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एक्सरसाइज ना करने से सिकुड़ता जाता है दिमाग…

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अगर हमे खुद को फिट रखना है तो उसके लिए हमे एक्सरसाइज करना शुरू कर देना चहिए। हम शुरुआत में तो बहुत मन से एक्सरसाइज करते हैं लेकिन धीरे-धीरे हमारी रुचि कम होने लगती है और हम व्यायाम करना बंद कर देते हैं।

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लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक्सरसाइज बंद करने के बाद आपका दिमाग बुरी तरह प्रभावित हो जाता है। इसलिए अगर आपको फिट रहने है तो इसके लिए आपको एक्सरसाइज करना शुरू कर देना चहिए।

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आइए जानते हैं एक्सरसाइज ना करने की वजह से आपके दिमाग के कौन से हिस्से को नुकसान पहुंचता है।

जब आप अचानक से एक्सरसाइज करना बंद कर देते हैं तो आपके दिमाग के 8 हिस्सों में रक्त का संचार कम हो जाता है। आपके दिमाग में एक जगह होती है जिसे हम हिपोकैम्पस कहते हैं। यह हिस्सा मानव मस्तिष्क का मेमोरी केंद्र होता है। सारी सूचना यहीं एकत्रित रहती है।

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इस वजह से अगर इस हिस्से में रक्त का संचार कम हो जाए तो 10 साल के अंदर आपके दिमाग का आकार कम हो जाएगा। जिसकी वजह से याद्दाश्त कम होने लगेगी।एक्सरसाइज ना करने की वजह से न्यूरोडीजेनेरेटिव नाम की बीमारी होने का खतरा भी बढ़ने लगता है। इसमें दिमाग के न्यूरॉन कोशिकाएं क्षीण होने लगती हैं।

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जिससे पर्किन्सन जैसे रोग होने का खतरा बढ़ जाता है। हर इंसान को हफ्ते में कम से कम 150 मिनट जरूर व्यायाम जरूर करना चाहिए। अगर समय कम हो तो, कम से कम 75 मिनट की दौड़भाग वाली एक्सरसाइज जरूर करें। एक्सरसाइज करने से ना केवल शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत होता है बल्कि आप जल्दी बूढ़े भी नहीं होते हैं।

एक्सरसाइज नहीं करने से सिकुड़ता है दिमाग, होती रहती हैं बीमारियां

30 साल की उम्र के बाद हमारा प्रतिरक्षा तंत्र साल-दर-साल 2-3% कम होने लगता है। इसीलिए बूढ़े लोगों को सामान्य रोग होने का खतरा रहता है। इसके अलावा गठिया और कैंसर जैसे रोग भी उन्हें जल्दी हो जाते हैं। एक स्टडी में लम्बी दूरी के 125 साइकिलिस्टों को शामिल किया गया जिनमें से कुछ लोगों की उम्र 80 साल से ज्यादा थी।

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स्टडी में पाया गया कि उनका प्रतिरक्षा तंत्र 20 साल की उम्र के लड़कों जितना मजबूत था। रेगुलर एक्सरसाइज करने वाले लोग बुढ़ापे में भी घातक वायरस से लड़ने की क्षमता रखते हैं। हालांकि ऐसा प्रतिरक्षा तंत्र पाने के लिए आपको किसी एथलीट की तरह मेहनत करने की जरूरत नहीं है। बस आप रेगुलर कुछ ना कुछ करते रहें।

आप फिट रहने के लिए डांस भी कर सकते हैं। इससे ना केवल आपकी याद्दाश्त बढ़ेगी बल्कि आपकी सीखने की क्षमता भी तेज होगी। एक्सरसाइज से तनाव, अवसाद और मानसिक समस्याओं से भी आपको दूर रहेंगे। इसलिए कुछ ना कुछ नया सीखते रहें इससे आप ना जल्दी बूढ़े होंगे ना बीमार और आपके हिपोकैम्पस का आकार भी बढ़ेगा।

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प्याज के छिलके से चेहरे को बनाए खूबसूरत

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कुछ लोगों को स्किन की कई समस्या होती हैं। कभी-कभी आपको स्किन एलर्जी की परेशनी हो जाती है।

इसे ठीक करने के लिए हम कई तरह के उपाय भी करते है लेकिन ये ठीक नहीं होती। ऐसे में हम आपको बताते है कि अपनी स्किन एलर्जी को कैसे ठीक करें।

स्किन के लिए प्याज बेहद लाभकारी है। जी हां प्याज आपके खाने का स्वाद बढ़ने के साथ-साथ आपकी स्किन के लिए भी बेहद फायदेमंद है।

इसके कुछ आसान से उपाय आपकी खुबसूरती में चार चांद लगा सकता है। बता दें अक्सर लोग प्याज काटकर उसके छिलके को बेकार कचरा समझ कर फेंक देते है। लेकिन आपको नहीं पता होगा यही छिलके आपकी स्किन के लिए फायदेमंद है। प्याज के छिलकों के इस्तेमाल से आप स्किन से जुड़ी बहुत सारी समस्यों को दूर कर सकते है।

आइए बताते है कैसे करें इस्तेमाल..

