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स्वास्थ्य

बचपन के संक्रमण से अकादमिक प्रदर्शन हो सकता है प्रभावित

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 बचपन के दौरान गंभीर संक्रमण से, जिससे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा हो, किशोरावस्था में अकादमिक प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है। इस शोध का प्रकाशन ‘द पेडियाट्रिक इंफेक्शस डिजीज जर्नल’ में किया गया है।

इसमें कहा गया है कि संक्रमण की वजह से ज्यादा बार अस्पताल में भर्ती होने से नौवीं कक्षा को पूरा करने की संभावना कम होती है, साथ ही साथ इम्तिहान में कम अंक आने की संभावना रहती है।

अध्ययन के सह लेखक डेनमार्क के आरहुस विश्वविद्यालय अस्पताल के कोहलर-फोसबर्ग ने कहा, “हमारे निष्कर्ष खास तौर से बचपन के दौरान गंभीर संक्रमण व किशोरावस्था के ज्ञान संबंधी उपलब्धि के जुड़े होने के संदर्भ में हमारी समझ को विस्तार देते हैं।”

इस शोध के लिए शोधकर्ताओं ने डेनमार्क में 1987 से 1997 के बीच जन्मे 598,553 बच्चों के डाटा को शामिल किया।

–आईएएनएस

स्वास्थ्य

सिनेमा, संग्रहालय जाने से बुजुर्गों में अवसाद का जोखिम हो सकता है कम

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सिनेमा, थिएटर या संग्रहालय जैसी सांस्कृतिक गतिविधियों के नियमित रूप से संपर्क में रहने से बुजुर्ग अवसाद से दूर रह सकते हैं। एक नए अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है। अवसाद एक बड़ा मुद्दा है, जिससे लाखों लोग प्रभावित होते हैं, विशेषकर बुजुर्ग।

अध्ययन में सामने आया कि वे लोग जो प्रत्येक दो-तीन महीने में फिल्में, नाटक या प्रदर्शनी देखते हैं, उनमें अवसाद विकसित होने का जोखिम 32 फीसदी कम होता है, वहीं जो महीने में एक बार जरूर यह सब चीजें करते हैं उनमें 48 फीसदी से कम जोखिम रहता है।

ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन की वरिष्ठ रिसर्च एसोसिएट डेजी फैनकोर्ट ने कहा, “लोग मनोरंजन के लिए सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ते हैं लेकिन हमें इसके व्यापक फायदों के बारे में जागरूकता फैलाने की जरूरत है।”

ब्रिटिश जर्नल ऑफ साइकियाट्री में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, इन सांस्कृतिक गतिविधियों की शक्ति सामाजिक संपर्क, रचनात्मकता, मानसिक उत्तेजना और सौम्य शारीरिक गतिविधि के संयोजन में निहित है, जो उन्हें प्रोत्साहित करती है।

फैनकोर्ट के मुताबिक, अगर हम तनाव या कुछ अलग सा महसूस करना शुरू कर देते हैं तो सांस्कृतिक जुड़ाव वह सामान्य चीज है, जिससे हम हमारे मानसिक स्वास्थ्य की सक्रिय रूप से मदद कर सकते हैं ताकि वह उस बिंदु तक न पहुंचे, जहां हमें किसी पेशेवर चिकित्सा मदद लेने की जरूरत आ पड़े।
अध्ययन के लिए, शोधकर्ताओं ने 50 से ज्यादा की उम्र के 2,48 से अधिक लोगों का अध्ययन किया।

–आईएएनएस

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राष्ट्रीय

ऑनलाइन दवा खरीद पर रोक

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प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

दिल्‍ली हाईकोर्ट ने दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगा दी है। ये रोक पूरे देश के लिए है। इससे पहले मद्रास हाईकोर्ट भी इस पर रोक लगाने का आदेश दे चुका है।

दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय के मुख्‍य न्‍यायाधीश जस्टिस राजेंद्र मेनन और जस्टिस वीके रॉय की खंडपीड ने एक पीआईएल की सुनवाई पर फैसला सुनाया।

गौरतलब है कि सितंबर में स्वास्थ्य मंत्रालय ने दवाओं की ऑनलाइन बिक्री का एक ड्राफ्ट तैयार बनाया था। इस ड्राफ्ट के अनुसार, ऑनलाइन दवा की बिक्री के लिए ई फार्मेसी को एक केंद्रीय प्राधिकार के पास पंजीकरण करवाना होगा। इन कंपनियों को मादक द्रव्यों की बिक्री की अनुमति नहीं होगी। ऑनलाइन फार्मेसी को केंद्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन में भी पंजीकरण करवाना जरूरी है लेकिन दवा कंपनियां ऐसे करने से बचती हैं। ऑनलाइन दवा बिक्री के लिए ठोस कानून न होने से कंपनियां मनमानी पर उतर आई हैं।

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स्वास्थ्य

घर बैठे स्वास्थ्य के खतरों के बारे में जानकारी देगी ‘डीएनए वाईज’

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लोगों को उनके स्वास्थ्य के खतरों के बारे में जानकारी देने और आहार व कसरत में बदलावों के चयन का निर्णय लेने में मदद करने के लिए इंडस हेल्थ प्लस ने हाल ही में ‘डीएनए वाईज’ नाम से एक स्वास्थ्य सेवा लॉन्च की है।

इंडस हेल्थ प्लस के संयुक्त प्रबंध निदेशक अमोल नायकवडी ने कहा, “डीएनए वाईज व्यक्ति के डीएनए के अनुसार उसके स्वास्थ्य को होने वाले खतरे व खाने और कसरत की आदतों, गुण विशेषों का विश्लेषण करती है। इससे लोगों को उनकी स्वास्थ्य जांच का नियोजन अपने व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार करने में आसानी होती है और उस आधार पर वे एक सुरक्षित जीवनशैली का चयन कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, “इसके साथ ही वह विभिन्न रोगों की तरफ अपने शरीर का जेनेटिक रुझान समझने से जीवनशैली में बदलाव कर आने वाले रोग को टाल सकता हैं।”नायकवडी ने कहा, “विशेष स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ और सस्ते दरों में उपलब्ध कराने के अपने लक्ष्य का अगला पड़ाव हमने डीएन वाईज जांच के माध्यम से पार किया है।”

डीएनए वाईज जांच, लार का नमूना देकर की जानेवाली एक बेहद आसान जांच है, जो कि लोग घर बैठे आराम से कर सकते हैं। ये पैकेज पूरे भारत में 14,999 रुपये की कीमत पर उपलब्ध है।

–आईएएनएस

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