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चुनाव

चेन्नईः दिनाकरन ने जीता आरके नगर उपचुनाव

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DINAKARAN
चेन्नई में वोटों की गिनती शुरू

तमिलनाडु की चर्चित आरके नगर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में निर्दलीय विधायक टीटीवी दिनाकरण जीत गए हैं।

18वें राउंड की गिनती में दिनाकरण को 86472 वोट, एडीएमके को 47115, डीएमके को 24075 और बीजेपी को महज 1236 वोट मिले थे। इससे पहले ही दिनाकरण ने दावा किया था कि मैं नाम के लिए निर्दलीय कैंडिडेट हूं लेकिन पार्टी (एआईएडीएमके) के सभी कार्यकर्ता मेरे साथ हैं।

आपको बता दें कि यह सीट एआईडीएमके की पूर्व महासचिव जयललिता की मौत के बाद खाली हुई थी। तमिलनाडु में आरके नगर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कुल 73.45 फीसदी वोटिंग हुई थी।

प्रचार के दौरान इस अभियान में सभी पार्टियों के शीर्ष नेताओं में मुख्यमंत्री पलानीस्वामी और एआईएडीएमके के पनीरसेल्वम, डीएमके नेता एम के स्टालिन और एआईएडीएमके नेता टीटीवी दिनाकरन आदि को प्रचार अभियान के दौरान मतदाताओं के बीच देखा गया था।

उपचुनाव से एक दिन पहले दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता का वीडियो जारी होने से सियासी सरगर्मी तेज हो गई थी। जयललिता की पार्टी एआईएडीएमके के विरोधी टीटीवी दिनाकरन धड़े ने इस वीडियो को जारी किया था जिसमें जयललिता अस्पताल में भर्ती हैं। वहीं वोट के लिए पैसे बांटने के आरोपों पर दिल्ली हाईकोर्ट ने उपचुनाव पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

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राजस्थान निकाय उपचुनाव में कांग्रेस ने दी बीजेपी को टक्कर

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bjp - congress

राजस्थान के पंचायती राज और शहरी निकाय के उपचुनाव नतीजों ने कांग्रेस में जोश भर दिया है। कुल 27 सीटों के लिए उपचुनाव हुए थे। इसमें से 13 बीजेपी ने जीतीं जबकि कांग्रेस ने 11 सीटें जीतीं। नगर पालिका की एक सीट पर एनसीपी ने जीत दर्ज की है। पंचायत समिति और नगरपालिका की एक-एक सीट पर निर्दलीयों ने विजय दर्ज की है।

सवाई माधोपुर जिले में कांग्रेस ने जिला परिषद की सीट जीती। यहां पर कांग्रेस के उम्मीदवार लोकेश ने भाजपा के अपने निकटतम प्रतिद्वंदी कमल को 358 मतों से पराजित किया है। पार्टी ने 9 निगम वार्ड के पदों में से 5 पर कब्जा जमाया। जबकि बीजेपी को मात्र 2 ऐसे वार्ड पर जीत मिल सकी। कांग्रेस ने पंचायत समिति की 5 सीटों और नगरपालिका परिषद की पांच सीटों पर विजय हांसिल की है।

स्थानीय निकाय के उपचुनावों के परिणामों पर भाजपा के प्रदेश महासचिव भजनलाल शर्मा ने कहा कि लोगों ने एक बार फिर से भाजपा पर विश्वास व्यक्त किया है और पार्टी के 13 उम्मीदवारों ने उपचुनावों में जीत दर्ज की है।

वहीं कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा कि शहरी मतदाताओं ने सत्ताधारी भाजपा के खिलाफ मतदान किया है। जनविरोधी योजनाओं के कारण लोगों ने भाजपा को नकार दिया है। सचिन पायलट ने कहा कि लोग बीजेपी की जन विरोधी नीतियों से बेहद खफा हैं। उन्होंने कहा कि शहरी मतदाता भी अब बीजेपी से दूरी बनाने लगे हैं। उन्होंने कहा, बीजेपी म्यूनिसिपल वार्ड में 2 सीटें ही जीत सकी, जबकि कांग्रेस ने 5 सीटें जीती।