अगर आपको स्किन एलर्जी है तो आप प्याज के छिलकों को 2-3 घण्टे तक भिगोकर रखें। बाद में इससे अपना चेहरा साफ कर लें ।

चेहरे के साथ-साथ प्याज के छिलके आपके बालों के लिए भी बेहद फायदेमंद है। प्याज के छिलकों को भिगोकर इसके पानी से बाल धोने से बालों में चमक आती है।

अगर आपको अपना चेहरा चमकदार और दाग धब्बे हटाने है तो उसके लिए प्याज के छिलकों को पीसकर हल्दी में मिला लें। इससे आपका चेहरा चाँद की तरह चमकेगा जाएगा। साथ ही कोमतला भी आएगी।

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Holi 2019: इन गानों के बिना अधूरी हैं होली…

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होली का त्योहार आते ही देशभर में उत्साह और उमंग की लहर दौड़ने लगती हैं। होली रंगो और गानों के बिना मनाना लगभग नामुमकिन है।

होली के गीतों से त्योहार में डबल मजा आ जाता हैं। नाच गानों की महफिल और सभी रंगों में सराबोर हो जाते हैं। बॉलीवुड में भी हमेशा से ही ऐसे तमाम गाने फिल्माए गए हैं जो होली पर आधारित हैं।

ये गाने आज भी काफी ज्यादा सुने जाते हैं। होली के मौके पर सूने ये नए और पुराने कुछ शानदार गाने।

https://www.youtube.com/watch?v=-GPAzK1hMfg

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बुंदेलखंड में अब बदला है होली के हुड़दंग का ढंग

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प्रतीकात्मक तस्वीर

उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड में हर तीज-त्योहार मनाने के अलग-अलग रिवाज रहे हैं। अब होली को ही ले लीजिए।

करीब एक दशक पूर्व तक होलिका दहन के बाद रात में गांवों के ‘लंबरदार’ अपने यहां ‘चौहाई’ (मजदूरी) करने वाले चुपके से दलितों के घरों में मरे मवेशियों की हड्डी, मल-मूत्र और गंदा पानी फेंका करते थे, इसे ‘हुड़दंग’ कहा जाता रहा है।

लेकिन इसे कानून की सख्ती कहें या सामाजिक जागरूकता, यह दशकों पुराना गैर सामाजिक रिवाज अब बंद हो चुका है। होली में ‘हुड़दंग’ सभी से सुना होगा, लेकिन बुंदेली हुड़दंग के बारे में शायद ही सबको पता हो। एक दशक पूर्व तक महिला और पुरुषों की अलग-अलग टोलियों में ढोलक, मजीरा और झांज के साथ होली गीत गाते हुए होलिका तक जाते थे और गांव का चौकीदार होलिका दहन करता था।

यहां खास बात यह थी कि होलिका दहन करने से पूर्व सभी महिलाएं लौटकर अपने घर चली आती थीं। तर्क दिया जाता था कि होलिका एक महिला थी, महिला को जिंदा जलते कोई महिला कैसे देख सकती है?

होलिका दहन के बाद शुरू होता था ‘होली का हुड़दंग’। गांव के लंबरदार (काश्तकार) मरे मवेशियों की हड्डियां, मल-मूत्र व गंदा पानी अपने साथ लाकर अपने यहां चौहाई (मजदूरी) करने वाले दलित के दरवाजे और आंगन में फेंक देते थे।

सुबह दलित दंपति उसे समेट कर डलिया में भर कर और लंबरदार को भद्दी-भद्दी गालियां देते हुए उनके दरवाजे में फेंक देते। दलित मनचाही बख्शीस (इनाम) मिलने के बाद ही हुड़दंग का कचरा उठाकर गांव के बाहर फेंकने जाया करते थे। दलितों को बख्शीस के तौर पर काफी कुछ मिला भी करता था।

बांदा जिले के तेंदुरा का कलुआ बताते हैं कि उनके बाबा पंचा को लंबरदार नखासी सिंह ने हुड़दंग की बक्शीस में दो बीघा खेत हमेशा के लिए दे दिया था, जिस पर वह आज भी काबिज हैं। अब वह किसी की चौहाई नहीं करते।

हालांकि ‘हुड़दंग’ जैसी इस गैर सामाजिक परंपरा की कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुरजोर मुखालफत भी की और इसके खिलाफ एक अभियान चलाया। इनमें ‘जल पुरुष’ राजेंद्र सिंह के शिष्य सुरेश रैकवार (निवासी तेंदुरा गांव) का नाम सबसे आगे आता है।

बकौल सुरेश, “हुड़दंग एक गैर सामाजिक परंपरा थी, जो मानवाधिकारों का भी उल्लंघन करती थी। वह कहते हैं कि इसकी आड़ में दलितों की आबरू से भी खिलवाड़ किया जाता था जिसका विरोध करने पर कथित लंबरदार जानलेवा हमला भी कर देते थे। तेंदुरा गांव में ही हुड़दंग का विरोध करने पर अमलोहरा रैदास को गोली मार दी गई थी, जिससे उसे अपना एक हाथ कटाना पड़ा था।”

बांदा के पुलिस अधीक्षक गणेश प्रसाद साहा कहते हैं, “होली का त्योहार भाईचारे का त्योहार है, प्रेम से रंग-गुलाल लगाया जा सकता है। कानून हुड़दंग (उपद्रव) करने की इजाजत नहीं देता है। अगर किसी ने भी होली की आड़ में गैर कानूनी कदम उठाया तो उसकी खैर नहीं होगी। सभी थानाध्यक्षों और गांवों में तैनात चौकीदारों को अराजकतत्वों पर कड़ी नजर रखने को कहा गया है।”

–आईएएनएस

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