आज वक़्त है कि आप महात्मा गाँधी के इस भाषण को ज़रूर पढ़ें | WeForNewsHindi | Latest, News Update, -Top Story
Connect with us

ब्लॉग

आज वक़्त है कि आप महात्मा गाँधी के इस भाषण को ज़रूर पढ़ें

Published

on

Mahatma Gandhi Speech After Freedom

नागरिकता क़ानून को लेकर उत्तर-पूर्वी राज्य उबल रहे हैं। सरकार को शान्ति और ‘ऑर्डर’ क़ायम रखने के लिए सेना को बुलाने का आख़िर तरीक़ा अपनाने के लिए मज़बूर होना पड़ा है। हालाँकि, यही वो सबसे मुफ़ीद वक़्त है, जब भारतवासियों को महात्मा गाँधी के उस भाषण को पढ़ना चाहिए जो उन्होंने 15 नवम्बर 1947 को दिल्ली में हुई अखिल भारतीय काँग्रेस समिति की बैठक में बोला था। पेश है उसी भाषण के अंश, जिसे ‘सम्पूर्ण गाँधी वांगमय के 10वें खंड के पृष्ठ 35-38’ से लिया गया है।

महात्मा गाँधी

“…मैंने करने या मरने की प्रतिज्ञा की थी। अवसर आने पर सचमुच मैं करूंगा या मर जाऊंगा। मैंने जो कुछ देखा है उससे इतना समझ गया हूं कि हम सब तो पागल नहीं हुए हैं लेकिन ऐसे लोगों की संख्या बहुत बड़ी है जिनका दिमाग फिर गया है। पागलपन की इस लहर के लिए क्या चीज़ ज़िम्मेदार है? कारण कुछ भी हो लेकिन यह बात स्पष्ट है कि अगर हमने इस पागलपन से छुटकारा नहीं पाया तो जो आज़ादी हमें मिली है, उससे हम हाथ धो बैठेंगे। आज हम जिस संकट की स्थिति में है उसकी गम्भीरता आपको समझनी और स्वीकार करनी चाहिए। आपको अत्यन्त गम्भीर समस्याओं का सामना करना है और उसका समाधान ढूंढने का प्रयत्न करना है।

…मैं चाहता हूं कि आप कांग्रेस के बुनियादी सिद्धान्तों के प्रति सच्चे रहें और हिन्दुओं तथा मुसलमानों में एकता स्थापित करें। यह एकता वह आदर्श है जिसकी प्राप्ति के लिए कांग्रेस 60 वर्षों से भी ज़्यादा समय से काम करती रही है। यह आदर्श अभी भी कायम है। कांग्रेस ने कभी ऐसा नहीं कहा है कि वह केवल हिन्दुओं के हितों के लिए ही कार्य करती है। जबसे कांग्रेस का जन्म हुआ है तब से ही वह जिस चीज़ का दावा करती रही है, क्या उसे छोड़ दें और नया सुर अलापने लगें? कांग्रेस भारतवासियों का संगठन है, उन सबका अपना संगठन है जो इस देश में निवास करते हैं, चाहे वे हिन्दू हों, या मुसलमान, ईसाई, सिख या पारसी। मुसलमान, ईसाई और पारसी कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर रह चुके हैं। लेकिन आज हम एक दूसरा ही नारा सुनते हैं। मैं आप को बता दूं कि आज हम जो सुनते हैं वह कांग्रेस की आवाज़ नहीं है।

…आज जो कुछ हो रहा है उससे मैं लज्जित हूं। भारत में ऐसी चीज़ें कभी नहीं होनी चाहिए। हमें यह बात समझानी होगी कि भारत केवल हिन्दुओं का नहीं है और न पाकिस्तान केवल मुसलमानों का। मैंने हमेशा माना है कि यदि पाकिस्तान केवल मुसलमानों का ही देश बन गया तो यह ऐसा पाप होगा जो इस्लाम को ही नष्ट कर देगा। इस्लाम ने ऐसी शिक्षा कभी नहीं दी है। अगर हिन्दू, हिन्दुओं की हैसियत से भारत के एक पृथक राष्ट्र होने का दावा करें और मुसलमान पाकिस्तान में ऐसा दावा करें तो यह कभी चल नहीं सकता। सिखों ने भी कभी-कभी सिक्खिस्तान की बात की है। यदि हम ऐसे दावे करेंगे तो भारत और पाकिस्तान दोनों नष्ट हो जाएंगे, कांग्रेस नष्ट हो जाएगी, और हम सब नष्ट हो जाएंगे।

