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जानकारी ही बचाव है: क्या है कोरोना का स्टेज – 1-2-3…?

वुहान और चीन को भी कोरोना की स्टेज के बारे में जानने में वक़्त लगा। यही हाल दुनिया के तमाम देशों का भी रहा। भारत को प्रकृति ने औरों के अनुभव से सीखने का बहुत मौका दिया।

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Coronavirus,

भारत में कोरोना का पहला मामला 30 जनवरी 2020 को सामने आया। जबकि चीन के वुहान महानगर में कोराना ने नवम्बर 2019 के दूसरे सप्ताह ने अवतार लिया। लेकिन 31 दिसम्बर तक कोरोना दूसरे स्टेज में पहुँच चुका था, क्योंकि उस दिन अचानक शहर के अस्पतालों में दर्ज़नों लोग एक-एक करके निमोनिया जैसे लक्षणों की शिकायत के साथ जा पहुँचे। तब डॉक्टरों का शक़ किसी नये वायरस के हमले की ओर गया। 7 जनवरी तक चीनी वैज्ञानिकों ने तय कर दिया कि कोरोना वायरस के परिवार में एक नये सदस्य ने अवतार ले लिया है। इसकी पहचान के लिए WHO से भी मदद माँगी गयी। उसने भी इसे अवतार ही पाया और COVID-19 का नाम दिया। हालाँकि, आम बोलचाल में इसे कोरोना वायरस ही कहा जा रहा है।

वुहान और चीन को भी कोरोना की स्टेज के बारे में जानने में वक़्त लगा। यही हाल दुनिया के तमाम देशों का भी रहा। भारत को प्रकृति ने औरों के अनुभव से सीखने का बहुत मौका दिया। वो बात अलग है कि हमने जागने में क़रीब हफ़्ते भर की देरी कर दी। Social Distancing और Total Lock Down का आख़िरी विकल्प हमने तब अपनाया जब हमारे कई शहरों में कोरोना स्टेज-2 की सीमाओं को तोड़ चुका था।

हालाँकि, ये हमारी ख़ुशकिस्मती है कि आज भी भारत का बहुत बड़ा हिस्सा कोरोना से अछूता है या अभी स्टेज-1 और स्टेज-2 में ही है। इसीलिए देश के कुल 732 में से अभी 75 ज़िलों में ही Total Lock-down या ‘जनता कर्फ़्यू’ को लागू किया गया है। यदि इससे कोरोना के संक्रमितों की संख्या की वृद्धि दर में कमी आने लगी तो ठीक, वर्ना पूरे देश को तब Total Lock-down करने की नौबत आ सकती है, जब तक संक्रमितों की संख्या पर काबू नहीं पा लिया जाता। अब बात कोरोना के स्टेजेज़ की।

कोरोना की पहली स्टेज

प्रशान्त विदेश से आया। एयरपोर्ट पर उसे बुखार नहीं था। इसलिए वहाँ यह शपथपत्र भरवाकर उसे घर जाने दिया गया कि वो अगले 14 दिन तक अपने घर में ही रहेगा। किसी से भी मेल-मिलाप नहीं करेगा और बुख़ार आदि आने पर फ़ौरन हेल्पलाइन नम्बर पर सम्पर्क करेगा। प्रशान्त ने शपथपत्र की शर्तों को सख़्ती से निभाया। परिवार के सदस्यों से भी दूरी बनाये रखी।

दो दिन बाद प्रशान्त की माँ ने कहा, “अरे! तुझे कुछ नहीं हुआ। अलग-थलग मत रह। इतने दिन बाद घर का खाना मिलेगा तुझे, आजा किचिन में… मैं गरम-गरम परोस देती हूँ।”

प्रशान्त ने मना कर दिया।

अगली सुबह भी माँ ने वही बातें दोहराईं। लेकिन प्रशान्त इस बार भी अडिग रहा । माँ बुरा भी मान गयीं। लेकिन प्रशान्त सबसे अलग-थलग ही रहता रहा। इत्तेफ़ाक से 6-7वें दिन उसे बुख़ार, सर्दी-खाँसी जैसे लक्षण आने लगे। प्रशान्त ने फ़ौरन हेल्पलाइन से सम्पर्क किया। उसका कोरोना टेस्ट पॉजिटिव निकला। जबकि परिवार के बाक़ी सदस्यों के टेस्ट नेगेटिव निकले।

