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मलेरिया में भूलकर भी इन चीजों का न करें सेवन…

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मलेरिया बुखार मच्छरों से होने वाला एक तरह की संक्रामक बीमारी है। जो फीमेल एनोफिलीज मच्छर के काटने से होती है। इस मादा मच्छर में एक खास प्रकार का जीवाणु होता है। जिसे डॉक्टरी भाषा में प्लाज्मोडियम नाम से जाना जाता है। यह जीवाणु लिवर और रक्त कोशिकाओं को संक्रमित करके व्यक्ति को बीमार बना देती है। वक्त पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी जानलेवा हो सकती है।

आज हम आपको इस बीमारी के लक्षण और बचाव के बारें में बताने जा रहे है। आइए जानें मलेरिया होने पर किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

मलेरिया के लक्षण
बुखार, पसीना आना, शरीर में दर्द और उल्टी आना इस बीमारी का अहम लक्षण है। इस रोग से बचने के लिए घर के आस-पास गंदगी और पानी इकठ्ठा न होने दें।

मलेरिया में क्या खांए-

  • मलेरिया के रोगी को सेब का सेवन करने से कई तरह के फायदे मिलते है।
  • मलेरिया से छुटकारा पाने के लिए पीपल का चूर्ण शहद में मिलाकर खाए। इससे बुखार जल्दी ठीक होता है।
  • मलेरिया में दाल-चावल की खिचड़ी, दलिया, साबूदाना पौष्टिक भोजन का सेवन करना चाहिए। यह पचाने में भी आसान होता है और पेट से जुड़ी भी समस्या नहीं होती।
  • मलेरिया होने पर नीबू में काली मिर्च के साथ चूर्ण और सेंधा नमक मिलाकर खाए। इससे रोगी का मुंह का स्वाद ठीक होगा।
  • मलेरिया ज्वर में अमरूद खाने से रोगी को लाभ मिलता है।
  • तुलसी के पत्तों के साथ काली मिर्च को पानी में उबालने के बाद इस पानी को छानकर पिएं।

मलेरिया में इन चीजों का ना करें सेवन

  • ठंडा पानी बिल्कुल न पियें और ना ही ठंडे पानी से नहाएं।
  • रोगी को आम, अनार, लीची, अनन्नास, संतरा जैसे फलों का सेवन नहीं करना चाहिए. इससे फायदा नहीं नुकसान होगा।
  • बुखार से पीड़ित व्यक्ति एसी में ज्यादा न रहें।
  • दही, शिकंजी, गाजर, मूली जैसी ठंड़ी चीजों का सेवन करने से बचें
  • मिर्च-मसाले व अम्ल रस से बने खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।

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सर्दियों में ऐसे रखें सेहत का ख्याल…

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सर्दियों में हर किसी के लिए अपनी सेहत का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। कुछ खास सावधानियां बरतकर आपक खुद को तंदुरुस्त रख सकते है। आइए जानें किन बातों का ध्यान रखें।

ब्लड शुगर और कॉलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रखें 

* अपने ब्लड शुगर और कॉलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण रखें। इस समय नमक का सेवन कम मात्रा में करें, क्योंकि ज्यादा नमक से दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ता है।

खाने-पीने की आदतें : साबुत अनाज, दलिया आदि दिल की सेहत के लिए अच्छे हैं और वजन कम करने में भी मदद करते हैं। तले हुए तथा सैचुरेटेड खाद्य पदार्थो का सेवन न करें। फलों और सब्जियों का सेवन भरपूर मात्रा में करें। इनमें मौजूद विटामिन और मिनरल्स इस मौसम में बीमारियों से लड़ने के लिए बहुत फायदेमंद हैं।

पानी पीने की आदत : सर्दियों में पानी का सेवन ज्यादा मात्रा में करें। हर्बल-टी पीने से एलडीएल कॉलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड का स्तर कम होता है।

अपने वजन पर नियंत्रण रखें, फिट रहने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करें। सैर करें, यह अच्छा व्यायाम है। साथ ही चलने से शरीर में गर्मी आती है। दिन में 6-8 घंटे की नींद लें। रोज कम से कम 15 मिनट चलें, इससे खून का दौरा बढ़ता है।

दिल की बीमारियों से बचने के लिए धूम्रपान और शराब का सेवन न करें।

अपने आपको गर्म कपड़ों से कवर करके रखें, खासतौर पर पैर, सिर और कानों को ढक कर रखें।

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टाइप-2 डायबिटीज से हृदय रोग का खतरा ज्यादा

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मधुमेह यानी डायबिटीज से पीड़ित लोगों को दिल की बीमारियों से मौत का खतरा बढ़ जाता है। टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों में लगभग 58 प्रतिशत मौतें हृदय संबंधी परेशानियों के कारण होती हैं।

मधुमेह के साथ जुड़े ग्लूकोज के उच्च स्तर से रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचता है, जिससे रक्तचाप और नजर, जोड़ों में दर्द तथा अन्य परेशानियां हो जाती हैं।चिकित्सक के अनुसार, टाइप-2 मधुमेह सामान्य रूप से वयस्कों को प्रभावित करता है, लेकिन युवा भारतीयों में भी यह अब तेजी से देखा जा रहा है।

