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चाइल्ड पोर्नोग्राफी कंटेंट मोबाइल में मिला तो होगी 5 साल की जेल

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Child pornography
प्रतीकात्मक तस्वीर

देशभर में चाइल्ड पोर्नोग्राफी को लेकर प्रशासन कड़े कदम उठाता रहा है अब ऐसा ही एक सख्त कदम और आगे बढ़ाया गया है। जी हां! अब अगर आपके मोबाइल फोन, लैपटॉप या कंप्यूटर में चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़े कंटेंट मिलते हैं तो आपको 5 साल तक की सजा भुगतनी पड़ सकती है। वैसे तो सन् 2000 से आईटी एक्ट की धारा 67 बी में ये प्रावधान है लेकिन गृह मंत्रालय द्वारा लॉन्च किए गए पोर्टल से ये अधिक प्रभावी हो गई है।

जानकारी के मुताबिक, एक चरण में इस पोर्टल को cybercrime.gov.in नाम से शुरू किया गया है। इस पोर्टल पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी, रेप या गैंगरेप से जुड़े कंटेंट सोशल मीडिया पर शेयर करने वालों के खिलाफ शिकायतें की जा सकेंगी। इस पोर्टल का एकमात्र उद्देश्य इस तरह के वीडियो और तस्वीरों पर रोक लगाना है। चूंकि दिन-प्रतिदिन नाबालिगों के साथ बढ़ती वारदातों के लिए इसे जिम्मेदार ठहराया जा रहा है और माना जा रहा है कि इन्हीं तस्वीरों और वीडियो को देखकर बच्चों से ज्यादती के अपराध बढ़ रहे हैं।

गौरतलब है 30 सितंबर को लॉन्च हुए इस पोर्टल में शिकायत की सिर्फ दो कैटेगरी हैं। अब तक कुल 34 शिकायतें आई है लेकिन एक भी इस कैटेगरी में फिट नहीं बैठ रही है। दरअसल मध्यप्रदेश सायबर सेल को गृह मंत्रालय ने सायबर क्राइम प्रिवेंशन फॉर वुमेन एंड चाइल्ड (सीसीपीडब्ल्यूसी) के तहत नोडल एजेंसी बनाया है। बच्चों और महिलाओं के खिलाफ हो रहे सायबर अपराधों को रोकने के इरादे से इसके तहत सायबर सेल को ट्रेनिंग प्रोग्राम करने है। बताया जा रहा है इसके लिए पुलिस और एडीपीओ को ट्रेनिंग भी दी जा चुकी है। दूसरे चरण में cybercrime.gov.in नाम से पोर्टल लांच किया गया है।

बता दें पोर्टल ओपन करते ही पहचान बताकर या छिपाकर शिकायत करने के दो ऑपशन आएंगे। पहचान छिपाकर शिकायत करने पर आगे का स्टेट्स पता नहीं चलेगा। चाइल्ड पोर्नोग्राफी, रेप या गैंगरेप की कैटेगरी भरने के बाद नाम-पता बताना होगा, जो गुप्त रखा जाएगा। उसके बाद जिस व्यक्ति, मोबाइल नंबर या यूनिट रिसोर्स लोकेटर (यूआरएल) के खिलाफ शिकायत करनी है, उसकी जानकारी भरनी होगी। आप जिस राज्य से हैं, वहां की नोडल एजेंसी को आपकी शिकायत भेज दी जाएगी। शिकायत को वेरिफाई करने के बाद संबंधित एजेंसी आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी।

उल्लेखनीय है सन् 2000 में बने आईटी एक्ट की धारा 67बी के तहत चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़े कंटेंट को सोशल मीडिया पर अपलोड करना, शेयर करना, इसे रिकॉर्ड करना या वेबसाइट पर ब्राउज करना भी अपराध की श्रेणी के अंतर्गत आता है। एआईजी गोयनका का कहना है कि पहली बार में इस धारा के तहत पांच साल तक की सजा का प्रावधान है। दोबारा वही गलती दोहराने पर सजा बढ़कर सात साल तक हो सकती है।

जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश सायबर सेल की सोशल मीडिया पेट्रोलिंग टीम ने सीसीपीडब्ल्यूसी के तहत 227 वेबसाइट चिह्नित की हैं। इन वेबसाइट पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी और अन्य अश्लील वीडियो या तस्वीरें अपलोड हैं। टीम ने अलग-अलग की-वर्ड का इस्तेमाल कर सर्च इंजन पर इन वेबसाइट्स को ढूंढा है। पुलिस ने इन चिन्हित वेबसाइट को ब्लॉक करने का प्रस्ताव गृह मंत्रालय को भेजा है।

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अमेरिकी हैकर का दावा- 2014 के आम चुनाव में हैक हुई थीं ईवीएम!