मैं मानता हूं कि भारत हिन्दू और मुसलमान, दोनों का है। जो कुछ हुआ उसके लिए आप मुसलिम लीग को दोषी ठहरा सकते हैं और कह सकते हैं कि दो-राष्ट्र का सिद्धान्त इस बुराई की जड़ है, और मुसलिम लीग ने ही यह विष-बीज बोया था। फिर भी मेरा कहना है कि दूसरों ने बुराई की, केवल इसी कारण हम भी बुराई करें तो हम हिन्दू धर्म के साथ घात करते हैं। अपने बचपन से ही यह मैं जानता हूं कि हिन्दू धर्म हमें बुराई के बदले भलाई करने की शिक्षा देता है। पापी को उसका पाप ही ले डूबता है। क्या उनके साथ हम भी डूब मरें? हिन्दू धर्म ने मुझे जो सिखाया है, 60 वर्षों के मेरे अनुभव से उसकी पुष्टि हुई है। इस्लाम भी यही बात कहता है। कांग्रेस का यह बुनियादी सिद्धान्त है कि भारत जितना हिन्दुओं का है, उतना ही मुसलमानों का भी है। मैं यह भी जानता हूं कि जो कुछ भी हुआ है उसमें कांग्रेस का कोई हाथ नहीं था।…

कुछ लोगों का कहना है कि पाकिस्तान में हिन्दुओं और सिखों पर जो अत्याचार किये गये हैं, उनसे ज़्यादा नृशंस अत्याचार हम यहां मुसलमानों पर करें तो इससे पाकिस्तान के मुसलमानों को एक अच्छा सबक मिलेगा। बेशक उन्हें सबक तो मिल जाएगा, लेकिन इस बीच आपका क्या होगा? आप कहते हैं कि आप भारत में मुसलमानों को नहीं रहने देंगे, लेकिन मेरी मान्यता है कि साढ़े तीन करोड़ मुसलमानों को यहां से भगाकर पाकिस्तान पहुंचा देना असम्भव है। उन्होंने क्या अपराध किया है? बेशक मुसलिम लीग अपराधी है, लेकिन हर मुसलमान तो दोषी नहीं है। अगर आप समझते हैं कि वे सभी देशद्रोही हैं और पाकिस्तान के पांचवें दस्ते का कार्य करते हैं, तो बेशक उन्हें गोली मार दीजिए, लेकिन यह सोचना कि वे मुसलमान हैं, इसलिए अपराधी हैं, गलत है। यदि आप उन्हें मारते पीटते हैं, धमकाते हैं, तो वे पाकिस्तान भाग जाने के अलावा क्या कर सकते हैं? आख़िरकार जीवन तो उन्हें प्यारा है ही। लेकिन आपके लिए ऐसा करना उचित नहीं है। इस तरह आप कांग्रेस को बदनाम करेंगे, अपने धर्म को बदनाम करेंगे और राष्ट्र को बदनाम करेंगे।

यदि आप इस बात को समझते हैं कि जिन मुसलमानों को मजबूरन पाकिस्तान जाना पड़ा है, उन्हें वापस बुलाना आपका कर्तव्य है। हां, जो मुसलमान पाकिस्तान में विश्वास रखते हैं, और वहीं अपनी खुशी हासिल करना चाहते हैं, वे शौक से जाएं। उनके लिए कोई रोक टोक नहीं है। उन्हें वहां जाने के लिए सैनिक बलों की सुरक्षा की ज़रूरत नहीं होगी। वे अपनी खुशी से और अपने खर्च से वहां जाएंगे। लेकिन जो लोग आज वहां जा रहे हैं, उनके लिए विशेष परिवहन व्यवस्था और विशेष सुरक्षा की आवश्यकता है। इस प्रकार का अस्वाभाविक देशत्याग, और वह भी कृत्रिम परिस्थितियों में, हमारे लिए शर्म की चीज़ है। आपको घोषणा कर देना चाहिए कि जिन मुसलमानों को मजबूरन अपने घर छोड़ने पड़े हैं, और जो लौटना चाहते हैं, उनका आपके बीच स्वागत है। आप उन्हें आश्वासन दें कि भारत में वे और उनका धर्म सुरक्षित रहेंगे। ये आपका कर्तव्य है, आपका धर्म है। पाकिस्तान कुछ भी करे। आपको मानवीयता और सभ्यता कायम रखनी है। यदि आप वही काम करेंगे जो उचित है , तो देर-सबेर पाकिस्तान को भी आपका अनुसरण करना पड़ेगा।