प्रशान्त के घर के आस-पड़ोस में एक किलोमीटर के दायरे में कई लोगों की एहतियान औचक जाँच भी हुई। हालाँकि, सबने बताया था कि किसी ने प्रशान्त को विदेश से आने के बाद बाहर निकलते नहीं देखा। प्रशान्त ने ख़ुद को सही ढंग से आइसोलेट किया इसीलिए उसने किसी और में कोरोना नहीं फैलाया। प्रशान्त जवान था। कोरोना के लक्षण फ़्लू वाले आम वायरलों की तरह ही थे। लिहाज़ा, हफ़्ते भर के उपचार के बाद वो बिल्कुल स्वस्थ होकर अस्पताल से घर आ गया। अब माँ शुक्र मनाती हैं कि प्रशान्त की सूझ-बूझ से पूरा भर कोरोना से बच गया।

यही है पहली स्टेज, जहाँ कोरोना विदेश से भारत तो आ गया लेकिन आगे नहीं फैल पाया।

कोरोना की दूसरी स्टेज

ज्योत्सना की तबीयत बिगड़ी तो अस्पताल गयी। कोरोना जाँच पॉजिटिव निकली। वो या उसके परिवार में कोई विदेश से नहीं आया था। लेकिन पाँच दिन पहले वो जिस ज्वेलर्स की दुकान पर गयी थी, उसके लाला जी एक दिन पहले ही विदेश घूमकर लौटे थे। बुखार नहीं होने पर उनसे भी शपथपत्र भरवाकर सभी ज़रूरी हिदायतों के साथ उन्हें घर जाने दिया गया।

लाला जी ने इसे फ़ालतू वाली सरकारी क़वायद समझा। घर पहुँचकर सबसे ख़ूब गर्मजोशी से मिले। सबसे साथ खाना-पीना हुआ और अगली सुबह अपनी ज्वेलरी की दुकान जा पहुँचे। पाँच दिन बाद सबसे पहले लाला जी की बूढ़ी माँ की तबीयत बिगड़ी। फिर एक-एक करके पूरा घर बीमार पड़ गया। जाँच में सभी कोरोना पॉजिटिव पाये गये। तहक़ीकात में पता चला कि विदेश से लौटने के बाद लाला जी कम से कम 450 लोगों के सम्पर्क में आये। जैसे दुकान के कर्मचारी, ग्राहक और आस-पड़ोस के लोग। अब इन सभी को ढूँढ़कर ये पता लगाया जा रहा है कि वो लाला जी की दुकान के बाहर किन-किन लोगों के सम्पर्क में आये।

यही है कोरोना वायरस के संक्रमण की दूसरी स्टेज। इसमें सफलतापूर्वक ये पता लगाना पड़ता है कि कोराना के संक्रमण की आशंका वाले 450 लोग बीते छह-सात दिनों में कितने हज़ार लोगों के सम्पर्क में आये और इनमें से कितने लोग आख़िरकार संक्रमित हुए और कितने नहीं?

कोरोना की तीसरी स्टेज

गिरधारी लाल अस्पताल में भर्ती है। वो रेलवे स्टेशन का कुली है और कभी विदेश नहीं गया। लेकिन जाँच में कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। ज़ाहिर है कि गिरधारी ऐसे किसी व्यक्ति के सम्पर्क में आया होगा जो कोराना का कैरियर था। ये कैरियर कौन था, कहाँ से आया था, कहाँ गया? इन सवालों का जवाब तो हवा में खो चुका है। यही स्टेज तीन है। इसमें आपको कोरोना के आने, जाने और रहने का पता-ठिकाना नहीं मिलता है। लिहाज़ा, आप नये लोगों को कोरोना की चपेट में आने से तब तक नहीं रोक सकते, जब तक कि आप हरेक आदमी को उसके घरों में क़ैद ना कर दें।

Social Distancing, Total Lock-down या ‘जनता कर्फ़्यू’ इकलौता ऐसा तरीका है जिससे ये तय होगा कि जो संक्रमित नहीं हैं वो स्वस्थ हैं। ‘जनता कर्फ़्यू’ के दौरान जो लोग बीमार होंगे उन्हें सबसे अलग-थलग रखते हुए उनका इलाज़ किया जाएगा और अन्ततः जब कोरोना का फैलना रुक जाएगा तो हफ़्ते भर में ख़त्म भी हो जाएगा। अलबत्ता, कोरोना का पूरी दुनिया से सफ़ाया तभी होगा जब इसके आख़िरी पीड़ित को भी सफलतापूर्वक isolate और quarantine कर लिया जाएगा।

