Connect with us

स्वास्थ्य

डीएलएफ ने कैंसर दिवस पर लगाया मुफ्त जांच शिविर

Published

on

world-cancer-day

विश्व कैंसर दिवस पर डीएलएफ ने एक दिवसीय कैंसर जांच और जागरूकता शिविर का आयोजन किया। इस दौरान करीब 100 लोगों की जांच और स्क्रीनिंग की गई।

डीएलएफ फाउंडेशन ने एक बयान में कहा कि डीएलएफ मोबाइल वेलनेस यूनिट ने होरिजन प्लाजा में यह शिविर लगाया। डीएलएफ 5 और डीएलएफ फाउंडेशन की एक संयुक्त पहल का उद्देश्य कैंसर के बारे में जागरूकता पैदा करना और इसकी रोकथाम, पहचान और उपचार को प्रोत्साहित करना था।

कैंसर की जांच के अलावा रक्तचाप, मधुमेह और लीवर तंत्र की भी जांच की गई। डीएलएफ फाउंडेशन के सीईओ विनय साहनी ने कहा, “इस पहल का उद्देश्य लोगों को जानकारी प्रदान करना, संसाधनों और सेवाओं के लिए सुविधाजनक पहुंच बनाने के लिए सहायता तथा रोकथाम एवं कैंसर की जल्दी पहचान करने के लिए है।

कैंसर पर जल्द से जल्द नियंत्रण और उपचार सुनिश्चित करने के लिए लोगों को कैंसर के प्रारंभिक जांच के बारे में शिक्षित और जागरूक करने की जरूरत है। डीएलएफ मोबाइल वेलनेस यूनिट एक बस को रिमॉडल करके बनाया गया है, जिसमें चिकित्सकीय परीक्षण की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

–आईएएनएस

स्वास्थ्य

भुखमरी पीड़ित देशों में अपना भारत महान भी!

Published

on

bhukmari-
प्रतीकात्मक तस्वीर

मानव जाति की बुनियादी जरूरतों की बात करें तो रोटी, कपड़ा और मकान का ही नाम आता है। इनमें रोटी सर्वोपरि है। रोटी यानी भोजन की अनिवार्यता के बीच आज विश्व के लिए शर्मनाक तस्वीर यह है कि वैश्विक आबादी का एक बड़ा हिस्सा अब भी भुखमरी का शिकार है।

अगर भुखमरी की इस समस्या को भारत के संदर्भ में देखें तो संयुक्त राष्ट्र द्वारा भुखमरी पर जारी रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के सर्वाधिक भुखमरी से पीड़ित देशों में भारत का नाम भी है। खाद्यान्न वितरण प्रणाली में सुधार तथा अधिक पैदावार के लिए कृषि क्षेत्र में निरंतर नए अनुसंधान के बावजूद भारत में भुखमरी के हालात बदतर होते जा रहे हैं, जिस वजह से ग्लोबल हंगर इंडेक्स में यह तीन पायदान नीचे उतर गया है।

दुनियाभर के देशों में भुखमरी के हालात का विश्लेषण करने वाली गैर सरकारी अंतर्राष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार गत वर्ष भारत दुनिया के 119 देशों के हंगर इंडेक्स में 97वें स्थान पर था, जो इस साल फिसलकर 100 वें स्थान पर पहुंच गया है और इस मामले में एशियाई देशों में उसकी स्थिति बस पाकिस्तान और अफगानिस्तान से थोड़ी ही बेहतर है। इंडेक्स में पाकिस्तान और अफगानिस्तान का हाल सबसे बुरा है।

भुखमरी

हंगर इंडेक्स में किसी भी देश में भुखमरी के हालात का आकलन वहां के बच्चों में कुपोषण की स्थिति, शारीरिक अवरुद्धता और बाल मृत्युदर के आधार पर किया जाता है। इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बच्चों में कुपोषण की स्थिति भयावह है। देश में 21 फीसदी बच्चों का पूर्ण शारीरिक विकास नहीं हो पाता, इसकी बड़ी वजह कुपोषण है।