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लंदन में बैठे हैकर ने ईवीएम को लेकर खुलासा किया। (फोटो: एनडीटीवी)

2014 के आम चुनाव में इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की हैकिंग को लेकर खुलासा हुआ है। लंदन में एक क्लोज इवेंट में एक अमेरिकी हैकर ने यह दावा किया। यूरोप में इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन (आईजेए) ने इवेंट का आयोजन किया। भारतीय मूल के इस अमेरिकी हैकर का नाम सैयद सूजा बताया जा रहा है।

हैकर ने दावा किया कि 2014 के चुनावों में हैकिंग हुई थी। हैकर ने बताया कि 2015 के दिल्ली चुनावों में उसकी टीम ने ईवीएम की हैकिंग को रोका था, वरना आम आदमी पार्टी की जगह बीजेपी की जीत होती।

हैकर ने दावा किया है कि सीनियर जर्नलिस्ट गौरी लंकेश उनकी स्टोरी चलाने के लिए तैयार हुई थीं लेकिन उनकी हत्या कर दी गई। हैकर ने खुलासा किया कि बीजेपी सिनीयर लीडर गोपीनाथ मुंडे की ‘हत्या’ की गई, क्योंकि उन्हें इस बारे में सब कुछ पता था।

हैकर सैयद सूजा कौन है और उनके दावों में कितनी सच्चाई है इसके बारे में फिलहाल कुछ साफ नहीं कहा जा सकता। हैकर दावा कर रहा है वो इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड का पूर्व कर्मचारी भी रह चुका है। बता दें कि इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड का ईवीएम डिजाइन में सहयोग रहता है।

हैकर का दावा है कि इस गड़बड़ी में बीजेपी सहित कई राजनीतिक दल शामिल हैं।

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जांच में खुलासा- ‘भय्यूजी को खुदकुशी के लिए अपनों ने किया मजबूर’

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Bhaiyyu Ji Maharaj
आध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज (फाइल फोटो)

इंदौर। मध्य प्रदेश ही नहीं महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात में ‘राष्ट्रसंत’ कहलाने वाले उदय सिंह देशमुख उर्फ भय्यूजी महाराज आत्महत्या मामले में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आने लगे हैं। उन्हें आत्महत्या के लिए गैरों ने नहीं, बल्कि अपनों ने मजबूर किया, जिनकी नजर उनकी संपत्ति पर थी। पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ है। भय्यूजी महाराज ने 12 जून 2018 को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के बाद बेटी कुहू और दूसरी पत्नी आयुषी के बीच विवाद को प्रचारित किया गया था, ताकि इस दुखद घटना के लिए उन्हें ही जिम्मेदार मान लिया जाए। मगर वक्त गुजरने के साथ जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। उनके सबसे करीबी ही उनकी जान के दुश्मन निकले।

केयर टेकर बनी पलक पुराणिक जहां भय्यूजी को अपना जीवन साथी बनाना चाहती थी, वहीं सेवादार उनकी संपत्ति पर कब्जे की साजिश रचे हुए थे। पुलिस के अनुसार, “भय्यूजी महाराज आत्महत्या मामले में सेवादार शरद देशमुख व विनायक दुधाले और केयर टेकर से प्रेमिका बनी पलक पुराणिक को गिरफ्तार किया जा चुका है। इन तीनों पर भय्यूजी को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगा है।” इंदौर के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) हरि नारायणचारी मिश्रा ने माना कि भय्यूजी महाराज को अपनों द्वारा ब्लैकमेल किए जाने के चलते आत्महत्या करनी पड़ी। विनायक, शरद व पलक इस साजिश के अहम किरदार थे।

पलक भय्यू महाराज से शादी करना चाहती थी और विनायक व शरद उनका साथ दे रहे थे। डीआईजी ने कहा, “तीनों ने उन्हें ब्लैकमेल किया, जिसके चलते भय्यूजी महाराज ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया। पुलिस को मोबाइल चैट से भी इसके सबूत मिले हैं।” पुलिस के अनुसार, “भय्यूजी महाराज की पहली पत्नी माधवी की मौत के बाद पलक को केयर टेकर के तौर पर रखा गया था, वक्त गुजरने के साथ पलक की उनसे नजदीकी बढ़ी।

इसी दौरान भय्यू महाराज ने डॉ. आयुषी से विवाह किया, तो पलक व अन्य ने उन्हें ब्लैकमेल करने की चेतावनी दी। पलक ने जून, 2018 के अंत तक शादी करने का अल्टीमेटम दिया था। इसी के चलते उन्होंने 12 जून, 2018 को खुद को गोली मार ली।” पुलिस को जांच में सबूत मिले हैं कि तीनों मिलकर उन्हें ब्लैकमेल करते थे। कई अश्लील वीडियो चेट भी मिले है। जांच में पता चला कि पलक व विनायक उन्हें दवाएं देते थे, जिनमें शारीरिक तौर पर कमजोर करने की भी दवाएं होती थीं।

–आईएएनएस

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मथुरा के जवाहर बाग हिंसा मामले में 45 दोषियों को 3 साल की कैद

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फाइल फोटो

साल 2016 में उत्तर प्रदेश के मथुरा के जवाहर बाग हिंसा के मामले में एक अदालत ने 45 आरोपियों को दोषी करार दिया गया है, वही सभी को अधिकतम 3 साल की कैद की सजा सुनाई है। वहीं मुख्य आरोपी चंदन बोस, उसकी पत्नी पूनम बोस और अन्य महिला श्यामवती को बरी कर दिया गया है।

गौरतलब है कि 2 जून 2016 को रामवृक्ष यादव द्वारा कब्जा किये गए जवाहर बाग को खाली कराने के दौरान हिंसा भड़क गई थी। रामवृक्ष यादव के समर्थकों ने जवाहर बाग खाली करा रहे पुलिस पर हमला कर दिया था। इसी दौरान एसपी (सिटी) मुकुल द्विवेदी और एसओ संतोष कुमार यादव समेत 29 लोगों की मौत हो गई थी।

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