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मीठा खाने का बहुत मन करता है तो हो जाएं सावधान!

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भारतीय मीठा खाने के शौकीन होते हैं। यूं समझ लीजिए कि हम अगर खाने के बाद कुछ मीठा ना खाएं तो हमारे पेट को तृप्ति नहीं मिलती। लेकिन ज्यादातर लोग मिठाई खाते समय इससे होने वाले नुकसान की परवाह नहीं करते हैं। क्या आप जानते हैं कि ये तलब महसूस क्यों होती है? चलिए आपको बताते हैं…

1. भारतीय व्यंजनों में कार्बोहाइड्रेट अधिक मात्रा में रहता है। इसके चलते हमारे शरीर में शुगर की मात्रा महसूस होने लग जाती है और कुछ मीठा खाने का मन होता है।

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2. अगर आपकी नमक ज्यादा खाने की आदत है तो भी आपकी मीठा खाने की इच्छा बढ़ जाती है।

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3. भोजन के बाद मीठा खाने कि इच्छा हमारे खराब पाचनतंत्र की वजह से भी होती है। इसके अलावा शरीर में पानी की कमी है तो भी आपको मीठा खाने की इच्छा होती रहती है।

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4. ये तो बात हुई कि हमारी मीठा खाने की इच्छा क्यों होती है। आइए अब जानते हैं कि इसको कैसे नियंत्रित किया जा सकता है। अगर आप रोज 10 मिनट की वॉक करें तो मीठा खाने की इच्छा में कमी आएगी।

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5. दांतो की भलीभांति सफाई करने से भी आप मीठा खाने की लत से खुद को बचा सकते हैं।

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6. अगर फिर भी आपको मीठा खाने की तलब लगती है तो आप फलों का सेवन कर सकते हैं। खाने से आधे घंटे पहले शहद, केले जैसी मीठी चीज खा सकते हैं।

मीठा खाने का बहुत मन करता है तो हो जाएं सावधान!

7. खाने को धीरे-धीरे चबाकर खाने की आदत डालिए। खाने को चबाकर खाने से भी आप मीठा खाने की लत को कम कर सकते हैं।

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8. अगर आप इस आदत से बचना चाहते हैं तो पानी पीने के तरीके को सुधारिए। हमेशा याद रहे कि खाना खाने और पानी पीने के बीच में हमेशा आधे घंटे का समय का अंतर जरूर रखें।

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‘जवानी बरकरार रखने के लिए प्रतिदिन 4-5 बार करें व्यायाम’

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अगर आप लंबे समय तक जवान बने रहना चाहते हैं तो आपको अपनी दिनचर्या तुरंत बदलनी होगी। एक शोध में खुलासा हुआ है कि अगर आप प्रतिदिन चार से पांच बार व्यायाम करना शुरू दें तो आपका दिल स्वस्थ रहेगा तथा आप पर बढ़ती उम्र का प्रभाव देर से पड़ेगा।

शोध के अनुसार व्यायाम को दिए गए समय के अनुसार विभिन्न प्रकार की धमनियों पर विभिन्न प्रभाव होते हैं। एक सप्ताह में 30 मिनट के हिसाब से 2-3 दिन व्यायाम मध्यम आकार की धमनियों की कठोरता कम करने के लिए पर्याप्त हो सकता है। जबकि प्रति सप्ताह चार से पांच दिन व्यायाम लंबी केंद्रीय धमनियों को युवा बनाए रखता है।

टेक्सास विश्वविद्यालय में इस शोध के लेखकों में से एक बेंजामिन लेवाइन ने कहा कि इस शोध से दिल को युवा रखने तथा यहां तक कि उम्रदराज लोगों के दिल को भी युवा बनाने के व्यायाम कार्यक्रम को विकसित करने में मदद मिलेगी।

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दिल में खून का परिसंचरण करने वाली धमनियां उम्र के साथ कठोर होने लगती हैं जिससे हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। जर्नल ऑफ फिजिओलॉजी में प्रकाशित शोध के लिए शोध दल ने 60 साल से ज्यादा के 102 लोगों का परीक्षण किया। इस दौरान उनके जीवन भर के व्यायाम का ब्योरा लिया गया।

जीवन भर सामान्य व्यायाम (प्रति सप्ताह 2-3 बार) करने वाले लोगों की मध्यम आकार की धमनियां अधिक युवा पाई गईं। ये धमनियां दिमाग और गर्दन में रक्त संचार करती हैं। वहीं, प्रति सप्ताह 4-5 बार व्यायाम करने से लंबी केंद्रीय धमनियों को युवा रखने में सहायक होती हैं। ये कोशिकाएं सीने तथा पेट में रक्त संचरण करती हैं।

इसके अलावा यह मध्यम आकार की धमनियों को स्वस्थ रखती हैं। शोधकर्ताओं ने बताया कि बड़े आकार की धमनियों को उम्र का प्रभाव कम करने के लिए और कम अंतराल पर व्यायाम करने की जरूरत होती है।

लेवाइन ने कहा कि शोध की सहायता से यह जानने में सहायता मिलेगी कि क्या सही मात्रा में व्यायाम करने पर धमनियों और दिल को दोबारा युवा करने में सहायता मिल सकती है।

–आईएएनएस

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बालों की सुरक्षा के लिए अपनाएं प्राकृतिक हेयर कलर

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आज लोगों में बाल झड़ने की समस्या तेजी से बढ़ रही है और इस समस्या के भी विभिन्न कारण हैं जिनमें प्रमुख है बालों की सही देखभाल न करना और आकर्षक दिखने के लिए तरह-तरह के हेयर कलर, तेल, क्रीम का इस्तेमाल।