आज जो स्थिति है, उसमें हम दुनिया के सामने अपना मस्तक ऊंचा नहीं रख सकते और हमें स्वीकार करना पड़ेगा कि हम पाकिस्तान के कुकर्मों की नकल करने पर मजबूर हुए हैं। और ऐसा करके हमने उसके तौर-तरीकों को उचित ठहराया है। हम इस तरह कैसे चलते रह सकते हैं? जो कुछ हो रहा है, वह युद्ध के लिए दोनों को भड़काने वाली बात है, और इसका निश्चित परिणाम युद्ध ही होगा। और आपको जवाहरलाल का साथ छोड़ना होगा। यह उन्हीं के कारण है कि आज संसार में हमारी इतनी इज्ज़त है। भारत से बाहर उनका सम्मान विश्व के एक अत्यन्त महान राजनेता के रूप में किया जाता है। अनेक यूरोपीय लोगों ने मुझे बताया है कि संसार ने उन जैसे ऊंचे दिमाग का राजनेता नहीं देखा है। मैं ऐसे अमेरिकियों को जानता हूं जो जवाहरलाल की इज्ज़त राष्ट्रपति ट्रूमैन से ज्यादा करते हैं। वे लोग भी जवाहरलाल के नेतृत्व के नैतिक मूल्यों की इज्ज़त करते हैं। जिनके पास अथाह धन है, बड़ी-बड़ी फ़ौजें हैं और अणु बम है। हम हिन्दुस्तानियों को इस बात की सही कद्र करनी चाहिए।”

[सम्पूर्ण गांधी वांगमय के 10वें खंड के पृष्ठ 35-38 से साभार]

ओपिनियन

80 फीसदी लोग मास्क पहनें तो महामारी पर लगाम संभव : डॉ. शैलजा

Published

on

By

Coronavirus Scare

नई दिल्ली, 2 अप्रैल | देश की अगर 50 प्रतिशत आबादी मास्क पहनती है, तो सिर्फ 50 प्रतिशत आबादी को ही कोरोना वायरस से संक्रमित होने का खतरा हो सकता है। यदि 80 प्रतिशत आबादी मास्क पहनती है, तो इस महामारी पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जा सकती है।-यह कहना है, सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय में वरिष्ठ सलाहकार डॉ. शैलजा वैद्य गुप्ता का। उन्होंने यह बात भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय द्वारा सार्स-सीओवी-2 कोरोना वायरस से जुड़ी एक नियमावली में पेश तथ्य के आधार पर कही।

डॉ. शैलजा ने कहा, “मास्क की कमी को देखते हुए इस नियमावली में घर पर मास्क बनाने पर जोर दिया गया है। यह पहल मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है, जो मास्क पहनना चाहते हैं, लेकिन उनकी इन मास्कों तक पहुंच नहीं है। ऐसे में घर पर बनाए हुए मास्क उपयोगी हो सकते हैं। इनकी खूबी यह है कि इन्हें धोकर आप दोबारा उपयोग कर सकते हैं।”

कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय ने घर में बने मास्क पर केंद्रित एक विस्तृत नियमावली ‘सार्स-सीओवी-2 कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए मास्क’ जारी की है।

नियमावली में विश्व स्वास्थ्य संगठन का हवाला देते हुए लिखा गया है, “मास्क उन्हीं लोगों पर प्रभावी हैं जो अल्कोहल युक्त हैंडवॉश या साबुन और पानी से हाथ साफ करते हैं। यदि आप मास्क पहनते हैं, तो आपको इसके इस्तेमाल और इसके उचित निस्तारण के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए।”

