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तूतीकोरिन में प्रदर्शनकारियों की मौत से वेदांता पर सवाल

विरोध प्रदर्शन और पुलिस फायरिंग के बाद तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (टीएनपीसीबी) ने तुतीकोरिन में कंपनी की पहली इकाई को संचालित करने की मंजूरी के नवीनीकरण (2018-2023) को यह करते हुए खारिज कर दिया कि उसने निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं किया है।

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Tuticorin protestors

चेन्नई, 25 मई (आईएएनएस)| तमिलनाडु के तूतीकोरिन में पुलिस की गोलीबारी में स्टरलाइट कॉपर स्मेल्टिंग प्लांट के खिलाफ विरोध कर रहे 13 प्रदर्शनकारियों की मौत से हालात और बिगड़ गए हैं और इसने स्टरलाइट की मूल कंपनी वेदांता द्वारा पर्यावरण नियमों के उल्लंघनों की ओर ध्यान खींचा है।

वेदांता ने कहा है कि उसने कॉपर स्मेल्टिंग प्लांट में प्रदूषण को लेकर मौजूद नियम-कानूनों का पालन किया है, लेकिन पर्यावरणविदों और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तूतीकोरिन में बड़े अनसुलझे मुद्दों पर उंगली उठाई है। वे अतीत में कंपनी द्वारा किए गए नियमों के उल्लंघन के कई अन्य उदाहरणों की ओर भी इशारा करते हैं जहां वेदांत शामिल थी।

इस बात पर जोर देते हुए कि 13 लोगों की मौत व्यर्थ नहीं जाएगी, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता नित्यानंद जयरामन ने आईएएनएस को बताया, “पुलिस गोलीबारी में 13 लोगों के विरोध और हत्या से स्टरलाइट कॉपर स्मेल्टर प्लांट (वेदांत लिमिटेड के स्वामित्व वाले) के लिए फिर से काम करना मुश्किल हो जाएगा।”

तूतीकोरिन में व्यापार संघ युवा इकाई के एस. राजा ने आईएएनएस को फोन पर आईएएनएस को बताया, “हमने पहले भी संयंत्रों को बंद होते और फिर से खुलते देखा है। स्थायी रूप से बंद होने की घोषणा तक स्मेल्टर संयंत्र के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।”

वहीं, मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी कह रहे हैं कि सरकार कॉपर स्मेल्टिंग प्लांट के कामकाज के खिलाफ है। तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने संयंत्र को निर्देश दिया है कि वह उनकी सहमति के बिना उत्पादन या संचालन शुरू न करे। संयंत्र की बिजली आपूर्ति को रोक दिया गया है।

कार्यकर्ताओं और मीडिया रिपोर्टों का कहना है कि कई मामलों में वेदांता ने कई बार कानूनी दिशानिर्देशों को नजरअंदाज किया है। इस सप्ताह ‘द वायर’ ने भी अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि कैसे कई वर्षों तक विरोध प्रदर्शनों ने कंपनी पर दबाव बनाया है।

एक समाचार पोर्टल के अनुसार, 2000 से 2010 तक लांजीगढ़ जिले और ओडिशा की नियमगिरी पहाड़ियों में कंपनी की एल्युमिना और बॉक्साइट खनन परिचालन के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन किया और वेदांत की छवि एक बड़े प्रदूषण फैलाने वाले और आदिवासी और मानवाधिकारों के अपराधी के रूप में स्थापित हुई।

‘द वायर’ के अनुसार, इस दस साल की अवधि के दौरान वेदांता ने कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी को राजनीतिक योगदान भी दिया था, जिसे दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा भारत के विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम का उल्लंघन बताया था।

कंपनी के कारनामों की तेजी से उनकी अनदेखी करना मुश्किल हो गई और न केनल स्थानीय कार्यकर्ताओं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों और संस्थानों ने भी उसकी आलोचना शुरू कर दी थी।

पोर्टल ने कहा कि 2007 में नॉर्वे के सरकारी पेंशन फंड ने ‘पर्यावरण और मानवाधिकार उल्लंघन’ का हवाला देते हुए कंपनी में अपनी हिस्सेदारी को खत्म कर दिया था। इसके तीन साल बाद प्रमुख निवेशकों जैसे चर्च ऑफ इंग्लिैंड जोसेफ रोउनट्री चैरिटेबल ट्रस्ट ने इसी तरह के कारणों से अपने शेयरों को बेच दिया था।

रिपोर्ट के अनुसार, इसी साल भारत के पर्यावरण मंत्रालय ने ओडिशा में वन संबंधिक कानूनों का उल्लंघन करने के लिए इससे ग्रीन क्लीयरेंस छीन लिया था।

