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इराक में विरोध प्रदर्शनों के बीच मृतकों की संख्या 104 हुई

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फोटो-सोशल मीडिया

बगदाद और अन्य इराकी शहरों में जारी विरोध प्रदर्शनों में मृतकों की संख्या बढ़कर 104 हो गई है, जबकि 6,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं। घायलों में सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। आंतरिक मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने रविवार को यह जानकारी दी।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, एक संवाददाता सम्मेलन में, मंत्रालय के प्रवक्ता साद मान ने पत्रकारों को बताया कि आठ सुरक्षा कर्मियों सहित 104 लोगों की मौत हुई है।

मान ने कहा कि प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में कुल 6,107 लोग घायल हुए, उनमें 1,241 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। मान ने कहा कि हिंसक घटनाओं में नागरिकों और सुरक्षा संस्थाओं के 52 वाहनों को भी नुकसान पहुंचा है।

प्रवक्ता ने कहा कि रविवार को अज्ञात बंदूकधारियों ने स्थानीय और विदेशी मीडिया प्रतिष्ठानों के कार्यालयों पर हमला किया, जिनमें एनआरटी, दीजला और सऊदी स्थित अल-अरबिया टीवी और अल-हदथ टीवी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हमले के संबंध में जांच जारी है।

उन्होंने बताया कि गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने राजनीतिक दलों के आठ कार्यालयों को आग के हवाले कर दिया, जबकि दो सुरक्षा चौकियों को भी जला दिया गया।

बेरोजगारी और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार की कमी को लेकर पिछले मंगलवार से राजधानी बगदाद और इराक के कई प्रांतों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।

–आईएएनएस

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आतंकी संगठन हिजबुल प्रमुख सलाहुद्दीन पर इस्लामाबाद में हमला

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हिजबुल आतंकी सैयद सलाहुद्दीन (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में अशांति पैदा करने के साथ ही भारत में हुए कई आंतकी हमलों के जिम्मेदार आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के प्रमुख सैयद सलाहुद्दीन पर 25 मई को इस्लामाबाद में अज्ञात हमलावरों ने कथित तौर पर हमला कर दिया। यह जानकारी सूत्रों ने दी।बताया जा रहा है कि इन दिनों सलाहुद्दीन और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और इस हमले की योजना आईएसआई द्वारा ही बनाई गई है।

खुफिया एजेंसियों के सूत्रों ने कहा कि मोहम्मद यूसुफ शाह उर्फ सैयद सलाहुद्दीन हमले में गंभीर रूप से घायल हो गया और उसका इलाज चल रहा है। सलाहुद्दीन यूनाइटेड जिहाद काउंसिल नामक पाकिस्तान समर्थक आतंकवादी समूहों के गठबंधन का प्रमुख भी है।

सलाहुद्दीन को अमेरिकी विदेश विभाग ने वैश्विक आतंकवादी घोषित किया है।

खुफिया एजेंसी के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा, “उसे इस्लामाबाद में 25 मई को हिजबुल मुजाहिदीन परिसर के पास निशाना बनाया गया।”

अधिकारी ने बताया कि कथित रूप से हमले की योजना आईएसआई द्वारा बनाई गई। उन्होंने बताया कि यह हमला सलाहुद्दीन को मारने के लिए नही, बल्कि उसे और उसके आतंकी संगठन के सदस्यों को एक संदेश देने के लिए किया गया है।

सलाहुद्दीन और उसके आईएसआई हैंडलर के बीच पिछले साल अगस्त में जम्मू एवं कश्मीर से अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से फासला होना शुरू हो गया था।

खुफिया सूत्रों ने कहा कि सलाहुद्दीन या उसके संगठन को भारत सरकार के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के कदम के बारे में कोई एहसास ही नहीं था। इसके बाद से ही आईएसआई ने धीरे-धीरे हिजबुल मुजाहिदीन से अपना समर्थन वापस लेना शुरू कर दिया था।

सूत्रों ने कहा कि आईएसआई ने सलाहुद्दीन को भारत सरकार के कदम के खिलाफ घाटी में बड़े पैमाने पर हमले का निर्देश दिए थे, लेकिन वह ऐसा करने में नाकाम रहा, जिससे आईएसआई नाराज हो गई।

सूत्रों ने कहा कि जब आईएसआई ने उसे अपना समर्थन वापस लेने का संदेश देना शुरू किया, तो सलाहुद्दीन ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के नेता राजा फारूक हैदर और अन्य से संपर्क किया।

सूत्रों ने कहा कि उसने आईएसआई से घाटी में हमले करने का वादा किया था। इस बीच आईएसआई ने हिजबुल कैडर को पर्याप्त प्रशिक्षण, हथियार और गोला-बारूद उपलब्ध कराना बंद कर दिया।