मास्क को क्यों पहना जाए? इस सवाल पर नियमावली कहती है कि एक व्यक्ति के दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आने पर कोविड-19 वायरस आसानी से फैलता है। वायरस को ले जाने वाली बूंदें इसे तेजी से फैलाती हैं और हवा में जीवित रहते हुए यह आखिरकार विभिन्न सतहों के संपर्क में आ जाता है। कोविड-19 को फैलाने वाला वायरस सार्स-कोव-2 किसी ठोस या तरल सतह (एयरोसोल) पर तीन घंटे तक और प्लास्टिक व स्टेनलेस स्टील पर तीन दिन तक जीवित रहता है।

नियमावली में कहा गया है कि मास्क के उपयोग से संक्रमित व्यक्ति से निकले द्रवकणों में मौजूद वायरस के किसी दूसरे व्यक्ति के श्वसन तंत्र में प्रवेश की आशंका कम हो जाती है। सुरक्षित मास्क पहनकर वायरस के सांस के माध्यम से शरीर में प्रवेश की संभावनाएं कम हो जाती हैं, जो इसके प्रसार को रोकने के लिहाज से अहम हो सकता है। हालांकि, मास्क को ऊष्मा, यूवी लाइट, पानी, साबुन और अल्कोहल के एक संयोजन के उपयोग से स्वच्छ किया जाना जरूरी है।

इस नियमावली को जारी करने का उद्देश्य मास्क, इनके उपयोग और मास्क के दोबारा उपयोग की सर्वश्रेष्ठ प्रक्रिया की सरल रूपरेखा उपलब्ध कराना है, जिससे एनजीओ और व्यक्तिगत रूप से लोग खुद ऐसे मास्क तैयार कर सकें और देशभर में तेजी से ऐसे मास्क अपनाए जा सकें। प्रस्तावित डिजाइन के मुख्य उद्देश्यों में सामग्रियों तक आसान पहुंच, घरों में निर्माण आसान करना, उपयोग और फिर से उपयोग को आसान बनाना शामिल है।

Continue Reading

अन्य

इंदौर में सोशल डिस्टेंसिंग से बेरुखी महंगी पड़ी

Published

on

By

Coronavirus india lockdown

इंदौर, 2 अप्रैल | स्वच्छता का परचम लहराने वाला मध्य प्रदेश का इंदौर इन दिनों देश और दुनिया में फैली कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहा है। स्वच्छता के बावजूद आखिर क्या वजह रही कि इंदौर में कोरोना के मरीज बढ़ते गए। इनमें एक जो प्रमुख वजह रही वह है सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न किया जाना। इसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जुड़े और आधुनिक सुविधाओं वाले शहर में शुरुआती केस आने के बाद भी समय पर प्रबंध नहीं किए गए, जिनकी जरूरत थी। शहर में जांच की सुविधा नहीं होना भी अहम वजह रही।

इंदौर की स्थिति पर गौर करें तो एक बात साफ है कि राज्य का सबसे विकसित और आधुनिक सुविधाओं वाला शहर है। यहां अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है और कई देशों की उड़ानें भी आती रही है, इतना ही नहीं रेल और बस सुविधा के मामले में अव्वल है। कई राज्यों से सीधा संपर्क है। औद्योगिक दृष्टि से भी यहां कई बड़े उद्योग हैं, जिससे देशी-विदेशी लोगों की आवाजाही कुछ ज्यादा ही रहती है। इसके अलावा यहां दूसरे स्थानों के हजारों छात्र अध्ययन करने और शिक्षित व्यक्ति रोजगार की तलाश में आते है। वहीं इंदौर के हजारों बच्चे दूसरे शहर और विदेशों में पढ़ते हैं, जो हाल ही में लौटे भी है।

लंबे अरसे से इंदौर और मालवा निमाड़ के क्षेत्र में सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर काम करने वाले जन स्वास्थ्य अभियान के राष्ट्रीय सह संयोजक अमूल्य निधि का कहना है, “इंदौर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़ा हुआ महानगर है यहां कई देशों से फ्लाइट आती हैं और पड़ोसी राज्य गुजरात और महाराष्ट्र से भी बड़ी संख्या में लोग आते हैं। कोरोना महामारी की जब बात सामने आई तब इंदौर में वह प्रबंध नहीं किए गए, जिनकी जरूरत थी। एक तो जांच की सुविधा नहीं थी, दूसरा सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में नहीं रखा गया। यही कारण रहा कि इक्का-दुक्का मरीज कभी आए होंगे, जिनमें यह संक्रमण रहा होगा और वह लगातार समाज के संपर्क में रहे जिससे यह तेजी से फैल गया।”

