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स्वास्थ्य

मिर्गी की दवा दिमागी ट्यूमर में भी कारगर

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ग्लूकोमा, मिर्गी व हार्ट फेल्योर के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवा तेजी से बढ़ते दिमागी ट्यूमर के पीड़ितों के लिए सहायक हो सकती है, वह ज्यादा समय तक जी सकते हैं।

दिमागी ट्यूमर को ग्लिओब्लास्टोमा के नाम से जानते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया है कि ज्यदातर ग्लिओब्लासटोमा मरीजो में उच्च स्तर का प्रोटीन बीसीएल-3 टेमोजोलोमाइड (टीएमजेड) के फायदेमंद प्रभावों पर उदासीन व्यवहार करता है। टीएमजेड बीमारी की कीमोथेरपी के लिए अक्सर प्रयोग किया जाता है।

प्रोटीन टीएमजेड से कैंसर कोशिकाओं की रक्षा करता है। यह एक बचाव करने वाले एंजाइम को सक्रिय करके कैंसर कोशिकाओं की रक्षा करता है। इस एंजाइम का नाम काबोर्निक एनहाइड्रेज 2 है। शोधकर्ताओं के दल ने कहा कि ऊंचाई की बीमारी की दवा एसिटाजोलमाइड एक कार्बनिक एनहाइड्रेज अवरोधक है और टीएमजेड की ट्यूमर कोशिकाओं को मारने की क्षमता को पुनस्र्थापित कर सकती है। इस प्रकार टीएमजेड को एसीटाजोलमाइड जोड़ने से ग्लिओब्लास्टोमा के साथ लंबे समय तक जीवित रहने में मदद मिल सकती है।

–आईएएनएस

स्वास्थ्य

2016 में शराब पीने से गई 30 लाख से ज्यादा लोगों की जान : WHO

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फोटो-(ट्विटर-WHO)

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि बहुत अधिक शराब पीने की वजह से साल 2016 में 30 लाख से ज्यादा लोगों की जान गई है।

इसमें  ज्यादातर पुरुष शामिल है। संयुक्त राष्ट्र की इस स्वास्थ्य एजेंसी ने चेतावनी भी दी है। कहा है कि मौजूदा नीतियों पर अमल और उनके नतीजे इस प्रवृति में बड़े बदलाव के लिए नाकाफी हैं। साथ ही, एजेंसी ने अगले 10 साल में शराब की खपत में बढ़ोतरी का पूर्वानुमान व्यक्त किया है।

शनिवार को जारी एक नई रिपोर्ट में डब्ल्यूएचओ ने कहा कि करीब 23.7 करोड़ पुरुष और 4.6 करोड़ महिलाएं अल्कोहल से जुड़ी समस्या का सामना कर रही हैं। इनमें ज्यादातर यूरोप और अमेरिका में रहने वाले हैं। यूरोप में प्रति व्यक्ति शराब की खपत पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा है।

जबकि वहां 2010 के मुकाबले अब शराब की खपत में 10 फीसदी तक की कमी हुई है। शराब से जुड़ी मौतों में से एक तिहाई मौंतें कार हादसों या खुद को नुकसान पहुंचाने से जख्मी होने जैसी वारदातों से होती हैं। जबकि करीब 20 फीसदी मौतें पाचनतंत्र में गड़बड़ी या हृदय संबंधी बीमारियों से होती हैं।

कैंसर, संक्रामक रोगों, मानसिक विकारों और स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य समस्याओं की वजह से भी ये मौतें होती हैं। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडहानोम घेब्रेयीसस ने कहा, ‘कई लोग, उनके परिजन और उनका समुदाय हिंसा, जख्म, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और कैंसर एवं स्ट्रोक जैसे रोगों के जरिए अल्कोहल के नुकसानदेह इस्तेमाल के नतीजे भुगतते हैं। उन्होंने कहा कि सेहतमंद समाज के निर्माण की राह में इस सबसे बड़े खतरे को रोकने की खातिर प्रभावी कार्रवाई करने का वक्त आ गया है।