Morale: कोरोना को सिर्फ़ isolation, quarantine, hand wash और डॉक्टर-नर्स-दवाई से ही डर लगता है। थाली-ताली वादन, शंखनाद या Go Corona Go के नारों से उसका कुछ नहीं बिगड़ता। गोमूत्र-गोबर, नमाज़-रोज़ा, ओझा-तांत्रिक, गंडा-तावीज़, मंत्र-जाप, यज्ञ-व्रत जैसे पाखंड तो इसके लिए खाद-पानी का काम करते हैं।

ब्लॉग

मध्य प्रदेश: आतंकवादी और नक्सली बनने की ली शपथ

उनका आरोप था कि नगरपालिका द्वारा आवंटित दुकानों का प्रतिमाह किराया दिये जाने के बावजूद कार्रवाई की गई और न्यायालय में विचाराधीन मामलों को लेकर भी संज्ञान नहीं लिया गया न ही उचित माध्यम से सूचना दी गई।

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terrorists

मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के भीकनगांव में अतिक्रमण मुहिम से आक्रोशित लोगों द्वारा आतंकवादी और नक्सलवादी बनने की शपथ लिए जाने को लेकर 12 लोगों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई है।

भीकनगांव के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ओम नारायण सिंह बड़कुल ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के परीक्षण के उपरांत 12 लोगों के खिलाफ तहसीलदार द्वारा प्रतिबंधात्मक कार्यवाही का नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि इस वीडियो में पुष्टि हुई है कि इन लोगों ने अतिक्रमण मुहिम के विरोध में आतंकवादी व नक्सलवादी बनने की सार्वजनिक शपथ ली है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कार्रवाई की प्रतिक्रिया स्वरूप इस तरह का कृत्य स्पष्ट रूप से विधि विरुद्ध है।

भीकनगांव कस्बे में 6 जनवरी को विभिन्न वार्डों में अतिक्रमण हटाए जाने की कार्रवाई से आक्रोशित प्रभावितों ने उनके रोजगार समाप्त हो जाने का हवाला देते हुए सार्वजनिक रूप से आतंकवादी तथा नक्सलवादी बन जाने की शपथ ले ली थी। उन्होंने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था।

उनका आरोप था कि नगरपालिका द्वारा आवंटित दुकानों का प्रतिमाह किराया दिये जाने के बावजूद कार्रवाई की गई और न्यायालय में विचाराधीन मामलों को लेकर भी संज्ञान नहीं लिया गया न ही उचित माध्यम से सूचना दी गई। दूसरी ओर प्रशासन ने उनके आरोपों से नकारते हुए स्पष्ट किया था कि अतिक्रमण के विरुद्ध सम्बन्धितों को आवश्यक सूचना देने के उपरांत ही समस्त कार्रवाई संपादित की गई थी।

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अंतरराष्ट्रीय

चीन ने कैसे कोविड-19 महामारी पर काबू पाया

महामारी के दौरान वुहान में ठहरे फ्रांसीसी चिकित्सक फिलिप क्लेन ने कहा कि चीन सरकार ने महामारी की रोकथाम में चौंकाने वाला प्रयास किया है, और चीनी लोगों ने भी इसमें बड़ा योगदान दिया है।

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बीजिंग, 9 जनवरी । वर्ष 2021 की शुरूआत में चीन के वुहान शहर के वाणिज्यिक सड़क पर लोगों की भीड़ नजर आती है। वुहान वासी मास्क पहने हुए परिजनों और दोस्तों के साथ खुशी से शॉपिंग करते दिखाई देते हैं। लेकिन एक साल पहले वुहान में कोविड-19 महामारी की वजह से 76 दिनों तक लॉकडॉउन लगा रहा, और सारी सड़कें सुनसान दिखाई देती थीं।

सिर्फ कुछ महीनों में चीन ने महामारी पर काबू पाया, और आम लोगों का जीवन सामान्य हो गया। रूसी लड़की अन्ना ने कहा कि कुल 1.7 लाख चिकित्सकों ने वुहान में महामारी की रोकथाम का प्रयास किया, और चिकित्सा उपकरणों की कुल लागत 1 अरब युआन से अधिक रही। हर गंभीर मरीजों के इलाज में कम से कम 1 लाख युआन का खर्च आया है। पिछले साल मार्च के मध्य तक महामारी की रोकथाम में चीन ने 1 खरब 16 अरब 90 करोड़ युआन खर्च किया, जो दुनिया में सबसे अधिक है। महामारी फैलने के बाद लगभग सभी देशों ने आर्थिक विकास पर ध्यान दिया, सिर्फ चीन ने अपना पूरा ध्यान जनता की जान पर केंद्रित किया।