समाज में अपनी छवि सुधारने के लिए वेदांता ने अपनी कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी पर काफी पैसा खर्च किया और उसके मालिक अनिल अग्रवाल जो नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार का बड़े समर्थक हैं, उन्होंने सरकार द्वारा शुरू की गई अधिकांश परियोजनाओं से खुद को शामिल कर लिया, जिसमें ‘स्वच्छ भारत’ अभियान भी शामिल है।

इसके साथ ही उन्होंने 30,000 शौचालय बनाने में मदद करने वाली समूह कंपनी के साथ खुद को शामिल किया।

मीडिया के बीच अपनी छवि को अच्छा करने के लिए कंपनी द्वारा चलाए गए अभियान पर व्यापक रूप से ध्यान दिया और इसकी आलोचना भी की गई।

‘द वायर’ के अनुसार, 2016 में लंदन में जयपुर साहित्य महोत्सव के संस्करण को कंपनी द्वारा प्रायोजित किए जाने पर इसके बहिष्कार की मांग उठी थी। सौ से अधिक शिक्षाविदों और लेखकों ने एक अभियान और ‘बायकॉट वेदांता जेएलएफ’ कार्यक्रम शुरू किया। इस अभियान में वेदांता कंपनी के कारण होने वाले प्रदूषण, बीमारी, उत्पीड़न, विस्थापन और गरीबी से पीड़ित कई समुदायों के साथ एकजुटता व्यक्त की गई थी।

तूतीकोरिन में प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी आवाज को पूरी तरह से दबाने के प्रयास किए जा रहे हैं। राजा कहते हैं, “ऐसा लगता है कि पुलिस की गोलीबारी संयंत्र के खिलाफ हो रहे विरोध को दबाने के साथ-साथ तमिलनाडु में अन्य विरोधों प्रदर्शन को रोकने का तरीका है।”

तूतीकोरिन में विरोध प्रदर्शन के 100वें दिन मंगलवार को उस समय उग्र हो गया था, जब पत्थरबाजी और वाहनों में आगजनी के बाद वेदांता समूह के स्टरलाइट तांबा संयंत्र को बंद करने की मांग कर रहे सैकड़ों लोगों के समूह पर पुलिस ने गोलियां चलाई थीं।

पुलिस की गोलीबारी में 11 लोगों की मौत हो गई थी। बुधवार को ताजा गोलीबारी में एक और व्यक्ति की मौत हो गई और एक घायल हुए शख्स ने दम तोड़ दिया, जिससे मृतकों की संख्या बढ़कर 13 हो गई।

राजा से जब आगजनी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “इसकी जांच की जानी चाहिए। आगजनी में शामिल लोग संयंत्र के समर्थक भी हो सकते हैं।”

विरोध प्रदर्शन और पुलिस फायरिंग के बाद तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (टीएनपीसीबी) ने तुतीकोरिन में कंपनी की पहली इकाई को संचालित करने की मंजूरी के नवीनीकरण (2018-2023) को यह करते हुए खारिज कर दिया कि उसने निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं किया है।

प्रदूषण नियंत्रण मानदंडों के उल्लंघन और अन्य मुद्दों को लेकर कंपनी के संयंत्र विवादों में रहा। 1990 के दशक में जब अन्य भारतीय राज्यों ने संभावित पर्यावरणीय क्षति के आधार पर कंपनी को इनकार कर दिया था, तब ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) सरकार ने इसके निर्माण की अनुमति दी थी।

वर्ष 2013 में सर्वोच्च अदालत ने स्टरलाइट पर तूतीकोरिन में पर्यावरण प्रदूषण के लिए 100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था।

सामाजिक कार्यकर्ता जयरमन के अनुसार, टीएनपीसीबी और तूतीकोरिन जिला प्रशासन के मार्च 2018 में 15 भूजल के नमूनों के विश्लेषण से पता चला कि सभी जल स्रोत प्रदूषित हो गए और पीने के पानी के लिए मानदंडों का उल्लंघन किया गया था।

इस पर तैयार रिपोर्ट सूचना के अधिकार के तहत सामने आई थीं जबकि तूतीकोरिन जिला प्रशासन ने ग्रामीणों को भूजल के खिलाफ चेतावनी देने के बजाए उसे छुपा लिया था।

उन्होंने यह भी कहा कि, 2008 में तिरुनेलवेली गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज द्वारा किए गए एक अध्ययन में कॉपर स्पेलटर प्लांट के पास रहने वाले ग्रामीणों में मस्कुलोस्केलेटल विकारों के उच्च स्तर पाए गए।