बता दें कि राजस्थान में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने है। बीजेपी को इस चुनाव में सरकार बनाने की चुनौती है, तो कांग्रेस के पास सत्ता पर फिर से काबिज होने का मौका भी है।

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चुनाव

भाजपा को लगा झटका, कांग्रेस ने जीती जयनगर सीट

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कांग्रेस की सौम्‍या रेड्डी ने जयनगर सीट बीजेपी से छीन ली। (प्रतीकात्‍म तस्‍वीर) 

कर्नाटक की जयनगर विधानसभा सीट कांग्रेस ने जीत ली है। मतगणना में कांग्रेस की सौम्‍या रेड्डी ने बीजेपी के बीएन प्रहलाद को 3775 वोटों से हरा दिया। कांग्रेस की सौम्या रेड्डी को 54045 जबकि बीजेपी के बीएन प्रहलाद को 50270 वोट मिले।

कर्नाटक विधानसभा के लिये 12 मई को प्रदेश भर में चुनाव कराये गए थे। हालांकि बीजेपी प्रत्याशी बी एन विजयकुमार के निधन के बाद जयनगर में चुनाव स्थगित कर दिया गया था। विजयकुमार इस सीट से विधायक थे। जयनगर सीट पर 11 जून को हुये मतदान में करीब 55 प्रतिशत वोट पड़े थे।

इस सीट पर विजयकुमार के भाई भाजपा के बी एन प्रहलाद और वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री रामलिंगा रेड्डी की बेटी सौम्या रेड्डी के बीच सीधा मुकाबला था। चुनाव से पहले जनता दल (एस) ने पांच जून को अपने प्रत्याशी को मैदान से हटा लिया और अपने सत्तारूढ़ गठबंधन सहयोगी कांग्रेस को समर्थन दिया। मतगणना केन्द्र के भीतर और आसपास पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये हैं।

इस जीत के बाद कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस सदस्यों की संख्या अब बढ़कर 79 हो गई है। 15 मई को घोषित हुए चुनाव नतीजों में कांग्रेस को 78 सीटें मिली थीं। लेकिन बीते 28 मई को उसके एक नवनिर्वाचित विधायक सिद्दू न्यामागोडा की सड़क हादसे में मौत हो गई थी।

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चुनाव

राहुल के ‘मास्टर स्ट्रोक’ से बिगड़ी भाजपा की फील्डिंग

राहुल की सभा के बाद भाजपा में अचानक सक्रियता बढ़ गई है। पार्टी की चुनाव प्रबंधन समिति के प्रमुख नरेंद्र सिंह तोमर ने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे लोगों के बीच जाएं और उनकी समस्याओं को जानकर समाधान के प्रयास करें।

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Rahul Modi

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनकी सरकार की पहचान या यूं कहें कि ‘किसान हितैषी सरकार’ के तौर पर प्रचार कुछ ज्यादा ही हुआ है, मगर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंदसौर की श्रद्धांजलि सभा में किसानों के कर्ज माफ करने का भरोसा दिलाकर ऐसा मास्टर स्ट्रोक मारा है कि भाजपा की लगभग डेढ़ दशक पुरानी फील्डिंग ही बिखरने लगी है।

मंदसौर गोलीकांड की पहली बरसी पर कांग्रेस की ओर से आयोजित श्रद्धांजलि सभा में पहुंचे राहुल गांधी ने प्रदेश की शिवराज सरकार को किसान, गरीब, मजदूर और युवा विरोधी करार दिया। साथ ही सत्ता में आने के 10 दिन के भीतर किसानों का कर्ज माफ करने का ऐलान किया।

राहुल के कर्जमाफी के ऐलान या क्रिकेट की भाषा में कहें तो मास्टर स्ट्रोक से भाजपा की लाइन लेंथ पूरी तरह गड़बड़ा गई है। राहुल का एक तरफ भाजपा की सबसे बड़ी ‘किसान हितैषी’ होने की ताकत पर वार और दूसरी ओर बड़ी-बड़ी बाधाओं को लांघकर बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों के जमावड़े ने सत्ताधारी दल के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी कर दी हैं।