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स्वास्थ्य

वजन कम करने के लिए सुबह उठकर करें ये 5 काम

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फाइल फोटो

आधुनिक जीवनशैली के चलते कई लोग मोटापे से पीड़ित हैं। वजन कम करने की तमाम कोशिशों के बाद भी लोगों का वजन कम ही नहीं होता है। चाहें 5 किलो वजन कम करना हो। कई बार डाइटिंग और एक्सरसाइज करने के बावजूद भी वजन कम नहीं होता है।

हम आपको 5 ऐसी चीजें बताने जा रहे हैं, जिन्हें सुबह उठकर करने से आप आसानी से वजन कम कर सकेंगे। सोने के बाद रातभर पानी न पीने और खाने में गैप होने के कारण सुबह उठने पर शरीर डीहाइड्रेड हो जाता है। इसलिए सुबह उठते ही सबसे पहले कम से कम 2 गिलास गुनगुना या ताजा पानी जरूर पिएं।

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सुबह खाली पेट पानी पीने के कई फायदे होते हैं। इससे शरीर में मौजूद टॉक्सिंस बाहर निकल जाते हैं। साथ ही मेटाबॉलिज्म भी मजबूत होता है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, जिनती अच्छी तरह मेटाबॉलिज्म काम करता है उतना ही जल्दी वजन कम होता है।

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गर्म पानी में नींबू, शहद और एक चुटकी दालचीनी का पाउडर मिलाकर पीना और भी ज्यादा फायदेमंद होता है। इसमें भारी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं, जो मेटाबॉलिज्म को मजबूत बनाते हैं।

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पानी में करी पत्ता उबालकर पिएं। आप चाहें तो करी पत्ता चबाते हैं हुए भी गर्म पानी पी सकते हैं। इससे शरीर से टॉक्सिंस निकल जाते हैं। ब्लड शुगर का स्तर कम होता है और कम समय में वजन भी कम होने लगता है।

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पानी में जीरा उबालकर और नींबू का रस मिलाकर पिएं या रात में जीरे को पानी में भिगो दें और सुबह उठकर जीरे के पानी को छानकर पी लें। ऐसा करने से जीरे इसमें मौजूद पोटेशियम और मैग्नीशियम मेटाबॉलिज्म को फायदा पहुंचाते हैं।

सुबह उठकर करें ये 5 काम, जल्द कम हो जाएगा वजन

तनाव से बचने की कोशिश करें क्योंकि ज्यादा तनाव लेने से वजन बढ़ता है। चाहें तो तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन भी कर सकते हैं। मेडिटेशन करने से स्ट्रेस दूर होता है। सुबह उठने के बाद कम से कम 10 मिनट तक मेडिटेशन करें। ये तनाव को दूर कर वजन कम करने में मददगार साबित होता है।

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स्वास्थ्य

शरीर में अनचाहा दर्द कही कैंसर की वजह तो नहीं…

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कैंसर एक ऐसी बिमारी है जिसमें शरीर के किसी एक हिस्से में कोशिकाएं अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती है।

कैंसरग्रस्त कोशिकाएं पूरे शरीर के ऊतकों व अंगों को नुकसान पहुंचाने लगती हैं। कैंसर आजकल बहुत ही कॉमन बीमारी होती जा रही है और इसके लक्षण भी अलग-2 होते हैं। ऐसे में यह जानना बहुत जरूरी है कि हमें किन बातों को ध्यान में रखना जरूरी है।

नैशनल हेल्थ सर्विस (इंग्लैंड) के मुताबिक, हर तीन में से एक को जीवनकाल में किसी ना किसी तरह का कैंसर हो रहा है। कैंसर भी करीब 200 प्रकार के होते हैं जिसमें से हर टाइप के कैंसर के अलग-अलग लक्षण होते हैं। हालांकि 4 ऐसे कैंसर हैं जिनके लक्षण कुछ-कुछ एक ही तरह के हैं।

इन 4 तरह के कैंसरों में एब्डोमिनल एरिया में दर्द भी एक सामान्य लक्षण है। अधिकतर लोगों को कैंसर का पता आखिरी स्टेज पर चलता है।इसलिए अगर हम कुछ बातों का ध्यान रखें तो शायद हमें इससे निपटने में मदद मिल जाए।

इसके लिए आपको सबसे ज्यादा अपने शरीर में होने वाले किसी भी अजीब से बदलाव पर ध्यान देना होगा, जैसे कि किसी हिस्से में कहीं गांठ, या फिर यूरीन में ब्लड या फिर आंतों में किसी तरह का बदलाव महसूस होना। अगर आपके शरीर के एब्डोमिनल हिस्से में दर्द होता रहता है तो ये इन 4 तरह के कैंसरों का लक्षण हो सकता है।

शरीर के इस हिस्से में होता है दर्द तो हो सकता है कैंसर!