वे गुर्दे की क्षति और हृदय रोग के साथ-साथ जीवन को संकट में डालने वाली जटिलताओं के जोखिम को झेल रहे हैं। पद्मश्री से सम्मानित डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, “देश में युवाओं के मधुमेह से ग्रस्त होने के पीछे जो कारक जिम्मेदार हैं, उनमें प्रमुख है प्रोसेस्ड और जंक फूड से भरपूर अधिक कैलारी वाला भोजन, मोटापा तथा निष्क्रियता।

समय पर ढंग से जांच न कर पाना और डॉक्टर की सलाह का पालन न करना उनके लिए और भी जोखिम भरा हो जाता है, जिससे उन्हें अपेक्षाकृत कम उम्र में ही जानलेवा स्थितियांे से गुजरना पड़ जाता है।”

उन्होंने कहा कि लोगों में एक आम धारणा है कि टाइप-2 मधुमेह वाले युवाओं को इंसुलिन की जरूरत नहीं होती है, इसलिए ऐसा लगता है कि यह भयावह स्थिति नहीं है। हालांकि, ऐसा सोचना गलत है। इस स्थिति में तत्काल उपचार और प्रबंधन की जरूरत होती है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि टाइप-2 डायबिटीज वाले युवाओं में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। यदि कुछ दिखते भी हैं, तो वे आमतौर पर हल्के हो सकते हैं, और ज्यादातर मामलों में धीरे-धीरे विकसित होते हैं, जिनमें अधिक प्यास और बार-बार मूत्र त्याग करना शामिल है।

डॉ. अग्रवाल ने कहा, “यदि घर के बड़े लोग अच्छी जीवनशैली का उदाहरण पेश करते हैं तो यह युवाओं के लिए भी प्रेरणादायी होगा। इस तरह के बदलाव एक युवा को अपना वजन कम करने में मदद कर सकते हैं (अगर ऐसी समस्या है तो) या उन्हें खाने-पीने के बेहतर विकल्प खोजने में मदद कर सकते हैं, जिससे टाइप-2 मधुमेह विकसित होने की संभावना कम हो जाती है।

जिनके परिवार में पहले से ही डायबिटीज की समस्या रही है, उनके लिए तो यह और भी सच है।

उन्होंने कुछ सुझाव दिए :

  • खाने में स्वस्थ खाद्य पदार्थ ही चुनें।
  • प्रतिदिन तेज रफ्तार में टहलें।
  • अपने परिवार के साथ अपने स्वास्थ्य और मधुमेह व हृदय रोग के जोखिम के बारे में बात करें।
  • यदि आप धूम्रपान करते हैं, तो इसे छोड़ने की पहल करें।
  • अपने लिए, अपने परिवार के लिए और आने वाली पीढ़ियों के लिए मधुमेह और इसकी जटिलताओं संबंधी जोखिम को कम करने खातिर जीवनशैली में बदलाव करें।

–आईएएनएस

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सर्दी के मौसम में बनाकर पीएं मटर-पुदीने का सूप

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सर्दियों में बार-बार चाय पीने की आदत तो सभी की होती है। लेकिन ज्यादा चाय आपकी सेहत को नुकसान भी कर सकती है। इसलिए आज हम आपके लिए लेकर आए है हेल्दी सूप की रेसिपी।

इसे पीने से आपके शरीर में एनर्जी बनी रहेगी। साथ ही शरीर में गर्माहट भी रहेगी। इस सूप को बनाने में लहसुन प्याज और पुदीने का प्रयोग किया जाएगा। इन सबसे बना सूप को कई बीमारियों से भी दूर रखेगा। आइए जानें इस सूप की रेसिपी।

सामग्री

एक कप पुदीना, 6 कप पानी, एक चम्मच- ऑलिव ऑयल, 3 लहसुन की कली, नमक स्वादानुसार, एक प्याज, एक चम्मच- सौंफ का पाउडर, एक कप-उबली मटर 2 चम्मच-क्रीम, 1/4 टीस्पून काली मिर्च पाउडर

विधि

सूप बनाने के लिए सबसे पहले प्याज, लहसुन और पुदीने को बारीक करके काट लें। इसके बाद एक पैन में ऑलिव ऑयल डालकर गर्म होने के लिए रख दें। अब इसमें प्याज और लहसुन को डालकर नरम होने तक भून लीजिए।

इसके बाद पुदीना और उबली मटर को डालकर 15 मिनट तक धीमी आंच पर पकने के लिए छोड़ दें। फिर ग्राइंडर जार में सूप डालकर इसका पेस्ट बना लें। अब इसके अंदर नमक और काली मिर्च डालकर अच्छे से मिला लें। लीजिए तैयार है आपका मटर-पुदीने का हेल्दी सूप। तैयार सूप पर पुदीना और क्रीम गर्म-गर्म सर्व करें।

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