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अमूल्य निधि कहते हैं, “मरीजों की संख्या बढ़ने का दूसरा कारण भी है। पहले कम सैंपल लिए जा रहे थे और जांच रिपोर्ट उन सैंपलों की ही आ रही थी। अब ज्यादा नमूने लिए जा रहे है और रिपोर्ट भी ज्यादा आ रही है। इसे नकारात्मक रूप में नहीं लेना चाहिए बल्कि ज्यादा मरीज पाए जा रहे हैं तो यह सुरक्षा ज्यादा बढ़ाने की ओर हमें तैयार रहने का संदेश भी दे रहा है।”

इंदौर फार्मासिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय बाकलीवाल भी मानते हैं, “इंदौर में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया गया और बीमारी फैलने की सबसे बड़ी वजह यही रही। जब लॉकडाउन हुआ है तो अब प्रयास हो रहे हैं और उम्मीद की जानी चाहिए कि जल्दी ही मरीजों की पहचान हो जाएगी और यह शहर सुरक्षित रहेगा।

इंदौर में मरीजों की संख्या बढ़ने के सवाल पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. प्रवीण जरिया ने आईएएनएस से कहा, “यह बात सही है कि इंदौर में संक्रमित मरीजों की संख्या और स्थानों की तुलना में कहीं ज्यादा है। मगर राहत की बात यह है कि गिनती के परिवारों के लोग ज्यादा संक्रमित हैं और उन्हीं के संपर्क में आए लोग संक्रमित पाए जा रहे हैं। प्रशासन ने इसीलिए लोगों को क्वारंटाइन में रखा है और आइसोलेट किया जा रहा है ताकि यह बीमारी आगे न फैल सके।”

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी इस बात को मान चुके है कि इंदौर के कुछ खास इलाकों में ही इस वायरस का संक्रमण फैला है। साथ ही उन्होंने लोगों से लॉकडाउन का पालन करने और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने पर जोर दिया। ऐसा इसलिए क्योंकि घरों में रहकर ही इस बीमारी की चेन को तोड़ा जा सकता है।

यह बात भी सामने आ रही है कि इंदौर के रानीपुरा, नयापुरा, दौलतगंज, हाथीपाला आदि स्थानों पर ही सबसे ज्यादा संक्रमित मरीज पाए जा रहे है। यहां बड़ी संख्या में लोगों को क्वारंटाइन और आइसोलेशन की प्रक्रिया में रखा गया है। होटल और निजी चिकित्सा महाविद्यालयों में इन मरीजों के लिए खास इंतजाम किए जा रहे हैं।

राज्य में कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा असर इंदौर में नजर आ रहा है। यहां मरीजों की संख्या बढ़कर 75 हो गई है, वहीं राज्य में पीड़ितों की संख्या 98 है। अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है। इंदौर के अलावा भोपाल में चार, जबलपुर में आठ, ग्वालियर व शिवपुरी में दो-दो, खरगोन एक और उज्जैन में छह मरीज हैं। इस तरह राज्य में अब कोरोना के पाजिटिव मरीजों की संख्या बढ़कर 98 हो गई है।

Continue Reading

ब्लॉग

पत्रकारीय तर्कों से देखें तो तीन महीने से कम नहीं रहेगा भारत में लॉकडाउन

Published

on

Lockdown Corona Covid

भारत की नौकरशाही के मुखिया कैबिनेट सचिव राजीव गौबा का 30 मार्च 2020 का बयान है, “मैं ऐसी रिपोर्टों से चकित हूँ, लॉकडाउन को आगे बढ़ाने की कोई योजना नहीं है।” अंग्रेज़ी में लिखूँ तो “I’m surprised to see such reports, there is no such plan of extending the lockdown.” लेकिन मेनस्ट्रीम मीडिया ने इसे कुछ ऐसे पेश किया कि लॉकडाउन की मियाद आगे नहीं बढ़ने वाली, क्योंकि कैबिनेट सचिव ने कहा कि ‘इसे आगे बढ़ाने की कोई योजना नहीं है।’