कश्मीर में हिजबुल को मिलने वाले समर्थन में कमी से वह कमजोर हो गया था। इसके अलावा इस महीने की शुरूआत में कश्मीर में हुई मुठभेड़ में भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा हिजबुल कमांडर रियाज नाइकू के खात्मे के बाद तो सलाहुद्दीन बैकफुट पर चला गया। सूत्रों का कहना है कि उसने पीओके में हिजबुल कैडर के साथ बातचीत के दौरान आईएसआई की खुले तौर पर आलोचना की थी।

नाइकू के मारे जाने के बाद सलाहुद्दीन ने कहा था कि कश्मीर घाटी में भारतीय सुरक्षा बलों की स्थिति मजबूत है। ऐसा कहते हुए उसका एक वीडियो सामने आया था।

सलाहुद्दीन को नायकू की मौत पर शोक व्यक्त करने के लिए रावलपिंडी में आयोजित एक सभा में यह कहते हुए सुना गया कि पांच सुरक्षाकर्मियों की हत्या के बाद भी भारतीय सुरक्षा बल की स्थिति मजबूत बनी हुई है।

–आईएएनएस

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पाकिस्तान: नवाज शरीफ के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी

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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ (फाइल फोटो)

इस्लामाबाद। पाकिस्तान की एक जवाबदेही अदालत ने तोशाखाना (राष्ट्रीय वस्तु संग्रह) मामले में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया। ‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट में यह जानकारी देते हुए बताया गया है कि नवाज शरीफ को कोर्ट में पेश होने के लिए समन भेजा गया था लेकिन वह नहीं आए।

रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने 15 मई को नवाज शरीफ, एक अन्य पूर्व प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी और पूर्व राष्ट्रपति आसिफ जरदारी को तोशाखाना मामले में आज (शुक्रवार) पेश होने के लिए कहा था। गिलानी व एक अन्य आरोपी अदालत में पेश हुए लेकिन नवाज और जरदारी नहीं आए।

जरदारी की तरफ से कोर्ट में पेशी से छूट देने के लिए अर्जी दायर की गई जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया लेकिन नवाज शरीफ की तरफ से अदालत में कोई पेश ही नहीं हुआ।

राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (नैब) के डिप्टी प्रॉसीक्यूटर जनरल सरदार मुजफ्फर ने इस पर नवाज के खिलाफ गैर जमानती गिरफ्तारी वांरट जारी करने का आग्रह किया जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया। अदालत ने साथ ही जरदारी, शरीफ व अन्य सभी आरोपियों को मामले की सुनवाई की अगली तारीख 11 जून को अदालत में पेश होने के लिए कहा।

तोशाखान वह विभाग है जो पाकिस्तानी शासनाध्यक्षों व राष्ट्राध्यक्षों को दूसरे देशों से मिलने वाले उपहारों का संग्रह करता है। यह तमाम उपहार राष्ट्र की संपत्ति होते हैं और इन्हें खुली नीलामी में ही बेचा जा सकता है।

जरदारी पर आरोप है कि लीबिया और संयुक्त अरब अमीरात से उन्हें बहैसियत राष्ट्रपति मिले वाहनों को उन्होंने तोशाखाना में जमा कराने के बजाए उनका खुद इस्तेमाल किया। इसी तरह आरोप है कि गिलानी के प्रधानमंत्री काल में नवाज शरीफ को तोशाखाना से वाहन दिए गए।

–आईएएनएस

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पीआईए के दुर्घटनाग्रस्त विमान का कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर मिला

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प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली, पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) के विमान का कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर आखिरकार मलबे से बरामद हो गया है। विमान 22 मई को कराची में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें 97 लोगों की मौत हो गई थी।

मीडिया ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, गुरुवार को एक बयान में पीआईए के प्रवक्ता अब्दुल्ला एच. खान ने कहा, खोज आज सुबह फिर से शुरू हुई और वॉइस रिकॉर्डर मलबे में दबा पाया गया।

उन्होंने कहा, कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर के मिलने से जांच में बहुत मदद मिलेगी। फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर पहले ही मिल चुका था।

घटना के पीछे के कारण का पता लगाने के लिए अधिकारी और एयरबस जांचकर्ता घटनास्थल पर सबूत इकट्ठा कर रहे हैं। बीईए के फ्रांसीसी जांचकर्ता (नागरिक उड्डयन के लिए फ्रांसीसी हवाई सुरक्षा जांच प्राधिकरण) पाकिस्तान के नेतृत्व वाली जांच में शामिल हो गए हैं, क्योंकि 15 साल पुराना एयरबस 320 जेट फ्रांस में डिजाइन किया गया था।

बीईए ने एक बयान में कहा कि दोनों रिकार्डरों की पेरिस के ठीक बाहर इसकी प्रयोगशाला में जांच की जाएगी। विमान शहर की घनी आबादी वाले मॉडल कॉलोनी में दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, उसमें सवार दो लोग चमत्कारिक रूप से बच गए थे।

आईएएनएस

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