एंटी-स्टरलाइट कॉपर कार्यकर्ता तमिल मंथन ने आईएएनएस को बताया कि लोगों ने इस संयंत्र के पास निवासियों ने कैंसर की घटनाओं के बढ़ने का दावा किया है। राजा के मुताबिक, तूतीकोरिन में सरकारी अस्पताल ने 550 से ज्यादा नए कैंसर के मामलों की सूचना दी थी।

–आईएएनएस

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बिहार : समस्तीपुर में डेयरी संयंत्र, भोजपुर में पशु आहार कारखाना लगेंगे

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dairy products

मोतिहारी, 19 जनवरी | बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने यहां शनिवार को कहा कि अगले वित्तीय वर्ष 2019-20 में बिहार राज्य दुग्ध सहकारी संघ लिमिटेड (कम्फेड) द्वारा समस्तीपुर में पांच लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता के डेयरी संयंत्र और भोजपुर के बिहिया में 300 मीट्रिक टन प्रतिदिन उत्पादन क्षमता के पशु आहार कारखाने लगाए जाएंगे। पूर्वी चंपारण जिले के मठबनवारी में 11 महीने के रिकार्ड समय में बन कर तैयार मदर डेयरी के प्रति दिन एक लाख लीटर क्षमता के दूध प्रसंस्करण संयंत्र का शनिवार को उद्घाटन करने के बाद बिहार के उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इस संयंत्र द्वारा मार्च से 1250 गांवों के 50 हजार किसानों से प्रतिदिन 2 लाख लीटर दूध का संग्रह किया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि अब सुधा व मदर डेयरी, दोनों मिलकर किसानों से दूध खरीदेगी।

मोदी ने कहा, “वर्तमान वित्तीय वर्ष में सुपौल में एक लाख लीटर क्षमता का डेयरी संयंत्र, समस्तीपुर व हाजीपुर में 30-30 मीट्रिक टन के दूध पाउडर संयंत्र, पटना व नालंदा में 20-20 हजार किलो दैनिक क्षमता के आइसक्रीम प्लांट स्थापित किए जाने के साथ ही पटना में पूर्व से स्थापित 100 मीट्रिक टन क्षमता के पशु आहार फैक्ट्री को 150 मीट्रिक टन में विस्तारित और 150 मीट्रिक टन की नई इकाई स्थापित की गई है।”

डेयरी स्थापित करने वाले किसानों को सरकार द्वारा 50 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को 66 प्रतिशत अनुदान दिए जाने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों की आमदनी केवल धान, गेहूं की खेती करने से दोगुनी नहीं होगी, बल्कि इसके लिए समग्र रूप से वानिकी, डेयरी, मछली और मुर्गी पालन को अपनाना होगा।

उन्होंने कहा कि फिलहाल बिहार में प्रतिदिन 18 लाख किलो दूध का संग्रह व 14 लाख लीटर की मार्केटिंग सुधा डेयरी द्वारा की जा रही है।

इस मौके पर केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह, बिहार सरकार में मंत्री प्रमोद कुमार, राणा रणधीर सिंह समेत कई अधिकारी और नेता मौजूद थे।

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मुकेश अंबानी ने ‘डेटा औपनिवेशीकरण’ के खिलाफ अभियान का आह्वान किया

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mukesh ambani

गांधीनगर, 18 जनवरी | औपनिवेशीकरण के खिलाफ महात्मा गांधी के अभियान को याद करते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ‘डेटा औपनिवेशीकरण’ के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व करने की गुजारिश की और कहा कि भारतीय डेटा भारतीयों के ‘स्वामित्व और नियंत्रण’ में होने चाहिए। उन्होंने यहां वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2019 में कहा, “हम अपने राष्ट्रपिता को उनकी 150वीं जयंती के वर्ष में श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। गांधी जी ने राजनीतिक औपनिवेशीकरण के खिलाफ आन्दोलन चलाया था.. आज हम सब मिलकर डेटा औपनिवेशीकरण के खिलाफ नया अभियान शुरू कर रहे हैं।” इस समिट का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।

अंबानी ने कहा कि डेटा नई दुनिया में ‘नया तेल और धन’ है। उन्होंने कहा कि भारत के डेटा का स्वामित्व और नियंत्रण भारतीय लोगों के हाथ में ही होना चाहिए और कॉर्पोरेट्स द्वारा नहीं किया जाना चाहिए, खासतौर से वैश्विक कॉर्पोरेशंस द्वारा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “माननीय प्रधानमंत्री, मैं आश्वस्त हूं कि आप अपने डिजिटल इंडिया मिशन के प्रमुख लक्ष्यों में इसे भी शामिल करेंगे।”

