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कार्ति चिदंबरम की जमानत याचिका पर सुनवाई से दिल्ली हाईकोर्ट की जज ने खुद को किया अलग

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कार्ति चिदंबरम की जमानत याचिका पर सुनवाई के मामले से दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस इंदरमीत कौर ने खुद को अलग कर लिया है। मामले से अलग होने के बारे में न्यायमूर्ति कौर ने कोई वजह नहीं बताई है।

उन्होंने बस इतना कहा कि वह इस मामले को मुख्य न्यायाधीश के पास भेजेंगी ताकि वह जमानत याचिका को आज ही किसी अन्य पीठ को सौंप दें। आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई ने कार्ति को गिरफ्तार किया था। जस्टिस कौर ने सुनवाई से अलग होने के कारणों को नहीं बताया है।

जमानत याचिका मामले की सुनवाई को जस्टिस कौर ने दूसरे बेंच को भेजने के लिए कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश को रेफर किया गया है। यह जमानत याचिका कल कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ के समक्ष लाई गई थी। इस मामले में आज सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गई थी।

कार्ति के मां-पिता और वरिष्ठ वकील पी चिदंबरम और नलिनी चिदंबरम कोर्ट रूम में मौजूद थे। वे अदालत कक्ष में मौजूद थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति ने उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दायर की थी। इसके कुछ घंटे पहले एक अदालत ने उन्हें 24 मार्च तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

कल एक विशेष अदालत ने आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में कार्ति को न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। कार्ति चिदंबरम ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट में जमानत के लिये अर्जी दी थी। आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में दिल्ली पटियाला हाउस कोर्ट 24 मार्च तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

कार्ति चिदंबरम को पिछले महीने 28 फरवरी को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। उनके ऊपर 2007 में आईएएनएक्स मीडिया को विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) से मंजूरी दिलाने के लिए पैसे लेने का आरोप है। उस वक्त उनके पिता पी चिदंबरम तत्कालीन यूपीए सरकार में वित्त मंत्री थे।

चेन्नई में 28 फरवरी को गिरफ्तारी के बाद से कार्ति 12 दिन से सीबीआई की हिरासत में थे, एजेंसी उनसे पूछताछ कर रही थी। सीबीआई ने अदालत से कहा कि कार्ति को हिरासत में रखकर पूछताछ करने की अब जरूरत नहीं है। इसके बाद अदालत ने उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया था। अदालत ने कहा कि उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई निर्धारित तारीख 15 मार्च को ही होगी।

Wefornews Bureau

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वीरप्पन का खात्मा करने वाले आईपीएस को मिली जम्मू-कश्मीर की जिम्मेदारी

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आईपीएस विजय कुमार (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर में महबूबा मुफ्ती सरकार के गिरने के बाद राज्य में राज्यपाल शासन है।

राज्यपाल एन.एन. वोहरा ने बुधवार को कई बैठकें भी की। राज्यपाल की अगुवाई में अब सेना के ऑपरेशन को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा, जिसके लिए तैयारियां भी शुरू हो गई हैं।

इसी के साथ ही राज्य में अधिकारी स्तर पर बड़ा फेरबदल भी हुआ। छत्तीसगढ़ कैडर के सीनियर आईएएस बीवीआर सुब्रमण्यम को राज्य का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया। मुख्य सचिव के अलावा राज्यपाल के सलाहकार के तौर पर आईपीएस विजय कुमार को नियुक्त किया गया है। विजय कुमार और बीवीआर सुब्रमण्यम को अपनी सख्त छवि के लिए जाना जाता है।

बता दें कि एक वक्त था जब कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन की साउथ इंडिया के जंगलों में तूती बोलती थी। उसका असली नाम कूज मुनिस्वामी वीरप्पन था, जो चन्दन की तस्करी के साथ हाथी दांत की तस्करी और कई पुलिस अधिकारियों की मौत का जिम्मेदार था। उसे पकड़ने के लिए सरकार ने करीब 20 करोड़ रुपये खर्च कर दिए थे।

बताया जाता है कि कुख्यात तस्कर वीरप्पन तक पहुंचने के लिए तीन राज्यों की पुलिस और सेना को लंबा समय लगा लेकिन IPS विजय कुमार के नेतृत्व में चलाए गए ऑपरेशन कोकून चलाया गया था। विजय कुमार ने ही तारीख 18 अक्टूबर 2004 को वीरप्पन को मार गिराया था।

