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दिल्ली हाई कोर्ट का निर्देश, कन्हैया के खिलाफ जेएनयू दो दिनों तक नहीं करे कार्रवाई

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File Photo

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) को निर्देश दिया कि वह छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार के खिलाफ शुक्रवार (20 जुलाई) तक कोई सख्त कदम न उठाए। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष पर 2016 की घटना के संबंध में विश्वविद्यालय के एक पैनल द्वारा जुर्माना लगाया गया था, जिसमें उन पर एक समारोह में भारत विरोधी नारे लगाने का आरोप था।

न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने यह आदेश कन्हैया की याचिका पर सुनाया है, जिसमें उन्होंने जुर्माने के विश्वविद्यालय के आदेश को चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की पीठ छुट्टी पर है, इसलिए न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने शुक्रवार तक इस मामले की सुनवाई स्थगित कर दी है।

एक उच्चस्तरीय जांच में छात्र-कार्यकर्ता उमर खालिद, कन्हैया कुमार और अनिर्बान भट्टाचार्य फरवरी 2016 में एक मामले में दोषी पाए गए थे, जिसमें छात्रों के एक समूह ने कथित रूप से देश विरोधी नारे लगाए थे।

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महिलाओं के लिए सबरीमाला मंदिर के खुले कपाट

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फाइल फोटो

केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर के कपाट बुधवार को पहली बार 10 से 50 साल की महिलाओं के लिए खोले गए हैं। कपाट शाम पांच बजे खुले हैं। इसे मासिक पूजा के लिए खोला गया है जिसकी समाप्ति 22 अक्टूबर को होगी। कपाट खुलने से पहले प्रदर्शनकारियों ने यहां बसों पर पथराव किया था साथ ही मीडियाकर्मियों की गाड़ी पर भी हमला बोला था।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद यहां महिलाओं को प्रवेश नहीं देने की कोशिश की जा रही थी। मंदिर परिसर के बाहर विरोध-प्रदर्शन और तनाव के मद्देनजर सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किये गए थे।

महिलाओं के मंदिर में प्रवेश का विरोध कर रहीं मंदिर के बोर्ड के पूर्व प्रेसिडेंट गोपालकृष्णन की पत्नी को हिरासत में लिया गया था। उनके अलावा करीब 50 अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया था।

वहीं नल्लिकेल इलाके में 3 जगहों पर प्रदर्शन हुआ। इनमें 2 जगह संघ परिवार की तरफ से प्रदर्शन हुआ। एक प्रदर्शन कांग्रेस की तरफ से किया गया। सभी ने मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का विरोध किया। नल्लिकेल और पम्पा बेस पर करीब 1000 से अधिक सुरक्षाकर्मी, जिनमें 800 पुरुष और 200 महिलाएं शामिल थीं। इनके अलावा 500 से अधिक अन्य सुरक्षाकर्मी भी तैनात किए गए थे।

मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने मंदिर में प्रवेश से श्रद्धालुओं को रोकने की कोशिश करने वालों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि हम सभी की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। किसी को कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी। मेरी सरकार सबरीमला के नाम पर कोई हिंसा नहीं होने देगी।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 10 से 50 साल की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश से रोकने की सदियों पुरानी परंपरा को गलत बताते हुए उसे खत्म कर दिया था और सभी आयुवर्ग की महिलाओं को प्रवेश करने की इजाजत दी थी।

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प्रयागराज के दुर्गा पूजा पंडाल में चली गोलियां-फूटे बम, एक की मौत

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Allahabad-
(फोटो क्रेडिट-जागरण)

यूपी सरकार ने इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज भले ही रख दिया हो लेकिन वहां होने वाले अपराधों में लगाम नहीं लगे। यहां दुर्गा पूजा पंडाल के बाहर एक शख्स की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

जिस युवक की हत्‍या हुई, उसे हिस्ट्रीशीटर बताया जा रहा है। ये शख्‍स कुछ दिन पहले ही जेल से बाहर आया था। मिली जानकारी के मुताबिक मृतक की पहचान नीरज बाल्मीकि के तौरपर हुई। ये अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन के लिए भी काम कर चुका था। इलाहाबाद के कैंट इलाके में 4 बदमाशों ने मिलकर इसकी हत्या की।

जानकारी के मुताबिक रात 8 बजे के करीब नीरज पंडाल के बाहर बने फूड स्टॉल के पास कुर्सी पर बैठा था। ये चारों बदमाश भी वहीं मौजूद थे। कुछ देर बाद इन चारों में से एक बदमाश नीरज के पास गया और कुछ बात करने लगा। फिर अचानक उसने नीरज को गोली मार दी। इस दौरान दूसरे बदमाश ने नीरज पर हथगोला फेंक दिया। इस पूरी घटना से पंडाल में अफरातफरी मच गई।  इसी बीच नीरज को गोलियों से छलनी कर बदमाश मिलिट्री एरिया की ओर भाग गए। इसके बाद नीरज को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

वीडियो साभार- NYOOOZ TV

पुलिस के मुताबिक नीरज बहुत बड़ा अपराधी था। इसके खिलाफ हत्या, अपहरण और लूट जैसे कई मामले दर्ज हैं।

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एक चमत्‍कारी मंदिर जहां ईंट चढ़ाने से पूरी होती है मंनत

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कानपुर के जंगली देवी मंदिर का इतिहास पुरातन है।

पुरातन काल से भारत में मंदिर लोगों की आस्‍था का केंद्र रहे हैं। हमारे देश में बहुत से ऐसे मंदिर हैं, जहां कहा जाता है कि मंनत हरहाल में पूरी होती है। इन्‍हीं मंदिरों में उत्‍तर प्रदेश के कानपुर का जंगली देवी मंदिर भी शुमार है। दुर्गा माता के इस मंदिर में नवरात्र में ही नहीं, बल्कि सालभर श्रद्धालुओं के आने का तांता लगा रहता है। मान्‍यता है कि मंदिर में मूर्ति के पीछे बनी नाली में ईंट रखने के बाद उस ईंंट को अपने घर में कहीं भी लगा देने से या निर्माणाधीन मकान में लगाने से तरक्की का रास्‍ता खुल जाता है। घने जंगल के बीचोबीच स्थित होने से ये स्थान जंगली देवी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है।

जंगली देवी मंदिर में माता की मूर्ति के साथ एक और मान्‍यता जुड़ी है। कहा जाता है कि जो भी भक्त पूरी श्रद्धा के साथ माता के चेहरे को निहारता है, उसको मनोकामना पूरी होने का संकेत मां की मूर्ति से ही मिल जाता है।

कानपुर के किदवई नगर स्थित जंगली देवी मंदिर का इतिहास बहुत ही रोचक है। लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर जंगली देवी का मंदिर बना है, 838 ईसवी में वहां पर राजा भोज का राज था। राजा भोज ने बगाही क्षेत्र में एक विशाल मंदिर बनवाया था लेकिन राजशाही समाप्त होने के बाद सब कुछ नष्ट हो गया। सत्रह मार्च साल 1925 में मोहम्मद बकर अपने घर के निर्माण के लिए खुदाई करा रहे थे, उसी दौरान उनको एक ताम्रपत्र मिला था, जिस पर विक्रम संवत 893 अंकित था। ताम्रपत्र देखने के लिए पूरा गांव जमा हो गया था। बाद में मोहम्मद बकर ने ताम्रपत्र को पुरातत्व विभाग को सौप दिया था। उस ताम्रपत्र में इस मंदिर का जिक्र होना बताया गया है।

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