मेनस्ट्रीम मीडिया ने जनता को इस बयान की तकनीकी बारीकियों को ठीक से नहीं समझाया और बात ये उड़ी कि लॉकडाउन का वक़्त 14 अप्रैल से आगे नहीं बढ़ेगा क्योंकि 21 दिन की मियाद इसी दिन तक है। ज़्यादातर लोगों और यहाँ तक कि सचिव स्तरीय अफ़सरों ने भी उड़ी-उड़ाई व्याख्या को ही सही समझ लिया। दो-एक पारिवारिक सरकारी अफ़सरों ने फ़ोन पर हुई बातों से भी लगा कि उन्होंने भी ख़बर को हूबहू वैसे ही समझा जैसा ऊपर लिखा है। ऐसे में साधारण लोगों की ग़लतफ़हमियाँ समझ से परे नहीं हैं।

दरअसल, जनता को गूढ़ बातों को बताना और समझाना पत्रकारों का काम है, मीडिया का फ़र्ज़ है। लेकिन पत्रकार भी तो अपना कर्तव्य तो तभी निभाएँगे, जब वो ऐसे बयानों को परखना जानेंगे। पेशेवर काबलियत के पतन को देखकर अक्सर लगता है कि कैसे हमारी बिरादरी बौद्धिक रूप से दिवालिया हो चुकी है! चौथा खम्भा तो अपने नसीब पर रो ही रहा है। वर्ना, मेनस्ट्रीम मीडिया का फ़र्ज़ था कि वो कैबिनेट सचिव के एक लाइन के बयान की ठीक से समीक्षा करता।

कहता कि ‘बेशक़, सरकार कह रही है कि उसका अभी लॉकडाउन की मियाद को बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है। लेकिन अभी इरादा नहीं होने का ये मतलब हर्ग़िज़ न समझें कि आगे चलकर हालात का जायज़ा लेने के बाद भी सरकार मियाद को नहीं बढ़ाएगी। इसका इरादा बनाने और लॉकडाउन की मियाद को आगे बढ़ाने का फ़ैसला लेने के लिए अभी सरकार के पास दो हफ़्ते का समय है। क्योंकि प्रधानमंत्री ने 21 दिन के जिस राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन का ऐलान किया है उसकी मियाद 25 मार्च से लेकर 14 अप्रैल तक है। लिहाज़ा, लॉकडाउन को लेकर कोई भी राय बनाने से पहले 14 अप्रैल का इन्तज़ार करें।’

यदि ख़बर को उपरोक्त ढंग से पेश होती तो क्या लोग ग़लतफ़हमी के शिकार होते या अफ़वाहों के सन्देश वाहक बनते? अरे, तकनीकी रूप से भले ही कैबिनेट सचिव ने सच नहीं बताया, लेकिन उन्होंने झूठ भी तो नहीं बोला। नौकरशाह ऐसे तरक़ीबों के खिलाड़ी होते हैं। उनकी छिपी हुई या अन्तर्निहित बातों को ख़ुद समझना और दर्शकों तथा पाठकों को समझाना पत्रकारों यानी रिपोर्टरों और न्यूज़ रूप में बैठे सम्पादकों का काम है। लेकिन मेनस्ट्रीम मीडिया से इस काम में कसर रह गयी।

पत्रकारिता का वैश्विक सिद्धान्त है कि “जब घटना को भाँपने वाली पत्रकारिता की दक्षता नष्ट हो जाती है तो वो घटना का ब्यौरा देने की ताक़त भी खो देता है। यही उसकी नियति है!” यहाँ कैबिनेट सचिव के बयान से जुड़ी घटनाओं और अनुभवों को सही ढंग से भाँपा ही नहीं गया। वर्ना, कौन नहीं जानता कि सर्वप्रथम लॉकडाउन 23 जनवरी को वुहान में लागू हुआ। इसे 8 अप्रैल को ख़त्म होना है। वुहान ने ही सबसे प्रभावी ढंग से लॉकडाउन को लागू करके दिखाया। फिर भी उसे 76 दिन के लॉकडाउन की ज़रूरत पड़ी तो भारत में इसके महज 21 दिनों में ख़त्म होने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। लिहाज़ा, लॉकडाउन को सख़्ती से लागू रखते हुए घर में रहिए और एहतियातों का कड़ाई से पालन कीजिए।