बीवीआर सुब्रमण्यम 1987 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उन्हें नक्सलियों को धर दबोचने से लेकर नक्सली विचारधारा को खत्म करने का अच्छा-खासा अनुभव है।

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पनामा पेपर लीक: टेलीकॉम ‘किंग’ के बेटे समेत कई नामचीन फंसे

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पनामा पेपर्स लीक मामले में नया खुलासा हुआ है। अप्रैल 2016 में पनामा पेपर्स के छपने के 3 हफ्ते पहले पनामा की लॉ फर्म मोसैक फोनसेका को किए गए ईमेल में कुछ भारतीयों के नाम सामने आए हैं।

इसमें पीवीआर सिनेमा के मालिक अजय बिजली, सुनील मित्‍तल के बेटे व हाइक मैसेंजर के सीईओ कवीन भारती मित्‍तल और एशियन पेंट्स के प्रवर्तक अश्विन धनी के बेटे जलज अश्विन धनी का नाम शामिल है। यह वे लोग हैं जिनकी विदेश में कंपनियां होने का पता लगा है। मोसैक इनके लिए काम कर रही थी।

इंडियन एक्‍सप्रेस की खबर के मुताबिक केबीएम ग्‍लोबल लिमिटेड के प्रवर्तक के तौर पर कवीन भारती मित्‍तल का नाम सामने आया है। यह फर्म ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड (BVI) में दिसंबर 2008 में पंजीकृत हुई थी। मार्च 2016 के ईमेल में कवीन का नाम कंपनी के लाभार्थी प्रवर्तक के रूप में सामने आया। इसमें उनका अमृता शेरगिल मार्ग, नई दिल्‍ली का भी पता दिया हुआ है।

ताजा खुलासे में 12 लाख ऐसे दस्‍तावेज हैं जिनमें 12000 दस्‍तावेज भारतीयों से जुड़े है। 2016 में 1.15 करोड़ दस्‍तावेज सामने आए थे। इसे खोजी पत्रकारों के अंतरराष्ट्रीय महासंघ (ICIJ) और जर्मनी के अखबार सूड्यूश जिटुंग ने मिलकर खोजा था। दस्‍तावेजों से यह भी खुलासा हुआ है कि पनामा की लॉ फर्म मोसैक फोनसेका उनका बहीखाता देख रही थी। मोसैक ने भारतीयों को उनकी कंपनियों के पंजीकरण से संबंधित दस्‍तावेज कम होने पर नोटिस भी भेजा था। इसके बाद मोसैक फोनसेका ने अपने सभी क्‍लाइंट को 90 दिन का नोटिस दिया जिसमें उसने पंजीकृत एजेंट पद से रिजाइन करने की बात कही क्‍योंकि कंपनियां वैधानिक औपचारिकताएं पूरी करने में फेल रही थीं।

जिन लोगों की विदेश में कंपनियां हैं उनमें शिव खेमका, अमिताभ बच्‍चन, जहांगीर सोराबजी, डीएलएफ समू‍ह के केपी सिंह और उनके परिवार वाले, अनुराग केजरीवाल, मेहरासंस ज्‍वेलर्स के नवीन मेहरा और हाजरा इकबाल मेमन व उनके परिवारवालों के नाम शामिल हैं।

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कश्मीर घाटी में अलगाववादियों का बंद का आह्वान, हिरासत में यासिन मलिक

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अलगाववादी नेता यासीन मलिक (फाइल फोटो)

अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारुक और यासिन मलिक ने कश्मीर घाटी के हालात को लेकर बंद का आह्वान किया है। इस बंद के मद्देनजर जम्मू एवं कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के नेता यासिन मलिक को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

जेकेएलएफ के प्रवक्ता ने बताया कि मलिक ने घाटी में निर्दोष नागरिकों की हत्या के खिलाफ बंद का आह्वान किया था। प्रवक्ता ने बताया कि पुलिस गुरुवार सुबह मलिक के आवास पर पहुंची और उन्हें हिरासत में ले लिया। बता दें कि घाटी में पिछले दिनों वरिष्ठ
पत्रकार शुजात बुखारी और अन्य निर्दोष नागरिकों की हत्या के खिलाफ बंद का आह्वान किया गया था।

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