भुखमरी

रिपोर्ट के अनुसार, सरकार द्वारा पोषण युक्त आहार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर चलाए जा रहे अभियान के बावजूद सूखे और मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण देश में गरीब तबके का एक बड़ा हिस्सा कुपोषण के खतरे का सामना कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, भुखमरी के लिहाज से एशिया में भारत की स्थिति अपने कई पड़ोसी देशों से खराब है।

हंगर इंडेक्स में चीन 29वें, नेपाल 72वें, म्यामार 77 वें, इराक 78वें, श्रीलंका 84वें और उत्तर कोरिया 93वें स्थान पर है, जबकि भारत 100 वें स्थान पर फिसल गया है। भारत से नीचे केवल पाकिस्तान और अफगानिस्तान हैं। पाकिस्तान 106वें और अफगानिस्तान 107वें पायदान पर है।

रिपोर्ट में भुखमरी की स्थिति के लिहाज से दुनिया के 119 देशों को अत्याधिक खतरनाक, खतरनाक और गंभीर जैसी तीन श्रेणियों में रखा गया है। इनमें भारत गंभीर की श्रेणी में है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत की इस स्थिति के कारण ही दक्षिण एशिया का प्रदर्शन हंगर इंडेक्स में और बिगड़ा है। इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक भारत में कुपोषण के हालात खराब जरूर हैं, लेकिन 2022 तक देश को कुपोषण से मुक्त करने के लिए सरकार ने जो कार्य योजना बनाई है, वह सराहनीय है। इसमें आने वाले वर्षों में देश से कुपोषण खत्म करने की सरकार की ²ढ़ प्रतिबद्धता झलकती है।

उन्होंने कहा कि सरकारी प्रयासों से साल 2000 के बाद से देश में बाल शारीरिक अवरुद्धता के मामलों में 29 प्रतिशत की कमी आई है, लेकिन इसके बावजूद यह 38.4 प्रतिशत के स्तर पर है जिसमें सुधार के लिए काफी कुछ किया जाना बाकी है। उम्मीद है कि सरकारी प्रयासों से यह संभव हो पाएगा। दुनिया के देशों के बीच भारत की छवि एक ऐसे मुल्क की है, जिसकी अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। लेकिन तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले इस देश की एक सच्चाई यह भी है कि यहां के बच्चे भुखमरी के शिकार हो रहे हैं।

एक ऐसा देश जो अगले एक दशक में दुनिया के सर्वाधिक प्रभावशाली देशो की सूची में शामिल हो सकता है, वहां से ऐसे आंकड़े सामने आनाए बेहद चिंतनीय माना जा रहा है। सबसे ज्यादा आबादी वाला देश चीन भी इस सूची से स्वयं को बचा नहीं पाया है। चीन को ग्लोबल हंगर इंडेक्स की लिस्ट में 20वें नंबर पर रखा गया है। भारत के दूसरे पड़ोसी देशों की हालात ज्यादा अच्छी है क्योंकि इंडेक्स में उनके नाम भारत से पहले हैं। हमारा पड़ोसी देश नेपाल 72वें स्थान पर है, जबकि म्यांमार 77वेंए श्रीलंका 84वें और बांग्लादेश 90वें स्थान पर है।

इस इंडेक्स रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया के अलग-अलग देशों में वहां के नागरिकों को खाने-पीने की सामग्री कितनी और कैसी मिलती है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स हर साल ताजा आंकड़ों के साथ जारी किया जाता है। इसमें विश्वभर में भूख के खिलाफ चल रहे अभियान की उपलब्धियों और नाकामियों को दशार्या जाता है। इस रिपोर्ट को देखते हुए तमाम सवाल उठते हैं। भुखमरी को लेकर भारत की सभी सरकारों की गंभीरता पर प्रश्नचिन्ह खड़े करते हैं।

नेपाल और श्रीलंका जैसे देश भारत से सहायता प्राप्त करने वालों की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में ये सवाल गंभीर हो उठता है कि जो श्रीलंका, नेपाल, म्यांमार हमसे आर्थिक से लेकर तमाम तरह की मोटी मदद पाते हैं, मगर भुखमरी पर रोकथाम के मामले में हमारी हालत उनसे भी बदतर क्यों हो रही है?

