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राजनीति

सेटअप बॉक्स में चिप लगाने के प्रस्ताव को कांग्रेस ने बताया लोगों की निजता का गंभीर उल्लंघन

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randeep-surjewala

केंद्र के नए टीवी सेटअप बॉक्सों में चीप लगाने के प्रस्ताव की रिपोर्ट पर कांग्रेस ने बीजेपी पर नागरिकों की निजता के उल्लंघन का प्रयास करने का आरोप लगाया।

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट किया, “ब्रेकिंग! भाजपा द्वारा अगले चरण की निगरानी का खुलासा। निजता के एक गंभीर उल्लंघन में स्मृति ईरानीजी बिना आपकी इजाजत के यह जानना चाहती हैं कि आप अपने शयनकक्ष की चारदीवारी के भीतर अपने टीवी पर कौन सा शो देख रहे हैं! क्यों?”

सूचना व प्रसारण मंत्रालय ने कथित तौर पर ट्राई को कहा है कि देखे जाने वाले चैनलों व उनकी अवधि का डाटा मुहैया कराने के लिए कदम उठाए गए हैं, जिससे विज्ञापनदाताओं और विज्ञापन व दृश्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी) को अपने विज्ञापन व्यय को बुद्धिमानी से खर्च करने में मदद मिलेगी।
मंत्रालय ने कहा कि सिर्फ व्यापक तौर पर देखे जाने वाले चैनलों को ही बढ़ावा मिलेगा।

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अब सेट टॉप बॉक्स में चिप लगाकर सरकार आप पर रखेगी नजर

चुनाव

राजस्थान, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को बढ़त और मध्य प्रदेश में कड़ी टक्कर

राज्यों – मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना, मिज़ोरम में हुए विधानसभा चुनाव 2018 के लिए हुए मतदान की गिनती शुरू हो चुकी है. इन राज्यों के परिणामों को लोकसभा चुनाव 2019 का सेमी-फाइनल भी कहा जा रहा है. छत्तीसगढ़ में दो चरणों में 12 तथा 20 नवंबर को मतदान करवाया गया था, जबकि शेष चारों राज्यों में एक-एक चरण में 28 नवंबर (मध्य प्रदेश, मिज़ोरम) और 7 दिसंबर (राजस्थान, तेलंगाना) को मतदान करवाया गया.

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Assembly Election in 5 State

नई दिल्‍ली: मिल रहे रुझानों के मुताबिक राजस्थान में कांग्रेस अच्छी खासी बढ़त बना ली है. वहीं छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस के जबरदस्त वापसी के संकेत हैं। मध्य प्रदेश में कड़ी टक्कर है तो तेलंगाना में टीआरएस बहुमत की ओर जाती दिखाई दे रही है।

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को रुझानों में बहुमत मिल गया है। छत्तीसगढ़ की राजनांदगांव से अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी कमला शुक्ला आगे हैं। डॉ. रमन सिंह उनसे पीछे चल रहे हैं। कुल मिलाकर अभी तक आ रहे रुझानों से साफ है कि यह कांग्रेस की जबरदस्त वापसी की संकेत हैं।

मध्य प्रदेश में अगर कांग्रेस को अगर बहुमत नहीं भी मिलता है तो भी वह सबसे बड़ी पार्टी की रूप में उभर सकती है। देखने वाली बात यह है कि लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले आए इन चुनाव परिणामों का देश की राजनीति पर क्या असर पड़ता है। क्या पीएम मोदी अर्थव्यवस्था को लेकर कोई बड़ा फैसला करेंगे और इसके साथ ही अब वह क्या रणनीति अपनाएंगे

विधानसभा चुनाव 2018 के नतीजों का LIVE UPDATES :

10:55 AM तेलंगाना के पलैर से TRS आगे

10:55 AM राजस्थान के सपोतरा पूर्व से कांग्रेस आगे

10:54 AM तेलंगाना के बालकोंडा से टीआरएस आगे

10:53 AM राजस्थान के निबहौड़ा, मेवात, हड़ौली से कांग्रेस आगे

10:52 AM राजस्थान के मारवाड़ से कांग्रेस के हेमाराम चौधरी आगे

10:51 AM राजस्थान के सिरोही से IND आगे

10:51 AM पता था मध्य प्रदेश में कांटे की टक्कर होगी : यशोधरा राजे सिंधिया

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राजनीति

इंसानों के हक के लिए वे झेल रहीं धमकियां

वह 87 वर्ष के थे। सूत्रों ने कहा कि उनका सोमवार रात को निधन हुआ था।

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Human-Rights

नई दिल्ली, 10 दिसंबर | इंसानों के हक की खातिर अपने जीवन को समिधा की मानिंद यज्ञाग्नि में झोंक रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं की जिंदगी उतनी आसान नहीं होती, जितनी बाहर से दिखती है। उसमें भी जुनूनी महिलाओं के लिए जोखिम तो दोगुना हो जाता है, क्योंकि जान से मारने के साथ-साथ दुष्कर्म की धमकियां भी उन्हें बार-बार मिलती हैं।

फिर भी उनकी दिलेरी तो देखिए, इन खतरों के बीच कोई बाल विवाह रोकने में लगा/लगी है, तो कोई सिर पर मैला ढोने वालों को अमानवीय दलदल से बाहर निकालने के लिए वर्षो से जद्दोजहद कर रहा/रही है।

अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर जरूरत है, ऐसे ही कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की आपबीती जानने की, जो परिवार को पीछे छोड़ समाज में बदलाव का झंडा बुलंद किए हुए हैं। इन्हीं में से एक हैं, राजस्थान से ताल्लुक रखने वाली मानवाधिकार कार्यकर्ता कीर्ति भारती।

कीर्ति ने बीते कुछ वर्षो में कई बच्चियों को बाल विवाह का शिकार होने से बचाया है। इसी उद्देश्य के साथ कीर्ति ने 2011 में ‘सारथी ट्रस्ट’ की शुरुआत की। यह एनजीओ बच्चियों के बाल विवाह को रोकने के काम में लगा हुआ है। कीर्ति के लिए यह राह कभी आसान नहीं रही, उन्हें कई बार जान से मारने की धमकियां तक मिल चुकी हैं।

कीर्ति आईएएनएस से कहती हैं, “मेरी यह लड़ाई उतनी आसान नहीं रही, जितनी बाहर से देखने में लगती है। छोटी-छोटी बच्चियों को बाल विवाह से बचाने के लिए एक सिस्टम की जरूरत थी, यही कारण रहा कि ‘सारथी ट्रस्ट’ अस्तित्व में आया। हम अब तक 39 बच्चियों का विवाह निरस्त करा चुके हैं और 1,200 बच्चियों को बाल विवाह का शिकार होने से बचाया है।”

वह कहती हैं, “महिला हूं तो रेप की धमकियां भी मिलती हैं। जान से मारने की धमकियां तो बहुत समय से मिल ही रही हैं।”

ऐसे ही एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं, अशोक रो कवी। अशोक समलैंगिक अधिकारों के लिए लंबे समय से मुहिम चला रहे हैं। पेशे से पत्रकार रह चुके अशोक ने 1990 में ‘बॉम्बे दोस्त’ नाम से देश की पहली समलैंगिकों की पत्रिका की शुरुआत भी की थी। एलजीबीटी अधिकारों के लिए देशभर में काम कर रहा ‘हमसफर ट्रस्ट’ की स्थापना इन्होंने ही की। आज देश में समलैंगिकों को कानूनी रूप से जो मान्यता प्राप्त है, उसमें ‘हमसफर ट्रस्ट’ की अहम भूमिका है।

ऐसे ही एक शख्स हैं, बेजवाड़ा विल्सन जो सिर पर मैला ढोने वालों को इस दलदल से बाहर निकालने के लिए कई वर्षो से संघर्ष कर रहे हैं। मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता बेजवाड़ा अब तक तीन लाख मैला ढोने वालों को नारकीय जीवन से मुक्ति दिला चुके हैं।

कोलार के दलित परिवार से ताल्लुक रखने वाले बेजवाड़ा सफाई कर्मचारी आंदोलन का नेतृत्व कर चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2014 के फैसले में सीवरेज की सफाई के दौरान मारे जाने वाले लोगों के परिवारों को मुआवजा मिलने की लड़ाई में बेजवाड़ा ने अहम भूमिका निभाई है।

देश में देह व्यापार से कई मासूमों को बाहर निकालने वाली सुनीता कृष्णन ऐसी हजारों लड़कियों को मुख्यधारा में वापस लेकर आई हैं, जिन्हें देह व्यापार में धकेला गया था। इस तरह की लड़कियों को बचाकर वापस मुख्यधारा में लाने के लिए सुनीता ने ‘प्रज्वला’ नाम के एक एनजीओ की स्थापना की, जो महिलाओं को वेश्यावृत्ति से बचाने में लगा हुआ है। वह अभी तक 10,000 से ज्यादा महिलाओं को देह-व्यापार के दोजख से निकाल चुकी हैं। इस काम के लिए उन पर 17 बार हमला हो चुका है।

पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित सुनीता कहती हैं, “मुझ पर 17 बार हमला हो चुका है। देह-व्यापार से जुड़े लोग चाहते हैं कि मैं उनकी राह से हट जाऊं, ताकि वे इस अमानवीय धंधे में लगे रहें।”

फ्लाविया एग्नेस का नाम शायद ज्यादा लोगों ने नहीं सुना होगा, लेकिन फ्लाविया लंबे समय से महिलाओं को शादी, तलाक और संपत्ति के मामलों में कानूनी मदद मुहैया करा रही हैं। वह अब तक 50,0000 महिलाओं को कानूनी मदद मुहैया करा चुकी हैं। इस काम के लिए उन्होंने ‘मलिस’ नाम के एक एनजीओ की स्थापना भी की है।

–आईएएनएस

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राजनीति

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सी.एन.बालाकृष्णन का निधन

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केरल के पूर्व मंत्री सी.एन.बालाकृष्णनन का एक निजी अस्पताल में निधन हो गया।

वह न्यूमोनिया से जूझ रहे थे। पार्टी सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी थी।वह 87 वर्ष के थे।सूत्रों ने कहा कि उनका सोमवार रात को निधन हुआ था। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री के.करुणाकरन के लंबे समय तक सहयोगी रहे बालाकृष्णन 17 वर्षो तक त्रिशूर जिला कांग्रेस समिति के अध्यक्ष थे और लंबे समय तक पार्टी की राज्य इकाई के कोषाध्यक्ष भी रहे।

आईएएनएस

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