तमाम प्रशासन की पोल खोल के रख दी है।

Gorakhpur Letter from Pushpa

This the Oxygen Supply Company letter for payment of due in Gorakhpur Hospital

लेकिन सरकार इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए गोरखपुर में यूपी के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ सिंह ने कहा कि जो मौतें हुई हैं वो ऑक्सीजन की कमी के चलते नहीं हुई हैं। उन्होंने बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ के दौरे के वक्त किसी ने ऑक्सीजन सप्लाई का मुद्दा नहीं बताया था। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इस मामले में गोरखपुर बीआरडी कॉलेज के प्रिंसिपल को सस्पेंड किया गया है साथ ही मुख्य सचिव की अध्यक्षता में जांच कराई जाएगी। यूपी के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने दावा किया कि बच्चों की मौत गैस की वजह से नहीं हुई। हालांकि उन्होंने माना कि दो बार गैस सप्लाई में रुकावट आई थी सिद्धार्थ नाथ ने कहा कि हम बच्चों की मौतों को कम नहीं आंक रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस कॉलेज में मरीज लास्ट स्टेज में आते हैं जिस कारण भी मौत का आंकड़ा ज्यादा है। सिद्धार्थ नाथ सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि अगर पुराने आंकड़ें देखें तो इस अस्पताल में औसतन 17-18 बच्चों की मौतें होती हैं। कुछ आकड़े पेश करते हुए उन्होंने कहा कि 2014 के अगस्त में औसतन में 5 से 7 मौतें हुई थी वहीं 2015 अगस्त में बच्चों की मौत का आकड़ा 22 पहुंच गया था। गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में पिछले 48 घंटों के भीतर 33 की मौत हो गई है। सिद्धार्थ सिंह ने सफाई देते हुए बताया कि बच्चों की मौतों का कारण अलग-अलग है।

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सरकार भले ही मासूम बच्चों की मौत की वजह अलग-अलग बता रहीं हो लेकिन इतना तो साफ है कि सरकार इस पूरे घटना से मूंह मोड़ और बीआरडी कॉलेज के प्रिंसिपल को सस्पेंड कर मामले की लीपा-पोती में लगी है।

बीजेपी सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने अपने 100 दिनों के कार्यकाल का ढिढोरा पीटा और सरकार की कामयाबी पर जमकर गाल बजाई। सबसे चौका देने वाली बात तो ये है कि इस घटना से कुछ दिन पहले ही राज्य के मुख्यमंत्री ने बीआरडी अस्पताल का जायजा लिया था। लेकिन इन मासूम मौतों पर न सिर्फ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौन है। बीजेपी के राज में लापरवाही से इतनी तादाद में बच्चों की मौत ने सरकार की कलई खोल कर रख दी है।

सत्ता में आते ही योगी सरकार कानून-व्यवस्था को लेकर पहले सी ही विपक्ष के निशाने पर थी चाहे मामला एंटी रोमियो स्क्वायड का हो या फिर बुचरखानों को बंद करने का। अब राज्य में मुख्य विपक्षी सपा के साथ बसपा और कांग्रेस के बड़े नेताओं ने इस घटना पर दुख जताने के साथ-साथ योगी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विपक्ष के सारे नेता एकजुट होकर मुख्यमंत्री से पूछ रहे हैं कि जब योगी ने तीन दिन पहले ही बीआरडी मेडिकल कॉलेज का दौरा किया था तो वहां इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई?

प्रदेश सरकार की इस बड़ी चूक को देखते हुए विपक्ष कहां पिछे रहने वाला था पूर्व मुख्यमंत्री सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, ‘बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी से हुई है लेकिन राज्य सरकार अपनी गलती सुधारने के बजाय झूठ बोलने में लगी है। गलती छुपाने के लिए परिजनों को बच्चों का शव देकर भगा दिया गया, मृतक बच्चों का पोस्टमार्टम तक नहीं हुआ है।’

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वहीं बसपा सुप्रीमों मायावती ने भी प्रदेश सरकार पर झूठ छुपाने का आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने की वकालत की है। मायावती ने कहा, ‘मासूमों की मौत के लिए यूपी सरकार जिम्मेदार है। मासूमों के परिजनों को न्याय दिलवाने के लिए हम आगे आए हैं। राज्य सरकार अपनी गलती छुपाने के बजाय दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने में अपनी ताकत लगाए।’

कांग्रेस ने इस मामले में सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इस्तीफा मांगा है। अध्यक्ष सोनिया गांधी के कहने पर पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद, आरपीएन सिंह, राज बब्बवर और प्रमोद तिवारी गोरखपुर मेडिकल कॉलेज का जायजा लिया। इस घटना पर गुलाम नबी आजाद ने कहा, ‘योगी सरकार की नाकामी और लापरवाही से ये दर्दनाक हादसा हुआ है। इस घटना की जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री आदित्यनाथ समेत स्वास्थ्य मंत्री और अन्य जिम्मेदार लोगों को इस्तीफा दें देना चाहिए।

वहीं इस घटना से बैकफुट पर आई सत्ता पक्ष के न खाते निगल रहा न उगलते। फिर भी सत्ता पक्ष विपक्ष की आवाज को बंद कर अपनी मनमानी करने पर लगा है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, ‘विपक्ष हड़बड़ी में है और प्रदेश की सरकार जनता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध है। दोषियों के खिलाफ यूपी सरकार कड़ी कार्रवाई करेगी।’ लेकिन सच तो ये है कि विपक्ष की हड़बड़ाहट उपमुख्यमंत्री को दिखाई दे रही है लेकिन खूद सरकार अगर इस मामले में हड़बड़ी दिखाता तो शायद ऑक्सीजन की कमी के मासूम बच्चों की मौत नही होती। लेकिन योगी सरकार ने ऐसा नही किया।

बच्चों का बचपन संवारने और नोबेल पुरुस्कार पाने वाले कैलाश सत्यार्थी ने तो इस घटना को हादसा नहीं बल्कि हत्या करार दिया है। सत्यार्थी ने कहा, बगैर ऑक्सीजन के 30 बच्चों की मौत हादसा नहीं, हत्या है। उन्होंने कहा कि क्या हमारे बच्चों के लिए आजादी के 70 सालों का यही मतलब है।’

लेकिन इस घटना से क्या राज्य सरकार कोई सीख लेगी, इन मौतों को लेकर जिम्मेदारी किस पर तय होगी? ये एक बड़ा सवाल है। लेकिन इतना तो तय है कि, इस मामले की भी जांच होगी, रिपोर्ट आएगी, रिपोर्ट में किसे गुनहगार ठहराया जाएगा, नहीं ठहराया जाएगा, क्लीन चिट दे दी जाएगी, जो होगा सो होगा, जो नहीं होगा वह यह कि ऐसी घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया जाएगा, आखिर में होगा वही ढाक के तीन पात, स्वास्थ्य सेवाओं से जूड़े लापरवाही के मामले सामने आते रहेंगे लेकिन हम सबक नहीं लेंगे। और जनता के बीच सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जो धारणाएं बनी हुई है कि वहां न जाया जाय, वहां जाने का मतलब मौत को दावत देना है।

Arvind Pandey

Arvind Pandey

(ये लेखक के निजी विचार है।)

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