इस सवाल पर यह तर्क दिया जा सकता है कि श्रीलंका व नेपाल जैसे कम आबादी वाले देशों से भारत की तुलना नहीं की जा सकती। यह बात सही है, लेकिन साथ ही इस पहलू पर भी ध्यान देने की जरूरत है कि भारत की आबादी श्रीलंका और नेपाल से जितनी अधिक है, भारत के पास क्षमता व संसाधन भी उतने ही अधिक हैं।

महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि हर वर्ष हमारे देश में खाद्यान्न का रिकार्ड उत्पादन होने के बावजूद क्यों देश की लगभग एक चौथाई आबादी को भुखमरी से गुजरना पड़ता है। यहां मामला ये है कि हमारे यहां हर वर्ष अनाज का रिकार्ड उत्पादन तो होता है, पर उस अनाज का एक बड़ा हिस्सा लोगों तक पहुंचने की बजाय कुछ सरकारी गोदामों में तो कुछ इधर-उधर अव्यवस्थित ढंग से रखे-रखे सड़ जाता है।

संयुक्त राष्ट्र के एक आंकड़े के मुताबिक, देश का लगभग 20 फीसद अनाज भंडारण क्षमता के अभाव में बेकार हो जाता है। इसके अतिरिक्त जो अनाज गोदामों में सुरक्षित रखा जाता है, उसका भी एक बड़ा हिस्सा समुचित वितरण प्रणाली के अभाव में जरूरतमंद लोगों तक पहुंचने की बजाय बेकार पड़ा रह जाता है। खाद्य की बबार्दी की ये समस्या सिर्फ भारत में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में है।

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, पूरी दुनिया में प्रतिवर्ष 1.3 अरब टन खाद्यान्न खराब होने के कारण फेंक दिया जाता है। कितनी बड़ी विडंबना है कि एक तरफ दुनिया में इतना खाद्यान्न बर्बाद होता है और दूसरी तरफ दुनिया के लगभग 85 करोड़ लोग भुखमरी का शिकार हैं। क्या यह अनाज इन लोगों की भूख मिटाने के काम नहीं आ सकता, पर व्यवस्था के अभाव में ऐसा नहीं हो रहा।

भारत में भुखमरी से निपटने के लिए कई योजनाएं बनी हैं, लेकिन उनकी सही तरीके से पालना नहीं होती है। महंगाई और खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल ने गरीबों और निम्न आय के लोगों को असहाय बना दिया है। हमारे देश में सरकारों द्वारा भुखमरी को लेकर कभी उतनी गंभीरता दिखाई ही नहीं गई जितनी कि होनी चाहिए।

यहां सरकारों द्वारा हमेशा भुखमरी से निपटने के लिए सस्ता अनाज देने संबंधी योजनाओं पर ही विशेष बल दिया गया। कभी भी उस सस्ते अनाज की वितरण प्रणाली को दुरुस्त करने को लेकर कुछ ठोस नहीं किया गया। सार्वजनिक वितरण प्रणाली हांफ रही है और मिड-डे मील जैसी आकर्षक परियोजनाएं भी भ्रष्टाचार और प्रक्रियात्मक विसंगतियों में डूबी हुई हैं।

–आईएएनएस

Continue Reading

स्वास्थ्य

विश्व खाद्य दिवस और भुखमरी के चौंकाते आंकड़े

Published

on

food-
File Photo

आज ‘विश्व खाद्य दिवस’ है। विकासशील देशों में कृषि के विकास के लिए जरूरी ‘खाद्य एवं कृषि संगठन’ (एफएओ) की स्थापना 16 अक्टूबर, 1945 को कनाडा में की गई थी जो बदलती तकनीक जैसे कृषि, पर्यावरण, पोषक तत्व और खाद्य सुरक्षा के बारे में जानकारी देता है।

