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राजनीति

नोटबंदी की सालगिरह पर कांग्रेस देशव्यापी विरोध प्रदर्शन आयोजित करेगी

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कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नोटबंदी को लेकर देश से माफी मांगने को कहा, जिसके कारण अर्थव्यवस्था ‘तबाह’ हो गई। कांग्रेस ने कहा कि शुक्रवार को नोटबंदी की दूसरी सालगिरह पर देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने ट्वीट किया, “दो साल पहले प्रधानमंत्री ने नोटबंदी की घोषणा की थी और इसे लागू करने के तीन कारण गिनाए थे। पहला इससे काला धन पर रोक लगेगी, दूसरा नकली मुद्रा पर रोक लगेगी और तीसरा आंतकवाद के वित्त पोषण पर रोक लगेगी, लेकिन इसमें से एक भी उद्देश्य पूरा नहीं हुआ।”

उन्होंने कहा, “वास्तव में, अब प्रचलन में दो साल पहले की तुलना में ज्यादा नकदी आई है, जब मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की थी।” कांग्रेस नेता ने कहा कि मोदी को देशवासियों से 500 और 1000 रुपये के नोटों को बंद करने के अपने ‘तुगलकी फरमान’ के लिए आठ नवंबर को (नोटबंदी की सालगिरह पर) माफी मांगनी चाहिए।

तिवारी ने कहा, “प्रधानमंत्री को देश की अर्थव्यवस्था को तबाह और ध्वस्त करने के लिए आठ नवंबर, 2018 को देशवासियों से माफी मांगनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि नोटबंदी जैसे तुगलकी फरमान से देश की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त करने के विरोध में आठ नवंबर को कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता सड़कों पर उतर कर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करेंगे।

–आईएएनएस

राजनीति

कश्मीर में नागरिक हत्याओं की जांच हो : आजाद

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कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने जम्मू एवं कश्मीर में शनिवार को सात नागरिकों की हत्या की जांच की मांग की और सुरक्षाबलों से नागरिकों पर गोलीबारी करने से बचने को कहा। आजाद ने नागरिकों के मारे जाने पर दुख जाहिर करते हुए कहा, “हमारे सशस्त्र बलों ने जब भी आतंकवादियों को मार गिराया है, वे हमेशा सराहनीय रहे हैं, लेकिन जब निर्दोष नागरिक मारे जाते हैं तो पीड़ा होती है। कश्मीर, पुलवामा में सात से ज्यादा नागरिकों की हत्या अस्वीकार्य है।”

आजाद ने कहा, “इस मामले की जांच की जानी चाहिए और सुरक्षा बलों को नागरिकों पर गोलीबारी करने से बचने को कहा जाना चाहिए, ताकि पुलवामा जैसी स्थिति भविष्य में फिर नहीं पैदा हो।”

पुलवामा जिले में सुरक्षा बलों के साथ झड़प के दौरान शनिवार को 11 लोगों की मौत हो गई थी और तीन दर्जन से ज्यादा नागरिक प्रदर्शनकारियों को चोटें आई थीं। मारे गए 11 लोगों में सात नागरिक व एक सेना का जवान व तीन आतंकवादी शामिल हैं।

–आईएएनएस

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राजनीति

सीएम बनते ही कमलनाथ ने किसानों का कर्ज किया माफ

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कमल नाथ, मुख्‍यमंत्री, मध्‍य प्रदेश (फोटो: एएनआई)

मध्‍य प्रदेश में कमलनाथ ने मुख्यमंत्री की कुर्सी सम्‍भालते ही किसानों का कर्ज माफ कर दिया। जानकारी के मुताबिक कमलनाथ ने किसानों की कर्जमाफी वाली फाइल पर हस्ताक्षर कर दिये। जून 2009 के बाद कर्जदार किसानों का कर्ज माफ किया जायेगा, इससे तेतीस हजार किसान लाभान्वित होंगे।

बता दे कि चुनाव अभियान की शुरूआत करने के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने वादा किया था कि जिस प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनेगी, वहां दस दिन के अंदर किसानों का कर्ज माफ होगा।

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चुनाव

मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री पद की कमलनाथ ने ली शपथ

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कमलनाथ (फाइल फोटो)।

मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री पद की कमलनाथ ने सोमवार को शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, अशोक गहलोत, सचिन पायलट, फारूक अब्दुल्ला और शरद यादव समेत कई बड़े नेता शामिल हुए। साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद रहे।

बता दें कि कमलनाथ 38 साल पहले सांसद चुने गए थे और अब वे सूबे के 31वें मुख्यमंत्री बने हैं। कमलनाथ को आठ महीने पहले ही मध्य प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था।

18 नवंबर 1946 को उत्तर प्रदेश के कानपुर में जन्मे कमलनाथ की स्कूली पढ़ाई मशहूर दून स्कूल से हुई। दून स्कूल से पढ़ाई करने के बाद कमलनाथ ने कोलकाता के सेंट जेवियर कॉलेज से बी.कॉम किया। 27 जनवरी 1973 को कमलनाथ अलका नाथ के साथ शादी के बंधन में बंध गए।

कमलनाथ 9 बार लोकसभा के लिए चुने गए हैं। वह साल 1980 में 34 साल की उम्र में छिंदवाड़ा से पहली बार चुनाव जीते जो अब तक जारी है। कमलनाथ 1985, 1989, 1991 में लगातार चुनाव जीते। 1991 से 1995 तक उन्होंने नरसिम्हा राव सरकार में पर्यावरण मंत्रालय संभाला। 1995 से 1996 तक वे कपड़ा मंत्री रहे।

1998 और 1999 के चुनाव में भी कमलनाथ को जीत हासिल हुई। लगातार जीत हासिल करने से कमलनाथ का कांग्रेस में कद बढ़ता गया और 2001 में उन्हें महासचिव बनाया गया। वह 2004 तक पार्टी के महासचिव रहे। छिंदवाड़ा में तो जीत का दूसरा नाम कमलनाथ हो गया और 2004 में उन्होंने एक बार फिर जीत हासिल की। यह लगातार उनकी 7वीं जीत थी। उन्होंने यूपीए-1 की सरकार में पूरे पांच साल तक यह अहम मंत्रालय संभाला। इसके बाद 2009 में चुनाव हुआ और एक बार फिर उनको लोकसभा के लिए चुन लिया गया। साल 2012 में कमलनाथ संसदीय कार्यमंत्री बने।

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