ख़बर से जुड़ी अतिरिक्त जानकारियों के रूप में जनता को ये समझाना चाहिए कि अभी दुनिया की 40 फ़ीसदी आबादी लॉकडाउन में है। भारत में रहने वाली विश्व की 17 फ़ीसदी आबादी भी इसमें शामिल है। लॉकडाउन के अभी तक के अनुभवों पर ग़ौर करें तो हम पाएँगे कि इसका सिलसिला ख़ासा लम्बा खिंच सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रम्प ने पहले अप्रैल के आख़िर तक लॉकडाउन के जारी रहने की थी, लेकिन अब वो इसके पूरे मई तक खिंचने और जून से ही हालात में सुधार दिखने की उम्मीद जता रहे हैं। समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक़, कल तक बड़े दावे करने वाले ट्रम्प अब पलट चुके हैं। अब उनका कहना है कि ‘जीत से पहले जीत का ऐलान करने से ख़राब और कुछ नहीं हो सकता।’

इटली और स्पेन जैसे सर्वाधिक पीड़ित देशों को लगता है कि वो कोरोना के कहर की चोटी तक पहुँच चुके हैं और जल्द ही उनका नीचे उतरना शुरू हो जाएगा। कई देशों ने अपने नागरिकों को चेतावनी दी है कि लॉकडाउन अनिश्चितकाल के लिए ‘न्यू नार्मल’ बनने वाला है। स्पेन ने कहा है कि वहाँ लोगों के आने-जाने पर रोक जारी रहेगी। इटली ने भी लॉकडाउन की मियाद को 3 अप्रैल से आगे बढ़ाने की बातें की हैं। ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है कि “संकट का दौर लम्बा चलेगा। अभी इतना ही समझ सकते हैं कि हालात सुधरने से पहले हमें और तबाही देखनी होगी।”

ब्रिटेन के शीर्ष चिकित्सा अधिकारी ने चेताया कि ज़िन्दगी को पटरी पर लौटने में छह महीने से ज़्यादा भी लग सकते हैं। इरान के राष्ट्रपति हसन रौहानी ने कहा है कि आने वाले महीनों में ‘ज़िन्दगी के नये ढर्रों’ को अपनाना होगा। रूस ने अपनी सीमाएँ सील की हैं तो मास्को के मेयर ने शहर में हफ़्ते भर की छुट्टी घोषित करके लोगों से घर में ही रहने को कहा है। अफ्रीका में नाइजीरिया ने लागोस और अबुजा में दो हफ़्ते का लॉकडाउन किया है तो बेनिन के राष्ट्रपति का कहना है कि उनके पास अमीर देशों जैसे संसाधन नहीं है, इसीलिए वो लॉकडाउन को कारगर नहीं बना सकते।

उधर, कोविड-19 की जन्मस्थली वुहान में ज़िन्दगी अब पटरी पर लौटने लगी है। हालाँकि, उन्हें विदेश से कोरोना के लौटने का डर भी सता रहा है। वुहान में जब कोरोना फैला तो वहाँ के लोगों को लगा कि शायद वो दूसरे देशों में ज़्यादा सुरक्षित रहेंगे। लेकिन अब उन्हें लगता है कि वो चीन में ही सबसे अधिक सुरक्षित हैं। यही दुनिया के सबसे सफल लॉकडाउन का नतीज़ा है।

आख़िर में, यदि सरकार लॉकडाउन को लेकर तस्वीर साफ़ करने से परहेज़ कर रही है तो पत्रकार क्या करें? कैसे इस सवाल का उत्तर दें कि क्या लॉकडाउन की मियाद बढ़ेगी या नहीं? इस सवाल का उत्तर कहीं उपरोक्त अनुभवों और अब तक हासिल पुख्ता जानकारियों में तो नहीं छिपा है? और यदि छिपा है तो उसे हम कैसे पढ़ें? इसका तरीका भी बहुत आसान है। हमें जितना पता है, उसे ही समझने की क्षमता होनी चाहिए। जैसे, जिस तरह से वित्त मंत्री और रिज़र्व बैंक के गर्वनर ने कोरोना को देखते हुए अपनी सारी रियायतों की मियाद को कम से कम तीन महीने के लिए तय किया है, उससे साफ़ है कि सरकार अच्छी तरह जानती है कि तीन महीने तक तो हालात सामान्य नहीं होने वाले।