अब इसे विडंबना कहें या दुर्भाग्य कि सुर्खियां बटोर रहा है दो दिन पहले जारी हुआ ‘ग्लोबल हंगर इंडेक्स’ यानी जीएचआई। इसमें दुनिया के विभिन्न देशों में खानपान की स्थिति का विस्तृत ब्यौरा होता है और हर साल वैश्विक, क्षेत्रीय तथा राष्ट्रीय स्तर पर भुखमरी का आकलन किया जाता है।

जीएचआई में भारत इस बार और नीचे गिरकर 103वें रैंक पर आ पहुंचा है। दुर्भाग्य इसलिए भी कि इस सूची में कुल 119 देश ही हैं। यकीनन साल दर साल रैंकिंग में आई गिरावट चिंताजनक है। राजनीति से इतर यह राजनीति का मुद्दा जरूर बन गया है, क्योंकि 2014 में मौजूदा सरकार के सत्ता सम्हालते समय जहां यह 55वें रैंक पर था, वहीं 2015 में 80वें, 2016 में 97वें और पिछले साल 100वें और इस बार तीन साढ़ियां और लुढ़क गया।

बेशक भूख अब भी दुनिया में एक बड़ी समस्या है और इसमें कोई झिझक नहीं कि भारत में दशा बदतर है। हम चाहे तरक्की और विज्ञान की कितनी भी बात कर लें, लेकिन भूख के आंकड़े हमें चौंकाते भी हैं और सोंचने को मजबूर कर देते हैं। केवल उपलब्ध आंकड़ों का ही विश्लेषण करें तो स्थिति की भयावहता और भी परेशान कर देती है।

दुनियाभर में जहां करीब 50 लाख बच्चे कुपोषण के चलते जान गंवाते हैं, वहीं गरीब देशों में 40 प्रतिशत बच्चे कमजोर शरीर और दिमाग के साथ बड़े होते हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट बताती है कि दुनिया में 85 करोड़ 30 लाख लोग भुखमरी का शिकार हैं।

अकेले भारत में भूखे लोगों की तादाद लगभग 20 करोड़ से ज्यादा है, जबकि संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन यानी एफएओ की एक रिपोर्ट बताती है कि रोजाना भारतीय 244 करोड़ रुपए यानी पूरे साल में करीब 89060 करोड़ रुपये का भोजन बर्बाद कर देते हैं।

इतनी राशि से 20 करोड़ से कहीं ज्यादा पेट भरे जा सकते हैं, लेकिन इसके लिए न सामाजिक चेतना जगाई जा रही है और न ही कोई सरकारी कार्यक्रम या योजना है। इसका मतलब यह हुआ कि भारत की आबादी का लगभग पांचवां हिस्सा कहीं न कहीं हर दिन भूखा सोने मजबूर है, जिससे हर वर्ष लाखों जान चली जाती है।

‘ग्लोबल हंगर इंडेक्स’ के आंकड़ों को सच मानें तो रोजाना 3000 बच्चे भूख से मर जाते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि भूखे लोगों की करीब 23 प्रतिशत आबादी अकेले भारत में है, यानी हालात अमूमन उत्तर कोरिया जैसे ही है। शायद यही कारण है कि भारत में पांच साल से कम उम्र के 38 प्रतिशत बच्चे सही पोषण के अभाव में जीने को मजबूर हैं और इसके चलते उनके मानसिक और शारीरिक विकास, पढ़ाई लिखाई और बौद्धिक स्तर पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

भूख के आंकड़ों के हिसाब से भारत की स्थिति नेपाल और बांग्लादेश जैसे पड़ोसियों से भी बदतर है। इस बार बेलारूस जहां शीर्ष पर है, वहीं पड़ोसी चीन 25वें, श्रीलंका 67वें और म्यांमार 68वें बांग्लादेश 86वें और नेपाल 72वें रैंक पर है। तसल्ली के लिए कह सकते हैं कि पाकिस्तान हमसे नीचे 106वें पायदान पर है।

तस्वीर का दूसरा पहलू बेहद हैरान करता है, क्योंकि यह आंकड़े तब आए हैं जब भारत गरीबी और भूखमरी को दूर कर विकासशील से विकसित देशों की कतार में शामिल होने के खातिर जोर-शोर से कोशिश कर रहा है। एक ओर सरकार का दावा है कि तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं, नीतियां बना रही हैं और उसी अनुरूप विकास कार्य किए जा रहे हैं।