पिछले 10 मार्च को चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने वुहान का दौरा किया। उन्होंने सामुदायिक क्षेत्र जाकर स्थानीय लोगों का हालचाल जाना और महामारी की रोकथाम व लोगों के जीवन की स्थिति का जायजा लिया।

महामारी के दौरान वुहान में ठहरे फ्रांसीसी चिकित्सक फिलिप क्लेन ने कहा कि चीन सरकार ने महामारी की रोकथाम में चौंकाने वाला प्रयास किया है, और चीनी लोगों ने भी इसमें बड़ा योगदान दिया है।

वहीं, अमेरिका के कुह्न् फाउंडेशन के अध्यक्ष रॉबर्ट लॉरेंस कुह्न् ने कहा कि चीन सरकार की संगठनात्मक क्षमता अद्भुत है। कोई अन्य देश ऐसा नहीं कर सकता है। चीन में इतनी जल्दी महामारी की रोकथाम में विजय पाने का कारण चीनी कम्यनिस्ट पार्टी का नेतृत्व है।

(साभार—-चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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ब्लॉग

Mirza Ghalib: मिर्जा गालिब के वो जबरदस्त शेर जो अमर हैं

गालिब की मां शिक्षित थीं उन्होंने गालिब को घर पर ही शिक्षा दी जिसकी वजह से उन्हें नियमित शिक्षा कुछ ज़्यादा नहीं मिल सकी। गालिब ने आगरा के पास उस समय के प्रतिष्ठित विद्वान ‘मौलवी मोहम्मद मोवज्जम’ से फारसी की प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त की।

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Mirza Ghalib

वह कुछ दिन लाहौर रहे, फिर दिल्ली चले आए। क़ौकान बेग के चार बेटे और तीन बेटियां थीं। इतिहास के पन्ने पलटें तो उनके बेटों में अब्दुल्लाबेग और नसरुल्लाबेगका वर्णन मिलता है। गालिब अब्दुल्लाबेग के ही पुत्र थे। जब गालिब पांच साल के थे, तभी पिता का देहांत हो गया। पिता के बाद चाचा नसरुल्ला बेग खां ने गालिब का पालन-पोषण किया। नसरुल्ला बेग खां मराठों की ओर से आगरा के सूबेदार थे।

गालिब की मां शिक्षित थीं उन्होंने गालिब को घर पर ही शिक्षा दी जिसकी वजह से उन्हें नियमित शिक्षा कुछ ज़्यादा नहीं मिल सकी। गालिब ने आगरा के पास उस समय के प्रतिष्ठित विद्वान ‘मौलवी मोहम्मद मोवज्जम’ से फारसी की प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त की। ज्योतिष, तर्क, दर्शन, संगीत एवं रहस्यवाद इत्यादि से इनका कुछ न कुछ परिचय होता गया। गालिब की कम ही समय में फारसी में गजलें भी लिखने लगें थे। आज हम आपको उनके कुछ मशहूर शेर पढ़ाएंगे।

-हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन
दिल के ख़ुश रखने को ‘ग़ालिब’ ये ख़याल अच्छा है

-मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले

-हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले

-उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है

-ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता

-रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ाइल
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है

-इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना

-न था कुछ तो ख़ुदा था कुछ न होता तो ख़ुदा होता
डुबोया मुझ को होने ने न होता मैं तो क्या होता

-रंज से ख़ूगर हुआ इंसाँ तो मिट जाता है रंज
मुश्किलें मुझ पर पड़ीं इतनी कि आसाँ हो गईं

-आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक
कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक

-बस-कि दुश्वार है हर काम का आसाँ होना
आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसाँ होना

-हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अच्छे
कहते हैं कि ‘ग़ालिब’ का है अंदाज़-ए-बयाँ और

-रेख़्ते के तुम्हीं उस्ताद नहीं हो ‘ग़ालिब’
कहते हैं अगले ज़माने में कोई ‘मीर’ भी था

-बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मिरे आगे

-काबा किस मुँह से जाओगे ‘ग़ालिब’
शर्म तुम को मगर नहीं आती

-दर्द मिन्नत-कश-ए-दवा न हुआ
मैं न अच्छा हुआ बुरा न हुआ

-कोई मेरे दिल से पूछे तिरे तीर-ए-नीम-कश को
ये ख़लिश कहाँ से होती जो जिगर के पार होता

-क़र्ज़ की पीते थे मय लेकिन समझते थे कि हाँ
रंग लावेगी हमारी फ़ाक़ा-मस्ती एक दिन

-कहाँ मय-ख़ाने का दरवाज़ा ‘ग़ालिब’ और कहाँ वाइज़
पर इतना जानते हैं कल वो जाता था कि हम निकले

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