भारत में कोरोना का ज्वालामुखी अब फटना शुरू हुआ है। विकसित देशों की तरह ये यहाँ भी सुनामी की तरह तबाही मचाएगा। ज़ाहिर है, तीन महीने तक तो इसके उफ़ान थमने से रहा। 22 मार्च के जनता कर्फ़्यू से शुरू हुआ तीन महीना 21 मई तक तो चलेगा ही। लिहाज़ा, 130 करोड़ की ग़रीब बहुल आबादी में लॉकडाउन की मियाद यदि जून तक भी खिंच जाए तो ताज़्ज़ुब मत कीजिएगा।

Continue Reading
Advertisement
मनोरंजन3 hours ago

कनिका कपूर ने कोरोना को हराया: पांचवां Covid -19 टेस्ट निगेटिव

sad nitish kumar
राजनीति4 hours ago

बिहार: नीतीश ने चिकित्सकों को दी सरकार के कार्यो की जानकारी

Coronavirus
राष्ट्रीय5 hours ago

भोपाल में एक और आईएएस अफसर को कोरोना

tihar jail
राष्ट्रीय5 hours ago

कैदियों का कमाल: तिहाड़ जेल में ही बना डाले 75000 मास्क, सेनेटाइजर

Coronavirus
राष्ट्रीय5 hours ago

लॉकडाउन: गाजियाबाद के ट्रॉनिका सिटी में 37 लोग हिरासत में लिए गए

Coronavirus
राष्ट्रीय5 hours ago

उप्र: बांदा में 7 और जमाती आइसोलेशन वार्ड में भर्ती

bhupesh baghel
राजनीति5 hours ago

छग की व्यापारिक गतिविधियों को दुरुस्त करने की पहल

Coronavirus
राजनीति6 hours ago

मोमबत्ती जलाने से चिकित्सकों को उपकरण नहीं मिल जाएंगे: जविपा

India Lockdown
राष्ट्रीय6 hours ago

लॉकडाउन तोड़ने में दिल्ली अव्वल, 1 दिन में 3747 पर कार्रवाई

BJP-logo
राजनीति6 hours ago

लॉकडाउन: भाजपा के स्थापना दिवस पर नहीं होगा कोई कार्यक्रम

मनोरंजन1 week ago

शिवानी कश्यप का नया गाना : ‘कोरोना को है हराना’

Honey Singh-
मनोरंजन1 month ago

हनी सिंह का नया सॉन्ग ‘लोका’ हुआ रिलीज

Akshay Kumar
मनोरंजन1 month ago

धमाकेदार एक्शन के साथ रिलीज हुआ ‘सूर्यवंशी’ का ट्रेलर

Kapil Mishra in Jaffrabad
राजनीति1 month ago

3 दिन में सड़कें खाली हों, वरना हम किसी की नहीं सुनेंगे: कपिल मिश्रा का अल्टीमेटम

मनोरंजन1 month ago

शान का नया गाना ‘मैं तुझको याद करता हूं’ लॉन्च

मनोरंजन2 months ago

सलमान का ‘स्वैग से सोलो’ एंथम लॉन्च

Shaheen Bagh Jashn e Ekta
राजनीति2 months ago

Jashn e Ekta: शाहीनबाग में सभी धर्मो के लोगों ने की प्रार्थना

Tiger Shroff-
मनोरंजन2 months ago

टाइगर की फिल्म ‘बागी 3’ का ट्रेलर रिलीज

Human chain Bihar against CAA NRC
शहर2 months ago

बिहार : सीएए, एनआरसी के खिलाफ वामदलों ने बनाई मानव श्रंखला

Sara Ali Khan
मनोरंजन2 months ago

“लव आज कल “में Deepika संग अपनी तुलना पर बोली सारा

Most Popular