स्वराज अभियान की याचिका पर 2016 में सर्वोच्च न्यायालय ने भूख और अन्न सुरक्षा के मामले में केंद्र और राज्य सरकारों की बेरुखी को लेकर कम से कम 5 बार आदेशए निर्देश दिए। यह तक कहा कि संसद के बनाए ऐसे कानूनों का क्या उपयोग जिसे राज्य और केंद्र की सरकारें लागू ही न करें! इशारा कहीं न कहीं नेशनल फुड सिक्योरिटी एक्ट 2013 के प्रति सरकारी बेरुखी की ओर था।

तस्वीर का तीसरा पहलू और भी चौंकाने वाला है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की ‘2018 बहुआयामी वैश्विक गरीबी सूचकांक’ बताता है कि बीते एक दशक यानी वर्ष 2005.06 से 2015-16 के बीच भारत में 27 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकल गए हैं।

इसी पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के 73वें अधिवेशन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गरीबी दूर करने के लिए भारत की तारीफों के पुल भी बांधे थे तथा लाखों लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकालने के उन्होंने सरकार की पीठ थपथपाई थी। वहीं चंद दिनों बाद आए ‘ग्लोबल हंगर इंडेक्स’ ने सभी के दावों और आंकड़ों पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं या एक-दूसरे का मुंह चिढ़ा रहे हैं?

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार एवं टिप्पणीकार हैं, ये उनके निजी विचार हैं)

-आईएएनएस

Continue Reading

स्वास्थ्य

जयपुर में जीका वायरस के 50 मामले आये सामने

Published

on

zika virus
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

राजस्थान के जयपुर में अब तक जीका वायरस की जांच में 50 लोगों को पॉजिटिव पाया गया है। खबर के मुताबिक जयपुर के शास्त्री नगर इलाके में कम से कम 10 लोग जीका वायरस की चपेट में बताए गए हैं। राजस्‍थान में जीका वायरस का पहला मामला 22 सितंबर को सामने आया था।

राजस्‍थान स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के एक अधिकारी ने कहा था कि कुल 30 मामलों में इलाज के बाद मरीजों की तबीयत ठीक है।

बिगड़ते हालात के मद्देनजर जयपुर में निगरानी टीमों की संख्या 50 से बढ़ाकर 170 कर दी गई है और हीरा बाग इलाज केंद्र में एक विशेष वॉर्ड बनाया गया है, जहां जीका वायरस से प्रभावित मरीजों को अलग रखकर इलाज किया जा सके।

एडिज एजेप्टी मच्छर के जरिए फैलने वाले जीका वायरस की चपेट में आने पर व्यक्ति को बुखार होता है, त्वचा पर दाग हो जाते हैं, कंजक्टिवाइटिस यानी आंखों में संक्रमण हो जाता है, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होता है।

WeForNews

Continue Reading
Advertisement
sabrimala
शहर27 mins ago

सबरीमाला मंदिर के कपाट खुलने से पहले हिंसा, पत्रकारों पर हमला

bhukmari-
स्वास्थ्य49 mins ago

भुखमरी पीड़ित देशों में अपना भारत महान भी!

unemployment in India
ब्लॉग1 hour ago

नई नौकरियां नहीं पैदा हुई, देश में बढ़ी बेरोजगारी दर

Manvendra Singh
राजनीति2 hours ago

पूर्व बीजेपी नेता मानवेंद्र सिंह कांग्रेस में शामिल

jammu and kashmir-min
राष्ट्रीय2 hours ago

बारामूला में पुलिस पार्टी पर आतंकी हमला

india women
राष्ट्रीय2 hours ago

देश में 92 फीसदी महिलाओं की तनख्वाह 10 हजार से भी कम

india women
ब्लॉग2 hours ago

देश में 92 फीसदी महिलाओं की तनख्वाह 10 हजार से भी कम

Navratri
राष्ट्रीय2 hours ago

नवरात्रि में भक्तों में बिखरे मां दुर्गा की भक्ति के रंग

rupee
व्यापार2 hours ago

एक रुपये की वसूली के लिए बैंक ने खर्च किये 85 रुपये

Anna Burns-
अंतरराष्ट्रीय2 hours ago

आइरिश लेखिका एना बर्न्स को ‘मिल्कमैन’ के लिए मिला मैन बुकर पुरस्कार

RAJU-min
राष्ट्रीय4 weeks ago

रक्षा मंत्री के दावे को पूर्व एचएएल चीफ ने नकारा, कहा- भारत में ही बना सकते थे राफेल