बोवेल कैंसर-

इस कैंसर के लक्षणों को बहुत आसानी से पहचाना नहीं जा सकता है, शायद आपको एहसास भी ना हो। हालांकि 90 फीसदी से ज्यादा मरीजों को एब्डोमिनल पेन महसूस होता है, या बेचैनी या सूजन या फिर bowel में किसी भी तरह का बदलाव, या बिना पाइल्स के खून आना।

शरीर के इस हिस्से में होता है दर्द तो हो सकता है कैंसर!

इन लक्षणों के दिखने का मतलब यह नहीं है कि आपको bowel cancer ही होगा। हालांकि NHS की सलाह है कि अगर ये लक्षण लगातार 4 हफ्तों से ज्यादा रहते हैं तो फिर आपको डॉक्टर से जांच जरूर करानी चाहिए।

पेट का कैंसर-

पेट का कैंसर वैसे तो बहुत कॉमन नहीं है लेकिन ब्रिटेन में करीब हर साल 7000 लोग इसकी चपेट में आ जाते हैं। इसके भी शुरुआती लक्षण बहुत स्पष्ट नहीं होते हैं और इनको अधिकतर लोग छोटी-मोटी बीमारी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इसके शुरुआती लक्षणों में पेट दर्द, खाने के बाद ब्लोटिंग, पेट में सूजन, डकार, पाचन की समस्या, हार्टबर्न हैं। एडवांस स्टोमक कैंसर के लक्षण मल में खून आना, भूख खत्म हो जाना, अचानक से वजन घटना आदि हैं।

अग्नाशय का कैंसर-

अग्नाश्य कैंसर के शुरुआती स्टेज में लक्षण ज्यादा स्पष्ट नहीं होते हैं जिससे इसकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है. इसका पहला लक्षण अक्सर बैक पेन या पेट में दर्द होना, अचानक से वजन घट जाना, पीलिया होना आदि है। इसके दूसरे संभावित लक्षणों में वॉमिटिंग, डायरिया, कब्ज, बुखार, कांपना, ज्यादा भूख या प्यास लगना, पाचन में समस्या, खून के थक्के बनना है।

शरीर के इस हिस्से में होता है दर्द तो हो सकता है कैंसर!

ओवरियन कैंसर-

महिलाओं में ओवरियन कैंसर के लक्षणों को अक्सर बोवेल सिंड्रोम या पीरियड्स से जोड़कर देखा जाता है। ओवरियन कैंसर का सबसे सामान्य लक्षण है पेट या पेल्विस में बेचैनी महसूस होना, सूजन का बने रहना, जल्दी भूख खत्म हो जाना और सामान्य से ज्यादा बार पेशाब करना।

इसके दूसरे लक्षणों में लगातार भोजन ना पचना, उल्टियां, सेक्स के दौरान दर्द, बैक पेन, वजाइनल ब्लीडिंग, हर समय थकान महसूस करना और बिना किसी खास वजह के वजन कम हो जाना। इसकी मुख्य वजह तंबाकू के सेवन की स्थानीय आदत, खान-पान के तरीके और सामाजिक-आर्थिक तथा रहन-सहन जैसे कारक होती है।

इन कारकों की वजह से हमारे देश में इस समय दिखाई दे रहा अधिकतर कैंसर आसानी से दिखने वाली जगहों पर या अंगुली की पहुंच के भीतर होता है। लेकिन दुख की बात यह है कि शुरू में ही बीमारी का निदान करा लेने के सहज लाभ के बावजूद हमारे देश में 80 प्रतिशत से अधिक कैंसर रोगी थर्ड और फोर्थ स्टेज में इलाज के लिए आते हैं, और इस समय तक अधिकतर मामले लाइलाज हो जाते हैं।

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