उन्होंने कहा, “भारत को इस डेटा संचालित क्रांति में सफल होने के लिए, हमें भारतीय डेटा का स्वामित्व और नियंत्रण वापस भारत भेजना होगा.. दूसरे शब्दों में भारतीय संपत्ति वापस लौटानी होगी। भारतीय डेटा को भरतीयों द्वारा नियंत्रित किया जाना चाहिए, न कि वैश्विक कॉर्पोरेट्स द्वारा। डेटा का नियंत्रण हमें अपने हाथों में लेने के लिए अभियान चलाने की आवश्यकता है।”

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अक्टूबर में कहा था कि सभी डिजिटल भुगतान कंपनियों जैसे गूगल प्ले, वाट्सएप और अन्य को अपने भारतीय कारोबार का डेटा स्थानीय तौर पर स्टोर करना चाहिए।

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बसपा-सपा गठबंधन से स्थायित्व के संकेत नहीं : शीला दीक्षित

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sheila dikshit-min

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का कहना है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) गठबंधन से स्थायित्व के संकेत नहीं मिल रहे हैं, लेकिन आगामी लोकसभा चुनाव में प्रदेश में कांग्रेस के परिणाम चौंकाने वाले होंगे।

शीला दीक्षित ने आईएएनएस को दिए साक्षात्कार में कहा, “उनको एक साथ आने दीजिए। वे मिलते और जुदा होते रहे हैं और फिर साथ आ रहे हैं। मेरा अभिप्राय यह है कि उनमें स्थिरता नहीं है और वे स्थायित्व के संकेत नहीं दे रहे हैं। अब आगे देखते हैं।”

तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकीं दीक्षित (80) सपा और बसपा गठबंधन को लेकर पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रही थीं। सपा और बसपा ने कांग्रेस को महागठबंधन से अलग रखते हुए प्रदेश में 80 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए एक गठबंधन किया है। दीक्षित को 10 जनवरी को दिल्ली कांग्रेस की कमान सौंपी गई।

उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन होने से पहले शीला दीक्षित को कांग्रेस ने मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित किया था। दीक्षित ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उम्मीद क्षीण पड़ गई है।

दीक्षित की टिप्पणी से इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस नेता चुनाव अभियान के दौरान सपा और बसपा को निशाना बनाएंगे, जबकि उनका सीधा मुकाबला सत्ताधारी पार्टी भाजपा से होगा।

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के सभी 80 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला लिया है, लेकिन पार्टी ने भाजपा को शिकस्त देने वाले सेक्यूलर दलों के लिए दरवाजा खुला रखा है।

उत्तर प्रदेश में पार्टी नेता उम्मीदवारों को बता सकते हैं कि कांग्रेस ही नरेंद्र मोदी सरकार को सत्ता से बाहर कर सकती है और भाजपा को शिकस्त दे सकती है।

कांग्रेस इस बात पर बल देंगे कि इस चुनाव के नतीजों से प्रदेश का मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि देश का प्रधानमंत्री चुना जाएगा।

लोकसभा चुनाव 2014 में कांग्रेस उत्तर प्रदेश में सिर्फ दो ही सीटें बचा पाई थीं, जबकि उससे पहले 2009 में पार्टी ने 21 सीटों पर जीत हासिल की थी, जब केंद्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) दूसरी बार केंद्र की सत्ता को बरकार रख पाई थी।

दीक्षित ने कहा कि उनसे कहा जाएगा तो वह उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए चुनाव प्रचार करेंगी, लेकिन वह दिल्ली पर अपना अधिक ध्यान केंद्रित करेंगी क्योंकि उनको यहां काफी काम करना है।

उन्होंने पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी को कांग्रेस द्वारा प्रधानमंत्री उम्मीदवार के तौर पर पेश करने का अनुमोदन किया।

उन्होंने कहा, “पार्टी को इस पर फैसला लेने दीजिए। हम चाहते हैं और खासतौर से मैं चाहती हूंं और हमारे बीच अधिकांश लोग चाहते हैं। लेकिन इस पर पूरी पार्टी द्वारा फैसला लिया जाएगा।”

गैर-भाजपा दलों में प्रधानमंत्री का पद विवादास्पद मसला है। राहुल गांधी ने खुद भी कहा कि इसका फैसला चुनाव के बाद लिया जाएगा और पहला काम नरेंद्र मोदी सरकार को पराजित करना है।

संपूर्ण भारत में महागठबंधन की संभावना पर पूछे जाने पर दीक्षित ने कहा कि लोग इस दिशा में प्रयासरत हैं, लेकिन इस पर अभी पूरी सहमति नहीं बन पाई है।

विपक्षी दलों ने इस बात के संकेत दिए हैं कि लोकसभा चुनाव से पहले देशभर में गठबंधन की संभावना कम है, लेकिन भाजपा को शिकस्त देने के लिए राज्य विशेष में गठबंधन होगा।

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