Shashi-Tharoor
ओपिनियन4 weeks ago

संशय भरे आधुनिक युग में हिंदू आदर्श धर्म : थरूर

man-min (1)
ज़रा हटके4 weeks ago

इस हॉस्पिटल में भूत-प्रेत करते हैं मरीजों का इलाज

Kapil Sibal
टेक2 weeks ago

बहुमत के फ़ैसले के बावजूद ग़रीब और सम्पन्न लोगों के ‘आधार’ में हुई चूक!

Sonarika Bhadauriya
टेक2 weeks ago

सोशल मीडिया पर कमेंट्स पढ़ना फिजूल : सोनारिका भदौरिया

Matka
ज़रा हटके3 weeks ago

मटकावाला : लंदन से आकर दिल्ली में पिलाते हैं प्यासे को पानी

mohan bhagwat world hindu congress, Bharatiya Janata Party, BJP, Chicago, Hindu Community, Hinduism, Hindus, Hindutva, Illinois, Mohan Bhagwat, Narendra Modi, Rashtriya Swayamsevak Sangh, RSS, TheySaidIt, WHC, World Hindu Congress
ब्लॉग4 weeks ago

मोहन भागवत झूठ पर झूठ परोसते रहे और भक्त झूम-झूमकर कीर्तिन करते रहे!

,Excercise-
लाइफस्टाइल3 weeks ago

उम्र को 10 साल बढ़ा सकती हैं आपकी ये 5 आदतें…

Vivek Tiwari
ब्लॉग3 weeks ago

विवेक की हत्या के लिए अफ़सरों और नेताओं पर भी मुक़दमा क्यों नहीं चलना चाहिए?

IAF Chief Dhanoa Rafale Jet
ब्लॉग2 weeks ago

राफ़ेल पर सफ़ाई देकर धनोया ने वायुसेना की गरिमा गिरायी!

राजनीति1 week ago

छेड़छाड़ पर आईएएस की पत्नी ने चप्पल से बीजेपी नेता को पीटा, देखें वीडियो

airforce
राष्ट्रीय1 week ago

Air Force Day: 8000 फीट की ऊंचाई से उतरे पैरा जंपर्स

Assam
शहर1 week ago

…अचानक हाथी से गिर पड़े असम के डेप्युटी स्पीकर, देखें वीडियो

Karnataka
ज़रा हटके2 weeks ago

कर्नाटक में लंगूर ने चलाई यात्रियों से भरी बस, देखें वीडियो

Kangana Ranaut-
मनोरंजन2 weeks ago

कंगना की फिल्म ‘मणिकर्णिका’ का टीजर जारी

BIHAR
राजनीति2 weeks ago

नीतीश के मंत्री का मुस्लिम टोपी पहनने से इनकार, देखें वीडियो

Hyderabad Murder on Road
शहर3 weeks ago

हैदराबाद: दिनदहाड़े पुलिस के सामने कुल्हाड़ी से युवक की हत्या

Thugs of Hindostan-
मनोरंजन3 weeks ago

धोखे और भरोसे के बीच आमिर-अमिताभ की जंग, ट्रेलर जारी

kapil sibal
राष्ट्रीय3 weeks ago

‘आधार’ पर मोदी सरकार का कदम असंवैधानिक ही नहीं अलोकतांत्रिक भी था: सिब्‍बल

rahul gandhi
राजनीति4 weeks ago

राहुल ने मोदी से पूछा- अब तो बताओ, ओलांद सच कह रहे हैं या झूठ

Most Popular