लेकिन इनसे होने वाले नुकसान पर हमारा ध्यान नहीं जाता। विशेषज्ञों का कहना है कि हेयर केयर आवश्यक तो है लेकिन जरूरी नहीं कि केमिकल तत्वों वाली क्रीम या उत्पाद इस्तेमाल किए जाएं, बाजार में नो अमोनिया या प्राकृतिक हेयर कलर भी मौजूद हैं जो बालों को नुकसान नहीं पहुंचाते।

कलरमेट के निदेशक आशीष गुप्ता बताते हैं कि हेयरफॉल इन दिनों लोगों के बीच होने वाली चिंताओं का प्रमुख कारण है। ऐसे में प्राकृतिक रंगों का उपयोग करने के काफी फायदे हैं, जिनसे आकर्षक लुक तो मिलता ही है, साथ ही बालों को नुकसान नहीं होता।

उन्होंने बताया कि बालों से संबंधित समस्याओं को ध्यान में रखते हुए हमने नो अमोनिया हेयर केयर श्रृंखला बाजार में उतारी है, जिसमें हिना के पोषक कलर हैं। ये प्राकृतिक हैं और किसी तरह का केमिकल इनमें शामिल नहीं है। साथ ही हिना की मौजूदगी उपभोक्ताओं के लिए रंग विकल्पों में से एक विकल्प प्रदान करता है।

सफेद बालों को छिपाने और बालों को नया स्टाइल एवं लुक देने के लिए हेयर कलर का चलन तेजी से बढ़ रहा है। आशीष गुप्ता ने कहा कि कुछ व्यक्तियों की त्वचा काफी सेंसीटिव होती है, ऐसे लोगों को केवल प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करना चाहिए।

बाजार में उपलब्ध कलरमेट की नई रेंज लोगों को एक नेचुरल हेयर कलर सोल्यूशन प्रदान करती है। इन कलर्स की कार्य प्रणाली अद्भुत है, यह बालों के आस-पास शील्ड बनाता है, एक सुरक्षात्मक कोटिंग देता है, जिससे बालों को होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है।

जबकि केमिकल तत्वों वाली क्रीम से खुजली, सूजन जैसी समस्याएं होने की संभावना अधिक है। उन्होंने कहा कि हम मानते हैं कि बालों का रंग व्यक्तित्व को बढ़ाता है, लेकिन आज भी बहुत से लोगों को बालों के नुकसान का डर रहता है और वे इसका उपयोग करने से बचते हैं, जो कि गलत धारणा है।

कलरमेट की पाउडर कलर रेंज इस संघर्ष को हल करते हुए लोगों को एक प्राकृतिक रंग का विकल्प प्रदान करती है। पाउडर कलर बालों व उपभोक्ताओं के लिए सर्वश्रेष्ठ व आसान उपाय है, जो बालों एवं जीवन को नई उमंग प्रदान करते हैं।

–आईएएनएस

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गर्मियों में भारतीयों को आध्यात्मिक यात्राएं ज्यादा पसंद

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पुरी, वाराणसी, तिरुपति और शिरडी जैसे तीर्थ स्थानों के साथ आध्यात्मिक प्रेरणादायक स्थल भारतीय पर्यटन उद्योग का एक सबसे महत्वपूर्ण घटक बनकर उभरा है। ट्रैवेल मार्केटप्लेस इक्सिगो द्वारा किए गए एक अध्ययन से इस बात सामने आई है।

अध्ययन के मुताबिक, ज्यादा से ज्यादा भारतीय अपनी धार्मिक जड़ों से जुड़ने के लिए सफर कर रहे हैं। आध्यात्मिक पर्यटन के बढ़ने के साथ इस बार गर्मियों के मौसम में अन्य शहरों की तुलना में वाराणसी और पुरी जैसे मशहूर धार्मिक स्थलों में होटलों की बुकिंग ज्यादा हो रही है।

अध्ययन में खुलासा हुआ कि पुरी में 60 प्रतिशत, वाराणसी में 48 प्रतिशत, तिरुपति में 34 प्रतिशत और शिरडी में 19 प्रतिशत होटल बुकिंग में मासिक वृद्धि दर्ज की गई है।

पर्यटक धार्मिक स्थानों की यात्रा के लिए औसतन दो दिनों के छोटी योजना बनाते हैं। आवास विकल्पों की बात करें, तो भारतीय कम बजट वाले होटल में रहना पसंद करते हैं। लगभग 82 प्रतिशत पर्यटक वाराणसी के बजट होटल्स में रहना पसंद करते हैं। इसके बाद शिरडी (78 प्रतिशत), तिरुपति (68 प्रतिशत) और पुरी (73 प्रतिशत) का नंबर आता है। 32 प्रतिशत भारतीय तिरुपति के 4/5 सितारा होटल में रहना पसंद करते हैं, जबकि पुरी में ऐसे पर्यटकों की संख्या 27 प्रतिशत है।

इक्सिगो के सीईओ एवं सह-संस्थापक आलोक बाजपेयी ने कहा, “आध्यात्मिक पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है। आध्यात्मिक यात्रा को अब भारत में एक अनूठे ट्रैवेल ट्रेंड्स के रूप में माना जा रहा है। यह देखकर बहुत अच्छा लग रहा है कि हमारे देश में देशी सांस्कृतिक अनुभव को एक्सप्लोर करने की दिशा में युवाओं का रुझान बढ़ रहा है।”

–आईएएनएस

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