राहुल की सभा के बाद भाजपा में अचानक सक्रियता बढ़ गई है। पार्टी की चुनाव प्रबंधन समिति के प्रमुख नरेंद्र सिंह तोमर ने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे लोगों के बीच जाएं और उनकी समस्याओं को जानकर समाधान के प्रयास करें। साथ ही यह जानें कि आमजन की बेहतरी के लिए और क्या किया जा सकता है।

वहीं पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह ने राहुल गांधी के किसानों के कर्ज माफ करने वाले बयान पर तंज कसा और किसानों के कर्ज के बोझ को ही झुठला दिया।

उन्होंने कहा, “यहां किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर कर्ज मिलता है और 10 प्रतिशत बतौर अनुदान दिया जाता है। ऐसे में किसान कर्ज के बोझ तले कैसे दबेगा? राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद किसानों की स्थिति सुधरी है, सिंचाई सुविधा में बढ़ोतरी हुई है। यही कारण है कि पांच बार कृषि कर्मण पुरस्कार मिला है।”

मुख्यमंत्री शिवराज ने तो कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाने के लिए यहां तक कह दिया कि उनकी सरकार ने ऐसे काम किए हैं, जिनके उदाहरण दुनिया में कहीं नहीं मिलते।

उन्होंने कहा, “संघर्ष का शंख बज चुका है, हमें लड़ना है और जीतना है। लड़ाई के लिए जो हथियार चाहिए, वह सरकार की उपलब्धियों के रूप में हमारे हाथ में है। सरकार ने मुख्यमंत्री जनकल्याण योजना सहित किसान, युवा और महिलाओं के हित में ऐसे-ऐसे काम किए हैं जिनके दूसरे उदाहरण दुनिया में कहीं नहीं मिलते।”

राहुल की सभा के बाद ‘डैमेज कंट्रोल’ के लिए भाजपा नेताओं के बयानों तक ही बात नहीं ठहरी है। पार्टी ने मीडिया में अपनी बात पूरी ताकत से उठाने के लिए पूर्व पत्रकार और सांसद प्रभात झा के हाथ में कमान सौंपी है। उन्हें प्रवक्ताओं, पैनलिस्टों के बीच समन्वय बनाने के लिए पार्टी के समग्र मीडिया का प्रभारी बनाया गया है।

वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस की प्रचार समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा सरकार को ‘किसान विरोधी’ बताते हुए कहते हैं, “इस सरकार के राज में किसानों का नहीं, दलालों और बिचौलियों का फायदा हुआ है। यह किसान को लूटने वाली सरकार है।”

वरिष्ठ पत्रकार भारत शर्मा का कहना है, “राज्य में भाजपा के खिलाफ तीन स्तर की एंटी इंकम्बेंसी है। पहला, स्थानीय स्तर के नेताओं की राज्य सरकार और केंद्र सरकार से नाराजगी है। दूसरा, गोलीकांड के बाद से किसानों में बेहद नाराजगी है। तीसरा, उत्तर प्रदेश के कैराना लोकसभा उपचुनाव में पार्टी की हार ने भाजपा को सचेत किया है। वहां जातिवाद, संप्रदायवाद का जहर घोलने के बाद भी पार्टी जीत नहीं पाई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके बैबिनेट के धुआंधार प्रचार, मतदान से ठीक एक दिन पहले कैराना के पास बागपत में प्रधानमंत्री का रोड शो और मेरठ में उनकी रैली भी भाजपा को जिता नहीं पाई। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा है। इसी बीच यहां राहुल ने सत्ता में आने पर कर्जमाफी की घोषणा कर दी, जिससे भाजपा सकते में आ गई है।”

राहुल की मंदसौर सभा और उसमें किसानों की कर्जमाफी के वादे के बाद भाजपा को किसानों को खुश करने की चुनौती है, मगर सूझ नहीं रहा कि क्या किया जाए। लिहाजा, भाजपा बड़े बदलाव के साथ ज्यादा आक्रामक होने की नीति बनाने में जुट गई है।

–आईएएनएस

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